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Atrial fibrillation: जानिए दिल से जुड़ी तकलीफ एट्रियल फायब्रिलेशन के बारे में और बचाव के तरीके!

    Atrial fibrillation: जानिए दिल से जुड़ी तकलीफ एट्रियल फायब्रिलेशन के बारे में और बचाव के तरीके!

    बॉडी के हर ऑर्गन का अपना काम होता है। ठीक ऐसी ही हार्ट भी अपना काम करता रहता है। वैसे दिल के कामों में फर्क सिर्फ इतना है कि ये नॉन स्टॉप धड़कता रहता है और अगर इसके धड़कने के पैटर्न में बदलाव आ जाए तो ये खतरे की घंटी हो सकती है। इसलिए आज इस आर्टिकल में हम आपके साथ एट्रियल फायब्रिलेशन (Atrial fibrillation) से जुड़ी जानकारी शेयर करने जा रहें हैं।

    एट्रियल फायब्रिलेशन (Atrial fibrillation) क्या है?

    एट्रियल फायब्रिलेशन (Atrial fibrillation)

    एट्रियल फायब्रिलेशन एक प्रकार का एरिथमिया (Arrhythmia) है। इसमें हार्ट के इलेक्ट्रिकल सिस्टम में समस्या आने के कारण दिल की धड़कनें आसमान रूप से चलने लगती हैं। हार्ट का इलेक्ट्रिकल सिस्टम दिल की धड़कनों को एक रिदम में रखता है, जिससे हृदय की गति और दिल धड़कने का पैटर्न बना रहता है। एट्रियल फाइब्रिलेशन व्यस्क और हृदय रोग से पीड़ित लोगो में ज्यादा होता है। जो लोग मोटापे से परेशान है उन लोगों को भी एट्रियल फाइब्रिलेशन की परेशानी हो सकती है।

    और पढ़ें : हार्ट प्रॉब्लम है! आम के सेवन से पहले जानिए क्या कहती है रिसर्च रिपोर्ट्स?

    एट्रियल फायब्रिलेशन के लक्षण क्या हो सकते हैं? (Symptoms of Atrial fibrillation)

    एट्रियल फायब्रिलेशन की समस्या होने पर कई बार ऐसा हो सकता है की इसका पता ही न चले। अगर बहुत तेज दिल की धड़कनों का एहसास हो रहा है, तो ये एट्रियल फाइब्रिलेशन का एक संकेत माना जा सकता है। इसलिए निम्नलिखित लक्षणों को इग्नोर नहीं करना चाहिए। जैसे:

    सांस लेने में परेशानी महसूस होना।

    • सीने में दर्द महसूस होना।
    • बेहोश होना।
    • अत्यधिक थकान महसूस होना।
    • फिजिकल एक्टिविटी या एक्सरसाइज नहीं कर पाना।

    अगर आपको इनमें से कोई भी लक्षण नजर आने पर डॉक्टर से जरूर संपर्क करें।

    और पढ़ें : Sinus Arrhythmia: साइनस एरिथमिया क्या है? जानिए इसके लक्षण, कारण और इलाज।

    एट्रियल फाइब्रिलेशन के कारण क्या हो सकते हैं? (Causes of Atrial fibrillation)

    हृदय में चार अलग-अलग हिस्सों में बंटा होता है। ऊपर के दो चैम्बर्स को एट्रिया (Atria) कहते हैं और नीचे के दो हिस्सों को वेंट्रिकल्स (Ventricles ) कहते हैं। हार्ट के सभी हिस्सों के काम करने का एक प्रतिरूप होता है। हृदय के इलेक्ट्रिकल प्रणाली में कुछ कोशिकाएँ होती हैं जो की हृदय के सही ढंग से धड़कने में मदद करती हैं। अगर ये कोशिकाएँ सही ढंग से काम नहीं कर रही हैं तो जरुरत से ज्यादा इलेक्ट्रिकल सिग्नल जाने की वजह से हृदय असाधारण ढंग से धड़केगा और परेशानियां हो सकती हैं।

    एट्रियम के अंदर का सारा खून वेंट्रिकल्स में नहीं जा पाएगा जिसकी वजह से बहुत सारा खून जम जाएगा और खून के थक्के बन जाएंगे। खून के थक्को की वजह से बहाव में रुकावट आएगी और स्ट्रोक की संभावना हो सकती है।

    इस स्थिति में शरीर में खून पहुंचाने के लिए हृदय को जरुरत से ज्यादा काम करना पड़ेगा। फाइब्रिलेशन के सभी कारणों में से बढ़ती उम्र इसका सबसे बड़ा कारण है।

    इसके और भी कारण हो सकते हैं :

    एट्रियल फाइब्रिलेशन की समस्या इन आदतों की वजह से बढ़ सकती है :

    • बहुत अधिक मात्रा में कैफीन का सेवन करना।
    • शराब का सेवन करना।
    • स्मोकिंग करना।
    • बहुत ज्यादा वजन बढ़ना।
    • ब्लड प्रेशर का बहुत ज्यादा बढ़ना।
    • इस बीमारी के किसी लक्षण को अनदेखा करना।
    • डॉक्टर के निर्देशों को न मानना।

    और पढ़ें : Heartbeat Vector: तेज दिल की धड़कन? कहीं ‘हार्ट बीट वेक्टर’ की राह में तो नहीं आप!

    किन परिस्थितियों में आपको एट्रियल फाइब्रिलेशन का खतरा हो सकता है? (Risk factor of Atrial fibrillation)

    • बढ़ती उम्र में होने की स्थिति में आपको एट्रियल फाइब्रिलेशन का खतरा हो सकता है।
    • अगर आपको कोई हृदय रोग है।
    • बढे़ हुए ब्लड प्रेशर की स्थिति में फाइब्रिलेशन हो सकता है।
    • बहुत ज्यादा शराब पीने से भी फाइब्रिलेशन हो सकता है।
    • मोटापे की वजह से।
    • परिवार में एट्रियल फाइब्रिलेशन की हिस्ट्री होने पर भी इस स्थिति के होने की सम्भावना हो सकती है।

    इन ऊपर बताई गई स्थितियों में एट्रियल फाइब्रिलेशन का खतरा ज्यादा रहता है।

    एट्रियल फाइब्रिलेशन की जांच कैसे की जा सकती है? (Diagnosis of Atrial fibrillation)

    एट्रियल फाइब्रिलेशन की जांच के लिए डॉक्टर इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम पर आपकी धड़कनों की गति को मापेंगें और हृदय के अंदर होने वाली गतिविधियों को अल्ट्रासाउंड की मदद से देखेंगे। अगर आपका इलेक्ट्रिकल फाइब्रिलेशन स्थिर नहीं है तब डॉक्टर पोर्टेबल रिकॉर्डर (हॉल्टेर मॉनिटर) की मदद से हृदय की धड़कनो को देखेंगे और इलाज करेंगे।

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    एट्रियल फाइब्रिलशन का इलाज कैसे कर सकते हैं? (Treatment for Atrial fibrillation)

    इलाज की शुरुआत एट्रियल फाइब्रिलेशन के कारण के पता लगाने से करेंगे। अगर आपका फाइब्रिलेशन थायरॉइड की वजह से है तो डॉक्टर आपके थायरॉइड का इलाज करेंगे। अगर फाइब्रिलेशन का कारण कैफीन या एल्कोहॉल है, तो इस केस में डॉक्टर आपको कैफीन और छोड़ने के लिए कहेंगे।

