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इस्कीमिक कार्डियोमायोपैथी : डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी के इस प्रकार के बारे में जानें!

इस्कीमिक कार्डियोमायोपैथी : डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी के इस प्रकार के बारे में जानें!

मेडलाइन प्लस के अनुसार कार्डियोमायोपैथी वो बीमारी है, जिसमे हार्ट मसल कमजोर व स्ट्रेच हो जाती है या इसमें कोई अन्य स्ट्रक्चल प्रॉब्लम होती है। कार्डियोमायोपैथी कई तरह की होती है और इसके एक प्रकार को डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी (Dilated Cardiomyopathy) के नाम से जाना जाता है। आज हम बात करने वाले हैं इस्कीमिक कार्डियोमायोपैथी (Ischemic Cardiomyopathy) की, जो डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी (Dilated Cardiomyopathy) का सबसे सामान्य प्रकार है। इस्कीमिक कार्डियोमायोपैथी में हार्ट की खून को पंप करने की क्षमता कम हो जाती है। क्योंकि, हार्ट का मुख्य पम्पिंग चैम्बर जिसे लेफ्ट वेंट्रिकल (Left ventricle) कहा जाता है। वो एंलार्जड, डायलेटेड और कमजोर हो जाता है। ऐसा अक्सर हार्ट अटैक या कोरोनरी आर्टरी डिजीज (Coronary Artery Disease) के कारण होता है। आइए जानें इस्कीमिक कार्डियोमायोपैथी (Ischemic Cardiomyopathy) के बारे में विस्तार से। सबसे पहले इसके लक्षणों से शुरू करते हैं।

इस्कीमिक कार्डियोमायोपैथी के लक्षण क्या हैं? (Symptoms of Ischemic Cardiomyopathy)

ऐसा हो सकता है कि हार्ट डिजीज की शुरुआती स्टेज में इस्कीमिक कार्डियोमायोपैथी (Ischemic Cardiomyopathy) का कोई भी लक्षण न नजर आए। लेकिन, अगर कोरोनरी आर्टरी डिजीज (Coronary Artery Disease) के कारण रक्त प्रवाह बाधित हो जाता है, तो आप इन लक्षणों को अनुभव कर सकते हैं:

  • बहुत अधिक थकावट (Extreme fatigue)
  • सांस लेने में समस्या (Shortness of breath)
  • चक्कर आना या बेहोशी (Lightheadedness, or fainting)
  • हार्ट पाल्पिटेशन (Heart Palpitations)
  • टांगों और पैरों में सूजन (Swelling in legs and feet)
  • पेट में सूजन (Swelling in Abdomen)
  • खांसी या कंजेशन जो लंग्स में फ्लूइड पैदा हो जाता है (Cough or Congestion)
  • सोने में समस्या (Difficulty in sleeping)
  • वजन का बढ़ना (Weight gain)

इस समस्या के उपचार के लिए इसके लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है। अब जानते हैं कि इस्कीमिक कार्डियोमायोपैथी (Ischemic Cardiomyopathy) के कारण और रिस्क फैक्टर्स कौन से हैं?

और पढ़ें : डायलेटेड कार्डियोमायोपैथी के उपचार में एवाब्राडीन के प्रयोग के बारे में जानें!

इस्कीमिक कार्डियोमायोपैथी के कारण (Causes of Ischemic Cardiomyopathy)

इस्कीमिक कार्डियोमायोपैथी (Ischemic Cardiomyopathy) के मुख्य दो कारण हैं। एक कोरोनरी आर्टरी डिजीज (Coronary Artery Disease) और दूसरा हार्ट अटैक (Heart Attack)। बच्चों में दिल के ब्लड वेसल्स में डिफेक्ट्स के कारण उनके हार्ट में ब्लड सप्लाई कम हो सकती है। यह समस्या बच्चों को जन्म के समय हो सकती है। हार्ट ब्लड वेसल में इशूज के कारण बच्चा अन्य कुछ बीमारियों का सामना भी कर सकता है जैसे कावासाकी रोग (Kawasaki disease)। वयस्कों में कोरोनरी आर्टरी डिजीज के कारण हार्ट में ब्लड सप्लाई कम हो सकती है जिससे हार्ट अटैक का खतरा हो सकता है।

और पढ़ें : कार्डियोमायोपैथी : इन तरीकों से बचाव संभव है इस हार्ट डिजीज से!

इस्कीमिक कार्डियोमायोपैथी के रिस्क फैक्टर (Risk factors of Ischemic Cardiomyopathy)

जैसा की पहले बताया गया है कि इस्कीमिक कार्डियोमायोपैथी (Ischemic Cardiomyopathy) की समस्या आमतौर पर हार्ट अटैक या कोरोनरी आर्टरी डिजीज (Coronary Artery Disease) के कारण होती है। इसके रिस्क फैक्टर्स इस प्रकार हैं :

  • कोरोनरी हार्ट डिजीज की फॅमिली हिस्ट्री (Family history of coronary heart disease)
  • हाय ब्लड प्रेशर (High blood pressure)
  • मोटापा (Obesity)
  • डायबिटीज मलायट्स (Diabetes mellitus)
  • एंड- स्टेज किडनी डिजीज (End-stage kidney disease)
  • एमिलॉयडोसिस (Amyloidosis)
  • तंबाकू स्मोकिंग की हिस्ट्री (History of smoking tobacco)
  • एल्कोहॉल (Alcohol)

यही नहीं, पुरुषों को कोरोनरी आर्टरी डिजीज (Coronary Artery Disease) के विकसित होने की संभावना अधिक होती है।लेकिन अगर 35 की उम्र से अधिक उम्र की महिला जो ओरल कंट्रासेप्टिव लेती है या तंबाकू का सेवन करती है, उसे भी यह रोग होने की संभावना अधिक रहती है। अब जानिए इस रोग के निदान के बारे में।

इस्कीमिक कार्डियोमायोपैथी (Ischemic Cardiomyopathy)

और पढ़ें : सेप्टल मायेक्टमी : हायपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी की स्थिति में की जाने वाली सर्जरी के बारे में जानें!

इस्कीमिक कार्डियोमायोपैथी के निदान (Diagnosis of Ischemic Cardiomyopathy)

इस्कीमिक कार्डियोमायोपैथी (Ischemic Cardiomyopathy) के निदान के लिए डॉक्टर रोगी से उनके लक्षणों के बारे में पूछेंगे और आपकी फिजिकल जांच भी करेंगे। इसके साथ ही डॉक्टर अन्य टेस्ट्स की सलाह भी दे सकते हैं, जैसे :

  • इमेजिंग टेस्ट जैसे कंप्यूटेड टोमोग्राफी स्कैन (Computed tomography) या मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (Magnetic resonance imaging)
  • इकोकार्डियोग्राम (Echocardiogram) जो हार्ट का अल्ट्रासाउंड है।
  • इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम को (Electrocardiogram) हार्ट की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी को जांचने के लिए किया जाता है।
  • इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी स्टडी (Electrophysiology study) को आपके दिल की इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी को और समझने के लिए किया जाता है।
  • स्ट्रेस टेस्ट (Stress test) : एक्सरसाइज करते हुए हार्ट की जांच के लिए यह टेस्ट किया जाता है।
  • कार्डिएक कैथेटेराइजेशन (Cardiac catheterization) यह टेस्ट इस बात को जांचने के लिए किया जाता है कि हार्ट सही से काम कर रहा है या नहीं।

इसके अलावा भी डॉक्टर कुछ अन्य टेस्ट्स की सलाह के सकते हैं। निदान के बाद इस समस्या के उपचार के विकल्पों को निर्धारित किया जाता है। इसके विकल्प इस प्रकार हैं।

और पढ़ें : कार्डियोमायोपैथी किस तरह से हार्ट को पहुंचाता है नुकसान, रखें ये सावधानियां

इस्कीमिक कार्डियोमायोपैथी का उपचार (Treatment of Ischemic Cardiomyopathy)

इस्कीमिक कार्डियोमायोपैथी (Ischemic Cardiomyopathy) के उपचार के लिए सबसे पहले डॉक्टर इसके पीछे के अंडरलायिंग कारणों की जांच करेंगे। अधिकतर मामलों में इसका कारण कोरोनरी आर्टरी डिजीज (coronary Artery Disease) होता है। इसके इलाज के लिए डॉक्टर रोगी को दवाई, सर्जरी और लाइफस्टाइल में बदलाव की सलाह दे सकते हैं। जानते हैं इनके बारे में:

मेडिकेशन्स (Medications)

इस समस्या के उपचार के लिए डॉक्टर इसके लक्षणों को कम करने, जटिलताओं को दूर करने और हार्ट फंक्शन को सुधारने के लिए कुछ दवाईयों की सलाह दे सकते हैं। यह दवाईयां इस प्रकार हैं:

  • बीटा-ब्लॉकर (Beta-blocker) ताकि ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट को कम किया जा सके।
  • कैल्शियम चैनल ब्लॉकर (Calcium Channel Blocker) जो आर्टरीज को रिलैक्स करती हैं और उन्हें वाइड करती हैं। इसके साथ ही इनसे ब्लड प्रेशर लो होता है।
  • एल्डोस्टेरॉन इन्हीबिटर (Aldosterone Inhibitor) ताकि ब्लड प्रेशर को लो किया जा सके और शरीर अतिरिक्त फ्लूइड से छुटकारा पा सके। जिससे कुछ लक्षणों जैसे सूजन और सांस लेने में समस्या से छुटकारा मिल सके।
  • डाययूरेटिक्स (Diuretics) का प्रयोग भी किया जा सकता है। ताकि, शरीर से अतिरिक्त फ्लूइड को बाहर निकाला जा सके, ब्लड प्रेशर (Blood Pressure) को लो किया जाए और हार्ट मसल के काम को कम किया जा सके।
  • अन्य मेडिकेशन थेरेपीज (Other Medication Therapy) की सलाह भी दी जा सकती है ताकि हार्ट रेट और रिदम को कंट्रोल किया जा सके।
  • ब्लड थिनर (Blood thinner)
  • हाय कोलेस्ट्रॉल के उपचार के लिए दवाईयां (Medication to treat high cholesterol)

और पढ़ें : हायपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी: हार्ट से जुड़ी इस समस्या के बारे में जानते हैं आप?

सर्जरी और अन्य तरीके (Surgery and other procedures)

डॉक्टर दवाईयों के अलावा सर्जरी और अन्य तरीकों की उपचार की सलाह दे सकते हैं। इसके उदाहरण इस प्रकार हैं :

  • पेसमेकर की इम्प्लांटेशन (Implantation of Pacemaker), डीफिब्रिलेटर (Defibrillator) या दोनों ताकि हार्ट की इलेक्ट्रिक फंक्शन को सुधारा जा सके।
  • एथेरेक्टॉमी (Atherectomy) ताकि आर्टरीज से प्लाक को रिमूव किया जा सके।
  • बैलून एंजियोप्लास्टी (Balloon Angioplasty) ताकि तंग आर्टरीज में ब्लड फ्लो को सुधारने में मदद मिल सके।
  • स्टंट (Stent) यह वो डिवाइस है जिसे आर्टरीज को ओपन रखने के लिए डिजाइन किया जाता है।
  • रेडिएशन थेरेपी (Radiation therapy)

गंभीर स्थितियों में डॉक्टर कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्ट (Coronary Artery Bypass Graft) की सलाह भी दे सकते हैं। यह एक ओपन चेस्ट सर्जरी है। अगर हार्ट में हुआ डैमेज बहुत अधिक हो तो डॉक्टर हार्ट ट्रांसप्लांट भी कर सकते हैं। दवाईयों और सर्जरी के साथ ही रोगी का हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना भी बेहद जरूरी है।

और पढ़ें : हार्ट डिजीज में एसेंशियल ऑयल्स का प्रयोग कितना सुरक्षित है, जानिए

लाइफस्टाइल में परिवर्तन (Change in Lifestyle)

इस्कीमिक कार्डियोमायोपैथी (Ischemic Cardiomyopathy) के मुख्य कारण कोरोनरी आर्टरी डिजीज (Coronary Artery Disease) के उपचार और जटिलताओं के रिस्क को कम करने के लिए रोगी को अपने लाइफस्टाइल पर खास ध्यान देना चाहिए और उसमें कुछ परिवर्तन करने चाहिए, जैसे:

  • हार्ट हेल्दी आहार का सेवन करें
  • स्मोकिंग, शराब और तंबाकू से बचें
  • नियमित व्यायाम करें
  • वजन को हेल्दी रखें
  • तनाव से बचें
  • पर्याप्त नींद लें।

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और पढ़ें : हार्ट डिजीज ही नहीं बल्कि उससे जुड़ी गंभीर समस्याओं के बारे में भी आपको होनी चाहिए जानकारी!

यह तो थी इस्कीमिक कार्डियोमायोपैथी (Ischemic Cardiomyopathy) के बारे में पूरी जानकारी। यह समस्या दुर्लभ है, लेकिन समय पर इसके लक्षणों की पहचान और सही उपचार से आप जटिलताओं से बच सकते हैं। इसके लिए आप नियमित रूप से डॉक्टर से जांच कराएं और अगर आपको यह समस्या है तो डॉक्टर की सलाह का पूरी तरह से पालन करें। इस्कीमिक कार्डियोमायोपैथी (Ischemic Cardiomyopathy) या किसी भी अन्य समस्या से बचने और उन्हें मैनेज करने का सबसे अच्छा तरीका है अपनी लाइफ में अच्छे परिवर्तन लाना। लेकिन, इन परिवर्तनों को थोड़े समय के लिए न करें बल्कि लॉन्ग टर्म हेल्दी हैबिट्स को अपना कर आपको पूरी उम्र स्वस्थ रहने में मदद मिलेगी।

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AnuSharma द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 02/08/2021 को
डॉ. हेमाक्षी जत्तानी के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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