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आंखों के इन रोगों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी!

आंखों के इन रोगों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी!

ऐसा माना जाता है कि आंखें हमारे दिल का प्रतिबिम्ब होती हैं। यही, कारण है कि आंखों को सबसे खूबसूरत अंग माना जाता है। यह सच है कि आंखें हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है लेकिन क्या हम इनकी उतनी देखभाल करते हैं जितनी हमें करनी चाहिए? बहुत कम लोग होंगे जो अपनी आंखों की देखभाल भी अच्छे से करते होंगे। आंखों का अच्छे से ख्याल न रखने का परिणाम होते हैं, आंखों के रोग (Eye Disease)। आंखों के रोग (Eye Disease) कई बार गंभीर हो सकते हैं। अगर यकीन नहीं होता तो पढ़िए यह लेख और जानिए आंखों की बीमारियों के बारे में।

आंखें क्यों हैं महत्वपूर्ण? (Importance of Eyes)

आंखों के रोग (Eye Disease) से जुड़ी जानकारी देने से पहले आपको आंखों का महत्व बताना जरुरी है ताकि आप इन्हें लेकर गंभीर और सचेत हो जाएं। आंखें हमारे शरीर का सबसे अधिक डेवेलप्ड सेंसरी ऑर्गन है। आंखें न केवल हमारे जीवन बल्कि हमारे शरीर में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। आंखों से न केवल हमें दिखाई देता है बल्कि इससे हम अपनी आसपास की दुनिया के बारे में अधिक जान पाते हैं। आंख हमें दुनिया में उन वस्तुओं के आकार, रंग आकर को देखने और उनकी व्याख्या करने की में मदद करती हैं, जो रोशनी को उत्सर्जित करती हैं। हमारी आंख तेज में या हल्की रोशनी में देखने में सक्षम है, लेकिन रोशनी नहीं होने पर हम वस्तुओं को नहीं देख पाते हैं।

यह भी पढ़ें: आंखों पर स्क्रीन का असर हाेता है बहुत खतरनाक, हो सकती हैं कई बड़ी बीमारियां

कौन से हैं आंखों के रोग? (Eye Disease)

आंखों के रोग (Eye Disease) भी कई तरह के होते हैं। जिनमें से कुछ सामान्य होते हैं तो कुछ के परिणाम गंभीर तक हो सकते हैं। कुछ आंखों के रोग (Eye Disease) इतने गंभीर हो सकते हैं जिनके कारण आंखों की रोशनी तक जा सकती है। कुछ ऐसी आंखों की बीमारियों के बारे जानें और जानिए क्या हैं इनके लक्षण और कारण:

आंखों के रोग

कैटरेक्ट (Cataracts)

आइ लेंस में धुंधले क्षेत्र के बनने को कैटरेक्ट कहा जाता है। जब लेंस धुंधला हो जाता है तो रोशनी ठीक से इससे गुजर नहीं पाती, जिससे रोगी को धुंधला नजर आता है। इसके लक्षण इस प्रकार हैं:

  • धुंधला दिखाई देना (Clouded, Blurred Vision)
  • रात को दिखाई देने में समस्या (Increasing Difficulty with Vision at Night)
  • रोशनी के प्रति संवेदनशीता (Sensitivity to light)
  • पढ़ने या अन्य गतिविधियों के लिए ब्राइट लाइट की जरूरत पड़ना (Need for Brighter Light for Reading and other Activities)

कारण (Causes) :कैटरेक्ट की समस्या धीरे-धीरे बढ़ती है। इस समस्या की शुरुआत में आपको कोई परेशानी नहीं होती लेकिन धीरे-धीरे आपको ठीक से नहीं दिखाई देता। इस आंख के रोग के कारणों के बारे में स्पष्ट रूप में जानकारी नहीं है। लेकिन कुछ चीजें इस समस्या के जोखिम को बढ़ा सकती हैं जैसे

  • उम्र का बढ़ना (Ageing)
  • डायबिटीज (Diabetes)
  • अधिक शराब पीना या धुम्रपान (Access Drinking or Smoking)
  • अधिक सूरज की रोशनी में रहना (Access Exposer of sunlight)
  • फैमिली हिस्ट्री (Family History)
  • मोटापा (Obesity)
  • आंखों में चोट (Eye Injury)

उपचार (Treatment): कैटरेक्ट के उपचार के लिए डॉक्टर चश्मे की सलाह देते हैं लेकिन जब चश्मे के कारण भी रोगी को सही से देखने में समस्या होती है तो सर्जरी की जाती है।

काला मोतियाबिंद (Glaucoma)

काला मोतियाबिंद होने पर आंख के ऑप्टिक नर्व (Optic Nerve) को नुकसान होता है। ऐसा माना जाता है कि यह आंखों के रोग (Eye Disease) आंख में अधिक दबाव के कारण होती है। इस समस्या के लक्षण इस प्रकार हैं

  • आंखों में दर्द और धुंधला दिखाई देना (Eye Pain and Blurred Vision)
  • अधिक सिरदर्द (Severe Headache)
  • आंखों का लाल होना (Eye Redness)
  • उलटी आना (Vomiting)
  • आंखों में ब्लाइंड स्पॉट्स (Blind Spots in both Eyes)
  • टनल विज़न (Tunnel vision)

कारण (Causes): यह आंखों के रोग (Eye Disease) बेहद सामान्य है। उम्र के बढ़ने पर अधिकांश लोगों में यह समस्या देखी जा सकती है। इसके कारण के बारे में सही ज्ञान नहीं है, लेकिन कुछ कारक इसके जोखिम को बढ़ा सकते हैं, जैसे

  • अधिक उम्र (Ageing)
  • फैमिली हिस्ट्री (Family History)
  • कुछ मेडिकल कंडीशंस (Having Certain Medical Conditions
  • अधिक इंटरनल आइ प्रेशर (Having high Internal Eye Pressure)
  • आंखों में चोट लगना या सर्जरी होना (Having eye injury or eye surgery)

यह भी पढ़ें: Rubbing Eye : आंख में खुजली क्या है? जानिए इसके कारण और उपचार

उपचार (Treatment) : काला मोतियाबिंद होने पर आंखों को हुई हानि को सही नहीं किया जा सकता लेकिन डॉक्टर दृष्टि में आई समस्या या नुकसान को रोकने के लिए इस तरह के उपचार के तरीकों को अपना सकते हैं:

डायबिटिक रेटिनोपैथी (Diabetic Retinopathy)

डायबिटिक रेटिनोपैथी मूल रूप से एक डायबिटीज की कम्प्लीकेशन है, जो रेटिना के हल्के संवेदनशील ऊतकों में फैले ब्लड वेसल्स (blood vessels) को नुकसान पहुंचा कर आंखों को प्रभावित करती है। इसके लक्षण इस प्रकार हैं :

  • नजर में डार्क स्पॉट्स (Dark Spots)
  • इम्पेयर्ड कलर रिकग्निशन (Impaired Color Recognition)
  • नजर में उतार-चढ़ाव (Fluctuating Vision)
  • नजर का धुंधला होना (Blurred Vision)
  • आंखों की रोशनी का जाना (Vision Loss)

आंखों के रोग

कारण (Causes) : खून में शुगर की मात्रा बढ़ने से छोटे ब्लड वेसल्स बंद हो जाते हैं, जो रेटिना के लिए जरूरी हैं। जिससे इसकी ब्लड सप्लाई बंद हो जाती है। इसके, आंख नए ब्लड वेसल्स को बनाने का प्रयास करती है। लेकिन ये नई ब्लड वेसल्स ठीक से विकसित नहीं होती हैं और आसानी से लीक कर सकती हैं। इससे जुड़े रिस्क फैक्टर इस प्रकर हैं:

  • डायबिटीज के रोगियों को यह समस्या होती है (Diabetic Patient)
  • ब्लड शुगर लेवल पर कंट्रोल न होना (No Control on Blood Sugar Level)
  • हाय ब्लड प्रेशर (High blood Pressure)
  • हाय कोलेस्ट्रॉल (High Cholesterol)
  • गर्भावस्था (Pregnancy)
  • तम्बाकू का प्रयोग करने वाले लोग (Tobacco use)

Quiz : फिटनेस क्विज में हिस्सा लेकर डायबिटीज के बारे में सब कुछ जानें।

उपचार (Treatment): इस आंखों के रोग (Eye Disease) के उपचार डॉक्टर सबसे पहले मरीज को अपने लाइफस्टाइल में परिवर्तन के लिए कहते हैं ताकि ब्लड ग्लूकोज की मात्रा संतुलित रहे। इसके साथ ही कुछ अन्य तरीके भी अपनाएं जा सकते हैं, जैसे:

  • कॉर्टिकॉस्टेरॉइड्स (Corticosteroids)
  • स्कैटर लेज़र सर्जरी (Scatter Laser Surgery)
  • एंटी-VEGF इंजेक्शन थेरेपी (Anti-VEGF Injection Therapy)
  • विटरेक्टॉमी (Vitrectomy)
  • फोकल/ग्रिड मैकुलर लेज़र सर्जरी (Focal/grid macular Laser Surgery)

यह भी पढ़ें: Dry Eyes : आंखों का सूखापन क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और उपाय

ड्राई आइज सिंड्रोम (Dry Eyes Syndrome)

ड्राई आइज सिंड्रोम एक सामान्य स्थिति है, जो तब होती है जब आंसू हमारी आंखों के लिए पर्याप्त लुब्रिकेशन प्रदान करने में सक्षम नहीं होते हैं। आंसू कई कारणों से अपर्याप्त और अनस्टेबल हो सकते हैं। इस समस्या के लक्षण इस प्रकार हैं:

  • आंखों में जलन या खुजली होना (Burning or Scratchy Sensation in your Eyes)
  • आपकी आंखों के अंदर या आसपास गाढ़ा बलगम (Stringy Mucus in or around your Eyes)
  • रोशनी के प्रति संवेदनशीलता (Sensitivity to Light)
  • आंखों का लाल होना (Eye Redness)
  • ऐसा महसूस होना जैसे आंखों में कुछ है (Sensation of having Something in Your Eyes)
  • कॉन्टेक्ट लेंस पहनने में समस्या (Difficulty wearing Contact Lenses)
  • रात को ड्राइव करने में समस्या (Difficulty with Nighttime Driving)
  • धुंधली रोशनी या आंखों का थकना (Blurred Vision or Eye Fatigue)

कारण (Causes): ड्राई आइज सिंड्रोम कई उन कारणों से हो सकता है, जिनसे हेल्दी टेअर फिल्म को नुकसान होता है। हमारी टेअर फिल्म तीन परतों से बनती होती है। इन तीनों परतों में से अगर किसी में भी समस्या हो तो वो इस सिंड्रोम का कारण बन सकती है। इन फिल्मों को नुकसान होने के काई कारण होते हैं, जैसे हॉर्मोन में बदलाव, ऑटोइम्यून डिजीज आदि। इन स्थितियों में जोखिम बढ़ सकता है:

उपचार (Treatment) : हल्की ड्राई आइज सिंड्रोम की समस्या के उपचार के लिए ओवर- द-काउंटर आइड्रॉप्स ले सकते हैं। इसके कुछ उपचार उन स्थितियों को मैनेज करना है, जिनसे यह समस्या होती है। इसके उपचार इस प्रकार हैं:.

  • आइलिड की सूजन को दूर करने के लिए दवाई (Drugs to reduce eyelid Inflammation)
  • कॉर्निया की सूजन को कम करने के लिए आइड्रॉप्स (Eyedrops to control Cornea Inflammation)
  • टेयर स्टिमुलेटिंग दवाई (Tear-stimulating Drug)
  • खुद के खून से बनी आइड्रॉप्स (Eyedrops made from your Own Blood)

आंखों के रोगों का निदान (Diagnosis of Eye Disease)

आंखों की समस्याओं का निदान और उनकी गंभीरता को जांचने के लिए कई तरह के टेस्ट किए जाते हैं। यह टेस्ट डॉक्टर मरीज के लक्षणों के अनुसार भी हो सकते हैं। जानिए आंखों की समस्याओं के निदान के लिए कौन से टेस्ट किए जाते हैं:

  • एंजियोग्राफी (Angiography)
  • एलेक्ट्रोरेटिनोग्राफी (Electroretinography)
  • अल्ट्रासोनोग्राफी (Ultrasonography)
  • ऑप्टिकल कोहेरेन्स टोमोग्राफी (Optical Coherence Tomography)
  • कंप्यूटेड टोमोग्राफी (Computed Tomography) और मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग Magnetic Resonance Imaging

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आंखों के रोग से बचने के लिए क्या करना जरूरी है? (Prevention for Eye Disease)

आंखों के रोगों (Eye Disease) से बचना संभव है। इसके लिए आपको केवल अपने लाइफस्टाइल में कुछ परिवर्तन करने चाहिए। इन परिवर्तनों से आपको आंखों को हेल्दी रखने में मदद मिलेगी। जानिए कौन से हैं वो तरीके, जिन्हें अपना कर आप आंखों की समस्याओं को दूर रख सकते हैं:

  • सही आहार का सेवन करें (Right Diet) : आंखों को स्वस्थ रखने के लिए कुछ खाद्य पदार्थ बेहद लाभदायक होते हैं जैसे हरी सब्जियां, मेवे, अंडे, फल, साबुत अनाज आदि।
  • स्मोकिंग न करें (Don’t Smoke) : स्मोकिंग करने से आंखों के रोग (Eye Disease) होने की संभावना बढ़ती है। इसलिए अगर आप स्मोकिंग करते हैं तो उसे छोड़ दें।
  • व्यायाम करें (Exercise) : व्यायाम करने से न केवल हमारा संपूर्ण शरीर हेल्दी रहता है बल्कि हमारी आंखों को भी स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। इसलिए व्यायाम करें।
  • सूरज की हानिकारक किरणों से बचें (Avoid the Sun’s Harmful Rays) सूरज की हानिकारक किरणें आंखों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए इनके संपर्क में आने से बचे।
  • पर्याप्त नींद लें (Enough Sleep) : शरीर के साथ ही आंखों को भी पर्याप्त आराम और नींद की जरूरत होती है। इसलिए पर्याप्त नींद लें। इसके साथ ही तनाव से भी बचें।

यह भी पढ़ें: आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए अपनाएं ये घरेलू उपाय

अगर आप चाहते हैं कि आंखों के रोग (Eye Disease) आपसे दूर रहें तो साल में कम से कम एक बार डॉक्टर से चेकअप जरूर कराएं। भले ही आपको आंखों से जुड़ी कोई समस्या हो या नहीं। इससे आपको आंखों के रोगों से बचने में आसानी होगी। आंखों के रोग (Eye Disease) की गंभीरता को समझें और कोई भी समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लें।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र
लेखक की तस्वीर
Dr. Pranali Patil के द्वारा मेडिकल समीक्षा
AnuSharma द्वारा लिखित
अपडेटेड 2 weeks ago
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