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कार्डियोमायोपैथी में एसीई इंहिबिटर्स के उपयोग से बीमारी का प्रोग्रेशन हो सकता है धीमा!

कार्डियोमायोपैथी में एसीई इंहिबिटर्स के उपयोग से बीमारी का प्रोग्रेशन हो सकता है धीमा!

कार्डियोमायोपैथी (Cardiomyopathy) शब्द हार्ट मसल्स से जुड़ी बीमारियों को परिभाषित करता है। ज्यादातर मामलों में, कार्डियोमायोपैथी के कारण हार्ट की मांसपेशियां बड़ी, मोटी या रिजिड हो जाती हैं। नतीजतन मरीज थकान, सांस लेने में तकलीफ या अनियमित दिल की धड़कन जैसे लक्षणों का अनुभव कर सकते हैं। कार्डियोमायोपैथी किसी भी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकती है। अक्सर, ट्रीटमेंट के रूप में कार्डियोमायोपैथी में एसीई इंहिबिटर्स (ACE inhibitors in Cardiomyopathy) दवाएं डॉक्टर्स द्वारा प्रिस्क्राइब की जाती हैं।

ये दवाओं का एक प्रकार है जिसके इस्तेमाल से बीमारी का प्रोग्रेशन धीमा होता है और क्वालिटी ऑफ लाइफ इम्प्रूव होती है। एसीई इंहिबिटर आमतौर पर हाय ब्लड प्रेशर, हृदय की समस्याओं और अन्य स्थितियों के इलाज के लिए निर्धारित किए जाते हैं। आइए, जानते हैं कार्डियोमायोपैथी में एसीई इंहिबिटर्स (ACE inhibitors in Cardiomyopathy) किस तरह काम करते हैं, इनके साइड इफेक्ट्स क्या हैं और ये किन प्रोडक्ट्स या दवाओं के साथ रिएक्ट कर सकते हैं?

एसीई इंहिबिटर्स क्या हैं? (ACE inhibitors)

एसीई इंहिबिटर्स एक ड्रग ग्रुप है जो ब्लड वेसल्स को बड़ा या डायलेट करने और ब्लड प्रेशर को कम करने के लिए ब्लड एंजाइमों के साथ इंटरैक्ट करता है। इन ड्रग्स का उपयोग हाय ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) को नियंत्रित करने, डायबिटिक हाय ब्लड प्रेशर वाले लोगों में हार्ट प्रॉब्लम्स, किडनी डिजीज के इलाज के लिए किया जाता है। ये दवाएं उन लोगों के सर्वाइवल रेट में भी सुधार करती हैं जो हार्ट अटैक से बच गए हैं। कभी-कभी किसी स्वास्थ्य स्थिति का ट्रीटमेंट करने के लिए एसीई इंहिबिटर्स के साथ अन्य दवाओं को भी दिया जाता है।

और पढ़ें: हार्ट अटैक और स्ट्रोक का कारण बन सकता है हाय ब्लड प्रेशर!

कार्डियोमायोपैथी में एसीई इंहिबिटर्स (ACE inhibitors in Cardiomyopathy)

कार्डियोमायोपैथी में एसीई इंहिबिटर्स कैसे काम करते हैं? (ACE inhibitors in Cardiomyopathy)

एसीई इंहिबिटर्स को एंजियोटेंसिन कंवर्टिंग एंजाइम इंहिबिटर्स (Angiotensin converting enzyme inhibitors) के नाम से जाना जाता है। एंजियोटेंसिन II शरीर द्वारा उत्पादित एक कैमिकल है जो मुख्य रूप से रक्त में सर्कुलेट होता है। यह ब्लड वेसल्स के आसपास की मांसपेशियों के कॉन्ट्रैक्शन का कारण बनता है, जिससे वेसल्स संकुचित हो जाती है। नतीजन, वेसल्स के सिकुड़ने से वेसल्स के भीतर दबाव बढ़ जाता है जिससे ब्लड प्रेशर (hypertension) बढ़ता है।

एंजियोटेंसिन II ब्लड में एंजियोटेंसिन I से एंजाइम एंजियोटेंसिन कन्वर्टिंग एंजाइम (ACE) द्वारा बनता है। (ब्लड में एंजियोटेंसिन I स्वयं एंजियोटेंसिनोजेन से बनता है, जो कि एक प्रोटीन है जो लिवर द्वारा बनता है और ब्लड में रिलीज किया जाता है।) एंजियोटेंसिन-कंवर्टिंग एंजाइम (एसीई) इंहिबिटर्स ब्लड प्रेशर को कम करके नसों और धमनियों को रिलैक्स करते हैं। कार्डियोमायोपैथी में एसीई इंहिबिटर्स (ACE inhibitors in Cardiomyopathy) बॉडी के एंजाइम को एंजियोटेंसिन II के प्रोडक्शन को रोकते हैं। यह एक पदार्थ है जो आपकी ब्लड वेसल्स को संकुचित करता है। यह संकुचन हाय ब्लड प्रेशर का कारण बन सकता है और आपके हार्ट को ज्यादा मेहनत करने के लिए मजबूर कर सकता है।

एसीई इंहिबिटर्स का उपयोग कब किया जाता है? (When to use ACE inhibitors)

एसीई इंहिबिटर्स का उपयोग किया जाता है:

और पढ़ें: पुरुष हार्ट हेल्थ को लेकर अक्सर करते हैं ये गलतियां

कार्डियोमायोपैथी में एसीई इंहिबिटर्स के साइड इफेक्ट्स क्या हैं? (ACE inhibitors side effects)

एसीई इंहिबिटर्स का अधिकांश व्यक्तियों में साइड इफेक्ट्स नहीं होते हैं, लेकि कुछ मरीजों को एसीई इंहिबिटर्स का उपयोग नहीं करना चाहिए। एसीई इंहिबिटर्स आमतौर पर गर्भवती महिलाओं के लिए निर्धारित नहीं हैं क्योंकि उससे बर्थ डिफेक्ट का खतरा बढ़ सकता है। बाइलैटरल रीनल आर्टरी स्टेनोसिस (किडनी को ब्लड सप्लाई करने वाली आर्टरीज का संकुचित होना) वाले व्यक्ति किडनी फंक्शन में गिरावट का अनुभव कर सकते हैं।

इनके सबसे कॉमन साइड इफेक्ट्स हैं:

एसीई इंहिबिटर्स

  • खांसी
  • हाय ब्लड पोटैशियम का स्तर
  • लो ब्लड प्रेशर
  • चक्कर आना
  • सिर दर्द
  • कमजोरी आना
  • असामान्य स्वाद (मैटेलिक या सॉल्टी टेस्ट)
  • चेस्ट पेन
  • यूरिक एसिड के लेवल में वृद्धि
  • सूरज की रोशनी के प्रति अत्यधिक संवदेनशील होना
  • क्रिएटिनिन लेवल का बढ़ना

कार्डियोमायोपैथी में एसीई इंहिबिटर्स (ACE inhibitors in Cardiomyopathy) के सबसे दुर्लभ, लेकिन गंभीर, दुष्प्रभाव हैं:

  • किडनी फेलियर
  • एलर्जी
  • पैंक्रियाटाइटिस
  • लिवर डिस्फंक्शन
  • वाइट ब्लड सेल्स में कमी
  • टिश्यूज में स्वेलिंग (एंजियोएडेमा)

और पढ़ें: रिड्यूस्ड इजेक्शन फ्रैक्शन के साथ हार्ट फेलियर: दुनियाभर के 1 करोड़ से ज्यादा लोग प्रभावित हैं इस कंडिशन से

कौन सी दवाएं कार्डियोमायोपैथी (Cardiomyopathy) में दी जाने वाली एसीई इंहिबिटर्स दवाओं के साथ रिएक्ट कर सकती हैं?

कार्डियोमायोपैथी में एसीई इंहिबिटर्स (ACE inhibitors in Cardiomyopathy)

  • चूंकि, एसीई इंहिबिटर्स पोटेशियम के ब्लड लेवल को बढ़ा सकते हैं, पोटेशियम सप्लिमेंट, सॉल्ट के सब्स्टीट्यूट (जिसमें अक्सर पोटेशियम होता है), या शरीर के पोटेशियम को बढ़ाने वाली अन्य दवाओं के उपयोग से ब्लड में पोटेशियम का स्तर बढ़ सकता है।
  • एसीई इंहिबिटर्स लिथियम (एस्कलिथ, लिथोबिड) के ब्लड कंसंट्रेशन को भी बढ़ा सकते हैं और लिथियम के साइड इफेक्ट्स को बढ़ा सकते हैं।
  • रिसर्च के अनुसार एस्पिरिन और अन्य नॉनस्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (NSAIDS) जैसे कि इबुप्रोफेन (एडविल, चिल्ड्रन एडविल/मोट्रिन, मेडिप्रेन, मोट्रिन आदि), इंडोमेथेसिन (इंडोसिन, इंडोसिन-एसआर), और नेप्रोक्सेन एसीई इंहिबिटर्स के प्रभाव से कम होने वाले ब्लड प्रेशर को और कम कर सकता है।
  • ड्यूरेटिक लेने वाले मरीजों को एसीई इंहिबिटर्स शुरू करने पर ब्लड प्रेशर में अत्यधिक कमी का अनुभव हो सकता है। एसीई इंहिबिटर्स लेने से पहले ड्यूरेटिक या नमक का सेवन बढ़ाने से ब्लड प्रेशर में आने वाली अत्यधिक कमी को रोका जा सकता है।
  • एसीई इंहिबिटर्स को एआरबी के साथ नहीं लिया जाना चाहिए क्योंकि इस तरह के ड्रग्स कॉम्बिनेशन से हायपोटेंशन, हाइपरकेलेमिया और रीनल इम्पेयरमेंट (renal impairment) का खतरा बढ़ जाता है।
  • एसीई इंहिबिटर्स को एलिसिरिन (टेक्टुर्ना) के साथ नहीं लिया जाना चाहिए। यह दवाओं का एक और ग्रुप है जिसका उपयोग हाय ब्लड प्रेशर के इलाज के लिए किया जाता है क्योंकि इस तरह के कॉम्बिनेशन से किडनी फेलियर, एक्सेसिव लो ब्लड प्रेशर और हाइपरकेलेमिया का खतरा बढ़ जाता है।
  • नाइट्राइटोइड रिएक्शन (लक्षणों में फेशियल फ्लशिंग, मतली, उल्टी और लो ब्लड प्रेशर शामिल हैं) तब हो सकता है जब इंजेक्टेबल (गोल्ड सोडियम ऑरोथियोमालेट [मायोक्राइसिन]), रूमेटाइड अर्थराइटिस के इलाज में उपयोग किया जाता है, एसीई इंहिबिटर्स के साथ कंबाइन होता है।

कार्डियोमायोपैथी में एसीई इंहिबिटर्स (ACE Inhibitors): जानिए इनके प्रकार भी

कुछ एसीई इंहिबिटर्स शरीर में दूसरों की तुलना में अधिक समय तक रहते हैं, और दिन में एक बार दिए जाते हैं। कुछ एसीई इंहिबिटर्स को काम करने से पहले उन्हें शरीर में सक्रिय रूप में परिवर्तित करने की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, कुछ एसीई इंहिबिटर्स ब्लड में मौजूद एसीई की तुलना में टिशूज में पाए जाने वाले एसीई पर अधिक काम करते हैं। हालांकि, इस अंतर का महत्व या एक एसीई इंहिबिटर्स दूसरे से बेहतर है या नहीं, यह निर्धारित नहीं किया गया है।

ये भी जान लें

कार्डियोमायोपैथी में एसीई इंहिबिटर्स (ACE inhibitors in Cardiomyopathy) वृद्ध लोगों की तुलना में कम उम्र के लोगों के लिए बेहतर काम करते हैं। इसलिए, यदि हार्ट मसल्स से संबंधित कोई भी डिजीज का लक्षण आपको दिखाई देता है, तो बिना देर किए डॉक्टर से कंसल्ट करके इलाज शुरू कर देना चाहिए। कार्डियोमायोपैथी के उपचार में दवाएं, जीवनशैली में बदलाव या सर्जरी शामिल हो सकती हैं। हालांकि कार्डियोमायोपैथी का कोई इलाज नहीं है, आप इस स्थिति को मैनेज कर सकते हैं। डॉक्टर द्वारा सजेस्ट की गई दवाओं का सेवन समय पर करें। हेडली लाइफस्टाइल अपनाएं ताकि कार्डियोमायोपैथी को मैनेज करना आसान हो सके।

नोट: किसी भी दवा का उपयोग डॉक्टर की सलाह के बिना ना करें। ना ही अपने अनुसार दवा की डोज या समय में कोई बदलाव करें।

और पढ़ें: इस्कीमिक कार्डियोमायोपैथी : डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी के इस प्रकार के बारे में जानें!

उम्मीद करते हैं कि आपको कार्डियोमायोपैथी में एसीई इंहिबिटर्स (ACE inhibitors in Cardiomyopathy) से संबंधित जरूरी जानकारियां मिल गई होंगी। अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से सलाह जरूर लें। अगर आपके मन में अन्य कोई सवाल हैं तो आप हमारे फेसबुक पेज पर पूछ सकते हैं। हम आपके सभी सवालों के जवाब आपको कमेंट बॉक्स में देने की पूरी कोशिश करेंगे। अपने करीबियों को इस जानकारी से अवगत कराने के लिए आप ये आर्टिकल जरूर शेयर करें।

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Manjari Khare द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 13/08/2021 को
और Admin Writer द्वारा फैक्ट चेक्ड
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