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Dementia: डिमेंशिया (मनोभ्रंश) क्या है?

इस विषय में मूल बातें|डिमेंशिया के लक्षण|चरण|प्रकार|डिमेंशिया के कारण|डिमेंशिया के रिस्क फैक्टर|मरीज की पहचान और इलाज|रोकथाम|जीवनशैली में बदलाव और घरेलू उपाय
Dementia: डिमेंशिया (मनोभ्रंश) क्या है?

इस विषय में मूल बातें

डिमेंशिया (Dementia) एक ऐसी स्थिति है जिसे कई मानसिक विकार को दर्शाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है जैसे कि भूलने की बीमारी। यह कई मानसिक व मनोदशा संबंधित विकारों का लक्षण होती है।

डिमेंशिया खुद में कोई बीमारी नहीं होती है बल्कि इसे कई समस्याओं जैसे याददाश्त, सोचने की शक्ति बोलने की क्षमता आदि के प्रभावित होने की स्थिति को माना जाता है, लेकिन हमेशा ही याद्दाश्त कम होने का मतलब यह नहीं है कि हमें डिमेंशिया है, क्योंकि इसके होने के और भी कई कारण हो सकते हैं।

डिमेंशिया भले ही उम्र के साथ विकसित होता हो, लेकिन इसे बढ़ती उम्र का सामान्य चरण नहीं माना जाता है। अध्ययनों के अनुसरण 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों में इसके होने का सबसे अधिक जोखिम होता है।

65 वर्ष की उम्र वाले हर 10 वे व्यक्ति को डिमेंशिया की शिकायत होती है। यह आंकड़े 85 वर्ष की उम्र तक और भी अधिक बढ़ जाते हैं।

डिमेंशिया के लगभग 60 से 80 प्रतिशत मामलों अल्जाइमर के होते हैं। इस लेख में आज हम आपको बताएंगे की डिमेंशिया क्या होता है और इसकी पहचान कैसे करें व इसका इलाज क्या है।

डिमेंशिया (Dementia) कितना सामान्य है?

विश्वभर में कुल 4 करोड़ 75 लाख लोग डिमेंशिया का शिकार हैं। हर 4 सेकंड में डिमेंशिया का एक नया केस सामने आता है।

डिमेंशिया ज्यादातर 65 साल और उससे ज्यादा उम्र के लोगों को प्रभावित करता है। इसके होने वाले लक्षणों को कम करके इसे कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन, ज्यादा जानकारी के लिए आप अपने डॉक्टर से बात करें।

और पढ़ें – बढ़ती उम्र में अल्जाइमर कितना आम है, जानें इसके बारे में

डिमेंशिया के लक्षण

डिमेंशिया (Dementia) के क्या लक्षण है?

डिमेंशिया से ग्रस्त मरीज को निम्न प्रकार के लक्षण महसूस हो सकते हैं। हालांकि, ध्यान रखें कि याददाश्त से जुड़े कुछ मामलों में मरीज को खुद इस बात का पता नहीं चल पाता है कि वह डिमेंशिया से ग्रस्त है।

ऐसे में परिवार के सदस्यों व व्यक्ति का ध्यान रखने वाले लोगों को इन लक्षणों की पहचान करनी होती है ताकि मरीज को सही समय पर इलाज मुहैया करवाया जा सके।

डिमेंशिया के साधारण लक्षण हैं :

  • याद्दाश्त कमजोर पड़ना
  • बातचीत करने में, सामान्य गतिविधियों में और भाषा के इस्तेमाल में परेशानी
  • समय और जगह को लेकर कन्फ्यूजन
  • समान को गलत जगह पर रखना
  • पर्सनैलिटी, बिहेवियर और मूड में अचानक बदलाव आना
  • कुछ भी काम शुरू करने में दिलचस्पी न होना

हो सकता है ऊपर दी गई लिस्ट में कुछ लक्षणों को नहीं लिखा गया हो। अगर आपको लक्षणों के बारे में किसी भी प्रकार की जानकारी लेनी हो तो, अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

डॉक्टर के पास कब जाएं?

अगर आपको ऊपर दी गई लिस्ट के अनुसार कोई भी लक्षण दिखाई दें या फिर आपको याद्दाश्त से जुड़ी हुई कोई भी समस्या हो, तो अपने डॉक्टर से मिलें। हर व्यक्ति का शरीर अलग-अलग तरीके से काम करता है। इसलिए, अपनी परेशानी के अनुसार डॉक्टर से बात करना हमेशा अच्छा होता है।

और पढ़ें – Patellofemoral pain syndrome: पेटेलोफेमोरल पेन सिंड्रोम क्या है?

चरण

डिमेंशिया के चरण

ज्यादातर मामलों में डिमेंशिया समय के साथ बत्तर होता जाता है। डिमेंशिया सभी व्यक्तियों को अलग तरह से प्रभावित करता है। हालांकि, लोग निम्न चरणों के मुताबिक लक्षणों का अनुभव करते हैं –

हल्की संज्ञानात्मक कमी

बढ़ती उम्र के साथ बुजुर्गों को हल्की संज्ञानात्मक कमी (Mild cognitive impairment) का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, इसके सभी मामलों में व्यक्ति डिमेंशिया का शिकार नहीं होते हैं। हल्की संज्ञानात्मक कमी होने पर व्यक्ति भूलने, शब्दों को याद रखने और शार्ट टर्म मेमोरी लॉस का अनुभव करते हैं।

हल्का डिमेंशिया

हल्के डिमेंशिया वाले चरण के लोगों को रोजाना के कार्य में समस्या आने लगती है। इस स्थिति में कई बार व्यक्ति को हल्की मध्यम संज्ञानात्मक कमी का सामना करना पड़ सकता है। इसके लक्षणों में शामिल हैं –

  • चीजों को गलत जगह पर रखना या भूल जाना
  • शार्ट टर्म मेमोरी लॉस
  • मनोग्रंथि समस्याओं का समाधान निकालने में दिक्कत आना
  • व्यवहारिक बदलाव जैसे की गुस्से या अवसाद में परिवर्तन
  • अपनी भावना व विचारों को दर्शाने में संघर्ष महसूस करना

मध्यम डिमेंशिया

रोजाना के कार्य पूरे करने में मुश्किलें आना और किसी की मदद की आवश्यकता पड़ना। इसके लक्षण हल्के डिमेंशिया जैसे ही होते हैं लेकिन थोड़े अधिक तीव्र। इस स्थिति में भी व्यक्ति में व्यवहारिक बदलाव आने लगते हैं और व्यक्ति उम्र के साथ बिना किसी कारण संदेहजनक होने लगता है।

इस चरण में व्यक्ति को तैयार होने, बाल बनाने और कपड़े पहनने तक में मदद की जरूरत होती है। इसके सामान्य लक्षण में शामिल हैं –

  • निर्णय न ले पाना
  • गुस्सा व कंफ्यूज रहना
  • व्यक्तित्व में गहरे बदलाव आना

गंभीर डिमेंशिया

इस स्टेज पर स्थिति पहले से भी अधिक गंभीर हो जाती है। व्यक्ति लोगों से बातचीत करने की क्षमता खो देते हैं और साथ ही उन्हें पूरे समय किसी की मदद की आवश्यकता रहती है।

इस चरण में व्यक्ति को उठने बैठने के लिए किसी अन्य का सहारा लेना पड़ता है। इसके अलावा गंभीर डिमेंशिया के दौरान व्यक्ति अपना पेशाब कंट्रोल करने की क्षमता को भी खो देता है।

और पढ़ें – सिकल सेल डिजीज से ग्रस्त बच्चों की पेरेंट्स ऐसे करें मदद

प्रकार

डिमेंशिया एक ऐसा रोग है जिसके कई चरणों के साथ कई प्रकार भी होते हैं। यह प्रकार की व्यक्ति की स्थिति और उम्र पर निर्भर करते हैं। डिमेंशिया के प्रकार में निम्न शामिल हैं –

डिमेंशिया के प्रकर

  1. अल्जाइमर रोग – यह डिमेंशिया के कारण होने वाला सबसे आम रोग है। हालांकि, फिलहाल अल्जाइमर रोग के सभी कारण अज्ञात हैं। इस रोग से ग्रस्त व्यक्ति के मस्तिष्क में प्रोटीन की असमानताएं आने लगती हैं जिसके कारण उसकी तंत्रिका प्रणाली को क्षति पहुंचती है और वह अपने मस्तिष्क पर कंट्रोल खो देता है।
    डिमेंशिया के 60 से 80 प्रतिशत मामलें अल्जाइमर रोग के होते हैं। इससे ग्रस्त होने पर व्यक्ति 8 से 20 साल तक जिंदा रह सकता है।
  2. वैस्कुलर डिमेंशिया – यह डिमेंशिया का दूसरा सबसे सामान्य प्रकार होता है जो की मस्तिष्क में खून पहुंचने वाली वाहिकाओं को क्षति पहुंचने के कारण होता है। रक्त वहिकाओं को क्षति पहुंचने के कारण स्ट्रोक हो सकता है। इसके अलावा यह मस्तिष्क को अन्य रूप से प्रभावित कर सकता है, जैसे कि मस्तिष्क के वाइट मैटर के फाइबर को नुकसान पहुंचाना। वैस्कुलर डिमेंशिया के मुख्य लक्षणों में प्रॉब्लम सॉल्व करने में समस्या आना, सोचने की क्षमता में कमी, ध्यान केंद्रित न कर पाना और संगठन में दिक्कत शामिल हैं।
  3. लेवी बॉडी – तंत्रिकाओं में प्रोटीन के कारण मस्तिष्क को केमिकल सिग्नल भेजने में मुश्किलें आती हैं। इसके परिणामस्वरुप में मेमोरी लॉस, रिएक्ट करने में देरी और संदेशों का खो जाना शामिल होता है।
  4. मिक्स डिमेंशिया – इस प्रकार के डिमेंशिया का मतलब होता है कि व्यक्ति एक साथ दो या तीन प्रकार के डिमेंशिया से ग्रसित है। उदाहरण के लिए – व्यक्ति में एक ही समय पर अल्जाइमर रोग और वैस्कुलर डिमेंशिया के लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
  5. फ्रंटोटेमपोरल डिमेंशिया – इस प्रकार के डिमेंशिया को पिक डिजीज भी कहा जाता है। यह व्यक्ति के व्यवहारिक और व्यक्तित्व को प्रभावित करता है। इस स्थिति में मस्तिष्क के सामने और एक तरफ का हिस्सा सही तरह से काम नहीं कर पाते हैं। ऐसे में व्यक्ति को बोलने, दूसरों को समझने में परेशानी आती है।
  6. पार्किंसन डिजीज – इस रोग के गंभीर पेशेंट में डिमेंशिया विकसित होने का खतरा बेहद अधिक होता है। इस प्रकार के डिमेंशिया में व्यक्ति विचार और निर्णय लेने में समस्या आती है और साथ ही उसमें चिड़चिड़ापन, पागलपन और अवसाद की स्थिति बढ़ जाती है।

इनके अलावा भी डिमेंशिया के कई अन्य प्रकार होते हैं, लेकिन उनके होने की आशंका 10 लाख में केवल 1 व्यक्ति को होने की होती है। डिमेंशिया के अन्य प्रकार के बारे में जानने के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करें।

और पढ़ें – अल्जाइमर की नई दवा विकसित, भूलने की समस्या में मिलेगी राहत

डिमेंशिया के कारण

डिमेंशिया (Dementia) किन कारणों से होता है?

डैमज ब्रेन सेल की वजह से डिमेंशिया होता है। यह ब्रेन सेल्स को एक-दूसरे से तालमेल बनाने में रुकावट डालता है, जिसके कारण हमारा स्वभाव और हमारी सोच प्रभावित होने लगती है।

डिमेंशिया में ज्यादातर डैमेज स्थायी होते हैं और समय के साथ-साथ यह और बिगड़ने लगता है। डिमेंशिया के नीचे बताए गए कारण हो सकते हैं। ऐसे में अगर इन समस्याओं में सुधार किया जाए, तो काफी हद तक डिमेंशिया से राहत पाई जा सकती है, जैसे :

और पढ़ें – Down Syndrome : डाउन सिंड्रोम क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और उपाय

