ब्रेस्टफीडिंग बचा सकता है आपको जानलेवा बीमारी से

Medically reviewed by | By

Update Date दिसम्बर 11, 2019 . 2 मिनट में पढ़ें
Share now

हम सभी जानते हैं कि ब्रेस्टफीडिंग बच्चे के जीवन के लिए वरदान होता है। ये केवल बच्चे को नहीं बल्कि मां को भी लाभ पहुंचाता है। जो मां बच्चे को छह माह तक अपना दूध पिलाती है, उसे ब्रेस्ट कैंसर जैसी बीमारी का जोखिम कम हो जाता है। रिसर्च में ये बात सामने आई है कि जो मां बच्चे को दूध पिलाती है उसे प्री एंड पोस्ट मेनोपोजल ब्रेस्ट कैंसर( Pre and post menopausal breast cancer) का खतरा कम हो जाता है। इस आर्टिकल के माध्यम से जानिए कि किस तरह से ब्रेस्टफीडिंग कैंसर के खतरे को कम करती है।

कम हो जाता है कैंसर का खतरा

स्तनपान कराने वाली अधिकांश महिलाएं स्तनपान कराने के बाद हार्मोनल चेंज महसूस करती हैं। स्तनपान के दौरान ब्रेस्ट टिशू संभावित DNA क्षति को रोकने के साथ ही कोशिकाओं को हटाने में मदद करते है। इस प्रकार से स्तनपान कराने वाली महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की संभावना कम हो जाती है। स्तनपान ओवुल्युशन को रोककर ओवेरियन कैंसर के खतरे को भी कम करता है।

5 Steps: ब्रेस्ट कैंसर की जांच ऐसे करें

ब्रेस्टफीडिंग आपके बच्चे को कैंसर से बचाने में मदद करती है

ये बात हर कोई जानता है कि जिस बच्चे ने ब्रेस्टफीड लिया है, उसे मोटापे का सामना नहीं करना पड़ता है। शरीर में मोटापे की वजह से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। यही वजह है कि ब्रेस्ट फीड करने वाले बच्चे में अग्नाशय, एंडोमेट्रियल, एसोफैगल, रेक्टल और किडनी कैंसर का खतरा कम हो जाता है।

यह भी पढ़ें – सर्जरी से ब्रेस्ट साइज किया 11 किलो कम, जानिए किस बीमारी से पीड़ित थी महिला

बिजी मॉम्स ध्यान से पढ़ें

शोध से पता चला है कि जो महिलाएं स्तनपान कराती हैं, वो उन महिलाओं के मुकाबले (जो स्तनपान नहीं कराती है) 20 प्रतिशत तक कैंसर के जोखिम से बच जाती है। ब्रेस्टफीडिंग न कराना ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को बढ़ाना है। शराब पीने और व्यायाम न करने से इस बीमारी के होने की संभावना बढ़ जाती है। अगर आप वर्किंग हैं या नहीं भी है तो ब्रेस्टफीडिंग को भूलकर भी इग्नोर न करें।  ये न सिर्फ आपकी बीमारी के लक्षणों को कम करने में मदद करता है बल्कि बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाने का काम करता है।

क्या कहती है रिसर्च?

स्टडी के अनुसार 15% महिलाओं में स्तन कैंसर का कारण जेनेटिक है। जबकि हाई ब्रेस्ट डेंसिटी, स्तन कैंसर के सबसे बड़े जोखिम कारकों में से एक है। हालांकि, स्तनों का घनत्व उम्र के साथ धीरे-धीरे कम होता जाता है, लेकिन बढ़ती उम्र भी इस कैंसर का एक कारण हो सकती है। स्तन कैंसर को रोका नहीं जा सकता है लेकिन, गर्भावस्था और ब्रेस्टफीडिंग स्तन कैंसर के खतरे को कम कर सकते हैं। हालांकि, अगर शुरूआत में ही ब्रेस्ट कैंसर के लक्षणों का पता चल जाए तो इसका इलाज आसान हो जाता है।

2020 तक आठ लाख महिलाओं की मौत का कारण बन सकता है ब्रेस्ट कैंसर

रखें ध्यान

सभी महिलाओं को यह पता होना चाहिए कि उनके स्तन सामान्य रूप से कैसे दिखते हैं ? उनमें किसी भी तरह बदलाव दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। वहीं, 50 वर्ष की उम्र की महिलाओं को नियमित अंतराल पर से मेमोग्राफी कराना चाहिए, जिससे स्क्रीनिंग के द्वारा ब्रेस्ट कैंसर को फर्स्ट स्टेज पर ही पकड़ा जा सके।

हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की चिकित्सा या उपचार प्रदान नहीं करता है।

यह भी पढ़ें – जानें कैसे रेड मीट की वजह से बढ़ सकती है ब्रेस्ट कैंसर की संभावना

घर-परिवार में किसी को है ब्रेस्ट कैंसर? तो ऐसे ख्याल रखें

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

संबंधित लेख:

    क्या यह आर्टिकल आपके लिए फायदेमंद था?
    happy unhappy"
    सूत्र

    Recommended for you

    मेन्स बूब्स (Men boobs)

    Quiz: पुरुषों के स्तन (Men boobs) के बारे में जानने के लिए खेलें मेन्स बूब्स क्विज

    Written by Shayali Rekha
    Published on फ़रवरी 12, 2020 . 1 मिनट में पढ़ें