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क्या आप जानते हैं वजन घटाने वाली आयुर्वेद में बताई इन 4 चीजों के बारे में?

के द्वारा मेडिकली रिव्यूड Dr. Anand Dwivedi · आयुर्वेदा · Kapiva Academy of Ayurveda


Manjari Khare द्वारा लिखित · अपडेटेड 23/11/2021

क्या आप जानते हैं वजन घटाने वाली आयुर्वेद में बताई इन 4 चीजों के बारे में?

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अनहेल्दी लाइफस्टाइल के चलते बढ़ता वजन आम परेशानी बन चुकी है। जिसको लेकर अक्सर लोग परेशान रहते हैं और कई तरह के उपाय अपनाते हैं, लेकिन अगर बहुत सारे उपायों को छोड़कर सिर्फ आयुर्वेद का दामन थाम लिया जाए तो वजन कम करने में सफलता मिल सकती है। आयुर्वेद में जड़ी- बूटियों और खाद्य पदार्थों का ऐसा अनमोल खजाना छुपा है जो वजन कम करने में मदद करने के साथ ही आपको फिट रख सकता है। आयुर्वेदिक हर्ब्स या रेमेडीज की सबसे अच्छी बात ये है कि इनके साइड इफेक्ट्स न के बराबर हैं। इस आर्टिकल में हम आयुर्वेद के खजाने में से ऐसे ही कुछ चीजों की जानकारी दे रहे हैं जो वजन कम करने में आपकी मदद करेंगी। 

आयुर्वेद के अनुसार वेट लॉस के तरीके और वजन कम करने के लिए आयुर्वेद का महत्व अगर खुद आयुर्वेदिक एक्सपर्ट बताएंगे तो इससे अच्छा क्या होगा। इस बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए हमने कपिवा आयुर्वेद एकेडमी के आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉ आनंद द्विवेदी से संपर्क किया और उन खाद्य पदार्थों और जड़ी-बूटियों के बारे में जानकारी प्राप्त की जो वजन घटाने में सहायता कर सकती हैं।

 जब हमने उनसे पूछा कि कौन सी आयुर्वेदिक या हर्बल रेमेडीज कम करने में मददगार हैं? तो उन्होंने इस बारे में विस्तार से बताया। डॉ द्विवेदी कहते हैं कि ‘’आयुर्वेद के अनुसार वेट लॉस के लिए ऐसे फूड्स रिकमंड किए जाते हैं जिनमें दो प्रकार के गुण हों। जिसमें पहला गुण गुरू (पचने में भारी) और दूसरा अतरपना (पोष्टिक ना हो) है। ये दोनों गुण भूख को शांत करते हैं, वात असंतुलन को कम करते हैं और वजन को बढ़ने से रोकते हैं। इसके उदाहरण जौ, शहद और चिया सीड्स हैं। 

अगर बात आयुर्वेद के अनुसार वजन कम करने वाली जड़ी बूटियों की हो तो करेला, विदंगा, त्रिफला, काली मिर्च, पिप्पली,अदरक, गुग्गुलु, शिलाजीत, गार्शिनिया, एलोवेरा, गिलोय, दालचीनी आदि की मदद ली सकती है। ये जड़ी-बूटियां फैट के मेटाबॉलिज्म को स्टिम्यूलेट करेंगी और वजन कम करने में मदद करेंगी।

 इसके साथ आयुर्वेद के अनुसार वजन कम करने के लिए सुबह उठकर सबसे पहले एक कप पानी में शहद मिलाकर पिएं। मसालों के साथ फर्मेंटेड छाछ का सेवन फैट टिशूज के ट्रांसफॉर्मेशन में कैटालिस्ट की तरह काम करता है। इसके साथ ही जौ का अधिक सेवन करें। यह पाचन शक्ति का ख्याल रखता है, लेकिन कैलोरी में योगदान नहीं करता। जब मसालों की बात आती है तो ऐसे मसालों के इस्तेमाल की सलाह दी जाती है जिसमें कटु और तिकटा रसों का समावेश हो। यानी वे स्वाद में तीखे या कसैले हों। रोजाना नियमित व्यायाम, पहले किए गए भोजन के पूरी तरह से पचने के बाद ही भोजन करना और आहार में जौ और गेहूं का नियमित सेवन मोटापे को कम करने के निश्चित उपाय हैं।’’

अब तो आप समझ ही गए होंगे कि जिन जड़ी बूटियों का उपयोग दादी नानी करती थीं या प्राचीन समय में ऋषि मुनी करते थे वे आज भी उतनी ही कारगर हैं। यानी आयुर्वेद के अनुसार वेट लॉस संभव है। चलिए अब जान लेते हैं उन फूड्स के बारे में जिन्हें अगर आप डायट में शामिल कर लेते हैं, तो वे वजन कम करने में आपकी मदद कर सकते हैं। 

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हरी पत्तेदार सब्जियां (पालक, केल) 

आयुर्वेद के अनुसार वेट लॉस

सब्जियां पोषण से भरपूर होती हैं और साथ ही साथ इनमें फायबर भी होता है। जिससे आपका मेटाबॉलिज्म अच्छे से काम करता है। पालक, केल, लैटस जैसी पत्तेदार सब्जियां फैट को बर्न करने में खासी मददगार हैं। इन सब्जियों में कैलोरी और कार्ब्स कम होते हैं और फायबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है। जिससे भेट भरे होना एहसास होता है और भूख कम लगती है। नैशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी (NCBI) में छपी के स्टडी के अनुसार लो एनर्जी डेंसिटी वाले मील्स को अपनी डायट में एड करने से लोग ओवरऑल कम कैलोरी को कंज्यूम करते हैं।

 इसके साथ ही हरी पत्तेदार सब्जियों में विटामिन्स, एंटीऑक्सिडेंट्स और कुछ मिनरल्स पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं। यह केवल वजन घटाने में ही नहीं सेहत को और बेहतर बनाने में मददगार साबित हो सकती हैं। 

 सबसे अच्छी बात ये है कि अपनी डेली डायट में आप इन सब्जियों आसानी से शामिल कर सकते हैं। आप चाहें तो इनको सब्जी के तौर पर चपाती या चावल के साथ खा सकते हैं या आप चाहे हैं तो सूप, वेजिटेबल जूस बनाकर इनको एंजॉय कर सकते हैं। तो हुआ ना टेस्टी और हेल्दी दोनों का कॉम्बिनेशन एक साथ। प्लस वजन करने में मददगार।  

जड़ी-बूटियां (एलोवेरा और गार्शिनिया) 

यहां हम आपको ऐसी जड़ी बूटियों के बारे में नहीं बता रहे जिनको पहचानना और उपयोग करना मुश्किल होता है। हम आपको वजन कम करने वाली ऐसी जड़ी बूटी के बारे जानकारी दे रहे हैं जो आजकल लगभग हर घर में मौजूद होती है। यहां हम बात कर रहे हैं एलोवेरा की। आयुर्वेद के अनुसार वेट लॉस करना चाहते हैं तो यह आपके लिए बेस्ट ऑप्शन हो सकता है। 

दरअसल एलोवेरा में फैट बर्न की क्षमता होती है जो उसमें मौजूद विटामिन बी की उपस्थिति की वजह से होता है जो शरीर में जमा फैट को एनर्जी में परिवर्तित करता है और वजन घटाने में मदद करता है। इसके साथ ही एलोवेरा आपके मेटाबॉलिज्म को बूस्ट कर देता है जिससे आप दिन भर में अधिक कैलोरीज को बर्न कर सकते हैं।

 अब आप सोच रहे होंगे कि एलोवेरा को यूज कैसे किया जाए। तो बता दें कि इसका बेहद आसान तरीका है एलोवेरा जूस। जो आजकल बेहद पॉपुलर है। कपिवा एकेडमी आयुर्वेदा के डॉ आनंद द्विवेदी इसके बारे में विस्तार से बताते हुए कहते हैं, ‘’एलोवेरा मेटाबॉलिज्म (विशेषकर लिवर) में सुधार करता है और भूख को भी शांत करता है। इसका सेवन वजन बढ़ाने में योगदान नहीं देता है। इसलिए यह वजन प्रबंधन (वेट लॉस) में मदद करता है। 10 मिली-15 मिली एलोवेरा जूस को सुबह खाली पेट 1-2 चम्मच शहद के साथ आधा गिलास पानी में मिलाकर पीने की सलाह दी जाती है।

अगर आप एलोवेरा जूस की मदद से वजन कम करना चाहते हैं तो कपिवा के एलो गार्शिनिया जूस की मदद ले सकते हैं। आयुर्वेद के अनुसार वेट लॉस करने का यह आसान तरीका है। यह एलोवेरा और गार्शिनिया से मिलकर बनता है। गार्सीनिया (Garcinia) इंडोनेशिया के मूल में पाया जाने वाला औषधीय गुणों से भरपूर पौधा है। इसके एक्सट्रेक्ट का यूज कपिवा एलो गार्शिनिया जूस में किया जाता है। इन दोनों हर्ब का कॉम्बिनेशन मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करने के साथ ही भूख को कम करके बॉडी में न्यू फैट के प्रोडक्शन को रोकता है और वजन मैनेजमेंट में सपोर्ट करता है। इसके साथ ही इसमें हायड्रोक्सिल एसिड (Hydroxyl Acid) भी होता है जो भूख को मारने के लिए जाना जाता है। यह जूस वेट लॉस के साथ ही फैट लॉस में भी मदद करता है। इसका यूज करना भी बेहद आसान है। 30ml पानी में 30ml कपिवा एलो गार्शिनिया जूस मिलाएं। स्वादानुसार शहद, शक्कर या नमक डालें और अच्छे परिणाम के लिए प्रत्येक सुबह खाली पेट पिएं।’’ 

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नट्स (बादाम, अखरोट)

आयुर्वेद के अनुसार वेट लॉस

अगर आप आयुर्वेद के अनुसार वेट लॉस करने के बारे में सोच रहे हैं तो नट्स का उपयोग भी इसका एक आसान तरीका है। जिसमें पहले नंबर पर आता है बादाम। बादाम प्रोटीन, एंटीऑक्सिडेंट और हार्ट हेल्दी फैट्स का अच्छा सोर्स है। बादाम में मोनो अनसैचुरेटेड फैट्स पाए जाते हैं जो ओवरईटिंग को कम करने में मदद करते हैं। वहीं इसमें मौजूद फायबर पेट भरा होना का एहसास कराता है। इसमें मौजूद एमिनो एसिड्स फैट बर्न करने में मदद करते हैं। 

इसी तरह अखरोट भी फैट लॉस को प्रमोट करते हैं। इनमें अनसैचुरेटेड फैट्स पाया जाता है जो हेल्दी बॉडी वेट को प्रमोट करता है। अखरोट भूख को कम करने में भी मदद करता है। इसमें मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड्स, प्लांट स्टेरॉल्स और विटामिन्स भूख को कम करने में मदद करते हैं जिससे वजन कम करने में मदद मिलती है। 

आप चाहे तो इन नट्स को ऐसे ही खा सकते हैं या फिर इनका उपयोग स्मूदीज और शेक में कर सकते हैं। ये आपकी स्मूदीज को टेस्टी के साथ ही क्रंची भी बना देंगे और वेट लॉस को प्रमोट करेंगे। यह अतिरिक्त फायदा तो आपको मिलने ही वाला है। अब बारी है आयुर्वेद के अनुसार वेट लॉस में मदद करने वाले फलों के नाम पता करना का।

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फल (सेब, संतरा)

आयुर्वेद के अनुसार वेट लॉस

अगर आप वजन कम करना चाहते हैं और फल खाने के भी शौकीन हैं तो आपके लिए यह खुशखबरी है। आपको बता दें कि ऐसे फल भी मौजूद हैं जो वजन को कम करने में मदद करते हैं। जिसमें पहला नाम आता है ए से एप्पल यानी कि सेब का। एप्पल में कैलोरीज कम और फायबर अधिक होता है। इसको खाने के बाद पेट भरा होने का एहसास होता है। जिससे आप दूसरी चीजों का सेवन कम करते हैं। यह भूख को कम करने में भी मदद करता है।

ऐसा ही एक दूसरा फल है संतरा। यह भी लो कैलोरीज और हाय फायबर वाला फ्रूट है। यह विटामिन सी का भी अच्छा सोर्स है। यह भी फुलनेस का एहसास दिलाता है और भूख को कंट्रोल करने में मदद करता है। वैसे तो फलों को साबुत खाने पर ये सबसे ज्यादा फायदेमंद होते हैं, लेकिन आप चाहे तो जूस या शेक में भी इनका उपयोग कर सकते हैं। आयुर्वेद के अनुसार वेट लॉस में फलों का भी विशेष महत्व है। साथ ही यह ओवरऑल हेल्थ को भी प्रमोट करते हैं। 

अभी तो आपने उन चीजों की बारे में जानकारी हासिल की जो वेट लॉस को सर्पोट करती हैं अब जान लेते हैं उनके बारे में जो आयुर्वेद के अनुसार वजन को बढ़ाने का काम करती हैं। डॉ द्विवेदी बताते हैं, ‘’यदि आप लगातार अधिक मात्रा में भोजन कर रहे हैं, तो इससे पाचन अग्नि (Digestive fire) में वृद्धि होती है, क्योंकि शरीर को भोजन की बढ़ी हुई मात्रा को पचाने के लिए इसकी आवश्यकता होती है, लेकिन क्योंकि मेदो धातु में रुकावट होती है, अधिक से अधिक फैट टिशूज का प्रोडक्शन होता है, जिससे वजन बढ़ता है। अन्य कारणों में दिन में सोना, पचाने में कठिन तैलीय या मीठे खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन और आनुवंशिकता भी शामिल है।

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 वे आगे सुझाव देते हैं, ‘’अगर आपको आयुर्वेद के अनुसार वेट लॉस करना है या वजन को नियंत्रित रखना है तो आपको कुछ अन्य बातों का भी ध्यान रखना होगा। जिसमें सीजनल फल और सब्जियों का सेवन, ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर की सही टाइमिंग, एक साथ बहुत सारा ना खाकर छोटे-छोटे मील्स लेना, जंक और फास्ट फूड से दूरी, योग और व्यायाम को रूटीन में शामिल करना आदि शामिल हैं।’’

इन डायट चेंजेस को अपनाकर आप अपने वेट लॉस प्लान को नेक्स्ट लेवल पर ले जा सकते हैं, इसलिए जब आयुर्वेद प्रभावी रूप से वजन घटाने और आपके लक्ष्य को सफलतापूर्वक प्राप्त करने में आपकी मदद कर सकता है, तो कई प्रकार की डायट के झंझट में पड़ने की जरूरत ही नहीं।  

डिस्क्लेमर

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