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क्या ई-बुक्स सेहत के लिए फायदेमंद है, जानें इससे होने वाले फायदे और नुकसान

क्या ई-बुक्स सेहत के लिए फायदेमंद है, जानें इससे होने वाले फायदे और नुकसान

शिक्षा ग्रहण करने के लिए प्राचीन काल में अत्यंत साधन मौजूद नहीं थे। शिक्षा के लिए गरूकुल ही स्कूल हुआ करते थे, जहा सिर्फ बोलने और सुनने के आधार पर ज्ञान का आदान- प्रदान किया जाता था, इसके पश्चात इसमें धीरे- धीरे सुधार हुआ और पेड़ के पत्तो और छालों पर लिखा जाने लगा इसके बाद लकड़ी पर लिखने का समय आया इसमें चाक की सहायता से लकड़ी पर लिखा जाता था लकड़ी के बाद कागज और पेन की सहायता से लिखा जाने लगा जाने लगा वर्तमान समय इंटरनेट का समय है, जिसमें ई-बुक्स (E-Books) के माध्यम से चीजों को लिखा और पढ़ा जा रहा है एक सबसे अहम बात यह निकलकर आ रही है कि दुनिया में फैली कोरोना वायरस महामारी की वजह से सभी शैक्षिक संस्थान बंद हैं जिसके चलते ई-बुक्स (E-Books) का चलन तेजी से चल पड़ा है। सभी स्कूल ऑन-लाइन शिक्षा प्रदान कर रहे हैं जहां ई-बुक्स (E-Books) का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे में हैलो हेल्थ के खास आर्टिकल में जानेंगे ई-बुक्स (E-Books) क्या है और इसके फायदे-नुकसान?

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ई-बुक्स क्या है

इस तकनीकी युग में चीजें कितनी बदल गई हैं। हमारे जीने और उसमें आनंद लेने के तरीकों में जमीन और आसमान का अंतर आ गया है। जैसा कि इसके नाम से ही पता चलता है कि ई-बुक्स (E-Books) एक इलेक्ट्रॉनिक किताब है, इसका अर्थ डिजिटल पुस्तक (Digital Book) है इसमें कागज का प्रयोग नहीं किया जाता है यानि कागजविहिन पुस्तक (Papperless Book) यह एक डिजिटल फाइल होती है इसे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस कम्प्यूटर, मोबाइल एवं अन्य डिजिटल उपकरणों के द्वारा पढ़ा जाता है इसके प्रयोग करने के लिए इंटरनेट की आवश्यकता होती है ई-बुक्स (E-Books) कई फॉर्मेट में बनायीं जाती है जैसे पीडीएफ (PDF) (पोर्टेबल डॉक्यूमेण्ट फॉर्मेट) इत्यादि, इनमें सबसे अधिक पीडीएफ फाइल प्रचलित है भविष्य में कागज की पुस्तकों के स्थान पर ऑडियो पुस्तक, मोबाइल टेलीफोन पुस्तक, ई-पुस्तक का प्रयोग किया जायेगा।

ई-बुक्स के लाभ

इस बात को तो हम अच्छी तरह जानते हैं कि इस तकनीकी युग में हमारे तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। हमारा संगीत सुनने का, फिल्में देखने का और बाजार में नये-नये खाने के व्यंजनों के साथ हमारी जिंदगी से जुड़ी कई चीजों का रूप तेजी से बदला है। इधर, पढ़ाई भी इससे अछूती नहीं रही है। हालांकि अभी इसका विस्तार पूरी तरह से नहीं हुआ है लेकिन कोरोना के कारण इसका प्रचलन बहुत तेजी से बढ़ा है। चलिए ई-बुक्स (E-Books) के कुछ लाभों पर एक नजर डाल लेते हैं..

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  • ई-बुक्स किसी भी पेपर-बेक बुक से आधे से भी कम कीमत में उपलब्ध हो जाती है। इसके फटने का भी कोई डर नहीं रहता और यह सालों साल सुरक्षित रहती है।
  • ई-बुक्स अपने मित्र संबंधियों के साथ आसानी से शेयर की सकती हैं।
  • ई-बुक्स से पढाई करके आप पर्यावरण संरक्षण में भी सहयोग दे रहे है, और पुस्तक कि छपाई में होने वाले कागज की बचत कर रहे है।
  • ई-बुक्स जगह भी कम घेरती है, और आप अपने कंप्यूटर मोबाइल इत्यादि पर हजारों ई-बुक्स स्टोर कर के रख सकते हो। इसे आप आसानी से एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर, मोबाइल इत्यादि पर कॉपी कर सकते है।
  • ई-बुक्स पढ़ते समय उसमे दी गयी वेबसाइट के लिंक पर भी आप क्लिक करके उस वेबसाइट पर जा सकते है, पेपर बुक में आप ऐसा नहीं कर सकते।
  • ई-बुक्स के द्वारा पैसों की बचत होती है, यह साधारण किताबों से सस्ती होती है इसे इंटरनेट के द्वारा डाउनलोड किया जा सकता है इसको खरीदने के लिए किसी मार्केट में नहीं जाना पड़ता है ये तो इसके साधारण लाभ हैं।
  • ई-बुक्स को इन्टरनेट पर खोजना, डाउनलोड करना, खरीदना आसान है और आप तुरंत पढ़ना शुरू कर सकते है।
  • ई-बुक्स को आप कंप्यूटर, मोबाइल और किसी अन्य यन्त्र के साथ आसानी से पढ़ सकते हो। इससे आपका पुस्तक को हर समय लेकर घूमने का झंझट नहीं रहता।
  • ई-बुक्स इन्टरनेट से डाउनलोड करते है, इसलिए इसके सार -संभाल, पेकिंग, और परिवहन में कोई खर्च नहीं है। इससे समय, संसाधन और पैसे कि बचत होती है।
  • ई-बुक्स आप 24 घंटे कभी भी इन्टरनेट से खरीद या डाउनलोड कर सकते हो। पेपर बुक के लिये दिन में आपको दुकान के टाइम का इन्तजार करना पड़ेगा।
  • आजकल लगभग हर विषय और रूचि अनुसार ई-बुक्स उपलब्ध है। ई-बुक में आप कोई शब्द, लाइन इत्यादि के लिये आसानी से खोज सकते है, पेपर बुक में ये संभव नहीं है।

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ई-बुक्स से परहेज

  • ई-बुक्स (E-Books) का इस्तेमाल उन लोगों के लिए नया नहीं है जो पहले से ही कंप्यूटर पर बहुत समय बिता चुके हैं और कुछ समय कंप्यूटर से दूर जाना चाहते है। उन्हें पेपर-बुक पर ही पुस्तक पढ़ना पसंद आएगा। कंप्यूटर पर पढ़-पढ़कर वे ऊब गए हैं।
  • ई-बुक्स कंप्यूटर के इस्तेमाल में सहज नहीं है। उनके पसंद के विषय में अच्छी ई-बुक उपलब्ध नहीं है, लेकिन यदि आप ई-बुक पढ़ने में रूचि रखते हैं तो आप इसे ऑनलाइन एप्स पर ई-बुक्स खरीदने और पढ़ने के लिये अच्छा रास्ता है।

ई-बुक्स एप्स पर मिलेंगे कई विकल्प

  • किसी भी बुक को तुरंत डाउनलोड कर के पढ़ सकते है. हर नयी पुस्तक जो बाजार में आती है, यहां उपलब्ध रहेगी।
  • हर पुस्तक को आप कंप्यूटर के आलावा एंड्रोयड, विंडो, आई-फोन, आई-पेड इत्यादि पर कहीं भी पढ़ सकते है।
  • यहां बहुत ज्यादा ई-बुक्स (E-Books) आप फ्री में भी डाउनलोड कर सकते है।

ई-बुक्स का उपयोग

ई-बुक का उपयोग मोबाइल, लैपटॉप या अन्य डिवाइस के द्वारा उपयोग किया जाता है। इसको कही भी किसी भी स्थान पर प्रयोग किया जा सकता है

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ई-बुक्स के नुकसान

पढ़ाई करते समय आंख और दिमाग सबसे ज्यादा इस्तेमाल में लाए जाते हैं। दिमाग को जितना इस्तेमाल किया जाए वह उतना ही तेज होता है। लेकिन आंखों का ख्याल रखना हमारे लिए पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। चाहे ई-बुक से पढ़ाई हो, चाहे पेपरलैस स्टडी। इन दोनों ही माध्यम में हमारी आंखों पर बुरा असर पड़ता है। ऐसे में ई-बुक्स एक तरह से मोबाइल, टैब और लैपटॉप और कंप्यूटर आदि चलाना ही माना जाए और जितनी हमारी आंखें इन सभी इलेक्ट्रोनिक्स डिवाइस पर टिकी रहेंगी उतनी ही यह हमारी आंखों के लिए खतरनाक साबित होगा। बता दें कि आधुनिक तकनीक ने जहां एक ओर हमारे जीवन को आसान बना दिया है, वहीं दूसरी ओर इसकी वजह से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं भी पैदा हो रही हैं। आइए जानते है ई-बुक के बड़े नुकसान।

  • ई-बुक्स जरिए रात में आईपैड, लैपटॉप या ई-रीडर पर किताबें पढऩे से नींद की गुणवत्ता कम हो जाती है।
  • ई-बुक्स से सोने के लिए तैयार होने में लगने वाले वक्त और नींद के कुल समय पर नकारात्मक असर पड़ता है। कई बार आंखों में लाल और सूजन की शिकायत भी आने लगती है
  • रैपिड आई मोमेंट स्लीप
    ई-बुक्स पढ़ने वाली के नींद वाले हॉर्मोन मेलाटोनिन के स्तर, नींद की गहराई और अगली सुबह उनकी सजगता के स्तर में बड़ा असर पड़ता है। शोध में यह पाया गया कि जो लोग रोज ई-बुक्स पढ़ते हैं, वे कई घंटे कम सोते हैं और उनमें रैपिड आई मोमेंट स्लीप का समय भी कम हो जाता है।
  • स्मरण-शक्ति कमजोर- ई-बुक्स नींद की इसी अवस्था में यादें संरक्षित होती हैं। इसलिए ज्य़ादा समय तक ई-बुक्स पढऩे से स्मरण-शक्ति कमजोर होती है।
  • पागलपन (Dementia)
    ई-बुक्स से शरीर और दिमाग को पूरी तरह से आराम न मिल पाने की स्थिति में मानसिक स्थिति पर भी बड़ा असर पड़ता है जिससे डिमेंशिया (Dementia) का भी खतरा बढ़ जाता है।

इसलिए अगर आप पढऩे के शौकीन हैं तो के बजाय किताबों के साथ वक्त बिताएं। अगर किसी वजह से ई-बुक्स पढऩा जरूरी हो तो भी सोने से पहले ई-बुक पढऩे से बचें।

 

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Arvind Kumar द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 09/08/2020 को
डॉ. पूजा दाफळ के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड