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स्तनपान में कच्चा पपीता खाने के फायदे और सावधानी

स्तनपान में कच्चा पपीता खाने के फायदे और सावधानी

आपने अक्सर देखा होगा जब कोई महिला एक शिशु को जन्म देती है। उसके पश्चात् महिला को ऐसी बहुत सी हिदायत दी जाती है कि “आपको क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए।” स्तनपान के दौरान महिलाएं जिस भी आहार का सेवन करती हैं। वो आहार महिला के स्तन के दूध से होकर गुजरता है। जिसका सीधा प्रभाव स्तनपान कर रहे आपके शिशु पर पड़ता है। इसलिए बिना पूरी जानकारी के स्तनपान में कोई भी आहार लेना स्वस्थ के लिए हानिकारक हो सकता है। यदि बात करें इस दौरान पपीता खाने कि, तो क्या स्तनपान में कच्चा पपीता खाना सुरक्षित है? आइए जानते हैं कि स्तनपान में कच्चा पपीता खाने से आपके शिशु पर क्या प्रभाव पड़ता है।

स्तनपान के दौरान ग्रीन पपीता के फायदे

जब आप स्तनपान करा रहे हों तो ऐसे में पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित आहार लेना बहुत आवश्यक है। रंगीन फलों और सब्जियों के तीन हिस्से आपके शरीर को आवश्यक सभी विटामिन और खनिज प्रदान करते हैं। जब मॉडरेशन में हरा पपीता लिया जाता है, तो इसके निम्नलिखित लाभ हो सकते हैं। जो इस प्रकार से हैं।

गैलेक्टागोग

ग्रीन पपीता के परिणामस्वरूप ऑक्सीटोसिन के उत्पादन में वृद्धि होती है, जो हार्मोन दूध उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। तो एशियाई देशों में, स्तनपान कराने वाली महिलाओं के बीच कच्चा पपीता एक लोकप्रिय गैलेक्टागोग है।

स्वस्थ आंत्र के कार्य को बढ़ावा देता है

पपीते में अधिक मात्रा में फाइबर होता है, जो कब्ज और रक्तस्राव को रोकने में मदद करता है। पपीते का नियमित सेवन पाचन तंत्र के लिए बहुत अच्छी तरह से काम कर सकता है। यह उच्च कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी कम करता है और रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है।

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न्यूट्रिशन डेंस

जब आप स्तनपान में कच्चा पपीता खाते हैं, तो आपके स्तन की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है, क्योंकि यह विटामिन और खनिजों का एक बड़ा स्रोत माना जाता है। पपीते में उच्च मात्रा में विटामिन सी होता है। यह प्रतिरक्षा को बढ़ावा दे सकता है और सर्दी और जुकाम को दूर रख सकता है। विटामिन ए,आपकी आंखों के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। कच्चे पपीते में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, और ये कैंसर और अन्य बड़ी बीमारियों को रोकने में मदद करते हैं। हरे पपीते में पोटेशियम होता है, जो शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। किडनी की कार्यप्रणाली के लिए पोटेशियम बेहद जरूरी है। यह स्वस्थ हृदय को भी बढ़ावा देता है, और आपकी मांसपेशियों पर अच्छी तरह से काम करता है।

दूध उत्पादन बढ़ाता है

पपीते को एक लैक्टोजेनिक प्रभाव के रूप में जाना जाता है, जो स्तनपान महिलाओं में दूध के उत्पादन को बढ़ाने में मदद करता है। हरे पपीते अधिक लैक्टोजेनिक होते हैं, और इसलिए नर्सिंग माताओं को निश्चित रूप से हरे पपीते को शामिल करने वाले विभिन्न व्यंजनों की कोशिश करनी चाहिए।

कोलेस्ट्रॉल के लिए बढ़िया

यह कम-कैलोरी, कोलेस्ट्रॉल-मुक्त भोजन है, जिसे आप भोजन के बीच ले सकते हैं। यह आपके शरीर को डिटॉक्स करता है। इसलिए जब आप पपीते का नाश्ता करते हैं तो आपको प्रसव के बाद कुछ अतिरिक्त वजन बढ़ाने की चिंता करने की जरूरत नहीं होती है।

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स्तनपान में कच्चा पपीता अपने आहार में कैसे शामिल करें?

हरा पपीता या तो कच्चा हो सकता है, या करी के रूप में पकाया जा सकता है। यहां कुछ तरीके दिए गए हैं जिनमें आप हरे पपीते को अपने भोजन में शामिल कर सकते हैं-

सलाद

स्तनपान में कच्चा पपीता खाने के लिए इसको कद्दूकस करें, इसमें थोड़ा सा काली मिर्च डालें, नमक और नींबू मिलाएं। आप अपने स्वाद के आधार पर अपनी पसंद की कुछ और भी चीजें इसमें डाल सकते हैं, जैसे कि तुलसी आदि।

हरा पपीता करी

आप हरे पपीते को आवश्यक मसालों के साथ पका सकते हैं, या इसे भूनकर इसे अपने आहार का हिस्सा बना सकते हैं।

दही के साथ कच्चा पपीता

आप कच्चे पपीते के साथ कुछ ही समय में एक स्वादिष्ट रायता तैयार कर सकते हैं। अगर आपको पसंद है तो आप इसमें गाजर भी शामिल कर सकते हैं। बस एक चुटकी भर चाट मसाला, और आपका स्वादिष्ट रायता तैयार है। यह बहुत स्वादिष्ट होता है। इसे आप साधारण खाने के साथ भी प्रयोग कर सकते हैं।

पराठे

हां, जैसे आप मूली या किसी अन्य सब्जी का इस्तेमाल करते हैं, वैसे ही पराठे बनाने के लिए भी कच्चे पपीते का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसको बनाने के लिए कच्चा पपीता आप कद्दूकस से घिस लें या छोटा-छोटा काट लें। अब बस आटा मिलाते समय इसको डालें, और पराठे को बेलकर गर्म तवे पर सेक लें।

ग्रीन पपीता स्मूदी

आप पपीता, गाजर और कुछ दही के साथ एक स्वस्थ नाश्ते की स्मूदी तैयार कर सकते हैं। कच्चे पपीते को आलू, सरसों के तेल, जीरा और बैंगन द्वारा अच्छी तरह से पूरक किया जाता है।

और पढ़ें : बेबी को ब्रेस्टफीडिंग कराते समय न करें ये गलतियां, इन बातों का ध्यान रखें

स्तनपान के दौरान पपीते से कब बचें?

वैसे तो हरा पपीता एक स्तनपान कराने वाली मां के लिए फायदेमंद है। लेकिन ऐसे कई मामले हैं, जहां मां को इससे एलर्जी हो सकती है। पपीता में मौजूद एक एंजाइम लेटेक्स के समान है, और यह एक एलर्जी की प्रतिक्रिया का कारण बनता है। यहां एलर्जी के कुछ लक्षण हैं।जो इस प्रकार से हो सकते हैं।

  • पपीता खाने पर मुंह में और होठों पर जलन
  • उल्टी
  • दस्त
  • त्वचा पर चकत्ते, जिनमें खुजली हो सकती है
  • सांस लेने में कठिनाई
  • एक अत्यधिक प्रतिक्रिया भी बेहोशी हो सकती है या सांस रोक सकती है

नोट: यदि आप इनमें से किसी भी लक्षण का अनुभव करते हैं, तो भी उन्हें तत्काल ही अपने डॉक्टर को दिखाएं। जब आप स्तनपान करवाते हैं, तो पपीता खाने से पहले अपने डॉक्टर से जांच कराना चाहिए। ब्रेस्टमिल्क में आपके जीवन के पहले कुछ महीनों में आपके सभी पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। इसके लिए हरा पपीता उपयोग करना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। लेकिन इसका उपयोग करने से पहले ऊपर दिए गए सावधानी पर एक नजर जरूरी डालें।

उपर दी गई जानकारी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। इसलिए किसी भी दवा या सप्लिमेंट का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर करें। हैलो स्वास्थ्य किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है।

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सूत्र

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shalu द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 30/09/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड