लेजी आय (Lazy Eye) जिसे एम्बलायोपिया (Amblyopia) या मंद दृष्टि भी कहा जाता है, बच्चों में होने वाली आंखों की एक बीमारी है जिसमें बच्चों की एक आंख की दृष्टि कमजोर हो जाती है और उसे धुंधला नजर आता है। वैसे तो इससे एक आंख ही प्रभावित होती है, लेकिन कुछ मामलों में दोनों आंखों पर असर हो सकता है। लेजी आय का समय रहते उपचार कराना क्यों जरूरी है जानिए इस आर्टिकल में।
लेजी आय (Lazy Eye) जिसे मेडिकल भाषा में एम्बलायोपिया या मंद दृष्टि कहा जाता है, एक ऐसी स्थिति है जिसमें मस्तिष्क सिर्फ एक आंख की दृष्टि पर ही ध्यान देता है, जो आंख साफ छवि देखती है। धुंधली छवि देखने वाली आंख को मस्तिष्क नजरअंदाज करता है जिससे धीरे-धीरे उस आंख की रोशनी पूरी तरह से जा सकती है। प्रभावित आंख जरूरी नहीं है कि अलग दिखे, लेकिन यह दूसरी दिशा में देखती हुई प्रतीत होती है। अधिकांश मामलों में तो यह सिर्फ एक आंख में ही होता है, लेकिन कुछ लोगों की दोनों आंखें इससे प्रभावित हो सकती है। यह स्थिति बच्चों में होती है और उनकी कमजोर दृष्टि का यह एक मुख्य कारण है।

ध्यान रखें कि लेजी आय (Lazy Eye) और तिरछी आंख एक समान नहीं है। उस स्थिति को स्ट्रैबिस्मस कहते हैं। हालांकि, स्ट्रैबिस्मस एम्बलायोपिया का कारण बन सकता है, यदि आप तिरछी आंख का इस्तेमाल कम करते हैं। यदि लेजी आय का समय पर उपचार न किया जाए, तो इससे अस्थाई या स्थाई रूप से दृष्टि का नुकसान हो सकता है। साथ ही आपकी गहराई का अंदाजा लगाने और 3 डी विजन को भी नुकसान पहुंच सकता है।
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जब तक लेजी आय की समस्या गंभीर नहीं हो जाती, इसके लक्षणों की पहचान कर पाना मुश्किल होता है। इसके प्रारंभिक लक्षणों में शामिल हैः
लेजी आय या एम्बलायोपिया मस्तिष्क के विकास से संबंधित समस्या है। इस समस्या में आपके मस्तिष्क का तंत्रिका मार्ग (नर्व पाथवे) जो आंखों को देखने में मदद करता है, सही तरीके से काम नहीं करता। यह विकृति तब होती है जब आपकी दोनों आंखों का समान इस्तेमाल नहीं होता है। कई स्थितियां और कारक आपको दोनों की बजाय एक आंख के इस्तेमाल के लिए प्रेरित करते हैः
लेजी आय आमतौर पर एक ही आंख में होती है। जब यह पहली बार होता है, तो न तो बच्चे को पता चलता है और न ही उनके पैरेंट्स को। इसलिए जरूरी है कि बच्चे की आंखों का नियमित चेकअप करवाएं, जब किसी तरह की समस्या न दिखे तब भी।
द अमेरिकन ऑप्टोमेट्रिक एसोसिएशन सलाह देती है कि जब बच्चे 6 महीने और 3 साल के हों तो उनका आय चेकअप करवान चाहिए। इसके बाद 6 से 18 साल की उम्र तक हर 2 साल में नियमित आय टेस्ट करवाना चाहिए।
आई स्पेशलिस्ट दोनों आंखों की जांच के लिए स्टैंडर्ड आय टेस्ट करता है जिसमें टेस्ट की एक श्रृंखला शामिल है जैसे-
आंखों की अंतर्निहित स्थिति का इलाज करना लेजी आय ट्रीटमेंट का सबसे प्रभावी तरीका है। दूसरे शब्दों में आपको अपनी क्षतिग्रस्त आंख को सामान्य रूप से विकसित करने में मदद की आवश्यकता है। लेजी आय का प्रारंभिक उपचार आसान है। आप जितनी जल्दी उपचार करवाएंगे उतना ही बेहतर परिणाम होगा। हालांकि, बड़े होने पर भी निदान के बाद सही उपचार से लेजी आय की समस्या ठीक हो सकती है। इसके उपचार के तरीकों में शामिल है चश्मा, कॉन्टेक्ट लेंस, आय पैच, आय ड्रॉप या विजन थेरेपी आदिः
यदि आपको नियरसाइटेडनेस, फारसाइटेडनेस या एस्टिग्मैटिज्म के कारण एक आंख में लेजी आय की समस्या है, तो करेक्टिव ग्लास या कॉन्टेक्ट लेंस की सलाह दी जा सकती है।
प्रभावित आंख पर आय पैच पहनने से कमजोर आंखें थोड़ी मजबूत हो जाती हैं। आपका डॉक्टर आपको दिन में 1 या 2 घंटे पैच पहनने की सलाह दे सकता है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि लेजी आय की आपकी समस्या कितनी गंभीर है। पैच आपके मस्तिष्क के उस हिस्से का विकास करने में मदद करता है जो दृष्टि को कंट्रोल करता है।
आई ड्रॉप आपकी आंख में डाला जाता है, जिससे नजर थोड़ी धुंधली हो जाती है। आय पैच की तरह यह कमजोर आंख की मसल्स को मजबूत बनाने में मदद करता है। यदि आप पैच नहीं लगाना चाहतें तो यह आपके लिए एक विकल्प हो सकता है।
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यदि आपकी आंखें तिरछी है या आंखें विपरित दिशा में पॉइंट करती हैं, तो आपकी आय मसल्स में सर्जरी की आवश्यकता है
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