ब्रेस्ट कैंसर से मानसिक परेशानी हो सकती है लेकिन, इससे डरे नहीं

    ब्रेस्ट कैंसर से मानसिक परेशानी हो सकती है लेकिन, इससे डरे नहीं

    बीमारी कोई भी हो इसका सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ना तय होता है। महिलाओं में स्तन कैंसर सबसे आम कैंसर है। भारत में हर 4 मिनट में एक महिला को स्तन कैंसर से पीड़ित होने की जानकारी मिलती है। अब ऐसे में ये सवाल उठता है की ऐसी स्थिति में वो खुद को कैसे संभाल सकती हैं ? ब्रेस्ट कैंसर से मानसिक परेशानी भी हो सकती है। ऐसा नहीं है की ब्रेस्ट कैंसर का इलाज संभव नहीं है। अगर समय पर इलाज शुरू किया गया तो इस बीमारी से भी बचना आसान है। आज इस आर्टिकल में जानेंगे कि ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर से मानसिक परेशानी होने के वावजूद कैसे खुद को मेंटली और इमोशनली स्ट्राॅन्ग रख सकती हैं।

    कैंसर आपके शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने के साथ-साथ मेंटली और इमोशनली प्रभाव भी डाल सकता है। ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित महिलाओं को निम्नलिखित मानसिक परेशानियां हो सकती हैं, पहले उनके बारे में जान लें, फिर आप जानेंगे कैसे उनसे निपटा जाए।

    ब्रेस्ट कैंसर से मानसिक परेशानी में शामिल है तनाव और चिंता

    इलाज के दौरान और बाद में तनाव होना सामान्य है लेकिन, इस दौरान अगर हार्ट बीट ज्यादा (प्रति मिनट 100 से ज्यादा) रहे, मसल्स और सिरदर्द की परेशानी होना, भूख नहीं लगना या अत्यधिक भूख लगना, कमजोरी महसूस होना और ठीक से नींद नहीं आना। ऐसे में अपने डॉक्टर से बात करें और उन्हें अपनी परेशानी बताएं। कभी-कभी ब्रेस्ट कैंसर से मानसिक परेशानी हो सकती है। जिस वजह से नींद न आना, भूख न लगना या अच्छा महसूस न होना हो सकता है लेकिन, इनसभी परेशानियों से दूर रहें। कोशिश करें 7 से 9 घंटे की नींद लें और ज्यादा से ज्यादा रिलैक्स करें।

    ब्रेस्ट कैंसर से मानसिक परेशानी में शामिल है उदासी और डिप्रेशन

    कोई भी कैंसर पेशेंट निश्चित ही उदास और डिप्रेशन महसूस कर सकता है लेकिन, इसे हावी न होने दें। हो सकता है आपको भूख न लगे या कुछ करने की इच्छा न हो। ऐसी परेशानी कुछ दिनों में ठीक हो सकती है लेकिन, ज्यादा दिनों तक ऐसा होना स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है। ऐसे में आप डिप्रेशन की शिकार हो सकतीं हैं। इसलिए सकारात्मक सोच रखें और आहार यानी डायट पर ध्यान दें। कई बार ब्रेस्ट कैंसर से मानसिक परेशानी होने भी खाने की इच्छा नहीं होती है और ऐसी में शारीरिक परेशानी में बढ़ सकती है। दरअसल विटामिन और पौष्टिक आहार की कमी भी डिप्रेशन का करण बन सकती है । इसलिए भूखे न रहें और संतुलित और पौष्टिक आहार का सेवन करना आपको स्वस्थ रहने में मददगार होते हैं।

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    ब्रेस्ट कैंसर से मानसिक परेशानी में शामिल है कसूर (Guilt)

    कई बार ब्रेस्ट कैंसर पेशेंट अपनी परेशानी और परिवार में हो रही परेशानियों की वजह से खुद को कसूरवार समझने लगती हैं। ऐसी भावना मन में न लाएं सिर्फ डॉक्टर द्वारा दिए गए निर्देश का पालन करें। ब्रेस्ट कैंसर से मानसिक परेशानी से बचने के लिए खुश रहना सीखें। खुश रहने से आप ज्यादा सकारात्मक सोच रखने में सक्षम होंगी।

    ब्रेस्ट कैंसर या स्तन कैंसर से मानसिक परेशानी में शामिल है डर महसूस होना

    कैंसर (बीमारी) शब्द भयभीत या चिंतित करने वाला जरूर है लेकिन, यह भी ध्यान रखना चाहिए की आप सिर्फ अकेले इस बीमारी से पीड़ित नहीं हैं। ऐसी कई कैंसर पीड़ित हैं, जिन्होंने इस बीमारी को हराया है और हरा रही हैं।