    इलाज की शुरुआत दवाओं से की जाएगी जिससे हृदय की धड़कनों को नियंत्रित किया जा सके। ये दवाएं हृदय की धड़कनों को नियंत्रित करेंगी और हृदय साधारण रूप से काम करेगा। इससे एट्रियल फाइब्रिलेशन अपने आप भी रुक सकता है और आगे इलाज करवाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इन दवाओं कोएंटीएरिथिमिक (Antiarrhythmic medicines ) भी कहते हैं।

    खून के थक्कों को रोकने के लिए डॉक्टर पतला करने वाली दवाएं भी दे सकते हैं। इन्हे एंटी-कॉग्यूलेन्ट कहते हैं जैसे वार्फरिन (Coumadin)। इन दवाओं के हानिकारक प्रभाव भी हो सकते हैं जैसे की खून बहना और चक्कते पड़ना। इसलिए डॉक्टर आपकी दवाएँ पूरी जांच के बाद ही देंगे।

    इलाज के दौरान हृदय की गति को दोबारा साधारण करने के लिए आपको कार्डियोवर्जन (Cardioversion ) की आवश्यकता पड़ सकती है। प्रक्रिया के दौरान डॉक्टर आपको शॉक भी दे सकते हैं जिससे कुछ मिनटों के लिए आपका हृदय काम करना बंद कर देगा लेकिन उसके बाद संभव है की हृदय अपनी साधारण स्थिति में वापस आ जाएगा। हृदय विशेषज्ञ डुअल चैम्बर पेसमेकर हृदय में लगा सकते हैं। आपको हार्ट कैथिटर या फिर सर्जरी की जरुरत भी पड़ सकती है। इसे मेज प्रक्रिया कहेंगे सर्जरी की मदद से हृदय के खराब हिस्से को निकाल दिया जाता है।

    एट्रियल फाइब्रिलेशन से बचाव कैसे करें? (Tips to control Atrial fibrillation)

    एट्रियल फाइब्रिलेशन से बचाव के लिए निम्नलिखित टिप्स फॉलो किये जा सकते हैं। जैसे:

    • हृदय के लिए लाभकारी भोजन ही खाए।
    • अपना वजन नियंत्रित रखें।
    • ज्यादा तनाव न लें।
    • ज्यादा से ज्यादा व्यायाम करें और सभी दवाएं सही समय पर लें।
    • किसी भी हानिकारक प्रभाव ( जैसे कि सिर चकराना, सांस उखड़ना, बेहोशी )के दिखने पर अपने डॉक्टर से सलाह लें।
    • किसी भी ऐसे काम से बचें जिससे की चक्कते पड़ने की संभावना हो।
    • स्मोकिंग करना छोड़ दें।
    • बहुत ज्यादा शराब और कैफीन का सेवन न करें।

    एट्रियल फाइब्रिलेशन से बचाव के लिए इन टिप्स को फॉलो कर बचाव में मदद मिल सकती है।

    डॉक्टर से कब मिलें?

    अगर आपकी दिल की धड़कनें सही ढंग से नहीं चल रही हैं और आपके सीने में दर्द है या फिर कोई असहजता लग रही है उस स्थिति में आपको डॉक्टर से मिल लेना चाहिए क्योकि ये स्ट्रोक के लक्षण भी हो सकते हैं।

    हम उम्मीद करते हैं कि आपको एट्रियल फायब्रिलेशन (Atrial fibrillation) से संबंधित ये आर्टिकल पसंद आया होगा। अगर आपके मन में कोई प्रश्न हो, तो डॉक्टर से जरूर पूछें। आप स्वास्थ्य संबंधी अधिक जानकारी के लिए हैलो स्वास्थ्य की वेबसाइट विजिट कर सकते हैं। अगर आपके मन में कोई प्रश्न है, तो हैलो स्वास्थ्य के फेसबुक पेज में आप कमेंट बॉक्स में प्रश्न पूछ सकते हैं और अन्य लोगों के साथ साझा कर सकते हैं।

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    Nidhi Sinha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 22/06/2022 को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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