थंडर गॉड वाइन एक हर्ब है जिसके पत्ते और जड़ का प्रयोग दवाई बनाने में किया जाता है। इसका प्रयोग संधिशोथ (Rheumatoid arthritis or RA), मासिक धर्म के दौरान होने वाली असामान्य ब्लीडिंग, मल्टीपल स्क्लेरोसिस (MS), किडनी की समस्याओं आदि में किया जाता है। यह बुखार, कैंसर, HIV/AIDS और त्वचा संबंधी रोगों में राहत पाने में भी प्रभावी है। संधिशोथ (RA) के लिए इसे त्वचा पर भी लगाया जाता है। इस हर्ब का प्रयोग कीड़ों या लार्वा, चूहों और पक्षियों के लिए जहर के रूप में भी किया जाता है।

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इसके साथ ही यह जड़ी-बूटी अन्य रोगों में भी प्रयोग में लाई जाती है।
थंडर गॉड वाइन में कुछ केमिकल पाए जाते हैं जो सूजन (जलन) से छुटकारा दिला सकते हैं और इम्यून सिस्टम के काम करने के तरीके को बदल सकते हैं। यह हर्ब गठिया और अन्य स्थितियों में भी मददगार हो सकती है, लेकिन थंडर गॉड वाइन में कुछ ऐसे केमिकल होते हैं जो पुरुष प्रजनन क्षमता को कम कर सकते हैं। इसलिए इसका सेवन करने से पहले डॉक्टर या अन्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना अनिवार्य है।
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थंडर गॉड वाइन को जब गर्भावस्था के दौरान मुंह के माध्यम से लिया जाता है तो यह पूरी तरह से असुरक्षित है। इससे शिशु में जन्म संबंधी विकार हो सकते हैं। इसलिए गर्भवती महिलाओं को इसका प्रयोग नहीं करना चाहिए। ब्रेस्टफीडिंग के दौरान इसका प्रयोग सुरक्षित है या नहीं इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है, लेकिन सुरक्षित रहने के लिए इसका प्रयोग करने से बचें।
थंडर गॉड वाइन की अधिक खुराक लेने से इम्यून सिस्टम कमजोर हो सकता है। अगर HIV/AIDS या किसी खास दवाई के कारण आपका इम्यून सिस्टम पहले से ही कमजोर है तो इसे हर्ब को लेना बंद कर दें।
थंडर गॉड वाइन के सेवन से हड्डियों की मजबूती कम हो सकती है। यदि आपको ऑस्टियोपोरोसिस है या इसके विकसित होने की संभावना है, तो थंडर गॉड वाइन का उपयोग न करें।
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थंडर गॉड वाइन की अधिक खुराक इम्यून सिस्टम को कमजोर कर सकती है। इसे अगर आप ऐसी अन्य दवाइयों के साथ लेते हैं जो इम्यून सिस्टम कमजोर कर देती हैं तो इसका बहुत अधिक प्रभाव इम्यून सिस्टम पर भी पड़ेगा। इसलिए, ऐसी दवाओं के साथ इस हर्ब को बिना डॉक्टर की सलाह के न लें। यह दवाइयां हैं आजतिओप्रिन (azathioprine) ,सीक्लोस्पोरिन (cyclosporine) ,ऑर्थोक्लोन (Orthoclone) आदि।
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वैज्ञानिक रिसर्च में इसकी हर्ब को लेने की सही मात्रा इस प्रकार है:
संधिशोथ (RA): जोड़ों की समस्या होने पर प्रतिदिन पांच से छह बार थंडर गॉड वाइन के टिंचर को लगाया जाता है।
उन लक्षणों के लिए जो किडनी डैमेज का संकेत देते हैं (nephrotic syndrome): रोगी को 20 हफ्तों के लिए इस जड़ी-बूटी का शरीर के वजन के प्रति किलोग्राम के हिसाब से 1mg से प्रति किलोग्राम सेवन करना चाहिए।
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Current Version
11/05/2020
Anu sharma द्वारा लिखित
के द्वारा मेडिकली रिव्यूड डॉ. हेमाक्षी जत्तानी
Updated by: Manjari Khare