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आईबीडी और हार्ट डिजीज होने पर क्या एक्सरसाइज करना चाहिए?

आईबीडी और हार्ट डिजीज होने पर क्या एक्सरसाइज करना चाहिए?

एक्सरसाइज, एक स्वस्थ जीवनशैली के लिए बहुत जरूरी है और इसे हर दिन करने की सलाह दी जाती है। लेकिन कुछ लोगों को एक्सरसाइज को लेकर कई तरह की सावधानियां बर्तनी की आवश्यकता होती है। जिन लोगों को इंफ्लामेटरी बाउल डिजीज और हार्ट डिजीज जैसी बीमारी होती है, उनके लिए रोज व्यायाम करना कठिन हो जाता है। जो लोग क्रोहन रोग या अल्सरेटिव कोलाइटिस के शिकार होते हैं, उनके लिए नियमित रूप से व्यायाम करने में कई दिक्कते आती हैं। जानिए आईबीडी और हार्ट डिजीज (IBD & Heart Disease) होने पर एक्सरसाइज करना चाहिए? इसी के साथ जानिए आईबीडी और हार्ट डिजीज (IBD & Heart Disease) में एक्सरसाइज के दौरान किन बातों का ध्यान रखें:

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आईबीडी(IBD) क्या है?

इंफ्लामेटरी बाउल सिंड्रोम यानि कि पेट फूलने (Stomach Bloating) की समस्या, जिसके कई कारण हो सकते हैं। लेकिन जिसे भी यह समस्या होती है, उनके लिए यह काफी बेचैनी भरी होती है। कई लोगों में गैस, बदहजमी, पेट की जलन, अपच जैसी कई समस्याओं से अलग पेट फूलने का एक कारण इंफ्लामेट्री बाउल डिसीज (IBD) भी है। इसके लक्षण बहुत सामान्य है। इस दिक्कत का समय रहते इलाज बहुत जरूरी है। ऐसे में आईबीडी में एक्सरसाइज करने में भी मरीजों को कई दिक्कते आती हैं।

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हार्ट डिजीज (Heart Disease) क्या है?

हार्ट डिजीज से तात्पर्य ऐसी समस्या से है, जो दिल को प्रभावित करती है। दिल की बीमारी को कोरोनरी आर्टरी डिजीज (Coronary artery disease), स्ट्रोक, चेस्ट पेन, हार्ट अटैक और हार्ट फ्लयोर जैसी कई गंभीर स्थितियां शामिल हो सकती हैं। हार्ट पेशेंट को उनकी डेली लाइफ में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। यानि की डायट से लेकर एक्सरसाइज तक, सभी को सावधानी के साथ करना होता है।

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आईबीडी और हार्ट डिजीज (IBD & Heart Disease) में एक्सरसाइज करना सही है?

कई ऐसे मरीज होते हैं, जिन्हें आईबीडी और हार्ट डिजीज की समस्या, दोनों ही हो जाती है, जोकि उनके लिए काफी मुश्किल भरी होती है। कई अनुसंधान से पता चलता है कि जब आईबीडी के शिकार लोग कुछ व्यायाम करने का प्रयास करते हैं, तो यह उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने में मददगार है। जबकि आईबीडी में एक्सरसाइज करना मुश्किल हो जाता है। इसी के साथ जब हार्ट की समस्या हो, तो भी हर तरह की एक्सरसाइज नहीं की जा सकती है। लेकिन वास्तव में, व्यायाम आईबीडी या अन्य हेल्थ प्राॅब्लम के उपचार में सहायक हो सकता है।

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आईबीडी और हार्ट डिजीज में व्यायाम का प्रभाव (Exercise effects in IBD & Heart Disease)

जिन लोगों के पास आईबीडी नहीं है, उन पर किए गए अध्ययन से पता चलता है कि कम से मध्यम तीव्रता वाले व्यायाम के कार्यक्रम को अपनाने से प्रतिरक्षा प्रणाली को फायदा हो सकता है। इसका मतलब है कि मध्यम मात्रा में व्यायाम करने से आम संक्रमणों से लड़ने में मदद मिल सकती है। आईबीडी और हार्ट डिजीज होने पर हाय इंटेस एक्सरसाइज की जगह हल्के व्यायाम किए जा सकते हैं। इससे पेट का फैट भी कम होता रहेगा। आमतौर पर, प्रति सप्ताह 3०० मिनट की मध्यम-तीव्रता या 150 मिनट व्यायाम की सलाह दी जाती है। इसी के साथ इसके कई हेल्थ बेनेफिट्स भी हैं, जिनमें शामिल हैं:

हड्डियों के लिए फायदेमंद है (Healthy Bone)

आईबीडी वाले लोगों में आईबीडी के बिना लोगों की तुलना में ऑस्टियोपोरोसिस विकसित होने की संभावना अधिक होती है। जिनमें कैल्शियम की कमी, कुपोषण और आईबीडी के इलाज के लिए स्टेरॉयड दवाओं का उपयोग शामिल है। व्यायाम, और विशेष रूप से, वजन बढ़ाने वाले व्यायाम, हड्डियों के घनत्व को बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। हड्डी के नुकसान के जोखिम को निर्धारित करने के लिए एक चिकित्सक के साथ काम करना, किस प्रकार के व्यायाम उपयोगी हैं, और आपको कितना व्यायाम करना चाहिए, सहायक निवारक उपाय हो सकते हैं।

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डिप्रेशन (Depression)

कुछ सबूत हैं कि आईबीडी वाले लोग स्वस्थ लोगों की तुलना में अधिक बार अवसाद का अनुभव कर सकते हैं। यह समझ में आता है, क्योंकि एक पुरानी बीमारी के साथ जीना चुनौतीपूर्ण है- आईबीडी जटिल है, इलाज करना मुश्किल है, और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। व्यायाम से कुछ को लाभ हो सकता है क्योंकि यह मूड विकारों में मदद करने के लिए दिखाया गया है। अवसाद विशेष रूप से व्यायाम और क्रोहन रोग या अल्सरेटिव कोलाइटिस के अध्ययन का केंद्र नहीं था, लेकिन रोगियों ने रिपोर्ट किया कि व्यायाम कार्यक्रम शुरू करने के बाद उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।

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थकान (Fatigue)

यह उल्टा लग सकता है, लेकिन एक व्यायाम कार्यक्रम आईबीडी से संबंधित थकान से निपटने में मददगार हो सकता है। थकान अक्सर रोगियों द्वारा जीवन की गुणवत्ता पर एक बड़ा प्रभाव डालने और व्यायाम आहार शुरू करने से बचने के कारण के रूप में चर्चा की जाती है। एक अध्ययन ने नैदानिक ​​​​उपकरणों के साथ मांसपेशियों की थकान को मापा और साथ ही क्रोहन रोग और स्वस्थ नियंत्रण वाले लोगों में स्वयं-रिपोर्ट की गई थकान को मापा।

अन्य फायदे

  • शरीर में रक्त संचार अच्छा बना रहता है
  • अन्य बीमारियों का खतरा कम होता है
  • डायबिटीज यदि है, तो वो कंट्रोल में रहती है
  • कैंसर का खतरा कम होता है।

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आईबीडी और हार्ट डिजीज होने पर आपको डायट से लेकर एक्सरसाइज हमेशा डॉक्टर के सलाह पर ही करनी चाहिए। जर्बदस्ती एक्सरसाइज करने पर जोर नहीं देना चाहिए, नहीं तो यह आपके जान के लिए खतरा हो सकता है। अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क करें।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

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Niharika Jaiswal द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 29/07/2021 को
और Admin Writer द्वारा फैक्ट चेक्ड
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