शिरीष एक पेड़ है। इसके फूल, बीज, जड़, छाल और पत्तियों का इस्तेमाल औषधी के रूप में किया जाता है। यह पेड़ बहुत तेजी से बढ़ता है। वैसे तो इसकी कई प्रजातियां है, लेकिन मुख्य रूप से तीन का प्रयोग दवाओं में होता है। लाल, काला और सफेद शिरीष का इस्तेमाल कई रोगों के इलाज के लिए किया जाता है। आयुर्वेद में भी इसके गुणों का वर्णन है। जोड़ों के दर्द के लिए इसे वरदान समान माना जाता है। इसका वानस्पातिक नाम एलबिझा लेबक (Albizia lebbeck) है। यह फबासिए (Fabaceae) परिवार से ताल्लुक रखता है। इसे शुकप्रिया (Shukpriya) और शिरिषा (Shirisha) के नाम से भी जाना जाता है।

एंग्जायटी और स्ट्रेस को दूर करता है (Relieves Anxiety and Stress)
शिरीष में इसोक्यरसेटिन (isoquercetin), क्यरसेटिन (quercetin), पॉलीफेनॉल (polyphenols) and सैपोनिन (saponins) पदार्थ होते हैं जो शरीर में हॉर्मोनल और नर्वस सिस्टम पर मजबूत प्रभाव डालते हैं। माइल्ड सिडेटिव के रूप में यह दिमाग को शांत कर चिंता और तनाव की भावना को दूर करने में मदद करता है। यह क्रॉनिक स्ट्रेस हॉर्मोन वाले लोगों के लिए लाभदायक माना जाता है।
अच्छी नींद (Sound Sleep)
इसका काढ़ा इंसोम्निया और नींद न आने की परेशानी से राहत प्रदान करता है। यह दिमाग के नर्व्स को शांत कर शरीर को राहत प्रदान करता है, जिससे अच्छी और गहरी नींद आती है।
श्वसन संबंधी परेशानियों में राहत
यह जड़ीबूटी साइनस और रेसपिरेटरी ट्रैक्ट से सूजन को दूर कर अस्थमा और पुरानी श्वसन स्थितियों से पीड़ित लोगों की मदद करता है। यह खांसी और घरघराहट के लिए इमपल्स को कम करता है। यह श्वसन स्वास्थ्य को जल्दी रिकवर करता है।
डायजेस्टिव सिस्टम को दुरुस्त रखता है
गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल परेशानियों से ग्रसित लोगों को इसका पाउडर लेने की सलाह दी जाती है। यह पाचन प्रक्रिया को तेज कर नियमित मल त्याग में मदद करता है।
हेल्दी स्किन
इसकी छाल और पत्तियों में एंटीऑक्सीडेंट और एंटीइंफ्लामेटरी गुण होते हैं जो शरीर के बाहरी त्वचा पर काम करते हैं। इसका इस्तेमाल चकत्ते, सोरायसिस, मुंहासे और घाव को ठीक करने के लिए किया जाता है।
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कोलेस्ट्रॉल लेवल को नियंत्रित करता है (Regulates Cholesterol Levels)
शिरीष में कई ऐसे कंपाउंड होते हैं, जो कोलेस्ट्रॉल लेवल को नियंत्रित करने में मददगार होते हैं। कोलेस्ट्रोल लेवल कम होने से कार्डियोवस्कुलर सिस्टम एथेरोस्क्लेरोसिस स्ट्रोक और हार्ट अटैक से सुरक्षा प्रदान करता है।
अर्थराइटिस और गाउट (Arthritis and Gout)
शिरीष का इस्तेमाल गाउट, गठिया और अन्य सूजन स्थितियों से जुड़े दर्द को खत्म करने के लिए किया जाता है। इसके पेस्ट को प्रभावित जोड़ों और क्षेत्रों पर लगाने से सूजन से राहत मिल सकती है। इसमें सिडेटिव गुण होते हैं जो दर्द को दूर करते हैं।
इन परेशानियों में भी मददगार है शिरीष का इस्तेमाल:
शिरीष में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनने से पहले हानिकारक बायोप्रोडक्ट्स की सफाई कर शरीर से फ्री रैडिकल्स को निकालने में मदद करते हैं। इसमें एंटी-फंगल, एंटी-प्रोटोजोल और एंटी-माइक्रोबियल प्रॉपर्टीज होती हैं, जिस वजह से कई रोगों के इलाज में इसका इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा इसमें एस्ट्रिजेंट और एंटी-हिस्टामिनिक गुण होते हैं।
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वैज्ञानिक अध्ययनों की कमी के कारण शिरीष को लेकर बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी कम है। इसलिए डॉक्टर या चिकित्सक की देखरेख में ही इसका सेवन करें। एक बात का खास ख्याल रखें कि हर्बल सप्लिमेंट का इस्तेमाल हमेशा सुरक्षित नहीं होता है। इस बारे में और अधिक जानकारी के लिए किसी हर्बल विशेषज्ञ या आयुर्वेदिक डॉक्टर से संपर्क करें।
ज्यादातर लोगों के लिए सीमित मात्रा में इसका सेवन सुरक्षित होता है। इसको अधिक मात्रा में लेने से जी मिचलाना और उल्टी की शिकायत हो सकती है। जो पुरुष लो स्पर्म काउंट और पूअर मोटिलिटी ऑफ स्पर्म से ग्रसित हैं उन्हें इसका सेवन नहीं करना चाहिए। इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने चिकित्सक या हर्बलिस्ट से कंसल्ट करें।
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कभी भी इसकी खुराक खुद से निर्धारित करने की भूल न करें। इसकी खुराक हर किसी के लिए अलग हो सकती है। यह आपकी स्वास्थ्य स्थिति, उम्र और लिंग के आधार पर आपके डॉक्टर द्वारा निर्धारित की जा सकती है। इसकी सही खुराक जानने के लिए कृपया अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
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शिरीष निम्नलिखित रूपों में उपलब्ध है:
अगर आपका इससे जुड़ा किसी तरह का कोई सवाल है, तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।
डिस्क्लेमर
हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।
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Current Version
16/06/2020
Mona narang द्वारा लिखित
के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड डॉ. पूजा दाफळ
Updated by: Mousumi dutta