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कीमोथेरिपी (Chemotherapy) के साइड इफेक्ट से बचने के लिए करें ये उपाय, मिलेगी राहत

कीमोथेरिपी (Chemotherapy) के साइड इफेक्ट से बचने के लिए करें ये उपाय, मिलेगी राहत

कैंसर (Cancer) से लड़ने के लिए पेशेंट और उसके परिवार को लंबा संघर्ष करना पड़ता है। कैंसर के दौरान दी जाने वाली कीमोथेरेपी (Chemotherapy) के साइड इफेक्ट बहुत से होते हैं। खासतौर पर इम्यून सिस्टम इसकी वजह से कमजोर हो जाता है और बाल झड़ने लगते हैं। अधिकांश कैंसर रोगियों को कीमोथेरिपी के बाद गंजेपन से गुजरना पड़ता है। हालांकि एक नई शोध में कीमोथेरिपी के दौर से गुजर रहे कैंसर के रोगियों के लिए उम्मीद की किरण दिखाई दी है।

स्किन थेरिपी लेटर में प्रकाशित लेख के मुताबिक, ‘अध्ययन में कीमो ड्रग्स को बालों के झड़ने के पीछे का मुख्य कारण पाया गया है। आमतौर पर यह माना जाता है कि कीमो के दौरान झड़ जाने वाले बाल शायद ट्रीटमेंट के बाद वापस आ जाएं। हां यह जरूरी नहीं कि ऐसा सभी के साथ हो!

और पढ़ें : कैंसर के बाद कैसे रहें स्वस्थ्य?

कैंसर के उपचार के दौरान कुछ लोगों का शरीर इन दवाओं को सहन नहीं कर पाता है। इस कारण बालों का झड़ना शुरू हो जाता है। यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर के सेंटर फॉर डर्मेटोलॉजी रिसर्च के शोधकर्ताओं ने कहा कि, कीमो दवा बालों के रोम और स्टेम सेल्स को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है, जिससे बालों के रोम को नुकसान पहुंचता है और बालों का गिरना शुरू हो जाता है। इसके अलावा कीमोथेरिपी (Chemotherapy) रोम छिद्रों को अपना टारगेट बनाती है, क्योंकि शरीर में यहां के सेल्स सबसे ज्यादा तेजी से विभाजित होते हैं।

यह देखने के लिए कि क्या कीमो दवाओं में कोई परिवर्तन करने से स्थिति से बचने में मदद मिल सकती है, शोधकर्ताओं ने सीडीके 4/6- कीमोथेरिपी के लिए दवाओं का एक नया वर्ग चुना। इन अवरोधकों के गुणों का मानव खोपड़ी के बालों के रोम के साथ शोषण और स्नान किया गया।

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कीमोथेरिपी के दौरान होने वाली समस्याएं क्या हैं? (Health problem during Chemotherapy)

कीमोथेरिपी (Chemotherapy) की वजह से निम्नलिखित स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो सकती है। जैसे:

1. न्यूरोपैथी

कैंसर के ट्रीटमेंट के दौरान साइड इफेक्ट के रूप में न्यूरोपैथी भी हो सकती है। इसमें मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के बाहर की नसें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। यह मांसपेशियों की कमजोरी, कॉर्डिनेशन की कमी, रक्तचाप (BP) में परिवर्तन और झुनझुनी सनसनी का कारण बन भी बन सकता है। दर्द निवारक दवा, तेल मालिश और एक्यूपंक्चर इससे निपटने में मदद कर सकता है।

उपाय – धूम्रपान का सेवन बंद कर दें। इसके साथ ही गर्म पानी में स्नान करें और नियमित रूप से व्यायाम करें।

और पढ़ें : स्तन से जुड़ी हर परेशानी कैंसर नहीं होती

2. कब्ज

कीमोथेरिपी दवाएं उन कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती हैं, जो पाचन में सहायता करती हैं। ये कब्ज, दस्त और मतली जैसी समस्याओं का कारण बन सकती हैं। कीमोथेरिपी के बाद कब्ज (Constipation after Chemotherapy) और पाचन की समस्या (Digestion problem) को रोकने के लिए आपको अपने खाने की आदतों को बदलना चाहिए। मसालेदार भोजन, कॉफी और तले हुए फूड से बचें । ऐसे खाद्य पदार्थ जो आपके पेट में जलन पैदा कर सकते हैं उन्हें न लें। अपने आहार में हाई फाइबर फूड जैसे फल और सब्जियां शामिल करें। एवोकैडो, केला, छोला, हरी पत्तेदार सब्जियां, मैग्नीशियम युक्त खाद्य पदार्थ भी ले सकते हैं। पानी को सेवन अधिक करें।

उपाय – प्रतिदिन नियमित रूप से तरल पदार्थ जैसे आठ गिलास पानी का सेवन करें। खाने के साथ पानी न पीएं। आसानी से पचने वाले आहारों का सेवन करें। जैसे की सीड, बेरी और पक्की हुई सब्जियां।

3. सांस लेने में तकलीफ

कीमोथेरिपी की मेडिसिन लंग्स कैंसर पेशेंट को नुकसान पहुंचा सकती हैं। यह फेफड़ों के लिए ऑक्सिजन के अधिग्रहण को मुश्किल बनाता है। अगर आप कैंसर के इलाज के बाद सांस लेने में समस्या का सामना कर रहे हैं, तो रोजाना कुछ व्यायाम करें। सोते समय शरीर को कुछ ऊंचा रखें, इससे आपको आराम मिलेगा।

उपाय – योगासन या हल्के व्यायाम करें। सांस संबंधी समस्या उत्पन्न होने पर कुर्सी पर बैठ जाएं और कुछ समय तक लंबी व गहरी सांस लें।

और पढ़ें : Cancer: कैंसर क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और उपचार

4. तंत्रिका प्रणाली में समस्या

हमारा नर्वस सिस्टम भावनाओं, विचारों और सामंजस्य को काबू करता है। कीमोथेरिपी के कारण मेमोरी संबंधी समस्याएं विकसित हो सकती हैं, जिसके कारण व्यक्ति कार्यों पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाता है। इस लक्षण को आमतौर पर कीमो फॉग या कीमो ब्रेन भी कहा जाता है।

नर्वस सिस्टम के इस प्रकार के हल्के लक्षण समय के साथ सही इलाज से अपने आप चले भी जा सकते हैं, तो कई बार कई वर्षों के लिए व्यक्ति को प्रभावित कर सकते हैं। कुछ दुलर्भ व गंभीर मामलों में यह व्यक्ति को उम्र भर के लिए एंग्जायटी और स्ट्रेस से भी ग्रसित कर सकते हैं।

उपाय – इन तरीकों से बनाएं अपनी तंत्रिका प्रणाली को मजबूत –

  • लंबी गहरी सांस लेना
  • नंगे पैर घास पर चलें
  • धूप सकें
  • योग और मेडिटेशन करें
  • व्यायाम
  • ओमेगा 3, सेंधा नमक और मैग्नीशियम का अधिक सेवन शुरू करें

और पढ़ें : मेल ब्रेस्ट कैंसर के क्या हैं कारण, जानिए लक्षण और बचाव

5. बालों, त्वचा और नाखूनों पर प्रभाव

कई प्रकार के कीमोथेरिपी ड्रग बालों के कूप को प्रभावित करती हैं, जिसके कारण इलाज के कुछ ही हफ्तों में बाल झड़ने की समस्या उत्पन्न हो सकती है। बाल झड़ने की समस्या शरीर के किसी भी अंग को प्रभावित कर सकती है। जैसे की भौहें से लेकर पैरों के बालों तक। बाल झड़ने की समस्या अस्थायी होती है और फाइनल ट्रीटमेंट के कुछ हफ्तों बाद बाल फिर से आने शुरू हो जाते हैं।

कीमोथेरिपी के दौरान त्वचा पर हल्की जलन, सूखापन, खुजली और चकत्ते हो सकते हैं। इस परेशानी से बचने के लिए डॉक्टर आपको मलहम लगाने की सलाह दे सकते हैं। जैसे-जैसे ड्रग के प्रभाव बढ़ते जाते हैं वैसे-वैसे यह आपके हाथों और पैरों के नाखूनों को भी प्रभावित करने लगते हैं।

इलाज की प्रकिया के कुछ समय बाद आपके नाखूनों का रंग भूरे या पीले रंग का हो सकता है। इसके साथ ही कीमोथेरिपी के कारण नाखूनों की ग्रोथ में भी कमी आने लगती है। कुछ दुर्लभ मामलों में नाखून अपनी जगह से उखड़ भी सकते हैं। ऐसे में आपको अपने नाखूनों की ज्यादा देखभाल करने की जरूरत पढ़ सकती है।

उपाय – बालों का झड़ना कम करने के लिए रोजाना शैम्पू न करें। त्वचा पर आए चकत्ते या अन्य समस्याओं का समाधान पाने के लिए अपने डॉक्टर से सलाह लें।

और पढ़ें : इन हेल्दी फूड्स की मदद से प्रेग्नेंसी के बाद बालों का झड़ना कम करें

इन बातों का रखें ध्यान

कैंसर के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवाएं कैंसर कोशिकाओं को मारती हैं, लेकिन वे अपने आसपास की कुछ स्वस्थ कोशिकाओं को भी खत्म कर देती हैं। यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune system) को कमजोर करता है। इस कारण आपको और भी बीमारियां घेर सकती हैं।

इम्युनिटी बढ़ाने के लिए ये खाएं

  • दही
  • पालक
  • ब्रोकली
  • लहसुन
  • लाल शिमला मिर्च
  • अदरक
  • खट्टे फल
  • हल्दी
  • सूरजमुखी के बीज
  • अंडे
  • फलों का रस
  • ताजी मौसमी सब्जियां

साथ ही इस बात का ध्यान रखें कि प्रोसेस्ड, पैकेज्ड और जंक फूड के सेवन से आपको बचना चाहिए।

और पढ़ें : कैंसर स्क्रीनिंग के बारे में हर किसी को होनी चाहिए यह जानकारी

व्यायाम

व्यायाम की मदद से सूजन, थकान और अवसाद से लड़ने में मदद मिलती है, जिससे इलाज की प्रक्रिया में तेजी आने लगती है। व्यायाम का तीव्र होना जरूरी नहीं है, आप चाहें तो नियमित रूप से टहलना, योग करना या अन्य हल्के व्यायाम भी कर सकते हैं। ध्यान रहे कि व्यायाम कि मदद से आपका रक्त प्रवाह सही ढंग से चलता रहना चाहिए। इसके अलावा आप चाहें तो सपोर्ट ग्रुप या थेरिपी सेशन भी जॉइन कर सकते हैं। अगर आपको कीमोथेरिपी के दौरान या बाद में अवसाद, तनाव या अन्य कोई समस्या आती है तो आप काउंसलर की भी मदद ले सकते हैं। अगर आप कीमोथेरिपी (Chemotherapy) से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं, तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा।

हेल्दी रहने के लिए हेल्दी लाइफ स्टाइल फॉलो करना बेहद जरूरी है। इसलिए योगासन को अपने रेग्यूलर रूटीन में जरूर शामिल करें। योगा एक्सपर्ट से इस वीडियों में बता रहीं है बीमारियों के इलाज के लिए योग कैसे है लाभकारी।

 

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

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Bhawana Awasthi द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 31/03/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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