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पैरों में होने वाला दर्द हो सकता है हड्डी का कैंसर, जान लें इसके बारे में सबकुछ

पैरों में होने वाला दर्द हो सकता है हड्डी का कैंसर, जान लें इसके बारे में सबकुछ

कैंसर एक ऐसी बीमारी जिसका नाम सुनते ही लोग घबरा जाते हैं। कुछ ऐसा ही हुआ 42 वर्षीय कुलदीप ठाकुर के साथ जिनके पैरों में बेतहाशा दर्द हो रहा था और पैर के एक स्थान पर सूजन भी थी। कुलदीप डॉक्टर के पास गए तो जांच में पता चला कि उन्हें हड्डियों का कैंसर है। हड्डी का कैंसर (Bone cancer) का नाम सुनते ही वह घबरा गए और मन में सोचने लगे कि अब तो उन्हें एक जानलेवा बीमारी हो गई है। अब क्या होगा?

डॉक्टर ने कुलदीप को समझाते हुए कहा कि ,”आप घबराए नहीं, बल्कि संयम से काम लें। हड्डी का कैंसर (Bone cancer) ठीक हो सकता है, बस आपको इलाज कराना होगा और अपने खानपान का ध्यान रखना होगा।”

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हड्डी का कैंसर (बोन कैंसर) क्या है?

कैंसर शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है। लेकिन, हड्डी का कैंसर हड्डियों की कोशिकाओं से शुरू होता है। सभी प्रकार के बोन कैंसर में कैंसर वाले स्थान पर हड्डियों में वृद्धि होती है, जिस कारण सूजन आ जाती है। जिस कारण से हड्डियों से काम करना थोड़ा कठिन हो जाता है।

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धीरे-धीरे कैंसर सेल्स (Cancer cells) पूरे शरीर में फैल जाता है। कैंसर सेल्स हड्डियों से होते हुए फेफड़े और आसपास के अंगों में भी फैल जाते हैं। जब कैंसर सेल्स आगे और ज्यादा फैलने लगती हैं, तो ऐसी स्थिति को मेटास्टैसिस कहा जाता है। लेकिन आपको जान कर हैरानी होगी कि बोन कैंसर हड्डियों से होते हुए जब फेफड़ों में फैलता है तो इसे लंग कैंसर नहीं कहते हैं। हड्डियों के कैंसर के कारण फेफड़े में फैले कैंसर (Lung cancer) को भी बोन कैंसर ही कहते हैं।

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हड्डी का कैंसर के लक्षण क्या हैं? (Symptoms of bone cancer)

बोन कैंसर के लक्षण निम्न प्रकार हैं :

हड्डी का कैंसर होने का कारण क्या है? (Cause of bone cancer)

बोन कैंसर के होने की वजह अभी तक स्पष्ट नहीं है, लेकिन फिर भी कुछ रिसर्च के आधार पर वैज्ञानिक बोन कैंसर के कारणों को लेकर कुछ निष्कर्षों पर पहुंचे हैं।

  • कैंसर होने का कारण आनुवांशिकता हो सकती है। अगर आपके परिवार में किसी को पहले से कैंसर है या कभी भी किसी को कैंसर हुआ था तो भी आपको कैंसर होने का जोखिम होता है।
  • अगर पहले कभी आपको कैंसर हुआ है और आपने रेडिएशन थेरिपी, कीमोथेरिपी (Chemotherapy) या स्टेम सेल ट्रांसप्लांटेशन (Stem cell transplant) किया है तो भी आपको बोन कैंसर (Bone cancer) हो सकता है। इसका कारण यह है कि रेडिएशन या कीमोथेरिपी में एक ही स्थान पर लगातार रेडिएशन को डाला जाता है, जिससे बोन की कोशिकाओं में कैंसर सेल्स पनप सकती हैं। इस कारण से बोन कैंसर हो सकता है।
  • बोन कैंसर 40 साल के ऊपर के लोगों में हो सकता है। खासकर उन लोगों में जिन्हें हड्डियों से संबंधित कोई बीमारी होती है। वहीं, ऑस्टियोसार्कोमा से ग्रसित व्यक्ति को कैंसर होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है।

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हड्डी का कैंसर कितने प्रकार के होते हैं? (Types of bone cancer)

बोन कैंसर अमूमन दो प्रकार को होते हैं :

  • प्राइमरी बोन कैंसर (Primary bone cancer)
  • सेकेंड्री बोन कैंसर (Secondary bone cancer)

प्राइमरी बोन कैंसर (Primary bone cancer)

प्राइमरी बोन कैंसर सबसे आम बोन कैंसर है। जो सिर्फ हड्डियों में कैंसर सेल्स के कारण होता है। प्राइमरी बोन कैंसर निम्न प्रकार के होते हैं :

  • ऑस्टियोसार्कोमा (Osteosarcoma)
  • कॉन्ड्रोसार्कोमा (Chondrosarcoma)
  • इविंग ट्यूमर या इविंग सार्कोमा (Ewing tumor or Ewing sarcoma)
  • मैलिगनैंट फाइब्रोस हिस्टिओसाइटोमा (Malignant Fibrous Histiocytoma/MFH)
  • फाइब्रोसार्कोमा (Fibrosarcoma)
  • हड्डियों के मैलिगनैंट जायंट सेल ट्यूमर (Malignant giant cell tumor of bone)
  • कॉर्डोमा (Chordoma)

ऑस्टियोसार्कोमा (Osteosarcoma)

ऑस्टियोसार्कोमा ओस्टिऑइड टिश्यू में बनने वाली बोन सेल हैं, जिसे ऑस्टियोब्लास्ट्स कहते हैं। यह ट्यूमर आमतौर पर हाथ में कंधे के पास और पैरों में घुटने के पास होता है। ऑस्टियोसार्कोमा बच्चों, किशोरों और बड़ों में होता है। लेकिन ऑस्टियोसार्कोमा किसी भी हड्डी में हो सकता है। ऑस्टियोसार्कोमा बहुत तेजी से बढ़ता है और फेफड़े के साथ-साथ शरीर के दूसरे हिस्सों में भी फैलता है।

ऑस्टियोसार्कोमा का खतरा बच्चों और किशोरों में 10 साल से लेकर 19 साल के बीच सबसे ज्यादा होता है। ऑस्टियोसार्कोमा महिलाओं की तुलना में पुरुषों को होने की संभावना अधिक होती है। गोरे बच्चों की तुलना में ऑस्टियोसार्कोमा सांवले बच्चों को होने के चांसेस ज्यादा होते हैं। वहीं, बड़ों में सांवले लोगों की तुलना में गोरों को ज्यादा ऑस्टियोसार्कोमा प्रभावित करता है।

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कॉन्ड्रोसार्कोमा (Chondrosarcoma)

कॉन्ड्रोसार्कोमा ऐसा बोन कैंसर है जो कार्टिलेजिनस टिश्यू में पनपना शुरू होता है। कार्टिलेज एक प्रकार का कनेक्टिव टिश्यू (Connective tissue) है, जो हड्डियों के किनारों को कवर करता है। साथ ही जोड़ों के साथ तालमेल बैठाने का काम करता है। कॉन्ड्रोसार्कोमा सबसे पहले पेल्विस, जांघों और कंधे में होता है। कॉन्ड्रोसार्कोमा धीरे-धीरे बढ़ता है। ध्यान न देने पर यह शरीर के अन्य भागों में भी फैलने लगता है।

कॉन्ड्रोसार्कोमा मुख्य रूप से 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में होता है। उम्र बढ़ने के साथ-साथ कॉन्ड्रोसार्कोमा का जोखिम बढ़ता है। वहीं, कॉन्ड्रोसार्कोमा का एक रेयर प्रकार एक्सट्रास्केलेटल कॉन्ड्रोसार्कोमा है, जो हड्डी के कार्टिलेज (Bone cartilage) में नहीं बनता है। एक्सट्रास्केलेटल कॉन्ड्रोसार्कोमा हड्डी के कार्टिलेज के जगह हाथों और पैरों के ऊपरी भाग के नर्म टिश्यू में बनता है

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इविंग ट्यूमर या इविंग सार्कोमा (Ewing tumor or Ewing sarcoma)

इविंग सार्कोमा एक रेयर सार्कोमा है, जो हड्डियों से पैदा होता है। इविंग सार्कोमा आमतौर पर पेल्विस, पैरों या पसलियों में पनपता है। लेकिन इविंग सार्कोमा शरीर की किसी भी हड्डी में हो सकता है। इविंग ट्यूमर काफी जल्दी से बढ़ता है और फेफड़ों के साथ शरीर के दूसरे हिस्सों में भी फैल जाता है। इविंग सार्कोमा का ज्यादातर 19 वर्ष से कम उम्र के बच्चों और किशोरों में होता है। वहीं, लड़कियों की तुलना में लड़कों में इविंग सार्कोमा का जोखिम ज्यादा होता है। पूरे भारत में लगभग पांच हजार लोग इविंग सार्कोमा से प्रभावित हैं।

मैलिगनैंट फाइब्रोस हिस्टिओसाइटोमा (Malignant Fibrous Histiocytoma/MFH)

इस बारे में जनरल फिजिश्यन डाॅक्टर अशोक रामपाल का कहना है कि पैरो में होना वाला कैंसर काफी घातकहो सकता है। पैरो में होने वाला मैलिगनैंट फाइब्रोस हिस्टिओसाइटोमा एक घातक ट्यूमर है। जो हड्डी या सॉफ्ट टिश्यू में पनप सकता है। MFH बहुत सामान्य प्रकार का सार्कोमा है। मैलिगनैंट फाइब्रोस हिस्टिओसाइटोमा अधिक उम्र वाले लोगों में पाया जाता है। वहीं, महिलाओं की तुलना में पुरुषों में मैलिगनैंट फाइब्रोस हिस्टिओसाइटोमा ज्यादा होता है। मैलिगनैंट फाइब्रोस हिस्टिओसाइटोमा के होने के कारण की अभी तक कोई सटीक जानकारी नहीं है। लेकिन इसके बहुत से लक्षण हैं, जो पहले से ही मरीज में नजर आने लगते हैं। जिसे लोगों को अनदेखान नहीं करना चाहिए।

2002 से पहले किसी भी तरह के सार्कोमा को मैलिगनैंट फाइब्रोस हिस्टिओसाइटोमा कहा जाता है। लेकिन, 2002 के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) पेलियोमॉर्फिक सार्कोमा के साथ इसमें अंतर न किए जाने के कारण इस सार्कोमा का नाम एमएफएच रखा गया। क्योंकि सेल टाइप 2 को अक्सर एमएफएच के लिए ही रेफर किया जाता था।

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फाइब्रोसार्कोमा (Fibrosarcoma)

फाइब्रोसार्कोमा एक दुर्लभ प्रकार का कैंसर है, जो फाइब्रोब्लास्ट नामक सेल्स को प्रभावित करता है। फाइब्रोब्लास्ट्स पूरे शरीर में पाए जाने वाला रेशेदार टिश्यू के निर्माण के लिए जिम्मेदार होते हैं। टेंडॉन्स (मांसपेशियों को हड्डियों से जोड़ते हैं) रेशेदार टिश्यू से बने होते हैं।

जब फाइब्रोसार्कोमा शरीर के फाइब्रोब्लास्ट पर अटैक करता है तो वह नियंत्रण खो देते हैं। जिससे फाइब्रोब्लास्ट सेल्स बढ़ जाते हैं। जिसके कारण यह फाइब्रोसार्कोमा यानी कि फाइब्रोब्लास्ट के कैंसर का रूप ले लेता है।

हड्डियों के मैलिगनैंट जायंट सेल ट्यूमर (Malignant giant cell tumor of bone)

हड्डियों के मैलिगनैंट जायंट सेल ट्यूमर (GCT) एक दुर्लभ प्रकार का ट्यूमर है। जायंट सेल ट्यूमर ऑफ बोन से ग्रसित मरीजों में आमतौर पर हड्डी के खराब होने से दर्द होता है और फ्रैक्चर होने का भी रिस्क बढ़ जाता है। आमतौर पर जायंट सेल ट्यूमर हड्डी में बनता है। लेकिन यह कार्टिलेज, मांसपेशियों, वसा, ब्लड वेसेल्स या शरीर के अन्य टिश्यू में भी बन सकता है। जायंट सेल ट्यूमर हाथ और पैर की लंबी हड्डियों के सिरों पर एक जोड़ (जैसे घुटने, कलाई, कूल्हे, या कंधे) के पास होते हैं।

जायंट सेल ट्यूमर ऑफ बोन के होने के सटीक कारणों की जानकारी नहीं है। जायंट सेल ट्यूमर ऑफ बोन पुरुषों की तुलना में महिलाओं को ज्यादा होता है। वहीं, यह 20 साल से 44 साल के उम्र के लोगों को होने का जोखिम सबसे ज्यादा होता है।

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कॉर्डोमा (Chordoma)

कॉर्डोमा एक रेयर ट्यूमर है, जो रीढ़ की हड्डियों में होता है। ये ट्यूमर आमतौर पर 40 साल के ऊपर के लोगों में होते हैं। ज्यादातर कॉर्डोमा रीढ़ के आधार पर और खोपड़ी के आधार पर बनते हैं। कॉर्डोमा महिलाओं की तुलना में पुरुषों को सबसे ज्यादा होता है।

सेकेंड्री बोन कैंसर (Secondary bone cancer)

सेकेंड्री बोन कैंसर बड़े बुजुर्गों में होने वाला सबसे आम बोन कैंसर है। लेकिन सेकेंड्री बोन कैंसर बोन कैंसर के कारण नहीं होता है। बल्कि ये किन्हीं अन्य कारणों से होता है और धीरे-धीरे हड्डियों तक फैल जाता है। ज्यादातर कैंसर बोंस में फैल सकते हैं। हालांकि, ब्रेस्ट कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर के मरीजों में हड्डी के कैंसर का जोखिम सबसे ज्यादा होता है।

हड्डी का कैंसर (Bone cancer) के बारे में कैसे लगाया जाता है?

बोन कैंसर के लक्षण सामने आने के बाद जब आप डॉक्टर के पास जाते हैं, तब डॉक्टर आपका फिजिकल टेस्ट करने के बाद कुछ अन्य टेस्ट कराने के लिए कहेंगे :

एक्स-रे (X-Ray)

हड्डी का कैंसर एक्स-रे पर देखा जा सकता हैं। अगर बोन कैंसर पाया जाता है, तो इसके बाद सीने का भी एक्स-रे कराया जाता है। ताकि ये पता किया जा सके कि हड्डी का कैंसर कहीं फेफड़े तक तो नहीं फैल गया है।

सीटी स्कैन (CT Scan)

सीटी स्कैन को कैट स्कैन भी कहा जाता है। सीटी स्कैन एक प्रकार का एक्स-रे है, जो अंगों का विस्तृत चित्र लेता है। सीटी स्कैन का उपयोग यह देखने के लिए किया जाता है कि कैंसर शरीर के अन्य अंगों, जैसे- लिवर, फेफड़े आदि में तो नहीं फैल गया है।

एमआरआई स्कैन (MRI Scan)

एमआरआई इमेजेस लेने के लिए एक्स-रे के बजाय रेडियो वेव्स और स्ट्रॉन्ग मैग्नेट का उपयोग करते हैं। एमआरआई का उपयोग कैंसर के आकार के बारे में जानने के लिए किया जाता है। एमआरआई अक्सर कॉर्डोमा जैसे बोन कैंसर की जांच के लिए किया जाता है।

बोन स्कैन (Bone Scan)

बोन स्कैन यह देखने के लिए किया जाता है कि कैंसर हड्डियों कि किन हिस्सों में फैल गया है। निम्न-स्तर की रेडियोएक्टिव पदार्थ की एक छोटी मात्रा को ब्लड में डाला जाता है। जो पूरे शरीर में हड्डी के डैमेज एरिया में जाता है। जिसके बाद एक विशेष कैमरे से रेडियोरेडिएक्टिविटी का पता लगा तक हड्डियों का चित्र निकाला जाता है।

पीईटी स्कैन (PET Scan)

पीईटी स्कैन एक तरह का बोन स्कैन है। लेकिन वे इसमें शुगर का उपयोग करते हैं जो शरीर के अंदर एक विशेष कैमरे के द्वारा देखा जाता है। अगर हड्डी का कैंसर (Bone cancer) है, तो कैंसर वाले स्थान पर शुगर हॉट स्पॉट के रूप में दिखाई देता है।

बायोप्सी (Biopsy)

बायोप्सी के लिए डॉक्टर ट्यूमर के छोटे टुकड़े निकालते हैं। ट्यूमर के टुकड़े की जांच के लिए उसे लैब में भेज दिया जाता है। जहां ये पता लगाया जाता है कि ट्यूमर में कैंसर सेल्स है या नहीं।

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बोन कैंसर का इलाज कैसे होता है? (Treatment for Bone cancer0

बोन कैंसर के इलाज के लिए डॉक्टर कीमोथेरिपी, रेडिएशन थेरिपी, सर्जरी, क्रायोसर्जरी और टारगेटेट थेरिपी करते हैं। जिससे बोन कैंसर ठीक हो जाता है। ज्यादा जानकारी के लिए आप डॉक्टर से बात करें।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

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Nidhi Sinha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 20/09/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड