शराब ना पीने से भी हो सकती है नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज

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Update Date मई 31, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज एक लाइफस्टाइल प्रॉब्लम है। बदलती लाइफस्टाइल और आदतों की वजह से आजकल लोगों को अलग-अलग बीमारियां हो जाती हैं। इनमें से एक है नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज। लाइफस्टाइल में सही बदलाव करके आप इससे खुद को बचा सकते है।

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सवाल

नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज क्या हैं और इसका कारण क्या है?

जवाब

लिवर हमारे शरीर का एक अहम हिस्सा है जो शरीर में मेटाबॉलिज्म को मेनटेन करता है। नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज में लिवर में फैट जमा हो जाता है जिसका इलाज अगर समय पर नहीं कराया जाए तो पर्मानेंट लिवर डैमेज हो सकता है जिसे हम लिवर सिरॉसिस कहते हैं जो आगे जाकर कैंसर का कारण बन सकता है।

ये 4 स्टेज में होता है। सिंपल फैट डिपॉजिशन (Steatosis), नॉन एल्कॉहलिक स्टेटोहेपेटाइटिस (Non-Alcoholic Steatohepatitis, NASH), लिवर सेल का डैमेज हो जाना (Fibrosis), सबसे खतरनाक है लिवर सेरॉसिस (Liver Cirrhosis) जिससे लिवर डैमेज हो जाता है।

ये आजकल बहुत सामान्य है और आज कल लाइफस्टाइल बदलाव की वजह से ज्यादा लोगों में होता है। इसका डायग्नोसिस नहीं हो पाता और ज्यादातर दूसरे टेस्ट के द्वारा पता चलता है। इसके कोई शुरुआती लक्षण नहीं हैं और इसके लक्षण आपको एडवांस स्टेज में नजर आते हैं।

पेट के ऊपरी दाएं भाग में दर्द या अधिक थकान, वजन घटना या कमजोरी होना इसके लक्षण हैं। वहीं सिरोसिस के लक्षण त्वचा का पीला पड़ना और आंखों का सफेद पड़ना, त्वचा पर खुजली होना, पैर, घुटनों और पेट में सूजन

इस बीमारी की वजह को हमें अवॉयड करना चाहिए। जैसे कि एल्कोहॉल, स्मोकिंग। जो लोग एल्कोहॉल नहीं पीते उन्हें भी यह परेशानी हो सकती है। यह वजन बढ़ने, कोलेस्ट्रॉल बढ़ने, हाईपर टेंशन, डायबिटिज, पीसीओएस आदि के कारण भी हो सकता है। जंक फूड छोड़ने से ये परेशानी कम हो सकती है। ये सभी उम्र के लोगों में हो सकता है।

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नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज के लक्षण

वैसे तो नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज के लक्षण सबमें अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन ज्यादातर लोगों में ये सामान्य लक्षण देखने को मिलते हैं

नॉन एल्कोहॉलिक स्टेटोहेपेटाइटिस (NASH,nonalcoholic steatohepatitis ) के लक्षण इस तरह से हैंः

  • पेट में फ्लूयड जमा होना  (Ascites)
  • त्वचा की सतह के ठीक नीचे बढ़े हुए ब्लड वैसल्स
  • एनलार्ज स्प्लीन
  • लाल हथेलियां
  • त्वचा और आंखों का पीला पड़ना (पीलिया)

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नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज के कारण

नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज के कारण विशेषज्ञों को ठीक से पता नहीं है कि क्योंकि कुछ लोगों नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज लिवर में फैट जमा होने की वजह से होता है तो कुछ लोगों में इसकी वजह कुछ और भी हो सकती है। इसी तरह इस बात की कम सूचना है कि कुछ फैटी लिवर में सूजन क्यों पैदा होती है जो आगे चलकर सिरोसिस की वजह बनती है।

NAFLD (नॉन एल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज) और NASH (नॉन एल्कोहॉलिक स्टेटोहेपेटाइटिस) दोनों इस तरह से आपस में जुड़े हुए हैं:

  • अधिक वजन या मोटापा
  • इंसुलिन रेजिस्टेंस जिसमें आपकी शरीर की सेल्स हॉर्मोन इंसुलिन के जवाब में शुगर नहीं बनाती
  • हाई ब्लड शुगर (हाइपरग्लाइसेमिया जो कि प्रीडायबिटीज या टाइप 2 डायबिटीज का लक्षण हैं)
  • खून में फैट का उच्च स्तर यानि की बल्ड में ट्राइग्लिसराइड्स

ये दोनों स्वास्थ्य समस्याएं लिवर में फैट के जमने को बढ़ावा देने के लिए दिखाई देती हैं। कुछ लोगों के लिए यह एक्सट्रा फैट लिवर सैल के लिए टॉक्सिन का काम करते हैं जिससे लिवर की सूजन और नॉन एल्कोहॉलिक स्टेटोहेपेटाइटिस (NASH) होता है जिससे लिवर में स्कार हो सकता है।

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नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज के रिस्क

यह बीमारियों और स्थितियों नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज के खतरे को बढ़ा सकता हैः

  • हाई कोलेस्ट्रॉल
  • खून में ट्राइग्लिसराइड्स का उच्च स्तर
  • मैटाबॉलिक सिंड्रोम
  • मोटापा, खासकर जब सारा फैट पेट पर हो
  • पीसीओएस (Polycystic Ovary Syndrome)
  • स्लीप एप्निया
  • मधुमेह टाईप 2
  • अंडरएक्टिव थायराइड (हाइपोथायरायडिज्म)
  • अंडरएक्टिव पिट्यूटरी ग्लैंड (हाइपोपिटिटारिस्म)

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नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज की वजह से परेशानी

नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज और एनएएसएच की मुख्य परेशानी सिरोसिस है जो लिवर में होने वाला निशान है। सिरोसिस लिवर में इंजरी की वजह से होता है जिसे नॉन एल्कोहॉलिक स्टेटोहेपेटाइटिस भी कहा जाता है। जैसे ही लिवर सूजन को रोकने की कोशिश करता है यह फाइब्रोसिस की वजह बनता है। जैसे जैसे सूजन बढ़ता है फाइब्रोसिस अधिक से अधिक लिवर में फैलते जाता है।

अगर इस प्रक्रिया को रोका नहीं जाता है तो सिरोसिस आगे चलकर ये परेशानियां खड़ी कर सकता हैः

  • पेट में तरल पदार्थ का निर्माण (Ascites)
  • आपके एसोफेगस (एसोफैगल संस्करण) की नसों में सूजन जो टूट सकता है और इनमें ब्लीडिंग हो सकती है
  • भ्रम, नींद आना और बोलने में परेशानी (Hepatic Encephalopathy)
  • लिवर कैंसर
  • आखिरी स्टेज में लिवर फेल होना जिसका अर्थ है कि लिवर ने काम करना बंद कर दिया है

5% और 12% लोगों जिनको नॉन एल्कोहॉलिक स्टेटोहेपेटाइटिस हैं उनको आगे चलकर सिरोसिस की परेशानी हो सकती है।

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नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज के बचाव

नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज के जोखिम को कम करने के लिए:

  • स्वस्थ आहार चुनेंः एक स्वस्थ प्लांट बेस्ड आहार चुनें जो फलों, सब्जियों, साबुत अनाज और फैट से बना हो। ऐसी सब्जियों और फलों को चुनें जिसमें गुड फैट अधिक मात्रा में हो। यह खराब कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड के स्तर को कम करने में मदद कर सकता है।
  • स्वस्थ वजन बनाए रखेंः अगर आप अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त हैं, तो आप हर रोज खाने की कैलोरी की संख्या कम करें और अधिक एक्सरसाइज करें और धीरे-धीरे वजन कम करें। अगर आपका वजन आपके हाइट के अनुसार ठीक है तो स्वस्थ आहार को चुनें और एक्सरसाइज करके इसे बनाए रखने के लिए काम करें।
  • एक्सरसाइज करें: सप्ताह के अधिकांश दिनों में एक्सरसाइज करें। अगर आप नियमित रूप से व्यायाम नहीं कर रहे हैं, तो पहले अपने डॉक्टर से बात करें।
  • शराब छोड़ें: अपनी शराब की खपत को सीमित करें या न पिएं। अगर आप रूटीन में शराब पीते हैं तो इसे अवॉयड करें।

नॉन एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज के लिए निर्धारित अनुसार दवाएं लें। अगर आप डायबिटिक या इंसुलिन प्रतिरोधी हैं, तो आपका डॉक्टर स्टैटिन को ट्राइग्लिसराइड के स्तर या मधुमेह विरोधी दवाओं को कम करने के लिए लिख सकता है।

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