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ALS Dementia: एएलएस डिमेंशिया क्या है?

परिचय|लक्षण|कारण|जोखिम|उपचार|घरेलू उपचार
ALS Dementia: एएलएस डिमेंशिया क्या है?

परिचय

एएलएस डिमेंशिया (ALS Dementia) क्या है?

एम्योट्रोफिक लेट्रल स्क्लेरोसिस (Amyotrophic lateral sclerosis) (ALS) डिमेंशिया एक खतरनाक बीमारी है। एएलएस डिमेंशिया दिमाग के तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) को प्रभावित करती है, जो इनवोलेंट्री मूवमेंट को नियंत्रित करता है। एएलएस डिमेंशिया को लोउ गेहरिग डिजीज (Gehrig’s disease) भी कहा जाता है। यह बीमारी लोउ गेहरिग नामक बेसबॉल प्लेयर को हुई थी। इसकी वजह से इस खिलाड़ी की मृत्यु हो गई थी। एएलएस डिमेंशिया में मांसपेशियां काफी कमजोर हो जाती हैं। इससे अक्सर लकवा (पैरालिसिस) और मृत्यु हो जाती है।
एएलएस डिमेंशिया मोटर न्यूरोन रोगों के रूप में जानी जाने वाले बीमारियों में से एक है।

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न्यूरोन्स नर्व कोशिकाएं होती हैं और मोटर न्यूरोन मूवमेंट को कंट्रोल करते हैं। मोटर न्यूरोन की बीमारी से पीढ़ित व्यक्ति मांसपेशियों पर नियंत्रण खो देता है और उसे पैरालिसिस हो जाता है। एएलएस डिमेंशिया या अन्य किसी मोटर न्यूरोन बीमारी का इलाज नहीं है। इस प्रकार की बीमारियों के प्रभाव को ठीक नहीं किया जा सकता है। एएलएस डिमेंशिया से पीढ़ित ज्यादातर लोगों की मृत्यु लक्षण नजर आने के पांच वर्ष के बाद हो जाती है। वहीं, ज्यादातर जानकारों का मानना है कि एएलएस डिमेंशिया मानसिक प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करता है।

ज्यादातर लोगों में यह समस्या न तो संज्ञानात्मक प्रक्रियाओं (cognitive processes) (जैसे सोच, सीखने, याद्दाश्त और समझ) और न ही व्यवहार प्रभावित करती है। हालांकि, डिमेंशिया दिमाग की एक गंभीर बीमारी है। यह व्यक्ति की दिनचर्या को पूरा करने की दक्षता जिसमें ध्यान लगाना, याद्दाश्त, योजना और संगठित रहने का कौशल प्रभावित होता है। एएलएस और डिमेंशिया के बीच संबंध की पड़ताल के लिए अभी भी अध्ययन चल रहे हैं।

एएलएस डिमेंशिया होना कितना सामान्य है? (How common is ALS dementia?)

एएलएस डिमेंशिया एक घातक बीमारी है। एएलएस डिमेंशिया किसी भी व्यक्ति को हो सकती है। इसके लक्षण या संकेत नजर आते ही तत्काल डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। उचित समय पर एलएस डिमेंशिया की पहचान इसका समुचित उपचार करने में मदद कर सकती है।

लक्षण

एएलएस डिमेंशिया के लक्षण हैं? (What are the symptoms of ALS dementia?)

