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Women Empowerment: जानिए वीमेन एम्पावरमेंट ऑर्गेनाइजेशन के बारे में जो करती हैं महिलाओं की मदद

Women Empowerment: जानिए वीमेन एम्पावरमेंट ऑर्गेनाइजेशन के बारे में जो करती हैं महिलाओं की मदद

देश बदल रहा है, लेकिन इस बदलते वक्त में भी कहीं ना कहीं महिला वर्ग को किसी न किसी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि पिछले कुछ वक्त से वीमेन एम्पावरमेंट (Women Empowerment) को लेकर देश में जागरूकता बढ़ी है। आज यहां ऐसे संस्थाओं के बारे में जानेंगे, जिन्होंने महिलाओं की मदद के लिए आगे आई है। आज इन्हीं महिला सशक्तिकरण संस्थाओं (Women Empowerment) के बारे में समझेंगे जानेंगे।

महिलाओं को लेकर असमानता को दूर करने के लिए विश्व महिला समानाता दिवस यानी की वुमन इक्वीलिटी-डे 26 अगस्त को मनाया जाता है। वीमेन एम्पावरमेंट (Women Empowerment) मुख्य रूप से महिलाओं को स्वतंत्र बनने, अपने लिए निर्णय लेने एवं उनपर होने वाले अत्याचारों को दूर करने के लिए शुरू की गई है। इसलिए इस बदलते वक्त में विचारधारा को बदलना जरूरी है और जीवन में आगे बढ़ने के लिए और एक दूसरे का साथ देने के लिए वीमेन एम्पावरमेंट (Women Empowerment) बेहद जरूरी है।

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वीमेन एम्पावरमेंट ऑर्गेनाइजेशन (Women Empowerment Organisation)

वीमेन एम्पावरमेंट (Women Empowerment)

1. वीमेन एम्पावरमेंट ऑर्गेनाइजेशन: एसईडब्ल्यूए (SEWA)

द सेल्फ एमप्लाइड वुमेंस एसोसिएशन (SEWA) का मुख्य उद्देश्य महिला सशक्तिकरण है। इस संस्था में महिला श्रमिकों के अधिकारों पर काम करने और प्रदर्शनों के अहिंसक तरीकों का उपयोग करने की कोशिश करते हैं। एसईडब्ल्यूए की स्थापना साल 1972 में गुजरात में एला भट्ट द्वारा की गई। द सेल्फ एमप्लाइड वुमेंस एसोसिएशन 1.9 मिलियन महिलाएं प्रतिनिधित्व कर रहीं हैं।

2. वीमेन एम्पावरमेंट: आजाद फाउंडेशन (Azad Foundation)

आजाद फाउंडेशन का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को शोषण से बचाना है। आजाद फाउंडेशन (Azad Foundation) में महिलाओं को आत्म-जागरूकता, रक्षा प्रशिक्षण और प्रजनन अधिकार और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियों से अवगत करवाया जाता है। दिल्ली के इंकॉपरेटेड ट्रस्ट द्वारा मई साल 2008 में वीमेन एम्पावरमेंट के लिय आजाद फाउंडेशन की शुरुआत की गई।

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3. वीमेन एम्पावरमेंट: एक्शनऐड इंडिया (ActionAid India)

एक्शनऐड इंडिया संस्था डोमेस्टिक (Domestic) एवं सेक्शुअल वायोलेंस (Sexsual Violence) के खिलाफ काम करती है। इस संस्था में डोमेस्टिक एवं सेक्शुअल वायोलेंस की शिकार हुई महिलाओं की काउंसलिंग की जाती है और उनकी हर प्रकार से मदद की जाती है। दिल्ली में साल 1972 में शुरू हुई यह संस्था आज विश्व के अलग-अलग हिस्सों में 40 जगह कार्यरत है और नारी सशक्तिकरण के लिए बढ़चढ़ कर काम कर रही है।

4. वीमेन एम्पावरमेंट: स्नेहालया (Snehalaya)

स्नेहालया महिला सशक्तिकरण को लेकर साल 1989 से कार्यरत है। स्नेहालया एचआईवी और एड्स जैसी बीमारियों से लड़ रही महिलाओं के लिए काम कर रही है। नारी सशक्तिकरण (Women Empowerment) के लिए स्नेहालया संस्था महिलाओं को सैनिटरी पैड बनाने के साथ-साथ उन्हें स्वतंत्र रूप से काम करने के लिए प्रेरित भी करती आ रही है।

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5. महिला सशक्तिकरण: सीआरईए (CREA)

सीआरईए एक नारीवादी मानवाधिकार संगठन है और इसकी स्थापना दिल्ली में साल 2000 में हुई। यह संस्था सेक्शुएलटी के बारे में महिलाओं को जागरूक करने का काम करती है।

6. महिला सशक्तिकरण: मजलिस मंच (Majlis Manch’s)

मजलिस मंच एक ऐसी संस्था है, जो यौन शोषण (sexual abuse) की शिकार हुई महिलाओं के लिए काम करती है। मजलिस मंच संस्था में सोशल वर्कर एवं वकीलों की टीम है, जो सेक्शुल एब्यूस की शिकार हुई महिलाओं के हित में काम करती है और हर संभव मदद प्रदान करती है। मजलिस मंच (Majlis Manch) एक पब्लिक ट्रस्ट एवं एनजीओ (Public Trust and an NGO) है और इस संस्था की शुरुआत साल 1991 में हुई।

7. महिला सशक्तिकरण: सयोध्या (Sayodhya)

सयोध्या एक ऐसी संस्था है, जो महिला एवं यंग गर्ल्स के लिए काम करती है। यह संस्था 24 घंटे सुविधा प्रदान करती है और इमरजेंसी की स्थिति में इस संस्था से मदद ली जा सकती है। यह संस्था जिन महिलाओं के पास रहने के लिए घर नहीं होता है, तो उन्हें रहने की सुविधा प्रदान करती है। हिंसा की शिकार हुई महिलाओं के लिए साल 2010 से काम कर रही है।

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8. महिला सशक्तिकरण: शिक्षण एवं समाज कल्याण केंद्र (Shikshan Ane Samaj Kalyan Kendra)

डोमेस्टिक वायोलेंस सर्वाइवर एवं विक्टिम (Victims and survivors of domestic violence) की मदद के लिए साल 1980 से काम कर रही है। यह संस्था पीड़ित महिला को क्राइसिस मैनेजमेंट, लीगल एडवोकेसी, सपोर्ट और आवश्यक सुविधा प्रदान करती है। इसके साथ ही यह संस्था महिलाओं को हेल्थ से जुड़ी जानकारी और एजुकेशन से जुड़ी जानकारी भी देती है।

9. नारी सशक्तिकरण: प्रेरणा (Prerana)

प्रेरणा मानव तस्करी पीड़ितों के बचाव, संरक्षण और पुनर्वास की दिशा में काम करती है। नारी सशक्तिकरण के लिए काम कर रही प्रेरणा संस्था अलग-अलग राज्यों में महिलाओं को सहयोग प्रदान करती है। हिंसा की शिकार हुई महिलाओं के काउंसिलिंग जैसी सुविधा भी इस संस्था में दी जाती है। इस संस्था ने साल 2000 में यूनाइटेड नेशन चिल्ड्रेन फंड (UNICEF) के साथ भी काम किया है।

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10. वीमेन एम्पावरमेंट: एनईएन (नॉर्थ ईस्ट नेटवर्क) (NEN [North East Network])

एनईएन की स्थापना वर्ष 1995 में महिलाओं पर बीजिंग विश्व सम्मेलन के एक भाग के रूप में की गई थी। यह लैंगिक अन्याय को दूर करने, समानता और मानवाधिकारों के सम्मान को शामिल करने की दिशा में काम करता है। यह संगठन असम, मेघालय, नागालैंड और उत्तर पूर्व भारत के अन्य हिस्सों में काम करता है।

महिला सशक्तिकरण यानी महिलाओं की आध्यात्मिक, राजनीतिक, सामाजिक या आर्थिक शक्ति में वृद्धि करना। भारत में महिलाएं शिक्षा, राजनीति, मीडिया, कला व संस्कृति, सेवा क्षेत्रों, विज्ञान व प्रौद्योगिकी आदि के क्षेत्र में भागीदारी करती हैं। भारत का संविधान सभी भारतीय महिलाओं की समानता की गारंटी देता है।

सिर्फ समाज में ही नहीं, बल्कि परिवार में भी महिलाओं और पुरुषों के बीच भेदभाव को कम करना जरूरी है। महिलाओं को खुद से जुड़े फैसले लेने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। सही मायने में तभी नारी सशक्तिकरण को सार्थक किया जा सकता है। नारी सशक्तिकरण में आर्थिक स्वतंत्रता की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

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वीमेन एम्पावरमेंट (Women Empowerment) के लिए देश में कई सारी योजना काम कर रही है। जैसे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम:, किशोरियों के सशक्तिकरण के लिए राजीव गांधी योजना (सबला), इंदिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय योजना, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, स्वाधार घर योजना, महिलाओं के लिए प्रशिक्षण और रोजगार कार्यक्रम (STEP) जैसे कई योजना है।

देश में महिलाओं की स्थिति को सुधारने के लिए शिक्षा पर ध्यान देना अत्यधिक जरूरी है। महिलाओं के प्रति अच्छी सोच भी लोगों या परिवार में होना जरूरी है। देश में अलग-अलग संस्थाएं मदद कर रहीं एवं सरकार द्वारा महिलाओं के लिए कई अलग-अलग योजना बनाई जा रही है। ऐसे में सभी को साथ मिलकर महिलाओं के प्रति सकारात्मक सोच रखने के अत्यधिक जरूरी है। आज की महिलाएं घर के साथ-साथ बड़े छोटे सभी संस्थाओं में काम कर रहीं और घर में आर्थिक मदद भी पहुंचा रहीं हैं। ऐसे में महिलाओं को साथ देना अत्यधिक जरूरी है और महिलाओं को भी किसी भी हिंसा को चुपचाप सहना नहीं चाहिए। क्योंकि डर या घबराहट के परदे से खुद बाहर निकलने की जरूरत है।

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सूत्र

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Nidhi Sinha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 25/02/2022 को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड