अब सरोगेसी के जरिए पेरेंट्स बनना आसान नहीं, जानें इसके रूल्स

By Medically reviewed by Dr. Shruthi Shridhar

सरोगेसी यानी किराए की कोख, ये एक प्रॉसेस है जिसके माध्यम से कई नि:संतान लोग संतान की खुशी हासिल कर सकते हैं। अधिकतर मामलों में इसकी जरूरत तब पड़ती है जब कोई स्त्री गर्भ धारण नहीं कर पाती है और आईवीएफ प्रॉसेस भी फेल हो जाता है। तब ऐसे में ऐसे में दंपति सरोगेसी का रास्ता अपनाते हैं। लेकिन,सरोगेसी के अपने कुछ कानूनी नियम हैं। इसलिए,अब कानून की सीमा के अंदर रहकर के सरोगेसी का तरीका अपनाया जा सकता है।
दंपित के अलावा सिगल व्यक्ति, सिंगल पेरेंट बनने की चाह में भी इसे अपनाना चाहते हैं, पर अब ये उनके लिए भी मुश्किल होगा। बल्कि होमोसेक्शुअल कपल, लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले लोग और सिंगल व्यक्ति भी सरोगेसी का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। जिन दंपति शादी को पांच साल से ज्यादा हो चुका है और जिन्हें किसी मेडिकल कारण से बच्चा नहीं हो सकता है, सिर्फ वही सरोगेसी का इस्तेमाल कर सकेंगे।
कुछ लोग जहां इसकी आलोचना कर रहे हैं, वहीं कई स्पेशलिस्ट इसे सरोगेसी और एडॉप्शन के हो रहे दुरूपयोग को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं।

क्या है सरोगेसी ?

ये एक तरह की तकनीक है, जिसमें एक महिला और एक कपल के बीच अग्रीमेंट होता है। इसमें ऐसी महिलाएं मां बन पाती हैं, जो बार-बार गर्भपात होने या आईवीएफ के फेल हो जाने के कारण बच्चों को जन्म दे पाने में असफल होती हैं। सरोगेसी में पुरूष के शुक्राणुओं को सरोगेट मदर के अंडाणुओं के साथ निषेचित किया जाता है। इसके अलावा,जेस्‍टेशनल सरोगेसी में माता और पिता दोनों के अंडाणु व शुक्राणुओं का मेल परखनली विधि से करवा कर भ्रूण को बच्‍चेदानी में प्रत्‍यारोपित किया जाता है। इसमें बच्‍चे का जैनेटिक संबंध माता-पिता दोनों से होता है। जन्म के बाद बच्चे पर उस महिला का अधिकार समाप्त हो जाता है।

कितनी तरह की होती है सरोगेसी ?

आमतौर पर सरोगेसी को दो प्रकार का माना जाता है: पहला परोपकारी सरोगेसी और दूसरा कमर्शियल सरोगेसी। कमर्शियल सरोगेसी की बहुत आलोचना होती रही हैं, क्योंकि, कमर्शियल सरोगेसी में कोखं को किराए पर लिया जाता है। इसमें सरोगेट बनने वाली महिला को मेडिकल खर्चे के अलावा उन्हें इसकी फीस भी दी जाती है। परोपकारी सरोगेसी में सिर्फ मेडिकल खर्चे और इन्स्योरंस के अलावा किसी तरह का भुगतान नहीं किया जाता।

सरोगेसी से संबंधित नियम:

  • देश में सरोगेसी से बच्चा चाहने वाले कपल्स को कम-से-कम पांच साल से शादी-शुदा जीवन निर्वाह किया होना अनिवार्य होगा, साथ ही इन कपल्स का भारत का
  • नागरिक होना भी जरूरी है।
  • सरोगेट के माध्यम से बच्चा चाहने वाले कपल्स का करीबी रिश्तेदार होना जरूरी होगा। उनका पहले से विवाहित होना भी अनिवार्य होगा, जिसका स्वयं भी कम-से-कम एक बच्चा हो।
  • संतान चाहने वाली महिला की उम्र 23 से 50 वर्ष और पुरुष की उम्र 26 से 55 वर्ष के बीच होना जरूरी है।
  • दंपती की शादी के कम से कम पांच वर्ष होना अनिवार्य और सरोगेसी के लिए भारत का नागरिक होना जरूरी
  • सरोगेट करने वाली मां की उम्र 25 से 35 के बीच होना जरूरी। शोषण रोकने व सरोगेट बच्चों के अधिकार तय करने के अलग से प्रावधान
  • सरोगेसी के लिए भ्रूण की बिक्री पर 10 साल की सजा और अधिकतम 10 लाख रुपये का जुर्माना भी देना होगा।

भारत में सरोगेसी की स्थिति ?

यूएन की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में करीब 3000 से ज्यादा सरोगेसी के केंद्र हैं। जिनमें महाराष्ट्र और गुजरात में सबसे अधिक सरोगेसी सेंटर पाया गया है। इसकी सबसे बड़ी कारण है, भारत में सरोगेसी में आने वाला कम खर्च। आंकड़े कहते हैं कि इनका कारोबार सालाना लगभग तीन से चार हजार करोड़ रूपए का है।

महिला राज-नेताओं ने बिल पर ऐसे रखी अपनी राय:

विधेयक पर चर्चा के दौरान भाजपा की सांसद रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि देश में सरोगेसी एक तरह का बिजनेस इंडस्ट्री बन गया है। बहुगुणा मानती हैं कि, यह विधेयक महिलाओं को शोषित होने से बचाएगा। वाईएसआर कांग्रेस की सांसद वीवी सत्यवती कहती हैं, कि इस विधेयक में करीबी रिश्तेदारों का जिक्र किया गया है, लेकिन, इसकी परिभाषा नहीं बताई गई है। इसके जवाब में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि करीबी रिश्तेदार को परिभाषित करने पर व्यापक चर्चा की गई है।

लोगों की राय:

वो कहती हैं, कि ‘सरोगेसी को लेकर सरकार की ओर से लिया गया फैसला सही है। क्योंकि, सरोगेट मदर को कई बार परेशान करने की बात भी सामने आती रही है। लेकिन, अब जब सिर्फ अपने दोस्त या परिवार के सदस्यों की मदद से ही सरोगेसी संभव है, तो ऐसी समस्याओं से राहत मिल सकती है। – सीमा सिंह, 40 वर्ष, आईटी प्रोफेशनल

अपने शरीर में किसी दूसरे के बच्चे को जीवन देना ऊपर वाले और विज्ञान दोनों की उपलब्धी है। लेकिन, कुछ लोगों द्वारा इसे भी बिजनेस की तरह इस्तेमाल किया जाने लगा था। सरोगेसी के लिए भारत दुनिया भर में प्रसिद्ध होने लगा था। इसमें भी गलत तरीके से धंधा किया जाने लगा, इसे रोकना और इन पर लगाम लगाना बहुत जरूरी है। सरकार की यह फैसला बहुत ही सराहनीय है। – दीपक सिंह राजपूत, 32 वर्ष, बैंकर

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रिव्यू की तारीख अगस्त 12, 2019 | आखिरी बार संशोधित किया गया अगस्त 12, 2019