डिमेंशिया के रिस्क फैक्टर

क्या चीजें डिमेंशिया (Dementia) के जोखिम को बढ़ाती हैं

कारण जिन्हें हम बदल नहीं सकते –

  • उम्र : डिमेंशिया होने का जोखिम 65 साल की उम्र के बाद बढ़ सकता है। लेकिन, बहुत लोगों को यह युवावस्था में भी हो जाता है।
  • फैमिली हिस्ट्री : बहुत-से लोगों में इस बीमारी की फैमिली हिस्ट्री होने के बावजूद भी कोई लक्षण दिखाई नहीं देते, जबकि बहुत सारे लोगों में बिना किसी फैमिली हिस्ट्री के भी इसके लक्षण पाए जाते हैं। इसलिए, डॉक्टर आनुवांशिक लक्षण जांचने के लिए आपके कुछ टेस्ट कर सकते हैं।
  • डाउन सिंड्रोम : जिन्हें डाउन सिंड्रोम होता है, उन्हें यह बीमारी जल्दी हो जाती है और आगे चलकर ओल्ड एज में अल्जाइमर हो सकता है।
  • माइल्ड कॉगनिटिव इंपेयरमेंट : इसमें भी याद्दाश्त की समस्या हो ने लगती है, लेकिन, रोजमर्रा की जिंदगी पर कोई खास फर्क नहीं पड़ता, लेकिन, ऐसे लोगों को आगे चलकर डिमेंशिया होने का खतरा हो सकता है।

कारण जिन्हें हम बदल सकते हैं –

  • नशे की आदत : अगर हम ज्यादा मात्रा में शराब पीते हैं, तो इस बीमारी का ज्यादा खतरा होता है।
  • र्डियोवस्कुलर जोखिम का खतरा : इसमें हाई ब्लड प्रेशर,हाई कोलेस्ट्रॉल, आर्टरी वॉल्स पर फैट का जमना (Atherosclerosis) और मोटापा आदि होते हैं।
  • डिप्रेशन : माना जाता है कि डिप्रेशन भी डिमेंशिया होने का एक कारण है।
  • डायबटीज : अगर आप को डायबिटीज है, तो आपको डिमेंशिया होने का खतरा ज्यादा हो जाता है और अगर वह कंट्रोल में नहीं है, तो यह खतरा और भी बढ़ जाता है।
  • धूम्रपान : यह भी आपको डिमेंशिया होने के खतरे के साथ ही साथ दूसरी बीमारियां जैसे ब्लड वेसेल्स संबंधी बीमारियों को भी बढ़ावा देता है।स्लीप एप्निया : जो लोग खर्राटे लेते हैं या फिर कभी कभी सोते-सोते उनकी सांस लेने की प्रक्रिया अचानक रुक जाती है, उन्हें भी बीच बीच में कुछ समय के लिए समय के लिए याद्दाश्त खोने का खतरा हो सकता है।

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मरीज की पहचान और इलाज

यहां जो जानकारी दी गई है, वह किसी डॉक्टरी सलाह का विकल्प नहीं है, ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

डिमेंशिया (Dementia) का पता कैसे किया जाता है?

  • मेडिकल हिस्ट्री : डॉक्टर डिमेंशिया के बारे जानने के लिए हमारी फैमिली हिस्ट्री के बारे में प्रश्न पूछते हैं, जैसे, पहले हुई कोई बीमारी ,कोई चोट और कोई सर्जरी और साथ ही पहले से अब तक ली जाने वाली दवाइयां और अभी की स्थिति जो डिमेंशिया का कारण बन सकती है।
  • शारीरिक जांच : हमारी सुनने की क्षमता, देखने की क्षमता, ब्लड प्रेशर, नब्ज और स्वास्थ्य और बीमारियों का पता लगाने वाले टेस्ट। इनसे हमारी मेडिकल कंडीशन का सही पता चल सकता है।
  • न्ययूरोलॉजिकल जांच : इनसे हमारे ब्रेन और नर्वस सिस्टम में होने वाली समस्याओं का पता लगाया जा सकता है। यह नर्वस सिस्टम की उन समस्याओं का भी पता लगाता है, जो हमारे व्यवहार और सोचने की शक्ति को प्रभावित करते है।
  • न्यूरोसाइकोलॉजिकल टेस्ट : ये सवाल जवाब की तरह का एक साधारण टेस्ट होता है। उदाहरण के लिए, जैसे डॉक्टर मरीज से कुछ शब्दों को याद करने या कुछ चीजों का नाम बताने आदि के बारे में कह सकता है, जो उसकी समस्या की सीमा का पता लगा सकते हैं कि मरीज की क्षमताओं में कितना और किस तरह का बदलाव हो रहा है।

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डिमेंशिया (Dementia) का इलाज कैसे किया जाए?

