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शिशु के लिए मिल्क पाउडर के नुकसान : समझना है जरूरी!

शिशु के लिए मिल्क पाउडर के नुकसान : समझना है जरूरी!

बच्चे के अच्छे स्वास्थ्य के लिए डॉक्टर शिशु को लंबे समय तक ब्रेस्ट मिल्क देने की सलाह देते हैं। जाहिर है शिशु के लिए मां का दूध सबसे अच्छा माना जाता है। लेकिन कई तरह के कॉम्प्लिकेशन के चलते कुछ महिलाएं बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग (Breastfeeding) नहीं करवा पाती, इसलिए उन्हें बच्चों को फॉर्मूला मिल्क देने की जरूरत पड़ती है। वैसे तो शिशु के लिए मां के दूध से बेहतर कुछ नहीं माना जाता, लेकिन कुछ स्थितियों में विकल्प के तौर पर शिशु को फार्मूला मिल्क देना पड़ता है। ऐसी स्थिति में बच्चे को कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। आज हो बात करने जा रहे हैं शिशु के लिए मिल्क पाउडर (Milk powder) और उसके नुकसान की। शिशु के लिए मिल्क पाउडर (Milk powder for babies) और उसके नुकसान कौन से हो सकते हैं, आइए जानें! लेकिन उससे पहले जानते हैं कुछ बातें शिशु के लिए मिल्क पाउडर के बारे में।

और पढ़ें: मां और बच्चे के लिए क्यों होता है स्तनपान जरुरी, जानें यहां

शिशु के लिए मिल्क पाउडर : क्या है ये विकल्प? (Milk powder for babies)

शिशु के लिए मिल्क पाउडर को फॉर्मूला मिल्क (Formula milk) भी कहा जाता है। यह एक कृत्रिम दूध पाउडर होता है, जो प्रोसेस्ड होता है। यह फार्मूला मिल्क पाउडर बेस्ड मिल्क माना जाता है। मां को हुई किसी कॉम्प्लिकेशन की वजह से शिशु को मिल्क पाउडर देना मां की मजबूरी बन जाती है। ऐसी स्थिति में बच्चे को कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ता है। हालांकि शिशु के लिए मिल्क पाउडर (Milk powder for babies) में कई तरह के विटामिन और प्रोटीन (Vitamins and Proteins) पाए जाते हैं, जो बच्चों के विकास में मदद करते हैं, लेकिन यह मां के दूध से बेहतर नहीं होता। इसलिए बच्चे की सेहत पर इसका नकारात्मक प्रभाव भी पड़ता है। आइए जानते हैं शिशु के लिए पाउडर मिल्क पाउडर (Milk powder) कितने प्रकार के होते हैं।

शिशु के लिए मिल्क पाउडर के हैं कई प्रकार (Types of Milk powder for babies)

शिशु के लिए मिल्क पाउडर के कई प्रकार के होते हैं, जो मार्केट में उपलब्ध हैं। इन फ़ॉर्म्युला मिल्क से शिशु को कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, सोडियम, गुड फ़ैट और अन्य तरह के पोषक तत्व मिल जाते हैं। इसके अलावा शिशु के लिए मिल्क पाउडर (Milk powder for babies) तरह-तरह के प्रकारों में उपलब्ध होते हैं, जो इस प्रकार हैं –

आइए अब जानते हैं शिशु के लिए मिल्क पाउडर (Milk powder) के क्या हेल्थ रिस्क हो सकते हैं।

और पढ़ें: बीमारी के दौरान शिशु को स्तनपान कराना सही है या गलत?

शिशु के लिए मिल्क पाउडर : ध्यान दें इन हेल्थ रिस्क्स पर (Health risks of Milk powder for babies)

शिशु के लिए मिल्क पाउडर (Milk powder for babies)

शिशु के लिए मिल्क पाउडर (Milk powder for babies) आप अपनी सुविधा के अनुसार ले सकते हैं, लेकिन शिशु को रोजाना फॉर्मूला मिल्क देने से पहले आपको कुछ बातों का ध्यान रखने की जरूरत पड़ती है। ये एक तरह से बच्चे के हेल्थ रिस्क की ओर संकेत करता है, इसलिए शिशु के लिए मिल्क पाउडर चुनने से पहले आपको इन हेल्थ रिस्क के बारे में ज़रूर पता होना चाहिए।

शिशु के लिए मिल्क पाउडर : पचाने में होते हैं मुश्किल

शिशु के लिए मिल्क पाउडर का इस्तेमाल करना भले ही एक आसान तरीका है, जिससे शिशु का पेट भर जाता है। लेकिन यह पचाने में बेहद मुश्किल साबित होता है। शिशु के लिए मिल्क पाउडर (Milk powder for babies) में बड़ी कैसियन। नामक प्रोटीन होता है, जो आसानी से नहीं पचता। जैसा कि आप सभी जानते हैं शिशु का डाइजेस्टिव सिस्टम शुरुआत में काफी सेंसिटिव होता है, इसलिए यह मिल्क पाउडर (Milk powder) पचाना बच्चे के लिए मुश्किल हो जाता है। इसकी वजह से बच्चे का पेट हमेशा भरा रहता है, जिसके चलते आप एक नियत समय में बच्चे को दूध नहीं पिला सकते। यदि आप ऐसा करते हैं तो बच्चे के डाइजेस्टिव सिस्टम (Digestive system) पर सीधा असर पड़ता है और उसे सेहत से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।

और पढ़ें: ब्रेस्ट मिल्क या फॉर्मूला मिल्क, जानें क्या है बेहतर आपके शिशु के लिए

शिशु के लिए मिल्क पाउडर : एलर्जी का बनता है कारण (Milk powder for babies)

शिशु के लिए मिल्क पाउडर (Milk powder for babies) का इस्तेमाल सोच समझ कर करना फायदेमंद माना जाता है। हालांकि कुछ बच्चे यह मिल्क पाउडर आसानी से पचा लेते हैं, वहीं कुछ बच्चों को इससे सीवियर एलर्जी रिएक्शन हो सकते हैं। जो बच्चे गाय के दूध में मौजूद प्रोटीन से एलर्जिक होते हैं, उन बच्चों के लिए ये दूध पाउडर एलर्जी का सबब बन सकता है। ऐसी स्थिति में बच्चा स्टूल और वोमिट (Stool and Vomit) के जरिए रिएक्शन दिखाता है। जिसकी वजह से उसकी तबीयत बिगड़ सकती है। यदि बच्चा इस तरह के लक्षण नहीं दिखाता, तो यह माता-पिता के लिए और भी गंभीर स्थिति हो सकती है। इसलिए शिशु के लिए मिल्क पाउडर (Milk powder) का चुनाव करने से पहले आपको पीडियाट्रिशियन से सलाह लेनी जरूरी मानी जाती है।

शिशु के लिए मिल्क पाउडर : बनता है एनवायरमेंटल पॉइजनिंग का कारण

जैसा कि आप जानते हैं बच्चे के लिए मां का दूध सबसे सुरक्षित माना जाता है। लेकिन रोजाना एयर क्वालिटी के गिरते स्तर को ध्यान में रखते हुए शिशु के लिए मिल्क पाउडर (Milk powder for babies) का इस्तेमाल करना उसके लिए एनवायरमेंटल पॉइजनिंग का खतरा बढ़ा देता है। ब्रेस्ट मिल्क के जरिए बच्चा हमारे आस पास के वातावरण में हो रही समस्याओं को आसानी से झेल लेता है, क्योंकि मां के दूध में बच्चे की जरूरत के अनुसार सारी चीजें होती है। वहीं जब आप शिशु के लिए मिल्क पाउडर का चुनाव करते हैं, तो बच्चे के ब्रेन डेवलपमेंट (Brain development) पर इसका सीधा असर होता है। जिसकी वजह से वह एनवायरमेंटल पॉइजनिंग से लड़ नहीं पाता। वातावरण में मौजूद टॉक्सिन उसे आसानी से अपनी गिरफ्त में ले सकते हैं। इसलिए शिशु के लिए मिल्क पाउडर (Milk powder) का चुनाव करने से पहले आपको इस बात का ध्यान रखने की जरूरत पड़ सकती है।

शिशु के लिए मिल्क पाउडर : डायबिटीज और क्रॉनिक डिजीज का खतरा

शिशु के लिए मिल्क पाउडर का चुनाव करने से पहले आपको यह जानना जरूरी है कि लंबे समय तक फॉर्मूला मिल्क का सेवन करने से बच्चे में अलग-अलग तरह की क्रॉनिक डिजीज (Chronic disease) या टाइप वन डायबिटीज होने की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा पेट से संबंधित समस्याएं भी शिशु को आसानी से हो सकती है, जिसमें सिलियक डिजीज और इन्फ्लेमेटरी बॉवेल डिजीज (Celiac Disease and Inflammatory Bowel Disease) आम तौर पर देखी जाती है। इसलिए शिशु के लिए मिल्क पाउडर का चुनाव सोच समझ कर करना चाहिए।

और पढ़ें: रिसर्च के अनुसार ब्रेस्टफीडिंग करवाने वाली महिलाएं भी ले सकती हैं कोविड 19 वैक्सीन, लेकिन पहले डॉक्टर से जरूर करें कंसल्ट

शिशु के लिए मिल्क पाउडर : बढ़ती है अस्थमा की शिकायत

शिशु के लिए मिल्क पाउडर (Milk powder for babies) का चयन करने से पहले आपको यह बात जरूर जान लेनी चाहिए कि जो बच्चे शुरुआती समय से लंबे समय तक फॉर्मूला मिल्क पर का सेवन करते हैं, वह बच्चे आसानी से अस्थमा (Asthma) के शिकार बन सकते हैं। जिसके चलते उन्हें ब्रीदिंग प्रॉब्लम्स हो सकती हैं। वहीं जो बच्चे ब्रेस्टफीडिंग करते हैं, उन बच्चों में अस्थमा की समस्या कम देखी जाती है। ब्रेस्ट मिल्क के चलते बच्चे का इंटरनल सिस्टम दिन पर दिन मजबूत बनता है और वह इन लाइफ़स्टाइल डिजीजेज से निपटने के लिए तैयार रहता है। लेकिन जब आप शिशु के लिए मिल्क पाउडर का चयन करते हैं, तो मिल्क पाउडर से उसे जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते, इसलिए उसकी इम्यूनिटी कम होती चली जाती है।

हालांकि कुछ स्थितियों में मां को मजबूरन शिशु के लिए मिल्क पाउडर (Milk powder for babies) का चयन करने की जरूरत पड़ती है, लेकिन ऐसी स्थिति में डॉक्टर या पीडियाट्रिशियन से सलाह लेकर इन बातों पर गौर किया जा सकता है।

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हर बच्चे की जरूरत अलग-अलग होती है, इसलिए आपको शिशु के लिए मिल्क पाउडर (Milk powder) का चुनाव करने से पहले कई बातों पर ध्यान रखना होता है। शिशु के लिए मिल्क पाउडर के चुनाव के बाद यदि आप बच्चे में डिस्कंफर्ट या परेशान करने वाले लक्षण देखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना आपके लिए जरूरी माना जाता है। ऐसी स्थिति में आप आपको तुरंत प्रोडक्ट बदलने की जरूरत पड़ती है। इस तरह आप बच्चे को कई तरह की समस्याओं से बचा पाते हैं। शिशु के लिए मिल्क पाउडर (Milk powder for babies) हमेशा कुछ खास स्थितियों में ही देना चाहिए, क्योंकि बच्चे के संपूर्ण विकास के लिए उसे ब्रेस्टफीडिंग कराना ही पहला विकल्प होना चाहिए।

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Toshini Rathod द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 13/08/2021 को
डॉ. हेमाक्षी जत्तानी के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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