Mammography and Thermography: मैमोग्राफी और थर्मोग्राफी में क्या अंतर है?

    Mammography and Thermography: मैमोग्राफी और थर्मोग्राफी में क्या अंतर है?

    मैमोग्राफी और थर्मोग्राफी (Mammography and Thermography) में अंतर समझने के लिए सबसे पहले सझने की कोशिश करते हैं कि क्या है मैमोग्राफी और थर्मोग्राफी? मैमोग्राफी और थर्मोग्राफी में अंतर से पहले जान लेते हैं कुछ खास फैक्ट्स। दरअसल मैमोग्राफी और थर्मोग्राफी की जरूरत स्तन कैंसर (Breast Cancer) की जांच के लिए की जाती है। मैमोग्राफी और थर्मोग्राफी कोई भी महिला करवा सकती हैं।

    क्या हैं ब्रेस्ट कैंसर से जुड़े फैक्ट्स? (Facts of Breast Cancer)

    मैमोग्राफी और थर्मोग्राफी (Mammography and Thermography)

    ब्रेस्ट कैंसर से जुड़े फैक्ट्स इस प्रकार हैं-

    • भारतीय महिलाओं में स्तन कैंसर (Breast Cancer) की समस्या सबसे आम मानी जाती है।
    • भारत में हर 4 मिनट में एक महिला को स्तन कैंसर का पता चलता है।
    • भारत में प्रत्येक 13 मिनट में एक महिला की मौत स्तन कैंसर (Breast Cancer) से होती है।
    • भारत में 50 प्रतिशत से ज्यादा ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित महिला स्टेज 3 और स्टेज 4 की पेशेंट होती है और इस स्टेज में पहुंचने के बाद उनके जीने की संभावना बेहद कम होती है।

    हालांकि इन ऊपर बताये गए फैक्ट्स से डरना नहीं चाहिए, लेकिन सतर्क जरूर रहना चाहिए। इस आर्टिकल में आगे समझेंगे मैमोग्राफी और थर्मोग्राफी (Mammography and Thermography) से जुड़ी पूरी जानकारी।

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    मैमोग्राफी क्या है? (What is Mammography?)

    मैमोग्राफी (Mammography) एक एक्स-रे प्रोसेस है, जिससे ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) और ब्रेस्ट से जुड़ी अन्य परेशानियों को आसानी से समझा जा सकता है। मैमोग्राफी से ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती स्टेज की जानकारी मिल जाती है, जिससे इलाज आसानी से और सही तरीके से किया जाता है। डॉक्टर अगर पेशेंट को मैमोग्राफी करवाने की सलाह देते हैं, तो गर्भवती महिलाओं को डॉक्टर से अपनी गर्भावस्था की जानकारी जरूर देनी चाहिए। टेस्ट के पहले किसी भी तरह के क्रीम, लोशन या परफ्यूम का इस्तेमाल न करें और अपने ब्रेस्ट पर भी न लगाएं।

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    मैमोग्राफी दो तरह की होती हैं- 1. डिजिटल मैमोग्राफी (Digital mammography) 2. सीएडी (Computer-aided detection)

    मैमोग्राफी (Mammography) के दौरान क्या होता है?

    • पेशेंट को पेपर (कागज) से बने कपड़े पहनाए जाते हैं।
    • दोनों ब्रेस्ट के दो-दो एक्स-रे लिए जाते हैं।
    • टेस्ट के दौरान ब्रेस्ट को दबाया जाता है, हालांकि इससे कोई नुकसान नहीं होता है। लेकिन हल्का दर्द महसूस हो सकता है।
    • एक्स-रे के दौरान डॉक्टर पेशेंट को गहरी सांस लेने की सलाह देते हैं और कुछ सेकेंड के लिए सांस होल्ड करने के लिए कहते हैं।

    मैमोग्राफी से मिले रिपोर्ट के अनुसार ब्रेस्ट में हुए गांठ की जानकरी आसानी से मिल जाती है। यह जरूरी नहीं की ब्रेस्ट में मौजूद गांठ कैंसरस ही हो। कई बार जांच के दौरान निकलने वाले रेडिएशन की वजह से महिला या परिवार के सदस्य चिंतित भी हो जाते हैं। लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि मैमोग्राम के दौरान निकलने वाले रेडिएशन से खतरा न के बराबर होता है।

    18 से 20 वर्ष से ज्यादा की महिलाएं खुद से घर पर ही स्तन की जांच की जांच कर सकती हैं। वहीं 40 से ज्यादा उम्र की महिलाओं को 2 साल में एक बार मैमोग्राफी करवाना चाहिए।

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    थर्मोग्राफी क्या है? (What is Thermography?)

    थर्मोग्राफी (Thermography) एक टेस्ट है, जो शरीर के टिशू में हीट पैटर्न और ब्लड फ्लो (Blood flow) की जानकारी के लिए किया जाता है। डिजिटल इंफ्रारेड थर्मल इमेजिंग (DITI) थर्मोग्राफी का प्रकार है। DITI से ब्रेस्ट कैंसर की जानकारी मिल जाती है। दरअसल ब्रेस्ट में मौजूद ट्यूमर तक ब्लड सप्लाई के जानकारी आसानी से मिल जाती है। थर्मोग्राफी से किसी भी तरह का रेडिएशन नहीं होता है और न ही थर्मोग्राफी (Thermography) के दौरान कोई दर्द महसूस होती है। थर्मोग्राफी को 50 साल से कम उम्र की महिलाओं के लिए किया जाता है।

    थर्मोग्राफी (Thermography) के दौरान क्या होता है?

    • पेशेंट को क्रीम, परफ्यूम या डिओड्रेंट जैसी किसी भी प्रोडक्ट के इस्तेमाल पर रोक होती है।
    • टेस्ट के वक्त पेशेंट को कमर से ऊपर अनड्रेस्ड रखा जाता है।
    • थर्मोग्राफी सिस्टम (मशीन) के सामने पेशेंट को खड़ा रखा जाता है।
    • एक्सपर्ट फ्रंट और बैक के 6 अलग-अलग इमेज लेंगे।
    • इस टेस्ट के दौरान कम से कम आधे घंटे का वक्त लगता है।

    थर्मोग्राफी से मिले रिपोर्ट के अनुसार ब्रेस्ट में हुए गांठ की जानकरी आसानी से मिल जाती है। थर्मोग्राफी (Thermography) से किसी भी तरह का रेडिएशन नहीं होता है। 50 साल से कम उम्र की महिलाओं को थर्मोग्राफी की सलाह दी जाती है।

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    थर्मोग्राफी (Thermography)–

    • थर्मोग्राफी टेस्ट के दौरान ब्रेस्ट पर प्रेशर नहीं दिया जाता है
    • इस टेस्ट के दौरान दर्द नहीं होता है
    • थर्मोग्राफी टेस्ट के दौरान किसी भी तरह का रेडिशन नहीं होता है
    • थर्मोग्राफी टेस्ट की मदद से ब्रेस्ट में हो रहे किसी भी तरह के बदलाव को आसानी से समझा जा सकता है
    • थर्मोग्राफी टेस्ट से ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती स्टेज की भी जानकारी आसानी से मिल जाती है
    • ब्रेस्ट टिशू में हो रहे बदलाव की जानकारी भी मिल जाती है
    • इससे हॉर्मोन या पीरियड्स पर कोई असर नहीं पड़ता है
    • थर्मोग्राफी रिपोर्ट कलर इमेज होती है।

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    मैमोग्राफी (Mammography)-

    • मैमोग्राफी और थर्मोग्राफी में अंतर यह है की मैमोग्राफी टेस्ट के दौरान ब्रेस्ट पर हल्का दबाव पड़ता है। जबकि थर्मोग्राफी में दवाब नहीं पड़ता है।
    • मैमोग्राफी और थर्मोग्राफी में दूसरा अंतर यह है की थर्मोग्राफी के दौरान दर्द नहीं होता है बल्कि मैमोग्राफी के वक्त महिला को हल्का दर्द (Pain) महसूस हो सकता है।
    • मैमोग्राफी और थर्मोग्राफी अंतर यह है कि थर्मोग्राफी के दौरान रेडिएशन नहीं होता है लेकिन, मैमोग्राफी टेस्ट के दौरान रेडिएशन होता है लेकिन, इसका नकारात्मक प्रभाव शरीर पर नहीं पड़ता है।
    • मैमोग्राफी के दौरान छोटे से छोटे ट्यूमर की जानकारी मिल जाती है। जिससे बीमारी की सही जानकारी मिल जाती है और इलाज करना आसान हो जाता है।
    • अगर महिला के मिल्क डक्ट में एब्नॉर्मल टिशू हैं तो इसकी जानकरी मिल जाती है। एब्नॉर्मल टिशू (Abnormal tissue) की जानकारी अगर जल्दी मिल जाती है, तो कैंसर एक्सपर्ट इलाज की शुरुआत जल्द से जल्द कर देते हैं।
    • मैमोग्राफी और थर्मोग्राफी के रिपोर्ट्स के रंग भी अलग-अलग होते हैं। थर्मोग्राफी (Thermography) की रिपोर्ट इमेज कलर होती है वहीं मैमोग्राफी की रिपोर्ट ब्लैक एंड वाइट होती है।

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    मैमोग्राफी और थर्मोग्राफी की जरूरत कब पड़ती है? (When Mammography and Thermography is required)

    जब किसी भी महिला को स्तन (Breast) संबंधी परेशानी महसूस होती है, तो ऐसी स्थिति में मैमोग्राफी और थर्मोग्राफी (Mammography and Thermography) की जरूरत पड़ सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार भारत के तकबरीबन सभी शहरों में 25 प्रतिशत से 32 प्रतिशत महिला ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) से पीड़ित हैं। इसलिए अगर ब्लड रिलेशन में कोई ब्रेस्ट कैंसर पेशेंट (Cancer patents) है, तो ऐसी स्थिति में महिलाओं का अपना विशेष ख्याल रखना चाहिए और स्तन की जांच (Breast examine) खुद से भी करनी चाहिए। इसे मेडिकल टर्म में सेल्फ ब्रेस्ट एग्जामिनेशन (Self Breast Examination) भी कहते हैं। इसलिए अपने शरीर के हर एक हिस्से को ठीक से समझना चाहिए और कोई भी परेशानी महसूस होने पर उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इससे परेशानी कम होने के बजाये और बढ़ सकती है।

    अगर आप मैमोग्राफी और थर्मोग्राफी (Mammography and Thermography) से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं, तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा।

    हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

    के द्वारा मेडिकली रिव्यूड

    डॉ. प्रणाली पाटील

    फार्मेसी · Hello Swasthya


    Nidhi Sinha द्वारा लिखित · अपडेटेड 29/12/2021

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