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Insulin and kidney disease: इंसुलिन एंड किडनी डिजीज में क्या संबंध है?

Insulin and kidney disease: इंसुलिन एंड किडनी डिजीज में क्या संबंध है?

जिन मरीजों की डायबिटीज कंट्रोल (Diabetes control) नहीं नहीं हो पाती है, उन मरीजों को डॉक्टर इंसुलिन लेने की सलाह देते हैं। इंसुलिन एक हॉर्मोन है, जिसका उत्पदान पैंक्रियाज द्वारा होता है। जिन मरीजों में इसका निमार्ण नहीं हो पाता है, तो ऐसे में डॉक्टर इंसुलिन इंजेक्शन (Insulin Injection) की सलाह देते हैं। इंसुलिन ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखने में मदद करता है। लेकिन डायबिटीज के मरीजों में इंसुलिन को लेकर कई मिथ सुनने को मिलते हैं। उन्हें लगता है कि इंसुलिन लेने के कई साइड इफैक्ट (Side effect) हो सकते हैं, सबसे ज्यादा लोगों को किडनी खराब होने के खतरे का डर रहता है। लेकिन यह मिथक, हां पर इसे सही ढंग से लेना बहुत जरूरी है। इंसुलिन एंड किडनी डिजीज (Insulin and kidney disease) को लेकर लोगों में कई लोगों को कई तरह के मिथक होते हैं, आइए जानते हैं कि इंसुलिन एंड किडनी डिजीज (Insulin and kidney disease) में क्या संबंध है।

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इंसुलिन एंड किडनी डिजीज में संबंध (Insulin and kidney disease)

पहली बार इंसुलिन की खोज सन् 1915 के लगभग हुई थी। डायबिटीज के मरीजों में इसका इस्तेमाल होते हुए लगभग 100 वर्ष से अधिक का समय हो गया है, हालाकि, लोग तब भी हिचकिचाते थें। जब हम उनके डायबिटीज के उपचार (Treatment of diabetes) के रूप में इसकी चर्चा करते हैं। तो यह मधुमेह की देखभाल (Diabetes care) करने के तरीकों में से एक है। इंसुलिन एक हाॅर्मोन (insulin a hormone) है, जो अग्न्याशय में बनता है। यह रक्त में ग्लूकोज (शर्करा) की मात्रा को नियंत्रित करता है, और जब इसमें गड़बड़ी आ जाती है, तो ग्लूकोज के स्तर को प्रबंधित और नियंत्रित करने के लिए इंसुलिन बाहरी रूप से दिया जाता है। इसलिए डायबिटीज पेशेंट को, जिन पर ओरल दवा काम नहीं करती है, उन्हें इंसुलिन इंजेक्शन दिया जाता है।

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इंसुलिन और किडनी डिजीज को लेकर लोगों में मिथक (Insulin and kidney disease Myth)

अगर इंसुलिन एंड किडनी डिजीज (Insulin and kidney disease) को लेकर बात करें, तो कई लोगों काे यह मानना ​​है कि मधुमेह के इलाज के लिए इंसुलिन का उपयोग अंतिम उपाय के रूप में किया जाता है और यह कि यह अन्य जटिलताओं का कारण बनता है, साथ ही इसे प्रबंधित करना बहुत कठिन है। परन्तु यह सच नहीं है; आज के समय में इंसुलिन थेरिपी (Insulin therapy) को सबसे प्रभावी उपचार विकल्प के रूप में देखा जाता है, क्योंकि यह हायपोग्लाइसीमिया को बहुत अच्छी तरह से नियंत्रित करता है। यह अधिक अनुमानित है, इसलिए रोगी स्वस्थ रक्त शर्करा के स्तर और उच्च और निम्न रक्त शर्करा से कम दुष्प्रभाव देख सकते हैं। चिकित्सा उपकरणों में प्रगति और चिकित्सा तंत्र में निवाचारों के साथ, पोर्टेबल इंसुलिन पेन और इंसुलिन पंप जैसे अधिक सुविधाजनक विधियां अब डायबिटीज पेशेंट (Diabetic patient) के लिए उपलब्ध हैं। कई प्रकार और शक्तियों के साथ, इंसुलिन को मौखिक दवाओं की तुलना में वैयक्तिकृत करना आसान होता है। इसका उपयोग अक्सर अन्य गैर-इंसुलिन उपचारों के संयोजन में किया जाता है।

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क्या है फैक्ट, जानिए यहां (Fact)

इंसुलिन एंड किडनी डिजीज (Insulin and kidney disease) के बारे में बात कर रहे हैं, तो लोगों को इंसुलिन के बारे में एक और डर है कि यह किडनी फंक्शन को प्रभावित करता है। वास्तव में, मधुमेह के रोगी में गुर्दे की कई समस्याएं (Kidney Problem) देखी जा सकती हैं, लेकिन इसका कारण इंसुलिन ही नहीं। मधुमेह, खुद में ही गुर्दे की बीमारी के कारणों में एक जटिल कारण है। ऐसा जरूरी नहीं कि इंसुलिन के कारण (Insulin Causes) हो किडनी डिजीज हो। कुछ विशेषज्ञों का मानना ​​है कि गुर्दे के फिल्टरिंग फंक्शन में रक्त के संचलन में परिवर्तन की एक महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।

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डायबिटीज पेशेंट के लिए इंसुलिन पेन का उपयोग

डायबिटीज पेशेंट (Diabetic patient) वैसे, इंसुलिन की जग ओरल दवाएं लेना ज्यादा पसंद करते हैं। लेकिन इन दोनों का भी अपना एक अलग-अलग फैक्ट है, उदाहरण के लिए, ओरल मेडिसिन दवा तब लेना ज्यादा ठीक रहता है, जब तक कि आपका मधुमेह प्रारंभिक अवस्था में हो। ओरल दवाएं, हायपरग्लाइसेमिया(Hypoglycemia) या हायपरग्लेसेमिया (Hyperglycemia) के अधिक शुगर लेवल और उतार-चढ़ाव होने पर वो परिणाम नहीं देती हैं। हाय शुगर लेवल वालों के लिए अवस्था में इंसुलिन इंजेक्शन ज्यादा अच्छा परिणाम देता है। रोगी की आवश्यकतानुसार डॉक्टर दिन भर में इंसुलिन की आवश्यकता के आधार पर दो बार या तीन बार इंसुलिन की सलाह दे सकते हैं।

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इंसुलिन एंड किडनी डिजीज: डाॅक्टर से जांच है जरूरी (Use of insulin pen for diabetic patient)

प्रारंभिक अवस्था में, कोई लक्षण नहीं हो सकता है। जैसे-जैसे किडनी की कार्यक्षमता और कम होती जाती है, जहरीले अपशिष्ट जमा होते जाते हैं, और रोगी अक्सर अपने पेट संबंधी समस्या महसूस (Stomach Problem) करते हैं, भूख कम हो जाती है, हिचकी आती है और पानी एकत्रित के कारण उनका वजन बढ़ जाता है। कई बार बीमारी के लक्षण नजर नहीं आते हैं, तो बीमारी का पता नहीं चल पाता है, अगर आपको कोई बीमारी होती है, तो हल्के या कम लक्षणों के दिखने पर ही आपको जांच करानी चाहिए, ताकि बीमारी के बारे में जानकारी मिल सके और समय पर उसका ट्रीटमेंट भी हो सके।

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अगर आपको ऐसी कोई दिक्कतें हो रही हैं, तो अपने डॉक्टर से पूछें! यदि आप मधुमेह रोगी हैं, तो अपने चिकित्सक से इस बारे में बात करना महत्वपूर्ण है कि आपकी देखभाल व्यवस्था में इंसुलिन को शामिल करने का सबसे अच्छा समय कब है। आपकी मधुमेह देखभाल टीम के हिस्से के रूप में एक प्रमाणित मधुमेह शिक्षक (सीडीई) होना भी महत्वपूर्ण है, खासकर जब आप अपना इंसुलिन आहार शुरू करते हैं या बदलते हैं। अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से पूछें। किडनी के कार्य के बारे में प्रश्न पूछें और किसी भी चिंता की रिपोर्ट करें। मधुमेह और गुर्दे की बीमारियों का प्रबंधन साथ-साथ चलता है। आज डॉक्टर से बात करो।

हैलो हेल्थ किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार उपलब्ध नहीं कराता है। इस आर्टिकल में हमने आपको इंसुलिन एंड किडनी डिजीज (Insulin and kidney disease) के बारे में जानकारी दी है। उम्मीद है आपको हैलो हेल्थ की दी हुई जानकारियां पसंद आई होंगी। अगर आपको इस संबंध में अधिक जानकारी चाहिए, तो हमसे जरूर पूछें। हम आपके सवालों के जवाब मेडिकल एक्स्पर्ट्स द्वारा दिलाने की कोशिश करेंगे।

 

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Niharika Jaiswal द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 21/09/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड