बवासीर या पाइल्स का क्या है आयुर्वेदिक इलाज

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट सितम्बर 2, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें
अब शेयर करें

परिचय

बवासीर शब्द के उच्चारण से ही दर्द का एहसास होने लगता है। वैसे तो ये बीमारी भी हाई ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर जैसी आम बीमारी हो गई है। असल में आजकल लोगों का लाइफस्टाइल इतना अंसतुलित और डिस्टर्ब हो गया है कि न खाना-पीना शुद्ध और संतुलित करते हैं और न ही सोने-उठने का समय ठीक है। नतीजा यह होता है कि शरीर की पाचन क्रिया बुरी तरह से प्रभावित होती है और इसके कारण एसिडिटी, बदहजमी, कब्ज आदि की समस्या शुरू हो जाती है। यही कब्ज की समस्या बाद में पाइल्स की समस्या की शुरुआत का कारण बन जाती है। असल में लगातार और लंबे समय तक कब्ज की समस्या रहने के कारण एनस के अंदर और बाहर और रेक्टम के नीचे सूजन आ जाती है। मल के सख्त होने के कारण एनस के अंदर और बाहर मस्से जैसा बन जाता है। ऐसे भी इस बात को समझ सकते हैं कि बवासीर होने पर एनस और रेक्टम के अंदर और बाहर जो नसें होती वह सूज जाती हैं। जिसके कारण पहले तो दर्द होता लेकिन इलाज सही तरह से न होने पर जब मस्सा बन जाता है, तब मल त्यागने के दौरान मस्से में घर्षण होने पर वह फट जाता है और खून निकलने लगता है। यह अवस्था नजरअंदाज करने पर बवासीर, खूनी बवासीर (Hemorrhoid) में तब्दील हो सकती है। आज हम इस आर्टिकल में पाइल्स का आयुर्वेदिक इलाज जानेंगे।

अब तक तो आप समझ ही चुके होंगे कि, हम बवासीर यानी पाइल्स के बारे में बात कर रहे हैं। वैसे तो बवासीर आनुवांशिक कारणों से भी होता है। अगर परिवार में किसी को पाइल्स की समस्या है या रह चुकी है तो वंशज को बवासीर होने की पूरी संभावना रहती है। यह समस्या बहुत दिनों तक रह जाने पर पाइल्स फिस्टुला का रूप धारण कर सकती है।

बवासीर को आम तौर पर दो भागों में बांटा जाता है- 

1- बादी बवासीर- इसके प्रथम अवस्था में एसिडिटी, अपच और कब्ज की समस्या होती है। रेक्टम और एनस की नसें सूजने लगती है। जिसमें जलन और खुजली जैसा भी महसूस होता है। इस अवस्था में दर्द आदि उतना नहीं होता है। लेकिन इस अवस्था को नजरअंदाज करने पर मलत्याग करने के समय या बाद में भी दर्द होना शुरू हो जाता है। दर्द के कारण व्यक्ति बैठ तक नहीं पाता है। 

2- खूनी बवासीर- इस अवस्था में एनस के अंदर और बाहर जो मस्से बन जाते हैं। मल सख्त होने के कारण मलत्याग करने के समय उसमें घर्षण होता है और उससे खून बूंद-बूंद में टपकने लगता है और बाद में पिचकारी के रूप में खून निकलता है। इसलिए बवासीर का इलाज प्रथम अवस्था में करना ही बेहतर होता है। 

अब हम आयुर्वेद के बारे में बात करते हैं, क्योंकि इस लेख का विषय है बवासीर या पाइल्स का आयुर्वेदिक इलाज। सदियों से चला आ रही पारंपरिक औषधीय उपचार पद्धति है आयुर्वेद। आजकल लगभग पूरी दुनिया आयुर्वेद की उपचार पद्धति को मानने लगी है। आयुर्वेद का उपचार मूलत: शरीर के तीन दोषों वात (वायु), पित्त (अग्नि) और कफ (जल) के संतुलन और असंतुलन पर निर्भर करता है। कहने का मतलब यह है कि आयुर्वेद की उपचार पद्धति का मूल लक्ष्य शरीर के इन तीनों दोषों को संतुलित करना होता है। क्योंकि इनके असंतुलन के कारण ही नाना प्रकार के रोगों का उद्भव होता है। पाइल्स को आयुर्वेद में अर्श कहते हैं। 

आयुर्वेद में दोषों के आधार पर बवासीर पांच तरह के होते हैं-

1-पित्त अर्श-  जिन लोगों को पित्त दोष होता है उनको खूनी बवासीर होने की संभावना होती है। साथ ही बुखार और दस्त भी हो सकता है।

2-वात अर्श- जिन लोगों को वात दोष होता है उनको असहनीय दर्द और कब्ज की समस्या होती है।

3- कफजा अर्श- जिन लोगों को कफ दोष होता है उनको बदहजमी की समस्या ज्यादा होती है। बवासीर के कारण जो रक्तस्राव होता है उसका रंग हल्का होता है।

4- रक्त अर्श- खूनी बवासीर

5- सहजा अर्श- आनुवांशिक कारणों से होने वाली बवासीर

और पढ़ें- दस्त का आयुर्वेदिक इलाज क्या है और किन बातों का रखें ख्याल?

लक्षण

बवासीर के आम लक्षण कुछ इस तरह के होते हैं-

  • एनस के आस-पास खुजली होना
  • मलत्याग के समय दर्द होना
  • मलत्याग करने के दौरान और बाद में ब्लीडिंग होना
  • एनस के चारों तरफ जलन और दर्द का अनुभव होना
  • मल का निष्कासन हो जाना
  • सेकेंडरी एनीमिया

और पढ़ें- घुटनों में दर्द का आयुर्वेदिक इलाज कैसे किया जाता है?

हैलो स्वास्थ्य का न्यूजलेटर प्राप्त करें

मधुमेह, हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, कैंसर और भी बहुत कुछ...
सब्सक्राइब' पर क्लिक करके मैं सभी नियमों व शर्तों तथा गोपनीयता नीति को स्वीकार करता/करती हूं। मैं हैलो स्वास्थ्य से भविष्य में मिलने वाले ईमेल को भी स्वीकार करता/करती हूं और जानता/जानती हूं कि मैं हैलो स्वास्थ्य के सब्सक्रिप्शन को किसी भी समय बंद कर सकता/सकती हूं।

कारण

आयुर्वेद के अनुसार बवासीर होने के ये कारण हो सकते हैं-

  • लंबे समय तक बैठे रहने के कारण रक्तस्राव हो सकता है
  • कब्ज के कारण लंबे समय तक मलत्याग के लिए बैठे रहने के कारण बवासीर हो सकता है
  • हाई ब्लड प्रेशर बवासीर का कारण हो सकता है
  • वजन ज्यादा होने के कारण रेक्टम पर दबाव पड़ने के कारण बवासीर हो सकता है
  • धूम्रपान करने से बवासीर की समस्या हो सकती है। रेक्टम के अंदर के नसों से ब्लीडिंग होने की संभावना हो सकती है।

और पढ़ें- लिवर रोग का आयुर्वेदिक इलाज क्या है? जानिए दवा और प्रभाव

इलाज

आयुर्वेद के अनुसार बवासीर का उपचार चार तरह से किया जा सकता है-

पाइल्स का आयुर्वेदिक इलाज- 1-

मेडिकल मैनेजमेंट (भेषज चिकित्सा)- बवासीर के प्रथम चरण में इस चिकित्सा का सहारा लिया जाता है। सबसे पहले मरीज में कौन-से दोष की प्रबलता है, इस बात की जांच की जाती है और फिर उस आधार पर उपचार किया जाता है।

पाइल्स का आयुर्वेदिक इलाज- 2-

ऑपरेटिव मैनेजमेंट (क्षार सूत्र)- इस तरह के इलाज में बवासीर के मस्से पर औषधी वाला धागा बांधा जाता है। धीरे-धीरे मस्सा सिकुड़ कर गिर जाता है। यह मैनेजमेंट नसों को बढ़ने से रोकता है।

