प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में बहुत से परिवर्तन होते हैं। अक्सर महिलाओं को इस बारे में जानकारी होती है। प्रेग्नेंसी की शुरुआत में वॉमिटिंग, थकान का एहसास, चक्कर आना आदि समस्याएं शुरू हो जाती हैं। यह बहुत नॉर्मल सी बात है लेकिन कई बार प्रेग्नेंसी के दौरान ऐसी भी समस्याओं का सामना करना पड़ता है जिनके बारे में पहले से जानकारी नहीं होती है। इनमें से एक समस्या है प्रेग्नेंसी में कोलेस्टेसिस (Cholestasis of Pregnancy) की। यह लिवर से संबंधित एक डिसऑर्डर है, जो महिलाओं के हाथ और पैर में खुजली या यह शरीर के विभिन्न हिस्सों में इचिंग का कारण बनता है। प्रेग्नेंसी में कोलेस्टेसिस (Cholestasis of Pregnancy) की समस्या सभी महिलाओं में नहीं पाई जाती है। यह समस्या रेयर होती है और प्रेग्नेंसी के तीसरे ट्राइमेस्टर के दौरान होने की अधिक संभावना होती है। प्रेग्नेंसी में कोलेस्टेसिस का सामना क्यों करना पड़ता है और इसके लक्षण क्या होते हैं, आइए जानते हैं इस आर्टिकल के माध्यम से।
प्रेग्नेंसी में कोलेस्टेसिस (Cholestasis of Pregnancy)
प्रेग्नेंसी में कोलेस्टेसिस (Cholestasis of Pregnancy) डिसऑर्डर होना रेयर होता है। ये डिसऑर्डर लिवर से संबंधित है और लेट प्रेग्नेंसी के दौरान होने की अधिक संभावना रहती है। ज्यादातर महिलाओं में थर्ड ट्राइमेस्टर के दौरान इस कंडीशन के लक्षण नजर आने लगते हैं। कोलेस्टेसिस को इंट्राहेप्टिक कोलेस्टेसिस (intrahepatic cholestasis) के नाम से भी जाना जाता है।प्रेग्नेंसी में कोलेस्टेसिस (Cholestasis of Pregnancy) 1000 में से एक या दो महिलाओं में होने की संभावना अधिक होती है। आइए जानते हैं प्रेग्नेंसी में कोलेस्टेसिस (Cholestasis of Pregnancy) होने पर क्या लक्षण नजर आ सकते हैं।
प्रेग्नेंसी में कोलेस्टेसिस के लक्षण क्या होते हैं?
कोलेस्टेसिस (Cholestasis) के कारण प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को हाथ और पैरों में बहुत खुजली महसूस होती है। साथ ही महिलाओं आंखों और त्वचा का रंग पीला भी दिखने लगता है। कुछ अन्य लक्षण जैसे कि मतली, उल्टी, यूरिन का रंग डार्क होना, शरीर के विभिन्न हिस्सों में खुजली होना, बेबी बंप के अलावा पेट बड़ा दिखना, हथेली और पैरों के तलवों में बेचैनी होना, रात में सोने में समस्या होना आदि इस बीमारी के लक्षण है। अगर प्रेग्नेंसी के दौरान आपके हाथ के तलवों और पैर के तलवों में लालिमा है लेकिन उनमें खुजली नहीं है, तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि ऐसा बढ़े हुए एस्ट्रोजन के कारण होता है। अगर आपको दिए गए उपरोक्त लक्षण नजर आते हैं, तो ऐसे में आपको बिना देरी किए डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
क्यों करना पड़ता है गर्भावस्था में कोलेस्टेसिस का सामना?
इस कंडीशन का सामना क्यों करना पड़ता है इसके लिए आपको कुछ बातों को जरूर समझना होगा। हमारे शरीर में पित्त का निर्माण लिवर के द्वारा होता है, जो कि गॉलब्लैडर में इकट्ठा हो जाता है। फैट को ब्रेक करने का काम पित्त या बाइल करता है और इसे फैटी एसिड्स में बदल देता है। इस प्रकार ये इंटेस्टाइन द्वारा तुरंत अवशोषित हो जाता है। यानी कि हमारे शरीर के लिए बाइल बहुत जरूरी होता है। इस कंडीशन के कारण बाइल का फ्लो धीमा पड़ जाता है, जिसके कारण बाइल एसिड लिवर में बनने लगता है। धीरे-धीरे यह ब्लड स्ट्रीम में भी फैल जाता है, जिसके कारण शरीर में खुजली की समस्या बढ़ जाती है। इसके साथ ही प्रेग्नेंसी में कोलेस्टेसिस (Cholestasis of Pregnancy) होने के कुछ और कारण जैसे कि प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर में एस्ट्रोजन की मात्रा बढ़ना आदि शामिल हैं। इस कारण से बाइल में कोलेस्ट्रॉल का लेवल बढ़ जाता है और साथ ही गॉलब्लैडर कंसंट्रेशन में कमी आ जाती है।
जिन महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान डायबिटीज की समस्या होती है, उन्हें भी प्रेग्नेंसी में कोलेस्टेसिस (Cholestasis of Pregnancy) होने की संभावना बढ़ जाती है। अगर आपके परिवार में किसी महिला को प्रेग्नेंसी के दौरान इस प्रकार की कंडीशन का सामना करना पड़ा है, तो आपको तुरंत इस बारे में डॉक्टर को जानकारी देनी चाहिए। गॉल ब्लैडर में स्टोन जमा हो जाने के कारण भी महिलाओं में कोलेस्टेसिस का खतरा बढ़ जाता है।
गर्भावस्था में कोलेस्टेसिस को कैसे किया जाता है डायग्नोज?
अगर आप डॉक्टर को प्रेग्नेंसी के दौरान हाथ और पैरों के तलवों में खुजली की समस्या के बारे में बताते हैं, तो डॉक्टर को शारीरिक परीक्षण करने के साथ ही अन्य परीक्षण करवाने की सलाह भी दे सकते हैं। इस कंडीशन को डायग्नोज करने के लिए डॉक्टर ब्लड टेस्ट (Blood test) की सलाह दे सकते हैं। इस टेस्ट को फ्रक्शनेटेड बाइल एसिड टेस्ट (fractionated bile acid test) भी कहा जाता है। लेकिन कई मामलों में लिवर फंक्शन टेस्ट भी किया जा सकता है। यह जरूरी है कि आपको बीमारी के लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर को बताना चाहिए। जितना जल्दी आप डॉक्टर से संपर्क करते हैं, उतनी ही जल्दी बीमारी की जानकारी मिल जाती है और बीमारी का ट्रीटमेंट शुरू कर दिया जाता है।
गर्भावस्था में कोलेस्टेसिस का ट्रीटमेंट (Treatment of cholestasis in pregnancy)
प्रेग्नेंसी के दौरान कोलेस्टेसिस (Cholestasis of Pregnancy) को रोकना संभव नहीं है। अगर आपको यह कंडीशन हो जाती है, तो ऐसे में डॉक्टर एंटी-इचिंग मेडिकेशन, लोशन, कॉर्टिकोस्टेरॉइड आदि मेडिसिन लिख सकते हैं। साथ ही डॉक्टर समय-समय पर बच्चे की हेल्थ की जांच भी करते रहते हैं। इसके लिए नॉन स्ट्रेस टेस्टिंग ( nonstress testing), फीटल बायोफिजिकल प्रोफाइल (fetal biophysical profile) आदि टेस्ट किए जाते हैं। इस कंडीशन के होने पर आपको डॉक्टर की देखरेख में रहना चाहिए। प्रेग्नेंसी के दौरान डॉक्टक बाइल को कम करने की दवा भी दे सकते हैं। अगर सही समय पर ट्रीटमेंट लिया जाए, तो होने वाले बच्चे और मां को किसी भी प्रकार की समस्या नहीं होती है। समय पर ट्रीटमेंट न लेने पर बच्चे का वजन कम हो सकता है या फिर फेफड़ों के विकास में समस्या भी आ सकती है। आपको डॉक्टर से इस संबंध में अधिक जानकारी लेनी चाहिए।
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ऐसे मामलों में जब मेटरनल बाइल एसिड अधिक होता हैं, कोलेस्टेसिस के कारण बच्चे के जन्म के समय कम वजन होना, अपगार स्कोर थोड़ा कम हो जाना, फेफड़े की अपरिपक्वता और समय से पहले बच्चे के जन्म का जोखिम को बढ़ सकता है। इसी कारण से इस कंडीशन का समय पर निदान और ट्रीटमेंट बहुत महत्वपूर्ण होता है।
इस आर्टिकल में हमने आपको प्रेग्नेंसी में कोलेस्टेसिस (Cholestasis of Pregnancy) से संबंधित जानकारी दी है। उम्मीद है आपको हैलो हेल्थ की ओर से दी हुई जानकारियां पसंद आई होंगी। अगर आपको इस संबंध में अधिक जानकारी चाहिए, तो हमसे जरूर पूछें। हम आपके सवालों के जवाब मेडिकल एक्स्पर्ट्स द्वारा दिलाने की कोशिश करेंगे।