एएलएस डिमेंशिया में व्यक्ति के व्यवहार और पर्सनैलिटी में बदलाव आता है। हालांकि, हर मामले में पीढ़ित के व्यवहार में बदलाव भिन्न हो सकते हैं।
आमतौर पर एएलएस डिमेंशिया के निम्नलिखित लक्षण होते हैं:

एएलएस डिमेंशिया के संज्ञानात्मक लक्षण (Cognitive Symptoms of ALS Dementia)

  • याद्दाश्त जाना
  • गूंगापन और भाषा का आंशिक या पूर्णतः नुकसान
  • तर्कशीलता या समस्याओं को सुलझाने की दक्षता न रहना

एएलएस डिमेंशिया के कुछ अन्य लक्षण

  • लोअर बॉडी में कमजोरी
  • निगलने में समस्या आना
  • मांसपेशियों का नुकसान
  • मांसपेशियों में मरोड़
  • सांस की कमी

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मुझे डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

एएलएस डिमेंशिया के लक्षणों को बताने वाले आप खुद हो सकते हैं। एएलएस डिमेंशिया में आने वाले बदलावों का अहसास करके आप इसका पता लगा सकते हैं। व्यक्तित्व, व्यवहार, स्पीच या याद्दाश्त में बदलाव आने पर तत्काल अपने डॉक्टर से सलाह लें। इस प्रकार के लक्षण एएलएस डिमेंशिया के लक्षण हो सकते हैं। यदि आपको इन लक्षणों का अनुभव होता है तो तत्काल अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

कारण

एएलएस डिमेंशिया के क्या कारण हैं? (What causes ALS dementia?)

एम्योट्रोफिक लेट्रल स्क्लेरोसिस तंत्रिका कोशिकाओं को प्रभावित करता है। यह तंत्रिका कोशिकाएं वोलेंट्री मूवमेंट जैसे चलना और बोलने (मोटर न्यूरोन्स) को नियंत्रित करता है। एम्योट्रोफिक लेट्रल स्क्लेरोसिस (एएलएस) की वजह से मोटर न्यूरोन धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होने लगते हैं। इसके बाद यह मोटर न्यूरोन मृत हो जाते हैं। मोटर न्यूरोन कोशिकाएं दिमाग से स्पाइनल कॉर्ड और पूरी बॉडी में मांसपेशियों तक फैली होती हैं। मोटर न्यूरोन्स के क्षतिग्रस्त होने पर वो मासपेशियों को संकेत देना बंद कर देती हैं। इसकी वजह से मांसपेशियां कार्य करना बंद कर देती हैं।

5-10% लोगों में एएलएस डिमेंशिया वंशानुगत पाई जाती है। इसके अतिरिक्त, लोगों में इसके असल कारण अज्ञात होते हैं। हालांकि, शोधकर्ता अभी भी एएलएस डिमेंशिया के संभावित कारणों का पता लगा रहे हैं। ज्यादातर सिद्धांत जेनेटिक और पर्यावरण कारकों के बीच में एक जटिल संबंध पर केंद्रित हैं।

यदि आप इस बीमारी के कारणों को लेकर आश्वस्त या चिंतित हैं तो बेहतर होगा कि आप अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। डॉक्टर आपकी मौजूदा हेल्थ के सभी पक्षों का गहन विश्लेषण करके इसके संभावित कारणों का आंकलन कर सकता है।

जोखिम

एएलएस डिमेंशिया के साथ मुझे क्या समस्याएं हो सकती हैं? (What problems can I have with ALS dementia?)

एएलएस डिमेंशिया से निम्नलिखित समस्याएं हो सकती हैं:

  • अनुवांशिकता: 10% लोगों को एएलएस डिमेंशिया वंशानुत होती है। इनमें से ज्यादातर लोगों के बच्चों में यह बीमारी फैलने की 50-50% संभावना रहती है।
  • उम्र: उम्र के साथ एएलएस डिमेंशिया के बढ़ने का खतरा रहता है। 40 और 60 वर्ष के मध्य में इस बीमारी के फैलने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।
  • सेक्स: 65 वर्ष की आयु से पहले पुरुषों में एएलएस डिमेंशिया होने का खतरा ज्यादा रहता है। हालांकि, लिंग के आधार पर यह फासला 70 वर्ष की आयु के बाद खत्म हो जाता है।
  • जेनेटिक्स: संपूर्ण मानव जीन के समूहों की जांच करने वाले कुछ अध्ययनों में वंशानुगत एएलएस डिमेंशिया और बिना वंशानुगत एएलएस डिमेंशिया में कई समानताएं पाई गईं। जीन के यह प्रकार लोगों में इस बीमारी के खतरे को और बढ़ा देते हैं।
  • सांस लेने की समस्या: एएलएस डिमेंशिया से पीढ़ित लोगों की सांस लेने में इस्तेमाल होने वाली मसल्स में पैरालिसिस हो जाता है। इससे सांस लेने में समस्या होती है।
  • बोलने में समस्या: एएलएस डिमेंशिया से पीढ़ित लोगों को बोलने में समस्या आती है। शुरुआत में यह हल्की होती है, लेकिन समय बढ़ने से यह गंभीर हो जाती है।
  • निगलने में समस्या: इस बीमारी से पीढ़ित लोगों को खाने पीने में समस्या आती है। जैसा कि पहले ही बता दिया गया है कि यह रोग निगलने की समस्या को पैदा करता है।

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पर्यावरणिक जोखिम

  • स्मोकिंग: स्मोकिंग एक इकलौता पर्यावरणिक जोखिम कारक है। महिलाओं में विशेषकर मेनोपॉज के बाद यह खतरा सबसे ज्यादा नजर आता है, जिसकी चलते उन्हें यह बीमारी हो सकती है। आमतौर पर एक स्वस्थ जीवन के लिए स्मोकिंग कई मायनों में नुकसानदेह साबित होती है। यदि आप स्मोकिंग करती हैं तो अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।
  • पर्यावरण के टॉक्सिन के संपर्क में आना: कुछ सुबूतों में सुझाव दिया गया है कि ऑफिस या घर पर किसी विषैले पदार्थ के संपर्क में आने से एएलएस डिमेंशिया का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि, इस पर पर्याप्त अध्ययनों की आवश्यकता है।
  • मिलिटरी सर्विस: अध्ययनों में पता चला है कि फौज में कार्य करने वाले लोगों को एएलएस डिमेंशिया का खतरा ज्यादा रहता है। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि फौज में किस प्रकार का कार्य करने से यह बीमारी होती है। चुनिंदा मेटल्स या कैमिकल्स, दुर्घटना में आई चोट, वायरल इंफेक्शन के संपर्क में आने से यह समस्या हो सकती है।

उपचार

यहां प्रदान की गई जानकारी को किसी भी मेडिकल सलाह के रूप ना समझें। अधिक जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से परामर्श करें।

एएलएस डिमेंशिया का निदान कैसे किया जाता है? (How is ALS dementia diagnosed?)

निम्नलिखित तरीकों से एएलएस डिमेंशिया का पता लगाया जा सकता है:

  • लैब टेस्ट: प्रयोगशाल में ऐसा कोई भी टेस्ट नहीं है, जिससे एएलएस डिमेंशिया का पता लगाया जा सके। इस बीमारी के अन्य कारणों का पता लगाने के लिए ब्लड टेस्ट किया जा सकता है।
  • इमेजिन टेस्ट: एएलएस डिमेंशिया के कारणों और मस्तिष्क की असामान्यताओं का पता लगाने के लिए ब्रेन स्कैन सबसे बेहतर है।
  • सीटी स्कैन: सीटी स्कैन एक एक्स-रे की तरह होता है, जो विस्तृत जानकारी दिखाता है। यह फ्रंटल लोब (Frontal lobe) की सिकुड़न (atrophy) को दिखा सकता है। हलांकि, एमआरआई इसकी विस्तृत जानकारी दे सकता है।
  • सिंगल फोटो इमिशन कंप्युटेड टोमोग्राफी (Single-photon emission computed tomography) (SPECT) मस्तिष्क के कार्य की समस्या को दिखा सकती है। हालांकि, एसपीईसीटी सिर्फ चुनिंदा मेडिकल सेंटर्स पर उपलब्ध होती है।

एएलएस डिमेंशिया के निदान के संबंध में यदि आप विस्तृत या अधिक जानकारी चाहते हैं तो बेहतर होगा कि अपने डॉक्टर से इस संबंध में सलाह लें।

और पढ़ें : वृद्धावस्था में दिमाग को तेज रखने के लिए मेमोरी बढ़ाने के तरीके

एएलएस डिमेंशिया का इलाज कैसे किया जाता है? (How is ALS dementia treated?)

एएलएस डिमेंशिया का इलाज करने के लिए कुछ चुनिंदा तरीके उपलब्ध हैं। हालांकि, यह कितने प्रभावकारी हैं, इस पर अभी भी आमराय नहीं है। रिलुजोल (Riluzole) दुनियाभर में एकमात्र उपलब्ध दवा है, जो मोटर न्यूरोन बीमारी के लिए उपयोग की जाती है। मोटर न्यूरोन के विघटन में यह दवा की कितनी कारगर है, इसकी अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। यदि आप इसके इलाज को लेकर चिंतित हैं या विस्तृत जानकारी लेना चाहते हैं तो बेहतर होगा कि अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

व्यवहार को ठीक करने वाली दवाइयां

गुस्से और मूड में सुधार करने के लिए डिप्रेशन की दवाइयों का इस्तेमाल किया जाता है। यह ब्रेन कैमिस्ट्री में बदलाव करती हैं। इन दवाइयों में सेरोटोनिन (Serotonin) रि-अपटेक इनहिबिटर्स (SSRIs) जैसे फ्लुओक्सटीन fluoxetine (Prozac), सेट्रार्लिन (sertraline) (Zoloft), पेरोएक्सटाइन (paroxetine) (Paxil) और सिटालोप्राम (citalopram) (Celexa) दवाइयां शामिल हैं। एएलएस डिमेंशिया में ओलैंजपिन (जियप्रेक्सा) olanzapine (Zyprexa) का इस्तेमाल भी किया जाता है। यह एक डोपामाइन ब्लॉकर दवा है।

उपरोक्त दवाइयों के अलावा भी कुछ ऐसी दवाइयां हो सकती हैं, जो इस बीमारी में कारगर साबित होती हैं। उपरोक्त सूची संपूर्ण नहीं है। यदि आप इस संबंध में दवाइयों को लेकर चिंतित हैं तो अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें। साथ ही उन सभी दवाइयों की एक सूची बनाएं, जिनका आप मौजूदा समय में सेवन कर रहे हैं। इस सूची में मार्केट में बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के खरीद के लिए उपलब्ध हर्बल प्रोडक्ट्स, सप्लिमेंट्स और डॉक्टर की सलाह पर ली जाने वाली सभी दवाइयों को शामिल करें। एएलएस डिमेंशिया में किसी भी दवा का सेवन बिना डॉक्टर की सलाह के न करें। साथ ही बिना डॉक्टर की मंजूरी के डोज में परिवर्तन या दवा शुरू या बंद न करें। ऐसा करने से गंभीर दुष्प्रभावों की संभावना बढ़ जाती है।

घरेलू उपचार

जीवन शैली में होने वाले बदलाव क्या हैं, जो मुझे एएलएस डिमेंशिया को ठीक करने में मदद कर सकते हैं?

एएलएस डिमेंशिया के मामले में ऐसे कोई भी घरेलू उपाय नहीं है। इसके लक्षण नजर आते ही डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। इस बीमारी के लक्षण सामने आते ही अपने किसी संबंधि या करीबी से सलाह या घरेलू उपाय जानने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करें। जो लक्षण आपकी बॉडी में नजर आ रहे हैं, उनकी विस्तृत जानकारी चिकित्सक से साझा करें।

इस संबंध में आप अपने डॉक्टर से संपर्क करें। क्योंकि आपके स्वास्थ्य की स्थिति देख कर ही डॉक्टर आपको उपचार बता सकते हैं।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र
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Sunil Kumar द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 10/03/2021 को
डॉ. पूजा दाफळ के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड
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