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वर्ल्ड अल्जाइमर डे : भूलने की बीमारी जो हंसा देती है कभी-कभी

वर्ल्ड अल्जाइमर डे : भूलने की बीमारी जो हंसा देती है कभी-कभी 

सोचिए आप कहीं जाकर ये भूल जाएं कि आप यहां क्यों आए हैं? आस-पास की चीजों को, लोगों को पहचान न पाएं या अपने परिवारजनों से ही पूछें कि आप कौन हैं? ऐसा सोचकर ही हमें घबराहट होने लगती है लेकिन, अल्जाइमर के मरीज के साथ ऐसा होना आम है। इस बीमारी से पीड़ित इंसान अपनी मेमोरी धीरे-धीरे खोने लगता है। हालांकि, याददाश्त खो देना एक दुःख भरी घटना है लेकिन, कई बार अल्जाइमर पेसेंट की कुछ बातें आपको हंसा भी सकती हैं।

एक ऐसा ही किस्सा है मेरी दोस्त की दादी कुंती देवी का, जो 80 की उम्र पार कर चुकी हैं। दादी जिंदगी के एक ऐसे मोड़ पर हैं जहां शायद उनके पास ज्यादा वक्त नहीं बचा हो। उस पर उनकी अल्जाइमर की बीमारी भी निराली, जो दादी को आज कभी घर की रानी तो कभी एक छोटा बच्चा बना देती है।

दरअसल, ये दादी जो उम्र भर अपनी बहू से डरती आई हैं। “एक चुप तो सौ सुख” के कांसेप्ट पर चलने वाली दादी ने कभी भी अपनी बहू से बहस करने की भी कोशिश नहीं की। वो दादी सोचती तो बहुत थी कि आज तो मैं अपनी बहू को जवाब दूंगी, आज तो मैं बोलूंगी कि बहू खाना थोड़ा टेस्टी बना लिया कर। यह मौका मिला तब, जब दादी 75 की हो गई थी और पता चला कि उनको अल्जाइमर है। अल्जाइमर रोग की वजह से दादी की याददाश्त धीरे-धीरे कम होती जा रही थी। आज जब वो 80 की उम्र पार कर चुकी है, उनके दिमाग से लगभग सभी पुरानी यादें खत्म हो गई हैं।

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तो अब दादी का टाइम आ गया था, अल्जाइमर की वजह से दादी यह भूल गई है कि किरन उनकी बहू है। दरअसल, अब दादी खुद को घर की रानी और बहू को नौकरानी समझने लगी है। हमेशा से अपनी बहू से डरने वाली दादी अब अक्सर अपनी बहू की क्लास लगाने लगती हैं, मनपंसद खाने से लेकर अपनी सारी बात मनवाना उनका रूटीन बन गया। खैर उनकी बहू भी दादी की बीमारी को समझती है। वो भी अपनी सास का ख्याल रखती है।

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बात यही खत्म नहीं हुई वे अपने लड़के को भी अपना नहीं समझतीं। दादी को जब तक याद रहता कि बलदेव उनका लड़का है तब तक तो उनको खूब प्यार-दुलार दिखाती लेकिन, जैसे जब वे उसे भूल जाती हैं तो वही लड़का उनके लिए यमराज की तरह बन जाता है। बलदेव जब भी दादी को कहीं ले जाने लगता है तो “हुड़ अपने घरवालों दे नाल रहना चाहन्दिया (मुझे अभी अपने परिवार के साथ रहना है)” ऐसा जोर-जोर से कहने लगती हैं और अपने बेटे को ही अपशब्द कह देती। बेटा भी हंसकर मां की गालियां सुनता रहता है।

और तो और दादी कभी-कभी अपने बचपन में चली जाती हैं और उनको लगता है कि वो अपने दोस्तों के साथ रहती हैं। अपने पोता-पोती, बहू-बेटे को ही दोस्त समझकर खेलने के लिए कहती हैं। कई बार तो जब डायपर पहनाने की बात आती है तो दादी कहती हैं कि “अब मुझे पीरियड्स नहीं आते हैं, तो डायपर क्यों पहनना?”

एक बार तो हद्द ही हो गई। दादी को लगा कि उनके पास बहुत पैसे हैं, तो उन्होंने अपनी बहू को नौलक्खा हार दिलाने की ठान ली। फिर क्या था, अपने लड़के से कहने लगी कि अलमारी से रूपए निकालकर लाओ और मुझे मार्केट ले चलो, हार खरीदना है।

दिनभर में ऐसे कई इंसीडेंट्स होते हैं जब दादी अपनी बीमारी में भी लोगों को हंसा देती हैं। हालांकि कभी-कभी दादी को संभालते-संभालते बहू-बेटे परेशान भी हो जाते हैं लेकिन, गुस्सा कंट्रोल करके सभी परिवार वाले दादी की हर स्थिति में साथ देते हैं। अल्जाइमर के पेसेंट्स को सबसे ज्यादा अपनों के साथ की जरूरत होती है। इसलिए उस इंसान की बीमारी को समझें और उन्हें अकेला न छोड़े। उन्हें आपकी और आपके साथ की जरूरत है।

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अल्जाइमर (Alzheimer) क्या है?

अल्जाइमर एक मानसिक बीमारी है जिसमें धीरे-धीरे इंसान की मेमोरी कम होने लगती है। शुरुआती तौर पर अल्जाइमर रोग से पीड़ित व्यक्ति को बातें याद रखने में कठिनाई हो सकती है और फिर धीरे-धीरे व्यक्ति अपने जीवन में महत्वपूर्ण लोगों को भी भूल जाता है। याद्दाश्त कमजोर होने के साथ-साथ इस बीमारी के कुछ और भी लक्षण दिखाई देने लगते हैं जैसे- अपने विचारों को व्यक्त करने में कठिनाई, किसी बात को समझने में भी परेशानी, निर्देशों का पालन करने में दिक्कत, आदि। अल्जाइमर रोग डिमेंशिया (मनोभ्रंश) का सबसे आम कारण है। इसमें स्मृति और मानसिक कार्यों में लगातार गिरावट आती है।

कुछ रिसर्च और हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार बढ़ती उम्र में अल्जाइमर की समस्या इससे पीड़ित व्यक्ति के साथ-साथ घर के सदस्यों को भी परेशानी में डाल सकता है। बढ़ती उम्र में अल्जाइमर होना मस्तिष्क के टिशू पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। सबसे समस्या तो यह होती है की इसके लक्षण तुरंत समझ में नहीं आते हैं। इस बीमारी में मस्तिष्क की कोशिकाएं डी-जेनरेट हो कर नष्ट हो जाती हैं और इसी कारण याददाश्त धीरे-धीरे कमजोर होने लगती है। उम्र ज्यादा होने के साथ-साथ जेनेटिकल, तनाव, डिप्रेशन, हाई ब्लड प्रेशर या सिर में चोट लगने के वजह अल्जाइमर का कारण बनता है।

अल्जाइमर रोग से पीड़ित व्यक्तियों में निम्नलिखित लक्षण समझे जा सकते हैं। जैसे-

  • अल्जाइमर रोग से पीड़ित व्यक्ति ठीक से बात नहीं कर पाते हैं।
  • किसी भी समस्या को ठीक करने में अल्जाइमर रोग से पीड़ित व्यक्ति को परेशानी होती है।
  • अल्जाइमर रोग से पीड़ित व्यक्ति को समय और जगह को लेकर असमंजस में रहना।
  • मौसम के अनुसार कपड़े नहीं पहनना।
  • अल्जाइमर रोग से पीड़ित व्यक्ति कभी-कभी व्यक्ति खुद को भी नुकसान पहुंचा लेता है।

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अल्जाइमर रोग से पीड़ित व्यक्ति को सबसे पहले डॉक्टर के पास ले जाएं। डॉक्टर आपको अल्जाइमर रोग और पेशेंट इस समस्या से कितने पीड़ित हैं इसकी जानकारी दे सकते हैं। बढ़ती उम्र में अल्जाइमर के लिए डॉक्टर आपको सही सलाद देता है। कई बार डॉक्टर अल्जाइमर के लिए थेरिपी देने की बात करते हैं लेकिन इसका इलाज हर किसी के लिए अलग-अलग है। बढ़ती उम्र में अल्जाइमर होन पर परेशान होने से बेहतर है कि परिवार से व्यक्ति को सहानूभुति मिले ताकि अल्जाइमर से पीड़ित व्यक्ति खुद को अकेला न समझें। अगर आप अल्जाइमर रोग से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

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Shikha Patel द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 22/09/2020 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड