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ब्रोंकाइटिस और निमोनिया : दोनों में क्या है फर्क?

ब्रोंकाइटिस और निमोनिया : दोनों में क्या है फर्क?

अगर आपको खांसी या बुखार है और ऐसा लग रहा है कि छाती बलगम के कारण जाम है, तो यह ब्रोंकाइटिस या निमोनिया के संकेत हो सकते हैं। यह दोनों फेफड़ों से जुड़ी समस्याएं हैं और इनके लक्षण भी एक जैसे होते हैं। इन दोनों इंफेक्शंस का प्रभाव ब्रीदिंग पर पड़ता है और इनके कारण गंभीर दर्द के साथ खांसी होना सामान्य है। ब्रोंकाइटिस और निमोनिया (Bronchitis and Pneumonia) के लक्षणों का एक जैसे होने का यह अर्थ नहीं है कि यह दोनों बीमारियां एक ही हैं। इन दोनों के बीच में बहुत ही महत्वपूर्ण अंतर होता है। हालांकि, अधिकतर लोग इनमें अंतर नहीं कर पाते। तो चलिए जानते हैं ब्रोंकाइटिस और निमोनिया के बारे में विस्तार से और जानिए इनमें क्या है अंतर।

क्या हैं ब्रोंकाइटिस और निमोनिया? (What are Bronchitis and Pneumonia)

ब्रोंकाइटिस फेफड़ों में ब्रोन्कियल टयूब (Bronchial Tubes) की सूजन है। जबकि, निमोनिया फेफड़ों के एयर सैक्स (Air Sacs) में होने वाली सूजन के कारण होता है। इन एयर सैक्स (Air Sacs) को एल्वियोली (Alveoli) कहा जाता है। निमोनिया के कारण एल्वियोली (Alveoli) में पानी जैसा तरल या पस भर जाती है। ब्रोंकाइटिस के दो प्रकार हैं एक्यूट ब्रोंकाइटिस (Acute Bronchitis) और क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस (Chronic bronchitis)। एक्यूट ब्रोंकाइटिस (Acute bronchitis) ऐसा इंफेक्शन है जो वायरस और कई बार बैक्टीरिया के कारण होता है। जबकि, क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस लंग्स में होने वाली लॉन्गटर्म सूजन है। कई बार ब्रोंकाइटिस, निमोनिया में बदल भी सकता है। अब जानते हैं ब्रोंकाइटिस और निमोनिया (Bronchitis and Pneumonia) के बीच की समानताओं और अंतर के बारे में। शुरुआत करते हैं ब्रोंकाइटिस और निमोनिया के कारणों से:

यह भी पढ़ें : Pneumonia: निमोनिया क्या है? जानें इसके लक्षण, कारण और उपाय

ब्रोंकाइटिस और निमोनिया के कारण कौन से हैं? (Causes of Bronchitis and Pneumonia)

ब्रोंकाइटिस और निमोनिया (Bronchitis and Pneumonia) में अंतर क्या है, इसमें सबसे पहले जानतें हैं कि इन समस्याओं के कारण कौन-कौन से होते हैं। सबसे पहले शुरुआत करते हैं ब्रोंकाइटिस के कारणों से:

ब्रोंकाइटिस के कारण (Causes of Bronchitis)

एक्यूट ब्रोंकाइटिस, ब्रोंकाइटिस का संक्रामक रूप है और अधिकतर लोग इससे पीड़ित होते हैं। लेकिन, यह गंभीर स्थिति नहीं होती। जबकि, क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस के कारण फेफड़े धीरे-धीरे काम करना बंद कर देते हैं, जिसके कारण यह स्थिति जानलेवा हो सकती है। एक्यूट ब्रोंकाइटिस के कारण इस प्रकार हैं:

एक्यूट ब्रोंकाइटिस के कारण (Causes of Acute Bronchitis)

