Asthma: दमा अस्थमा क्या है? जानें इसके कारण, लक्षण और इलाज

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट November 28, 2020 . 8 मिनट में पढ़ें
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अस्थमा क्या होता है?

दमा अस्थमा एक ऐसी स्थिति है जहां ब्रोंकाइटिस में सूजन के कारण सांस लेने में तकलीफ होती है। सूजन की वजह से मांसपेशियों के बीच से हवा पास होने में  परेशानी होती है और घरघराहट की आवाज आती है। इसके साथ इसमें सांस की तकलीफ, सीने में जकड़न और खांसी भी होती है। इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है लेकिन, जीवनशैली में कुछ बदलाव करके इस पर काबू जरूर पा सकते हैं।

अस्थमा के बारे में जानने से पहले अपनी सांस से जुड़े तत्वों के बारे में जानना आवश्यक होता है। आमतौर पर जब हम सांस लेते हैं तो हवा हमारी नाक या मुंह से हो कर गले और वायुमार्ग में जाती है। इसके बाद आखिरी में वह फेफड़ों में समा जाती है।

हमारे फेफड़ों में ऐसे कई छोटे पैसेज होते हैं जो ऑक्सीजन को रक्त प्रवाह से मिलने में मदद करती है। जब वायुमार्ग में सूजन या उसके आसपास की मांसपेशियों में अकड़न आने लगती है तो यह अस्थमा का संकेत होता है। इसके बाद बलगम वायुमार्ग को भर देता है जिससे फेफड़ों तक हवा पहुंचने में कमी आने लगती है।

इस स्थिति के कारण अस्थमा अटैक पड़ सकता है। सीने में खांसी और अकड़न को आमतौर पर अस्थमा का लक्षण माना जाता है।

कितना आम है दमा (Asthma)?

यह बेहद तेजी से फैलने वाली बीमारी है। दुनियाभर के लगभग 300 मिलियन लोग अस्थमा से पीड़ित हैं। यह सभी उम्र के लोगों को प्रभावित करती है लेकिन, बचपन में इसके संक्रमण की संभावना ज्यादा होती है।

अस्थमा का अटैक क्या होता है?

अस्थमा का अटैक तब होता है जब आपके लक्षण अचानक से बिगड़ने लगते हैं। इस स्थिति में आपका वायुमार्ग सूजन, बलगम और अकड़न से भर जाता है।

हालांकि, अस्थमा से ग्रस्त हर व्यक्ति को अस्थमा अटैक के एक जैसे सामान्य लक्षण नहीं होते हैं। आपको अलग समय पर अलग प्रकार के लक्षण महसूस हो सकते हैं। इसके साथ ही लक्षण पहले अटैक के मुकाबले दूसरे अटैक में अधिक या कम गंभीर हो सकते हैं।

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दमा अस्थमा (Asthma) के लक्षण

अस्थमा के लक्षण हर व्यक्ति में अलग पाए जाते हैं। आपको अस्थमा का अटैक कई बार पड़ सकता है लेकिन इसके लक्षण केवल कुछ विशेष समय पर ही दिखाई देते हैं। जैसे कि व्यायाम करते समय या हर समय।

दमा अस्थमा के सामान्य लक्षणों में निम्न शामिल हैं –

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अस्थमा के प्रकार

आमतौर पर अस्थमा के लक्षण अस्थमा के प्रकार पर निर्भर करते हैं। दमा अस्थमा के कई विभिन्न प्रकार हैं। इनमें से सबसे सामान्य ब्रोन्कियल अस्थमा है जो कि फेफड़ों की ब्रांकाई को प्रभावित करता है।

अस्थमा के अन्य मुख्य प्रकारों में बच्चों में अस्थमा और वयस्कों में अस्थमा शामिल है। वयस्कों में होने वाले अस्थमा के लक्षण 20 वर्ष की उम्र के बाद दिखाई देने लगते हैं।

तो चलिए अब जानते हैं दमा अस्थमा के अन्य प्रकार के बारे में, जिनके आधार पर व्यक्ति के लक्षणों की पहचान की जा सकती है –

  • एलर्जिक अस्थमा – जानवरों, खाने, फफूंदी, पराग (पोलन) और धूल से एलर्जी
  • नॉनएलर्जिक अस्थमा – आग, धुंए, वायु प्रदूषण, परफ्यूम, एयर फ्रेशनर और ठंडी हवा
  • ऑक्यूपेशनल अस्थमा (विशेष प्रकार की जगहों पर होने वाला) – धूल, रबड़ लेटेक्स, जानवरों के प्रोटीन, गैस और इंडस्ट्रियल केमिकल वाली जगहों पर
  • एक्सरसाइज इंड्यूस ब्रोंकोकंस्ट्रिक्शन – व्यायाम के दौरान या कुछ समय बाद होने वाला अस्थमा
  • एस्पिरिन इंड्यूस अस्थमा – एस्पिरिन या अन्य नॉनस्टेरॉइडल एंटीइंफ्लेमेटरी दवाओं के कारण होने वाला
  • रात में होने वाला अस्थमा -धूल के कण, पालतू जनवरों या सीने में जलन के कारण
  • सूखी खांसी वाला अस्थमा – इस स्थिति में सांस फूलना या ठंड लगना भी शामिल है

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

आपातकालीन स्थिति में आपको निम्न संकेत और लक्षण दिखाई दे सकते हैं –

  • सांस लेने में लगातार तकलीफ बढ़ते जाना
  • इनहेलर का इस्तेमाल करने पर भी स्थिति में कोई सुधार न आना
  • सामान्य या कम थकान वाली शारीरिक गतिविधियों के दौरान सांस में कमी आना

अस्थमा के गंभीर अटैक जानलेवा हो सकते हैं। अगर ऊपर दिए गए लक्षणों में से आपको कोई भी लक्षण दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं क्योंकि बीमारी जितनी पुरानी होगी तकलीफ उतनी ही बढ़ेगी।

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अस्थमा के कारण

आज तक अस्थमा के स्पष्ट कारणों का पता नहीं चल पाया है। वैज्ञानिक इस बात की पुष्टि करने में भी असफल हैं कि क्यों कुछ लोगों को दमा की समस्या होती है और बाकियों को नहीं।

इसका कोई एक सटीक कारण नहीं है। हालांकि, कुछ ऐसे ट्रिगर हैं जो दमा अस्थमा का कारण बन सकते हैं। यह आमतौर पर अनुवांशिक और व्यक्ति के आसपास के पर्यावरण पर निर्भर करते हैं –

  • धूल, जानवरों के फर, तिलचट्टे, मोल्ड और पेड़, घास और फूलों से परागकण
  • सिगरेट का धुआं, धूल, मिट्टी, स्प्रे (जैसे हेयरस्प्रे)
  • दवाएं जैसे एस्पिरिन या अन्य नॉनस्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लमेटरी ड्रग्स और नॉनसेलेक्टिव बीटा-ब्लॉकर्स
  • ठंडी हवा
  • खाद्य पदार्थों और पेय में सल्फेट
  • स्ट्रेस
  • वायरल संक्रमण जैसे सर्दी
  • व्यायाम

अस्थमा अटैक एलर्जन के संपर्क में आने से हो सकता है, जैसे कि पेड़, घास या खरपतवार, धूल के कण, तिलचट्टे या जानवरों की डैंडर। अन्य सामान्य ट्रिगर हवा में पाए जाते हैं, जैसे कि धुआं और रासायनिक धुएं स्ट्रॉन्ग गंध जैसे इत्र।

कुछ बीमारियां – विशेष रूप से फ्लू, साइनसाइटिस या यहां तक कि एक श्वसन संक्रमण – भी अस्थमा के दौरे को ट्रिगर कर सकता है, जैसा कि इंटेंस एक्सरसाइज , एक्सट्रीम वेदर और इमोशन जो सामान्य श्वास पैटर्न को बदल देते हैं।

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क्या चीजे हैं जो अस्थमा की संभावना को बढ़ा सकती हैं?

दमा अस्थमा हर उम्र के लोगों पर प्रभाव डालता है लेकिन, बचपन में दमा अस्थमा की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है।

दमा अस्थमा के यह कुछ सामान्य कारण हैं;

  • फैमिली हिस्ट्री: अगर आपके परिवार में किसी को दमा अस्थमा है तो आपको अन्य लोगों की तुलना में 6 गुना ज्यादा इसके होने की संभावना होती है।
  • वायरल श्वसन संक्रमण: बचपन और बचपन के दौरान श्वसन संबंधी समस्याएं घरघराहट का कारण बन सकती हैं। कुछ बच्चे जो वायरल श्वसन संक्रमण का अनुभव करते हैं वे आगे चलकर इसका शिकार हो सकते हैं।
  • एलर्जी: एलर्जी होना जैसे कि एक्जिमा या एलर्जिक राइनाइटिस ।
  • धूम्रपान: धूम्रपान करने वालों में इसके होने की संभावना ज्यादा होती है। गर्भावस्था के समय जिनके माता-पिता धूम्रपान करते हों उनके शिशु में दमा अस्थमा होने की संभावना को टाला नहीं जा सकता।
  • मोटापा: मोटे लोगों में दमा अस्थमा होने की संभावना होती है। हालांकि ऐसा क्यों होता है इसका कारण अभी भी साफ नहीं है।

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बच्चों में ट्रिगर्स 

कुछ ट्रिगर अस्थमा से पीड़ित बच्चों को विशेष रूप से प्रभावित करते हैं और फेफड़ों में इंफ्लमेशन को और भी बदतर बना सकते हैं। बहुत छोटे बच्चों में अस्थमा के अटैक के लिए सामान्य सर्दी सबसे अधिक होने वाले ट्रिगर में से एक है। दूसरो में शामिल हैं:

  • धुआं
  • एलर्जी के संपर्क में (जैसे कि जानवरों की खुशबू और डेंडर , धूल के कण )
  • स्ट्रॉन्ग खुशबू (इत्र या अन्य गंध)
  • मौसम में परिवर्तन; ठंडी हवा
  • दौड़ना या अधिक खेलना
  • रोना या हंसना

यदि आपके बच्चे को अस्थमा है, तो एलर्जिस्ट आपको उन ट्रिगर्स की खोज करने में मदद करेगा जो लक्षणों को लाते हैं या उन्हें और भी खराब करते हैं। लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए पहला कदम यह है कि आपके बच्चे को उन चीजों से दूर करें जो खांसी और कफ देता है।

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अस्थमा का रोकथाम

अस्थमा और उसके अटैक को पूरी तरह से रोका नहीं जा सकता है। हालांकि, आप अपने डॉक्टर के साथ मिलकर एक स्टेप-बाय-स्टेप प्लान तैयार कर। इस प्लान में आप अपनी जीवनशैली के बदलाव और आसपास की जगहों के बारे में परामर्श ले सकते हैं। डॉक्टर आपको बताएंगे कि आपको किस अवस्था में अस्थमा की अधिक समस्या हो सकती है और उससे कैसे परहेज करें।

अस्थमा अटैक के खतरे को कम करने के लिए निम्न बातों का खास ध्यान रखें –

  • डॉक्टर द्वारा बनाए गए प्लान का पालन करें
  • फ्लू और निमोनिया की वैक्सीन का सही उपयोग करें
  • आपको किन-किन जगहों और पदार्थों के कारण अस्थमा की समस्या होती है? उनकी पहचान कर के उनसे परहेज अपनाएं।
  • अपनी सांस का ध्यान रखें – अस्थमा अटैक पड़ने या उसके लक्षण दिखाई देने पर आपको अपनी सांस लेने की क्षमता में कुछ परिवर्तन महसूस होंगे। उनकी तुरंत पहचान कर के इनहेलर या अन्य दवाओं का इस्तेमाल करें। इसके साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि आपको किन जगहों पर सांस लेने में दिक्कत होती है। जैसे घर या ऑफिस।

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अस्थमा का निदान कैसे किया जा सकता है?

इसका पता मरीज की मेडिकल हिस्ट्री देखकर या फिर ब्रीथिंग टेस्ट द्वारा लगाया जाता है। इससे पता चलता है कि फेफड़े कितनी अच्छी तरीके से कार्य कर रहे हैं।  डॉक्टर आपकी धड़कन सुनकर और कुछ अन्य लक्षण देखकर पता लगा सकता है कि आपको दमा अस्थमा है या नहीं।

 डॉक्टर कुछ टेस्ट कर सकते हैं जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं;

  • स्पिरोमेट्री: आप कितनी तेजी से और किस तरह सांस लेते हैं यह टेस्ट इसका पता लगाने के लिए होता है।
  • ब्रोंकोप्रोवोकेशन टेस्ट : वायुमार्ग कितना संवेदनशील है यह टेस्ट इसका पता लगाने के लिए होता है।
  • एक टेस्ट यह जानने के लिए किया जाता है कि आपको दमा अस्थमा के जैसी कोई अन्य बीमारी तो नहीं ।
  • एक सीने का एक्स-रे या एक ईकेजी (इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम): यह टेस्ट ये जानने के लिए होता है कि आपके दमा अस्थमा का कारण कोई बाहरी तत्व तो नहीं ।

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दमा अस्थमा के चरण

अस्थमा के इलाज से पहले स्थिति की गंभीरता को समझने के लिए नेशनल अस्थमा एजुकेशन एंड प्रिवेंशन प्रोग्राम (National Asthma Education and Prevention Program) के तहत इसके चरणों की पहचान करने से निदान में मदद मिलती है।

अस्थमा के चरण कुछ इस प्रकार हैं –

  • अनिरंतर (Intermittent) – ज्यादातर लोगो को इस चरण का अस्थमा होता है जो कि उन्हें रोजाना के जीवन में परेशान नहीं करता है। इस चरण में लक्षण बेहद हल्के होते हैं और आमतौर पर प्रतिसप्ताह या प्रति महीने केवल दो दिन के लिए ही होते हैं।
  • माइल्ड परसिस्टेंट (Mild persistent) – इस चरण में अस्थमा के लक्षण हफ्ते में दो बार सामने आते हैं और प्रति महीना चार रातों तक रहते हैं।
  • मॉडरेट परसिस्टेंट (Moderate persistent) – इस चरण तक आते-आते लक्षण हर रोज नजर आते हैं, खासतौर से प्रति सप्ताह एक रात। इसके कारण व्यक्ति को कुछ गतिविधियों में समस्या आ सकती है।
  • सीवियर परसिस्टेंट (Severe persistent) – यह सबसे गंभीर चरण होता है जिसमें लक्षण रोजाना दिन व रात के समय व्यक्ति को परेशान करते हैं। इसके कारण व्यक्ति को रोजाना की कई गतिविधियों में समस्या आने लगती है।

दमा अस्थमा का इलाज कैसे करें?

वर्तमान में, इसका कोई उपचार नहीं है लेकिन, दवाओं का सेवन करके और अपनी जीवनशैली में बदलाव करके दमा अस्थमा को काबू में किया जा सकता है

मेडिकेशन

आमतौर पर ली जाने वाली कुछ दवाओं का उपयोग किया जाता है और कुछ दवाओं को सांस के द्वारा लिया जाता है जैसे कि, टिको स्टेरॉइड्स (फ्लाइक्टासोन (फ्लोवेट डिस्कस, फ्लोवेंट एचएफए)), बुडेसोनाइड (पल्मिकॉर्ट फ्लेक्सहेलर), मेमेटासोन (असेंमेक्स), कोलिसोनाइड (अल्वेसको), फ्लुनिसोलाइड (एरोबिड), एस्लेलोमीथासोन (क्वावर) शामिल हैं। ल्यूकोट्रिअन मॉडिफायर्स दवाएं हैं जिनमें मोंटेलुकास्ट (सिंगुलैर), जाफिरुकास्ट (एकोलेट) और जाइलुटोन (जीफ्लो, जेफ्लो सीआर) शामिल हैं।

कुछ दवाएं हैं जिनका उपयोग त्वरित-राहत के लिए किया जाता है। इनमें शामिल हैं: बीटा-एगोनिस्ट। इन ब्रोन्कोडायलेटर दवाओं में अल्ब्युटेरोल (प्रोएयर एचएफए, वेंटोलिन एचएफए, अन्य), लेवलब्युटेरोल (एक्सोपेनेक्स एचएफए) और पायरब्यूटेरोल (मैक्सेयर ऑटोहेलर) इत्यादि शामिल हैं।

इनहेलर

इनहेलर में कॉर्टिकोस्टेरॉइड प्लस जो कि एक बीटा-एगोनिस्ट (LABA) होता है। LABAs बीमारी के लक्षणों को काबू में लाते हैं और वायुमार्ग को खोलने में सहायक होते हैं।

ब्रीथिंग एक्सरसाइज

सांस संबंधी व्यायाम की मदद से आप अपने फेफड़ों में अधिक से अधिक सांस पहुंचा सकते हैं। समय के साथ-साथ यह आपके फेफड़ों की क्षमता को बढ़ाने व गंभीर अस्थमा को कम करने में मदद करती है।

आपके डॉक्टर या अन्य एक्सपर्ट आपको इस प्रकार के व्यायाम सिखाने में मदद कर सकते हैं।

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अस्थमा अटैक के लिए फर्स्ट ऐड

अगर आपके सामने किसी व्यक्ति को अस्थमा अटैक आता है तो उन्हें सीधा बैठने के लिए कहें और तुरंत इनहेलर का इस्तेमाल करवाएं। दमा अस्थमा के इनहेलर के दो से छह पफ व्यक्ति के लक्षणों को कम कर सकते हैं जिससे उन्हें राहत मिलेगी।

यदि 20 मिनट बाद भी लक्षण कम नहीं होते हैं और दोबारा इनहेलर का इस्तेमाल करने से भी किसी प्रकार की मदद नहीं मिलती है तो तुरंत डॉक्टर या आपातकालीन कक्षं से संपर्क करें।

अगर आपको बार-बार इस प्रकार के अस्थमा अटैक आते रहते हैं तो आपको अपने डॉक्टर से लंबे समय के लिए इलाज का विकल्प चुनने की सलाह लेने की जरूरत पड़ सकती है।

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जीवनशैली में बदलाव और घरेलू उपाय

  • यदि आप गर्भवती हैं, तो कई बार आप दवाइयों को लेने में संकोच कर सकती हैं लेकिन, यह आपके स्वास्थ्य और शिशु के लिए खतरनाक हो सकता है।
  • उन चीजों से परहेज करें जो दमा अस्थमा की स्थिति को और ज्यादा बिगाड़ सकती हैं ।
  • अपनी दवा को समय पर लें ।
  • आप कब क्या मेडिकेशन लेते हैं इसका शेड्यूल बनाएं।
  • आप लहसुन का उपयोग कर सकते हैं, जो दमा अस्थमा के लक्षणों से तुरंत राहत दिलाता है। दमा अस्थमा के लिए लहसुन लेने का एक तरीका यह है कि इसकी 10-12 कलियों को आधा कप पानी में उबालें और इसे दिन में एक बार पिएं। लहसुन में काफी मात्रा में एंटी इंफ्लमेटरी गुण होते हैं जो दमा अस्थमा से राहत दिलाने में मदद कर सकते हैं, क्योंकि दमा अस्थमा एक इंफ्लमेटरी डिसीज है।
  • अदरक सुपरफूड दमा अस्थमा के खिलाफ लड़ाई में बेहद कुशल है। सभी प्रकार की श्वसन स्थितियों के उपचार के लिए आप इसे सूखे, कच्चे और ताजे रूप में उपयोग कर सकते हैं। इसमें एंटी-ऑक्सिडेंट और दर्द को दूर करने वाले गुण होते हैं।

और पढ़ें – अस्थमा से राहत पाने के लिए ये घरेलू उपाय हैं कारगर 

इस आर्टिकल में हमने आपको दमा अस्थमा से संबंधित जरूरी बातों को बताने की कोशिश की है। उम्मीद है आपको हैलो हेल्थ की दी हुई जानकारियां पसंद आई होंगी। अगर आपको इस बीमारी से जुड़े किसी अन्य सवाल का जवाब जानना है, तो हमसे जरूर पूछें। हम आपके सवालों के जवाब मेडिकल एक्सर्ट्स द्वारा दिलाने की कोशिश करेंगे। अपना ध्यान रखिए और स्वस्थ रहिए।

अधिक जानकारी के लिए आप डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

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