पाइल्स का आयुर्वेदिक इलाज- 3-

आयुर्वेदिक क्षार का प्रयोग (आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी)- इस मैनेजमेंट में नॉन सर्जिकल प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाता है। हर्ब्स को मिलाकर औषधी बनाई जाती है और उसको मस्से पर लगाया जाता है। लगाने के लगभग 24 घंटे के बाद मस्सा फूट जाता है और सूखने लगता है। 

पाइल्स का आयुर्वेदिक इलाज- 4-

अग्निकर्मा– वातज और कफज अर्श का  इलाज अग्निकर्मा द्वारा किया जाता है। 

नोट-ऊपर दी गई जानकारी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। इसलिए किसी भी घरेलू उपचार, दवा या सप्लिमेंट का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर करें।

पाइल्स के अन्य घरेलू उपाय-

ऑलिव ऑयल या जैतून का तेल- जैतून के तेल का इस्तेमाल बवासीर के कारण जो सूजन होती है, उससे राहत दिलाने में मदद करता है। जैतून के तेल को मस्सों पर लगाने से सूजन कम होती है। 

नारियल का तेल- जैतून की तरह ही नारियल के तेल को भी मस्सों पर लगाने से खुजली, जलन और सूजन कम करने में मदद मिलती है। 

और पढ़ें-अपेंडिक्स का आयुर्वेदिक इलाज कैसे किया जाता है?

बर्फ का इस्तेमाल-  बवासीर के मस्से के ऊपर कम से कम 10 मिनट तक बर्फ से हल्का मसाज करने से दर्द, सूजन और जलन से जल्दी आराम मिलता है।

एलोवेरा का रस- एलोवेरा के रस में मौजूद एंटी-ऑक्सिडेंट और एंटी-इंफ्लमेटरी गुणों के कारण बवासीर के कष्ट से राहत दिलाने में बहुत मदद मिलती है। यह जलन और खुजली से आराम दिलाता है।

सेब का सिरका- सेब का सिरका रूई के फाहे में लगाकर मस्सों पर लगाने से बवासीर के कारण होने वाले दर्द और जलन से राहत पाने में सहायता मिलती है।

हरीतकी- यह एक ऐसा हर्ब है जिसका इस्तेमाल खूनी और बादी दोनों बवासीर में फायदेमंद होता है। हरीतकी को गर्म पानी में डालकर उसके भाप से मस्सों पर सेंक करने से दर्द में आराम मिलता है। यहां तक कि, हरीतकी के सेवन से कब्ज से भी राहत मिलती है, जिससे मल नरम होता है और मलत्याग करने में आसानी होती है और बवासीर के कष्ट से कुछ हद तक आराम मिलता है।

नोट-ऊपर दी गई जानकारी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। इसलिए किसी भी घरेलू उपचार, दवा या सप्लिमेंट का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर करें।

और पढ़ें- बुखार का आयुर्वेदिक इलाज क्या है?

जीवनशैली में बदलाव

बवासीर के लिए जीवनशैली में जरूरी बदलावों में सबसे पहले इस बात का ध्यान आता है कि क्या खाना चाहिए क्या नहीं-

क्या खाना चाहिए-

-पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेने चाहिए।

-डायट में फाइबर की मात्रा बढ़ानी चाहिए

-वॉल्किंग जैसी एक्सरसाइज रोजाना करनी चाहिए।

-वजन को नियंत्रित रखना चाहिए।

-भोजन को चबा कर खाना चाहिए।

-छाछ, प्याज, पत्तेदार सब्जियां, भिंडी, पालक, गाजर, मूली, रतालू  और चने को डायट में शामिल करनी चाहिए।

-जल्दी से हजम होने वाले खाद्द पदार्थ लेने चाहिए।-

-मसालेदार और तैलीय खाद्य पदार्थों से परहेज करनी चाहिए।

-दिन में कम से कम 10 गिलास पानी पीना चाहिए।

-गेहूं के आटे से चोकर को नहीं निकालना चाहिए।

-गर्म पानी से नहाना चाहिए।

चलिए पाइल्स को लेकर एक क्विज खेलते हैं- Quiz: कहीं आपको बवासीर (पाइल्स) तो नही? पाइल्स के बारे में जानने के लिए खेलें क्विज

क्या नहीं खाना चाहिए-

-बवासीर होने पर कठोर फर्श पर न बैठे।

-शौचालय में लंबे समय तक न बैठे। इससे एनस पर ज्यादा दबाव पड़ता है।

-कॉफी और एल्कोहॉल से दूरी बनाएं

-भारी सामान न उठाएं। 

– रोजाना लैक्सेटिव लेने की आदत न डालें।

– कोई भी दवा बिना डॉक्टर के सलाह के न लें।

ऊपर दी गई जानकारी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। इसलिए किसी भी घरेलू उपचार, दवा या सप्लिमेंट का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर करें।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

क्या यह आर्टिकल आपके लिए फायदेमंद था?
happy unhappy
सूत्र

शायद आपको यह भी अच्छा लगे

दांत दर्द का आयुर्वेदिक इलाज क्या है? जानें कौन सी जड़ी-बूटी है असरदार

दांत दर्द का आयुर्वेदिक इलाज इन हिंदी, दांत दर्द का आयुर्वेदिक इलाज कैसे करें, टूथएक का इलाज कैसे करें, Ayurvedic Medicine and Treatment for tooth pain

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pooja Daphal
के द्वारा लिखा गया Shayali Rekha
ओरल हेल्थ, स्वस्थ जीवन जून 26, 2020 . 6 मिनट में पढ़ें

पथरी का आयुर्वेदिक इलाज क्या है? जानें कौन सी जड़ी-बूटी होगी असरदार

पथरी का आयुर्वेदिक इलाज इन हिंदी, किडनी की पथरी का आयुर्वेदिक इलाज कैसे करें, किडनी स्टोन का इलाज कैसे करें, Ayurvedic Medicine and Treatment for Stone

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pooja Daphal
के द्वारा लिखा गया Shayali Rekha

एसिडिटी का आयुर्वेदिक इलाज क्या है? जानें क्या करें क्या नहीं

एसिडिटी का आयुर्वेदिक इलाज क्या है, एसिडिटी का आयुर्वेदिक इलाज इन हिंदी, पेट में जलन होने का कारण क्या है, Ayurvedic Medicine and Treatment for Acidity.

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pooja Daphal
के द्वारा लिखा गया Shayali Rekha
कब्ज, पेट और गैस की समस्या जून 19, 2020 . 6 मिनट में पढ़ें

चिकनपॉक्स का आयुर्वेदिक इलाज क्या है? जानें क्या करें और क्या नहीं

चिकनपॉक्स का आयुर्वेदिक इलाज क्या है, चिकनपॉक्स का आयुर्वेदिक इलाज इन हिंदी, चेचक होने का कारण क्या है, Ayurvedic Medicine and Treatment for chickenpox

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pooja Daphal
के द्वारा लिखा गया Shayali Rekha
हेल्थ टिप्स, स्वस्थ जीवन जून 18, 2020 . 6 मिनट में पढ़ें

Recommended for you

आयुर्वेदिक डिटॉक्स क्विज

QUIZ : आयुर्वेदिक डिटॉक्स क्विज खेल कर बढ़ाएं अपना ज्ञान

के द्वारा लिखा गया Shayali Rekha
प्रकाशित हुआ अगस्त 25, 2020 . 1 मिनट में पढ़ें
कैल्शियम डोबेसिलेट

Calcium dobesilate : कैल्शियम डोबेसिलेट क्या है? जानिए इसके उपयोग और साइड इफेक्ट्स

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Shikha Patel
प्रकाशित हुआ अगस्त 7, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
स्मूथ ऑइंटमेंट

Smuth Ointment : स्मूथ ऑइंटमेंट क्या है? जानिए इसके उपयोग और साइड इफेक्ट्स

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil
के द्वारा लिखा गया Shikha Patel
प्रकाशित हुआ जुलाई 23, 2020 . 6 मिनट में पढ़ें
हर्निया का आयुर्वेदिक इलाज-Hernia ayurvedic treatment

हर्निया का आयुर्वेदिक इलाज क्या है? जानिए दवा और प्रभाव

चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pooja Daphal
के द्वारा लिखा गया Nidhi Sinha
प्रकाशित हुआ जून 30, 2020 . 6 मिनट में पढ़ें