डिमेंशिया नीचे बताई गई मैडिकेशन और थैरेपी से ठीक किया जा सकता है :

मेडिकेशन

  • Cholinesterase inhibitors : साथ में डोनेपेजिल (donepezil) (Aricept), रिवास्टिजमाइन (Rivastigmine) (Exelon) और गेलंटामाइन (Galantamine) (Razadyne)।
  • मैमेनटाइन (Memantine) : कुछ मामलों में cholinesterase inhibitor के साथ मैमेनटाइन (memantine) भी डॉक्टर द्वारा प्रिस्क्राइब की जाती है।
  • इसके अलावा, अन्य प्रिस्क्रिप्शन भी मिल सकती है।

बिना दवाई इलाज के तरीके

  • ऑक्यूपेशनल थैरेपी : मरीज के चारों तरफ के वातावरण में बदलाव करना भी उसके दिमागी समस्या और व्यवहार को सुधारने में मदद करता है।
  • मानसिक शांति से उपचार : जैसे म्युजिक, पालतू जानवर, आर्ट, मालिश आदि भी मरीज की मानसिक स्थिति और व्यवहार को संतुलित रखने में मदद कर सकते हैं।

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रोकथाम

शोधकर्ताओं और डॉक्टर के वर्षों की अध्ययनों के मुताबिक डिमेंशिया को न तो ठीक किया जा सकता है और न ही इसका कोई रोकथाम है। हालांकि, 2017 में आई एक नई रिसर्च के अनुसार डिमेंशिया के 1/3 मामलों में सही देखभाल और परहेज की मदद से डिमेंशिया का इलाज किया जा सकता है।

फिलहाल इस विषय पर अधिक अध्ययन करने की आवश्यकता है, लेकिन फिर भी निम्न बातों का ध्यान रखने से डिमेंशिया का रोकथाम मुमकिन हो सकता है –

  • धूम्रपान और अन्य नशीले पदार्थ जैसे मारिजुआना और शराब से परहेज
  • अस्वस्थ आहार की बजाए विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट युक्त आहार चुनें
  • हृदय संबंधी रोग होने पर अपने ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, शुगर और वसा के स्तर को बढ़ने न दें
  • किसी भी प्रकार की बीमारी होने पर तुरंत उसका इलाज करवाएं
  • बढ़ती उम्र के साथ अपनी नींद का खास ध्यान रखें

ध्यान रखें की इस बीमारी को रोकने का कोई भी उपाय मेडिकली अप्रूव नहीं किया गया है।

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जीवनशैली में बदलाव और घरेलू उपाय

जीवनशैली में कौन से बदलाव और कौन-से घरेलू उपाय हैं, जो डिमेंशिया (Dementia) से निपटने में मदद कर सकते है?

नीचे बताई गई जीवनशैली और घरेलू उपाय डिमेंशिया के मरीज को जीवन आसान करने में मदद कर सकते हैं :

बातचीत : बात करते समय हमें सामने वाले के साथ नजर मिलाकर बात करनी चाहिए और धीरे-धीरे बोलना चाहिए। अपनी बातें समझाने के लिए आप कुछ साधारण इशारों का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।

व्यायाम : व्यायाम और पौष्टिक खाना यह दोनों आपको और आपके पूरे स्वास्थ्य को सुधारने में काम करेगा और दिमाग को भी सुरक्षित रखेगा।

संतुलित जीवनशैली : अपनी दैनिक गतिविधियों के अलावा, नाचना, पेंटिंग करना, खाना बनाना, गाना और कुछ भी जिसे आप पसंद करें, वो सब करना चाहिए।

भरपूर नींद लें : कैफीन को कम करना चाहिए। इसके अलावा, दिन में सात से आठ घंटे की नींद लें।

कैलैंडर रखना : यह आपको आने वाले इवेंट्स को याद रखने में मदद मिलेगी साथ ही आपको अपना रुटीन और दवा लेना का समय भी याद रहेगा।

अगर आप किसी प्रकार के भी सवाल का जवाब पाना चाहते हैं तो, अपने डॉक्टर की सलाह लें, ताकि आप अपनी समस्या के अनुसार पूरी तरह से सही इलाज पा सकें।

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सूत्र

Dementia/https://www.dementia.com/index.html//accessed on 03/07/2020

Dementia/https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC4488926//accessed on 03/07/2020

What Is Dementia? Symptoms, Types, and Diagnosis/https://www.nia.nih.gov/health/what-dementia-symptoms-types-and-diagnosis//accessed on 03/07/2020

Alzheimer’s and Dementia in India/https://www.alz.org/in/dementia-alzheimers-en.asp/accessed on 03/07/2020

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Shikha Patel द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 03/06/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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