Secondary Liver Cancer: सेकेंड्री लिवर कैंसर क्या है?

    Secondary Liver Cancer: सेकेंड्री लिवर कैंसर क्या है?

    परिचय

    लिवर कैंसर (Liver cancer) क्या है?

    लिवर में होने वाले कैंसर को लिवर कैंसर (Liver cancer) कहते हैं। लिवर शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि होती है। लिवर हमारे शरीर को विषाक्त और हानिकारक पदार्थों से मुक्त रखता है। यह पेट के दाहिनी तरफ पसलियों के ठीक नीचे होता है। लिवर में ही पित्त का उत्पादन होता है। पित्त ही भोजन से मिलने वाले वसा, विटामिन और अन्य पोषक तत्वों को पचाने में मदद करता है। लिवर में ही ग्लूकोज जैसे पोषक तत्व संग्रहीत होते हैं। जिससे जब आप भोजन नहीं खा रहे हों तो शरीर को शक्ति मिलती रहे। लिवर इसी तरह से छोटे-बड़े कई काम करता है। ​लिवर में कैंसर हो जाने पर यह ठीक से काम नहीं कर पाता है इसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है। कैंसर की कोशिकाएं, लिवर की स्वस्थ कोशिकाओं को धीरे-धीरे नष्ट कर देती हैं। इस वजह से लिवर सामान्य रूप से काम करने में सक्षम नहीं रहता।

    सेकेंड्री लिवर कैंसर (Secondary liver cancer) क्या है?

    Secondary Liver Cancer

    आमतौर पर लिवर कैंसर को प्राइमरी और सेकेंड्री कैंसर के रूप में विभाजित किया गया है। सेकेंड्री लिवर कैंसर (Secondary liver cancer) को लिवर मेटास्टेटिस भी कहते हैं। प्राइमरी कैंसर वह होता है ​कैंसर लिवर के अंदर ही शुरू हुआ हो। वहीं सेकेंड्री लिवर कैंसर वो होता है जब शरीर के ​किसी और अंग में कैंसर हुआ हो और वो कैंसर कोशिकाएं लिवर तक पहुंच जाएं। ज्यादातर लिवर कैंसर सेकेंड्री ही होते हैं।

    सेकेंड्री लिवर कैंसर (Secondary Liver Cancer) स्तन, ब्लेडर, किडनी, ओवरी, पेनक्रियाज, पेट, यूट्रस और फेफड़ों से शुरू हो सकते हैं। इन्हीं अंगों के कैंसर लिवर तक पहुंच जाते हैं और वहां बढ़ने लगते हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोप में सेकेंड्री लिवर कैंसर, प्राइमरी की तुलना में अधिक सामान्य हैं।

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    लक्षण

    सेकेंड्री लिवर कैंसर के लक्षण (Secondary liver cancer symptoms) क्या हैं?

    सेकेंड्री लिवर कैंसर के शुरुआती लक्षण नजर नहीं आते हैं। हालांकि इससे पेट में सूजन रह सकती है। सूजन से खून और पित्त के कार्य में रुकावट हो सकती है। जब ऐसा होता है, तो एक व्यक्ति को इन लक्षणों का अनुभव हो सकता है जैसे:

    कारण

    सेकेंड्री​ लिवर कैंसर के कारण (Causes of Secondary Liver Cancer) क्या हैं?

    सेकेंड्री लिवर कैंसर शरीर के अन्य किसी अंग में होता है और वो लिवर तक पहुंच जाता है। कोई भी कैंसर लीवर में फैल सकता है। लिवर तक फैलने वाले कैंसर में शामिल है:

    • स्तन कैंसर
    • कोलोरेक्टल कैंसर
    • इसोफेजियल कैंसर
    • फेफड़ों का कैंसर
    • मेलेनोमा
    • पेनक्रियाज का कैंसर
    • पेट का कैंसर

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    इलाज

    सेकेंड्री लिवर कैंसर का परीक्षण (Secondary liver cancer test) कैसे होता है?

    यदि किसी व्यक्ति में लिवर कैंसर के लक्षण दिखते हैं, तो डॉक्टर सेकेंड्री लिवर कैंसर के तौर पर जांच करते हैं। परीक्षण के दौरान (Secondary liver cancer test) वो आपसे कुछ सवाल पूछ सकते हैं। इसके अलावा सेकेंड्र्री लिवर कैंसर का पता लगाने के लिए कुछ टेस्ट भी करेंगे। जैसे:

    • पेट का सीटी स्कैन
    • लिवर ठीक से काम कर रहा है या नहीं, डॉक्टर ये भी जांचेंगे।
    • लिवर का अल्ट्रासाउंड
    • लैप्रोस्कोपी, जिसमें एक लचीली ट्यूब द्वारा लिवर की बायोप्सी होती है।
    • एंजियोग्राम
    • एमआरआई स्कैन

    सेकेंड्री लिवर कैंसर के इलाज (Secondary liver cancer treatment) क्या है?

    सेकेंड्री लिवर कैंसर का इलाज आमतौर पर लक्षणों को कम करने के लिए होता है। साथ ही डॉक्टर कोशिश करते हैं कि कैंसर को छोटा कर आपका जीवन लंबा कर सकें। ज्यादातर ​सेकेंड्री लिवर कैंसर ऐसे होते हैं जिनका इलाज करना मुश्किल होता है। ये पूरी तरह से नहीं ठीक हो पाते हैं।

    सेकेंड्री लिवर कैंसर के इलाज के दो तरीके हैं- पहला लोकल और दूसरा सिस्टमैटिक। व्यक्ति की उम्र और उसकी स्वास्थ्य स्थिति देखकर डॉक्टर बताएंगे कि उनके लिए कौन सा इलाज सही रहेगा।

    इलाज इस बात पर भी निर्भर करेगा कि प्राइमरी कैंसर कहां है। लिवर में कैंसर का आकार कितना बड़ा है।

    लोकल इलाज निम्न प्रकार से किया जाता है।

    रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन- इसमें कैंसर कोशिकाओं को मारने खत्म करने की कोशिश की जाती है।

    रेडिएशन थेरेपी- इसमें इंजेक्शन या मशीन द्वारा इलाज होता है। इसमें रेडिएशन बीम के जरिए ट्यूमर को छोटा करने का प्रयास किया जाता है।

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    सिस्टमैटिक इलाज खून के संचार के माध्यम से किया जाता है। जैसे:

    बायोलॉजिकल रिस्पॉन्स मॉडिफायर थेरेपी- इसमें शरीर के इम्यून सिस्टम को बढ़ा दिया जाता है।

    कीमोथेरेपी- शरीर में तेजी से बढ़ रहे कैंसर सेल्स को दवाओं द्वारा रोका जाता है।

    हार्मोन थेरेपी- कैंसर को बढ़ाने वाले हार्मोन को नष्ट किया जाता है।

    टार्गेट थेरेपी- इसमें सीधा कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने की कोशिश की जाती है।

    प्रभाव

    सेकेंड्री लिवर कैंसर (Secondary Liver Cancer) होने के बाद ​जीवित रहने की संभावना कितनी होती है?

    • लिवर मेटास्टेसेस यानी सेकेंड्री लिवर कैंसर (Secondary Liver Cancer) वाले लोगों में कैंसर को पूरी तरह से खत्म करना संभव नहीं होता है। ऐसे में उनका जीवन छोटा होने लगता है।
    • इसमें डॉक्टर सिर्फ ट्यूमर को छोटा कर सकते हैं, पूरी तरह से खत्म नहीं कर सकते। इससे कुछ समय तक जीवन लंबा हो जाता है और लक्षणों से भी राहत मिलती है।
    • लंबे समय तक जीवित रहना, इस बात पर निर्भर करता है कि कैंसर कितना बड़ा या छोटा है और कहां से शुरू हुआ है। इसके अलावा आप महिला हैं या पुरुष, उम्र और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति भी जीवन को लंबा करने में सहायक हो सकती है।
    • डॉक्टर आपकी बची हुई आयु के बारे में अच्छे से बता सकता है। कभी-कभी ऐसा भी हो सकता है कि एक व्यक्ति उम्मीद से कहीं ज्यादा या कम समय तक ही जीवित रह पाए।

    समस्याएं

    इलाज के दौरान होने वाली समस्याएं क्या है?

    सेकेंड्री लिवर कैंसर वाले लोगों में कभी-कभी कोई लक्षण बहुत तेजी से बढ़ते हैं। ऐसे में उन्हें तुरंत इलाज की जरूरत होती है।

    इन लक्षणों में से कुछ इस प्रकार हैं:

    • लगातार उल्टी होना
    • पैरों या पेट में सूजन
    • निगलने में परेशानी
    • खूनी उल्टी
    • पीलिया
    • बिना वजह वजन घटना

    सेकेंड्री लिवर कैंसर (Secondary Liver Cancer) से बचने के ​लिए इन बातों का रखें ध्यान:

    • ​सेकेंड्री लिवर कैंसर में कैंसर जिस अंग से शुरू हुआ है, वहां से लिवर तक पहुंचने में करीब 6 महीने या साल भर का समय लगता है। ऐसे में समय—समय पर शरीर की जांच जरूरी है। सही समय पर कैंसर का पता चल गया तो इलाज होने की पूरी संभावना होती है।
    • प्राइमरी लिवर कैंसर के इलाज के बाद इस बात की कोई पुष्टि नहीं कर सकता कि आपको दोबारा कैंसर नहीं होगा। कई बार प्राइमरी लिवर कैंसर का इलाज सफलतापूर्वक हो जाता है लेकिन कई बार कुछ कोशिकाएं नष्ट होने से बच जाती हैं।
    • इलाज के बाद व्यक्ति को एक स्वस्थ डाइट चार्ट फॉलो करना चाहिए। शराब और स्मोकिंग नहीं करनी चाहिए। व्यायाम और खानपान द्वारा अपने वजन को बढ़ने नहीं देना चाहिए।

    उपरोक्त दी गई जानकारी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। अगर आपको अधिक जानकारी चाहिए तो बेहतर होगा कि एक बार डॉक्टर से संपर्क जरूर करें। आप स्वास्थ्य संबंधी अधिक जानकारी के लिए हैलो स्वास्थ्य की वेबसाइट विजिट कर सकते हैं। अगर आपके मन में कोई प्रश्न है, तो हैलो स्वास्थ्य के फेसबुक पेज में आप कमेंट बॉक्स में प्रश्न पूछ सकते हैं और अन्य लोगों के साथ साझा कर सकते हैं।

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    के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड

    डॉ. पूजा दाफळ

    · Hello Swasthya


    Bhawana Sharma द्वारा लिखित · अपडेटेड 02/05/2021

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