ब्रोंकाइटिस ब्रोन्कियल टयूब्स (Bronchial Tubes),में होने वाली सूजन है जो श्वास नली (Trachea), या विंड पाइप से (Windpipe) फेफड़ों में हवा को अंदर ले जाती है। एक्यूट ब्रोंकाइटिस के कई प्रकार हैं जिनके ऊपर इसके कारण निर्भर करते हैं:

  • वायरल ब्रोंकाइटिस (Viral bronchitis): वायरल इंफेक्शन के कारण यह ब्रोंकाइटिस हो सकता है। इसमें प्रभावित व्यक्ति खांसी, सांस लेने से समस्या महसूस करता है।
  • बैक्टीरियल ब्रोंकाइटिस (Bacterial bronchitis): बैक्टीरियल इंफेक्शन भी ब्रोंकाइटिस का कारण बन सकता है। इसके होने पर रोगी एकदम सांस लेने में समस्या महसूस कर सकता है।
  • फंगल इंफेक्शंस (Fungal infections) : कभी कभी फंगल इंफेक्शंस के कारण भी यह समस्या हो सकती है।
  • अन्य कारण (Other Causes) : इंफेक्शन के साथ ही कुछ ऐसी अन्य ऐसी चीजों के संपर्क में आना, जो फेफड़ों में समस्या का कारण हो सकती हैं। यह चीजें या इर्रिटेंट्स भी ब्रोंकाइटिस का कारण बन सकते हैं। यह चीजें तंबाकू (Tobacco), धूल (Dust), धुआं (Fume), भाप (Steam) या हवा का प्रदूषण (Air Pollution) कुछ भी हो सकती हैं।

क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस के कारण (Causes of Chronic Bronchitis)

क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस

क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस एयरवेज में सूजन के कारण हो सकता है। यह एक तरह की क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (Chronic Obstructive Pulmonary Disease) है।

यू.एस. नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ हेल्थ (U.S National Institute of Health) के अनुसार ब्रोंकाइटिस की समस्या म्यूकस मेम्ब्रेन (Mucous membranes) में होने वाली जलन है। जबकि, निमोनिया लंग टिश्यूज में होने वाली जलन को कहा जाता है, जो बैक्टीरियल, वायरल या फंगल इंफेक्शन एक कारण होती है। एक्यूट ब्रोंकाइटिस और निमोनिया दोनों को बलगम वाली या बिना बलगम वाली खांसी के विकास के आधार पर पहचाना जा सकता है।

लंग्स से जुड़ी समस्या क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) के बारे में जानें इस 3 D मॉडल के माध्यम से

निमोनिया के कारण (Causes of pneumonia)

अब जानते हैं निमोनिया के कारणों के बारे में। निमोनिया वायरस, बैक्टीरिया या कवक के कारण होता है। इसका कारण कुछ हानिकारक चीजों का शरीर के अंदर जाना भी हो सकता है। जब यह जर्म्स या इर्रिटेंट्स फेफड़ों में एल्वियोली (Alveoli) में प्रवेश करते हैं, तो निमोनिया हो सकता है। निमोनिया कई प्रकार का होता है और यह इसके कारणों पर निर्भर करता है, जैसे:

  • बैक्टीरियल निमोनिया (Bacterial Pneumonia) बैक्टीरिया के कारण होता है। इस सबसे सामान्य प्रकार के बैक्टीरियल निमोनिया को न्यूमोकोकल निमोनिया (Pneumococcal Pneumonia) कहा जाता है। यह स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिया बैक्टीरिया (Streptococcus Pneumonia Bacteria) के कारण होता है।
  • वायरल निमोनिया (Viral) वायरस के कारण होता है जैसे इन्फ्लुएंजा वायरस (Influenza Virus)
  • माइकोप्लाज्मा निमोनिया (Mycoplasma Pneumonia) छोटे-छोटे परजीवी के कारण होता है। जिन्हें माइकोप्लाज्मा (Mycoplasma) कहा जाता है। इनमें वायरस और बैक्टीरिया दोनों की विशेषताएं होती हैं।
  • कवक निमोनिया (Fungal Pneumonia) एक कवक के कारण होता है। इसे निमोसिस्टिस जीरोवेजी (Pneumocystis Jiroveci) कहा जाता है।

ब्रोंकाइटिस और निमोनिया के लक्षण (Symptoms of Bronchitis and Pneumonia)

ब्रोंकाइटिस और निमोनिया (Bronchitis and Pneumonia) के लक्षण आमतौर पर एक समान ही होते हैं। हालांकि, कुछ स्थितियों में यह अलग भी हो सकते हैं। इनके लक्षण इस प्रकार हैं:

बैक्टीरियल निमोनिया-bacterial pneumonia
बैक्टीरियल निमोनिया-bacterial pneumonia

कुछ लक्षण ब्रोंकाइटिस और निमोनिया (Bronchitis and Pneumonia) के बीच अंतर करने में मदद कर सकते हैं। उनमें से कुछ इस प्रकार हैं :

  • कुछ लोगों खासतौर पर बुजुर्गों में बेचैनी (Confusion in some People, especially Seniors)
  • व्हीजिंग की जगह ब्रीदिंग का कम या अधिक होना (Rapid, Shallow Breathing instead of Wheezing)
  • जी मचलना या उलटी (Nausea and Vomiting)
  • भूख में कमी (Loss of Appetite)
  • ठंड लगना या मसल्स में दर्द (Chills and Muscle Aches)

यह भी पढ़ें: बच्चों में ब्रोंकाइटिस की परेशानी क्यों होती है? जानें इसका इलाज

ब्रोंकाइटिस और निमोनिया में अंतर क्यों नहीं पहचाना जा सकता?

दरअसल, जो इंफेक्शंस ब्रोंकाइटिस का कारण बनते हैं, वह निमोनिया का कारण भी बन सकते हैं। इस कारण ब्रोंकाइटिस और निमोनिया में अंतर पहचानना आसान नहीं होता। यही नहीं, क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस (Chronic Bronchitis) एक ऐसा रिस्क फैक्टर है, जिसके कारण निमोनिया या अन्य गंभीर इंफेक्शंस हो सकते हैं। अगर किसी व्यक्ति को पहले ही कोई इंफेक्शन है, तो वो दूसरे इंफेक्शन का शिकार भी बन सकता है। हालांकि, ऐसे में लक्षणों को नोटिस करना जरूरी है कि यह बदले हैं या बदतर हुए हैं। इन दोनों बीमारियों के लक्षणों की पहचान करना अधिकतर लोगों के लिए आसान नहीं होता। केवल एक डॉक्टर ही इनमें अंतर को पहचान सकते हैं।

किन स्थितियों में तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए?

ब्रोंकाइटिस और निमोनिया (Bronchitis and Pneumonia) दोनों ही गंभीर और जानलेवा हो सकते हैं। इसलिए सबसे पहले इनकी पहचान करना और इनके ब्रीदिंग से जुड़े लक्षणों को गंभीरता से लेना जरूरी है। लोगों को इन स्थितियों में तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए, अगर:

  • रोगी को सांस लेने में समस्या हो (Patient have Difficulty Breathing)
  • रोगी को खांसी रोकने में परेशानी हो (It Feels Impossible to stop Coughing)
  • रोगी को अधिक बुखार हो (Patient have a Very High Fever)
  • उपचार के बाद भी ब्रोंकाइटिस या निमोनिया के लक्षण ठीक न हो रहे हों या यह समस्या बार-बार हो रही हो (Symptoms of Pneumonia or Bronchitis do not get better with Treatment, or Symptoms are Happening Again and Again)
  • अगर रोगी को कोई और गंभीर बीमारी और सांस लेने में समस्या हो (Patient have Another Chronic Illness and Breathing Difficulties)
  • बलगम में खून आए (Blood in the Phlegm)
  • सांस लेने में परेशानी हो रही हो (Shortness of Breath)
  • छाती में दर्द हो (Chest Pain)
  • बहुत अधिक कमजोरी हो (Extreme Weakness)

ब्रीदिंग इश्यूज बहुत जल्दी बदतर हो सकते हैं। अगर रोगी को ब्रीदिंग इश्यूज हों और डॉक्टर को एक दिन के अंदर रोगी में ब्रोंकाइटिस या निमोनिया के संकेत न मिले, तो रोगी को इमरजेंसी रूम में ले जा कर तुरंत उपचार कराना अनिवार्य हो जाता है।

ब्रोंकाइटिस और निमोनिया का निदान कैसे किया जाता है? (Diagnosis of bronchitis and pneumonia)

ब्रोंकाइटिस और निमोनिया (Bronchitis and Pneumonia) का निदान करने के लिए डॉक्टर सबसे पहले इनके लक्षणों के बारे में जानेंगे। इसके साथ ही यह जानना भी जरूरी है कि यह लक्षण किन स्थितियों में बेहतर और बदतर होते हैं। प्रभावित व्यक्ति की मेडिकल हिस्ट्री भी जानी जाती है। इसके बाद डॉक्टर स्टेथोस्कोप की मदद से रोगी जब सांस लेता है, तो उसके फेफड़ों को सुनते हैं। क्योंकि, यह आवाज इस बात का लक्षण हो सकता है कि यह रोग ब्रोंकाइटिस है या निमोनिया। इन लक्षणों के अनुसार कुछ टेस्ट्स के लिए कहा जा सकता है, जैसे:

  • स्प्यूटम कल्चर (Sputum Culture) : स्प्यूटम कल्चर टेस्ट में खांसी से निकलने वाली कफ का नमूना लिया जाता है और किसी खास जर्म्स के लिए इसकी जांच की जाती है।
  • चेस्ट एक्स-रेज (Chest X-rays) : चेस्ट एक्स-रेज से डॉक्टर को प्रभावित व्यक्ति के फेफड़ों में इंफेक्शन के बारे में पता चलता है और इससे भी ब्रोंकाइटिस और निमोनिया (Bronchitis and Pneumonia) में अंतर पता चल सकता है।
  • पल्स ऑक्सीमीट्री (Pulse Oximetry) : इस टेस्ट के लिए डॉक्टर रोगी के उंगलियों में एक डिवायस लगाते हैं, ताकि खून में ऑक्सीजन की मात्रा को मापा जा सके।
  • पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट्स (Pulmonary Function Tests) : पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट्स में रोगी को एक डिवायस में फूंकना होता है। जिसे स्पैरोमीटर कहा जाता है। इससे मापा जाता है कि रोगी के फेफड़ों में कितनी हवा है।

यह भी पढ़ें : निमोनिया और वॉकिंग निमोनिया, दोनों में से ज्यादा से खतरनाक कौन सा है?

ब्रोंकाइटिस और निमोनिया का उपचार (Treatment of Bronchitis and Pneumonia)

ब्रोंकाइटिस और निमोनिया दोनों का उपचार इसके अंडरलाइंग कारकों पर निर्भर करता है। जैसे यह कारण बैक्टीरियल है या वायरल। जानिए कैसे किया जाता है है ब्रोंकाइटिस का इलाज :

अधिकतर मामलों में एक्यूट ब्रोंकाइटिस वायरल होता है। जिसका उपचार एंटीबायोटिक्स से नहीं किया जा सकता है। इस स्थिति में उपचार के तरीके इस प्रकार हैं:

  • आराम करना (Take Rest)
  • अधिक से अधिक तरल पदार्थों का सेवन (Drinking Plenty of Fluids)
  • दर्द से राहत पाने के लिए ओवर द काउंटर दवाईयों का प्रयोग (Over-the-Counter Pain Relievers)
  • खांसी की दवाई (Cough Medication)
  • रात में खांसी से छुटकारा पाने के ह्युमिडिफायर का प्रयोग भी किया जा सकता है (Use Humidifier at Home)

अगर ब्रोंकाइटिस का कारण बैक्टीरियल इंफेक्शन है तो डॉक्टर एंटीबायोटिक्स की सलाह दे सकते हैं। क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस का इलाज संभव नहीं है। हालांकि कई तरीकों से प्रभावित व्यक्ति को सांस लेने में आसानी हो सकती है। इसके लिए डॉक्टर इनहेलर्स(Inhalers), पल्मोनरी रिहेबिलेशन थेरेपी (Pulmonary Rehabilitation Therapy) और अन्य दवाईयां दे सकते हैं। जिनकी मदद से एयरवेज की सूजन कम हो सकती है। एक्यूट और क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस उन लोगों में बहुत ही सामान्य है, जो धूम्रपान करते हैं। धूम्रपान करना छोड़ने से आप ब्रोंकाइटिस की समस्या को कम कर सकते हैं और इससे एयरवेज के नुकसान को भी रोका जा सकता है।

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निमोनिया का उपचार (Treatment of Pneumonia)

निमोनिया का उपचार इसके प्रकार पर निर्भर करता है। बैक्टीरियल निमोनिया का उपचार एंटीबायोटिक्स के साथ हो सकता है और एंटीफंगल दवाइयां फंगल निमोनिया का उपचार के लिए प्रयोग में लाई जाती हैं। हालांकि, वायरल बैक्टीरिया के लिए कोई खास उपचार मौजूद नहीं है।

इसके साथ ही कुछ अन्य तरीके भी निमोनिया के उपचार में लाभदायक सिद्ध हो सकते हैं, जैसे:

  • दर्द या बुखार को कम करने के लिए दवाईयां (Medicines to Reduce Pain and Control fever)
  • अधिक तरल पदार्थों को लेना (Drinking Plenty of Fluids)
  • पर्याप्त आराम करना (Getting Lots of Rest)
  • ह्यूमिडिफायर या स्टीम का प्रयोग कर के बलगम को लूज करना (Using a Humidifier or Steam to Help Loosen Mucus)
  • स्मोकिंग को नजरअंदाज करना (Avoid Smoking)

इस दौरान होने वाली खासी से बचने के लिए कुछ लोग खांसी से राहत दिलाने वाली दवाईयों का प्रयोग कर करते हैं। लेकिन, इस दवाई का प्रयोग करने से पहले डॉक्टर की सलाह अवश्य लें। निमोनिया से पीड़ित कुछ लोगों को गंभीर स्थितियों में अस्पताल में भी भर्ती होना पड़ सकता है जैसे अधिक बुखार होना। ऐसे में किसी भी स्थिति या लक्षण को नजरअंदाज न करें।

यह भी पढ़ें : Bacterial pneumonia: बैक्टीरियल निमोनिया क्या है?

निमोनिया और एक्यूट ब्रोंकाइटिस बहुत जल्दी ठीक होने वाले इंफेक्शन होते हैं। अधिकतर मामलों में घर पर ही रोगी का ध्यान रखकर और उपचार से रोगी एक या दो हफ्तों में स्वस्थ हो जाता है। ब्रोंकाइटिस और निमोनिया (Bronchitis and pneumonia) दोनों का उपचार संभव है। खासतौर, पर अगर इन समस्याओं के लक्षणों को तुरंत पहचान कर इलाज कराया जाए। दोनों स्थितियों के लक्षण भी एक जैसे होते हैं। अधिकतर मामलों में लोग बिना डॉक्टर के निदान के इनमें अंतर नहीं बता पाते हैं। ब्रोंकाइटिस और निमोनिया (Bronchitis and pneumonia) दोनों में ही जल्दी मेडिकल केयर से रोगी की जान बच सकती है। यही नहीं, इससे रोगी की रिकवरी भी जल्दी होती है और वो जल्दी सामान्य जीवन जीने में सक्षम होते हैं।

अगर आप हेल्दी रहना चाहते हैं तो संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए हेल्दी आदतों को अपनाना भी बहुत जरूरी है। जैसे सही और संतुलित आहार का सेवन, व्यायाम, तनाव से बचना आदि। स्वास्थ्य को कभी भी हलके में न लें, क्योंकि स्वास्थ्य के बिना जीवन की हर खुशी अधूरी है।

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AnuSharma द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 28/04/2021 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड