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पैंक्रियाटिक कैंसर के लक्षण क्या हैं? जानिए इस पर एक्सपर्ट की राय...

    पैंक्रियाटिक कैंसर के लक्षण क्या हैं? जानिए इस पर एक्सपर्ट की राय...

    पैंक्रियाटिक कैंसर आम के समय में लोगों के बीच देखे जाने वाले कैंसर में एक है। पैंक्रियास टिश्यू के भीतर जो हानि होती है उसे पैंक्रियाटिक कैंसर कहते हैं। ये टिश्यू जो पेट के पीछे की तरफ स्थित एक महत्वपूर्ण अंग है। पैंक्रियाज हमारे शरीर का महत्वपूर्ण अंग हैं, जो एंजाइम्स का निमार्ण करता है। ये एंजाइम शरीर के वसा, कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन फूड को पचाने में मदद करते हैं। पैंक्रियास भी दो महत्वपूर्ण हार्मोन उत्सर्जित करता है: ग्लूकागन और इंसुलिन, जो ग्लूकोज (चीनी) मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने के लिए मददगार साबित होते हैं। इंसुलिन, सेल्स मेटाबोलाइज में एनर्जी बनाने में मदद करते हैं। साथ ही ग्लूकागन, ग्लूकोज के स्तर को बढ़ाने में मदद करता है जब उसका स्तर घट जाता है।

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    पैंक्रियाटिक कैंसर के लक्षण

    पैंक्रियास जिस स्थान पर स्थित होता है, उस कारण कैंसर का पता लगाना मुश्किल हो जाता है और उसके अगले लेवल्स पर पता लगाया जाता है। कई चीजों को निंयत्रित करके इसकी जोखिम को कम कर सकते है। अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से मिलें।

    इस कैंसर के संकेत और लक्षण तब तक दिखाई नहीं देतें जब तक बीमारी गंभीर स्वरुप नहीं लेती। बीमारी गंभीर होने के बाद जो लक्षण दिखाई देते हैं, उनमें शामिल हैं:

    • पेट की ऊपरी तरफ जो दर्द होता है वह आपकी पीठ तक पहुंच जाता है।
    • आपकी त्वचा का रंग पीला होता है और आंखों का सफेद भाग भी पीलिया पड़ जाता है (पीलिया)।
    • आपको भूख नहीं लगाती है या में कम लगाती है।
    • आपका वजन घटता है
    • आपको तनाव महसूस होता है।
    • आपके खून में थक्के तैयार हो जाते हैं।

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    पैंक्रियाटिक कैंसर का कारण

    हालांकि अब तक इस कैंसर का ठोस कारण अभी भी पता नहीं चल पाया है। ये कैंसर तब होता है जब पैंक्रियास के पास असामान्य स्वरुप से सेल्स बढ़ने लगती हैं और उसका रूपांतर ट्यूमर में हो जाता है। सामान्यत: हेल्दी सेल्स मध्यम संख्या में बढ़ती हैं और मर भी जाती हैं। लेकिन इस कैंसर में सेल्स असामान्य तरीके से बढ़ते है और ये सेल्स अंततः हेल्दी सेल्स को कवर करती हैं।अब तक विशेषज्ञ पैंंक्रियाटिक कैंसर का ठोस कारण नहीं समझ पाएं हैं, लेकिन कुछ चीजे जो इस कैंसर की जोखिम को बढ़ा सकते हैं। जिन चीजों के कारण जोखिम बढ़ सकती है, उनमे शामिल हैं:

    • अगर आप मोटापे के शिकार हैं
    • अगर आप रोज व्यायाम नहीं कर रहें हैं
    • विशेष रूप से कुछ फल और सब्जियों के सेवन करने से
    • वसा युक्त चीजों का अधिक सेवन करने से
    • ज्यादा शराब पीने से
    • अगर आपको डायबिटीज है
    • कीटनाशकों और रसायनों के साथ काम करने से
    • पैंक्रियास पर अगर पुरानी सूजन होने से
    • अगर लिवर की हानि हुई है
    • अगर आप अफ्रीकी-अमेरिकी हैं
    • अगर आपकी फॅमिली हिस्ट्री के अनुसार किसी को पैंक्रिअटिक कैंसर होने पर
    • किसी जेनेटिक डिसऑर्डर का इस कैंसर से जुड़ा होना

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    पैंक्रियाटिक कैंसर का निदान कैसे करते हैं?

    अगर डॉक्टर को आपमें कोई संदेहजनक लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो वो आपको कई टेस्ट करने की सलाह दे सकते हैं। इस बीमारी का निदान करने के लिए डॉक्टर आपके लक्षण और मेडिकल हिस्ट्री का की जांच कर सकते हैं। इन टेस्ट्स में शामिल हैं:

    • पैंक्रियास की पूरी जांच और इमेज के लिए सीटी स्कैन या एमआरआय कर सकते हैं।
    • एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड, जिसमें एक पतली, लचीली ट्यूब जुड़ी होती है जिसमें पैंक्रियास की इमेज ली जाती है, इसे पेट में निचले हिस्से में डाला जाता है।
    • पैंक्रियास की बिओप्सीय या टिश्यू की जांच करना।
    • CA 19-9 ट्यूमर की जांच के लिए ब्लड टेस्ट की जरुरत होगी, जिससे इस बीमारी का पता चल सकता है।

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    इसका चार चरणों में पता लगता है

    • स्टेज 1: पैंक्रियास में भीतर ट्यूमर है, जिसकी ग्रोथ पैंक्रियास के आसपास है लेकिन 2 से 4 सेमी के बीच है।
    • स्टेज 2: ट्यूमर पेट के आसपास के टिश्यू या लिम्फ नोड्स में फैला गया है, जिसकी ग्रोथ 4 सेमी से ज्यादा है।
    • स्टेज 3: कैंसर मुख्य ब्लड वेसल्स और लिम्फ नोड्स में फैल गया है,
    • स्टेज 4: ट्यूमर शरीर के बाकि अंगो में फ़ैल गया है, जैसे कि लिवर।

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    पैंक्रिअटिक कैंसर का उपचार

    डॉक्टर द्वारा कैंसर स्टेज के आधार पर, उसका इलाज तय किया जाएगा। इस इलाज के दो लक्ष्य होते हैं: पहला है कैंसर टिश्यू को खत्म करना और दूसरा है इसका शरीर में फ़ैलाने न देना। इस कैंसर के उपचार के दौरान वजन में कमी आना, आंत्र में रुकावट आना, पेट में दर्द होना और लिवर का ख़राब होना, सबसे आम कॉम्प्लीकेशन्स में से एक हैं।

    • सर्जरी: यदि ट्यूमर पैंक्रियास तक सीमित है, तो सर्जरी का सुझाव दिया जाता हैं – सर्जरी तब की जा सकती है जब कैंसर सटीक स्थान पर आधारित होगा। यदि ट्यूमर पैंक्रियास के सिर और गर्दन तक सीमित है, तो एक प्रक्रिया करेंगे जिसे व्हिपल प्रक्रिया (pancreaticoduodenectomy) कहा जाता है। इस प्रक्रिया में, पहले पार्ट या पैंक्रियास के ऊपर और लगभग 20% शरीर या दूसरे भाग को निकाला जाता है। पित्त नली के नीचे का आधा हिस्सा और आंत का पहला हिस्सा भी हटा दिया जाता है। इस सर्जरी के एक मोड़ीफाइड वर्जन में, पेट का एक हिस्सा निकाल दिया जाता है।
    • रेडिएशन थैरेपी: रेडिएशन थैरेपी का उपयोग कैंसर टिश्यू को एक्स-रे और अन्य हाई-एनर्जी बीम से मारने के लिए होता है। अन्य उपचार विकल्पों का उपयोग तब किया जाता है जा पैंक्रियास के अलावा किसी और अंग में कैंसर फैला होगा।
    • कीमोथेरपी: कुछ मामलों में, डॉक्टर कीमो के साथ अन्य उपचारों को जोड़ सकते हैं। इसमें कैंसर किलिंग ड्रग्स का उपयोग कैंसर टिश्यू को रोकने के लिए होता है।

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    इन बातों का रखें ध्यान

    • तम्बाकु का सेवन ना करें
    • संतुलित आहार लें
    • कम से कम 30 मिनट तक व्यायाम जरूर करें
    • ज्यादा से ज्यादा फल और सब्जियों का सेवन करें
    • ज्यादा वसायुक्त आहार का सेवन न करें
    • शराब पीने से परहेज करें

    अगर इस बीमारी का निदान और उपचार जल्दी हो जाता है तो आप इसकी स्थिति को बिगड़ने से रोक सकते हैं। साथ ही और दूसरी मेडिकल इमर्जेन्सी को भी रोक सकते हैं। इसलिए इस कैंसर की गंभीर स्थिति का इलाज करने के लिए अपने डॉक्टर से जरूर बात करें। अगर ऊपर दिए गए लक्षणों में से कोई लक्षण आपको महसूस हो रहे हैं तो अपने डॉक्टर से जरूर बात करें। हर किसी का शरीर अलग तरह से काम करता है। अपने डॉक्टर के साथ चर्चा करे और कौनसा सुझाव और उपचार आपके लिए ठीक है यह तय करें।अगर आपको कोई भी सवाल या चिंता सता रही है तो सही सुझाव के लिए अपने डॉक्टर से बात करें।

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    Niharika Jaiswal द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 10/05/2022 को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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