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    ब्रेस्ट कैंसर या स्तन कैंसर से मानसिक परेशानी में शामिल है गुस्सा आना

    पेशेंट के मन में ऐसे सवाल कई बार आते हैं कि आखिर उन्हें कैंसर क्यों हुआ? यह ध्यान रखें बीमारी कभी भी किसी को बता कर नहीं आती है। अगर आपको गुस्सा आ रहा है, तो उसे अपने मन में न रखें क्योंकि ऐसी प्रवृति आपकी सेहत के लिए ठीक नहीं है।

    आपका ध्यान रखने के लिए परिवार के सदस्यों के साथ-साथ आपके फ्रेंड्स भी होंगे लेकिन, आपको (पेशेंट) भी अपने आपको फिट रखने के लिए कुछ बातों को ध्यान रखना चाहिए। जैसे:

    1. अपनी भावनाओं को व्यक्त करें- मन में कोई भी बात न रखें। अगर कोई परेशानी महसूस हो रही है तो इसे छुपाये नहीं। किसी भी तरह की परेशानी को दूर करने के लिए अपने प्रियजनों से अवश्य बात करें। ऐसा करने से आप अच्छा महसूस करने के साथ-साथ रिलैक्स महसूस करेंगे। वहीं स्वास्थ्य संबंधी कोई परेशानी होने पर परिवार के सदस्यों को बतायें और जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क करें।

    2. सकारात्मक सोच रखें- बुरे समय में भी अच्छी सोच रखना और आशावादी रहना चाहिए। यह आपके लिए फिजिकली और मेंटली दोनों तरह से लाभदायक है। ब्रेस्ट कैंसर से मानसिक परेशानी होने पर महिलायें बीमारी के कारण परेशान तो रहती हैं लेकिन, परिवार के लोगों को परेशान देख उनकी समस्या और बढ़ सकती है। इसलिए पॉसिटिव सोच रखें और डॉक्टर द्वारा बताये गए निर्देशों का पालन करें।

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    3. अपने आपको एक्टिव रखें- जितना सक्षम हो उतना अपने आपको एक्टिव रखें। घर के हल्के-फुल्के काम करें। अगर डॉक्टर से बेड रेस्ट की सलाह मिली है, तभी पूरी तरह से बेड रेस्ट पर रहें। अगर ऐसा नहीं है तो आपको नियमित वॉकिंग करना चाहिए। नियमित वॉकिंग शरीर फिट रखने के साथ-साथ एक्टिव रहने में मददगार हो सकता है। अगर आप बाहर वॉक करने किसी कारण नहीं जा पा रहीं हैं, तो घर में चलने की कोशिश करें।

    4. आहार, एक्सरसाइज और योग- पौष्टिक आहार का सेवन करें और डॉक्टर ने जैसे आहार लेने की सलाह दी है वही खाएं। खाने के साथ-साथ योग और एक्सरसाइज भी करें। एक्पर्ट से राय लें की आपको कौन-कौन से एक्सरसाइज या योगा करना चाहिए। अगर आप एक्सरसाइज या योग नहीं कर पा रही हैं, तो वॉक अवश्य करें।

    5. अपनी पसंद का ध्यान रखें- अगर आपको (पेशेंट को) पढ़ना, लिखना, गाने सुनना या इनसब के अलावा जो कुछ भी आपको करना पसंद हो वो जरूर करें। लेकिन, ऐसा कुछ भी ऐसा न करें जिससे आपके सेहत को नुकसान हो।

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    ब्रेस्ट कैंसर या स्तन कैंसर से मानसिक परेशानी होने स्वाभाविक है लेकिन, ऐसी स्थिति में ब्रेस्ट कैंसर या स्तन कैंसर पेशेंट के साथ-साथ परिवार के सदस्यों दोनों को एक दूसरे का साथ सकारात्मक सोच के साथ करना होगा। ब्रेस्ट कैंसर पेशेंट अगर कभी परेशानी महसूस करें तो परिवार के सदस्यों के साथ-साथ दोस्तों को भी सपोर्ट करना आवश्यक होता है।

    अगर आप ब्रेस्ट कैंसर से मानसिक परेशानी हो सकती है। इसलिए ब्रेस्ट कैंसर या इस से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा। उपरोक्त दी गई जानकारी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। अगर आपको कैंसर से रिलेटेड कोई भी समस्या है तो एक्सपर्ट से राय जरूर लें।

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    के द्वारा मेडिकली रिव्यूड

    Dr Sharayu Maknikar


    Nidhi Sinha द्वारा लिखित · अपडेटेड 28/12/2021

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