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लंबे समय से घर पर रहे रहें बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य में सुधार के लिए अपनाएं एक्सपर्ट टिप्स!

देश में कोरोना के मामले जिस तरह के लगातार बढ़ते जा रहे हैं, उसे देखते हुए यह कुछ नहीं कहा जा सकता है कि हमारी ऐसी जिंदगी कब तक चलने वाली है। कोविड-19 का प्रभाव बड़े से लेकर बच्चों तक, सभी पर पड़ा है। आज हम यहां बात कर रहे हैं, कोरोना महामारी के दौरान बच्चों के मानसिक स्वास्थ की। क्योंकि ऑनलाइन एज्युकेशन के चलते लंबे समय से बच्चे के घर पर ही हैं। उनके लाइफ कि वो सभी एक्टिविटीज भी रूक गई हैं, जो स्कूल जाने के दौरान उनके सैड्यूल में शामिल होती थीं। तो ऐसे में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य (Child mental health) का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य (Child mental health) को ध्यान में रखते हुए पेरेंट्स इन बातों को करें फॉलों:

और पढ़ें: कोरोना वायरस के ट्रांसमिशन फैक्टर: मास्क पहनने के साथ, इन छोटी-छाेटी बातों की तरफ भी गौर करें!

बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए पेरेंट्स अपनाएं ये टिप्स (Tips for Child mental health)

बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य की बात करें, तो ऑनलाइन एज्युकेशन बच्चों के लिए एक नया अनुभव रहा है। लंबे समय से घर पर रहे रहें बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर काफी प्रभाव पड़ा है। इसलिए पेरेंट्स इन बातों का रखें ध्यान:

बच्चे को सिचुएशन के बारे में समझाएं (Explain the situation to the child)

बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए बच्चे को सही सिचुएशन के बारे में समझाएं। इससे वो मेंटली क्लियर रहेगा बच्चा। कई परेंट्स सिर्फ बच्चे को यही दिलासा देते रहते हैं कि बस थोड़ें दिन, ऐसा करने से एक समय के बाद बच्चे का धैर्य टूट जाता है।

अपने बच्चों को कोरोना से सुरक्षित रखने के लिए उन्हें कोविड-19 (Covid-19) बीमारी के बारे में बताए। उन्हें बीमारी से सुरक्षित रहने के उपाय के बारे में भी अवगत कराए। आप अपने बच्चों के साथ क्वालिटी टाइम बिताएं जिससे उन्हें अकेलापन ना महसूस हो। इस बात का भी विशेष ध्यान रखें की उनके जो भी सवाल हो आप उसका ठीक से जवाब दें ताकि बच्चें भी इस बीमारी से खुद को सुरक्षित रख सकें और सतर्क रहें।

दोस्तों के साथ रखें संपर्क में
आप इस बात का विशेष ध्यान रखें की बच्चों को अपने दोस्तें के साथ संपर्क में रखें। कोरोना में सोशल डिस्टेंसिंग बेहद जरूरी है पर आप बच्चों को वीडियो कालिंग या फोन को जरीए उनके दोस्तों के साथ कनेक्टेड रख सकतें है। ऐसा करने से उन्हें अकेलापन नहीं महसूस होगा।

और पढ़ें:कोरोना में सेल्फ मेडिकेशन हो सकता है खतरनाक, सलाह के बाद ही करें इनका इस्तेमाल!

अपने बच्चे की चिंता को दूर करें
इस समय बच्चे का चिंतित होना सामान्य सी बात है पर आप अपने बच्चे में भावनात्मक संकेतों के देखें और उसी के बारे में उनसे बात करें. इस बात का विशेष ध्यान रखें कि बच्चे अपनी भावना व्यक्त करते रहें। COVID-19 से रिलेटेड उनके सवालों से बचें नहीं और उनके सभी सवालों का जवाब दें। इससे उनके मन की चिंता दूर होगी। उन्हें कोरोना के बारे में समझाएं कि अगर हम उचित देखभाल करेंगे तो चीजें जल्द ही बेहतर हो जाएंगी। ऐसा करने से बच्चों में विश्वास पैदा होता है और वह मानसिक रूप से स्वास्थ्य फिल करेंगे।

उन्हें सही जानकारी दें
कोरोनो वायरस महामारी की सभी रिपोर्ट बच्चों बताना सही नहीं है क्योकिं इससे वह घबरा जाएगें। हालांकि, उन्हें दुनिया में क्या हो रहा है, इसकी सही जानकारी देना बहुत जरूरी है। उन्हें इस तरह से जानकारी दें कि वे समझ सकें बीमारी के बारे में पर वह इससे घबराएं नहीं।

और पढ़ें:प्रेग्नेंसी में लो कार्ब डायट बच्चे और मां दोनों के लिए हो सकती है नुकसान दायक, अपनाने से पढ़ लें ये लेख

एक्सपर्ट की राय

तनाव के चलते हॉर्मोन में बदलाव होता है। लॉकडाउन के कारण उनकी रूटीन में बदलाव आ चुका है। वे घर पर ही रह रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई भी ऑनलाइन हो रही है, मनोरंजन के लिए भी वे फोन पर ही आश्रित हैं। वे अपना काफी समय मोबाइल या लैपटॉप को दे रहे हैं। रचनात्मक कायरें से दूर हैं। लगातार बुरी घटनाओं को देखने और सुनने के कारण कई बच्चों में तनाव बढ़ रहा है। इस तनाव से उन गहरा असर पड़ सकता है। ऐसे में बच्चों को इस नकारात्मक माहौल से बाहर निकालना बहुत जरूरी है। अभिभावक यह सुनिश्चित करें कि बच्चों को कम से कम फोन का इस्तेमाल करने दिया जाए। उन्हें रचनात्मक कार्य करने को प्रोत्साहित करें। इस दौरान उनके साथ अभिभावक खुद भी जुड़ें। गार्डेनिंग, व्यायाम, कुकिंग जैसे कामों की तरफ बच्चों का ध्यान लगाएं। उन्हें प्रर्याप्त नींद मिले इसका ध्यान रखें। अगर वह कुछ असामान्य हरकत कर रहा है तो डॉक्टर से सलाह लें। नई स्थिति में खुद को ढ़ालना होगा

बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ट्विटर हैंडल पर यूनिसेफ के ‘ग्लोबल चीफ ऑफ एजुकेशन’ राबर्ट जेन्किन्स ने बच्चों की मनःस्थिति को बेहतर ढंग से समझने में मदद करने वाले पांच टिप्स बताए हैं –

  1. बच्चों के साथ मिलकर रूटीन बनाएं।
  2. अपना भी समय दें।
  3. बच्चों के साथ खुलकर बातचीत करें
  4. आनॅलाइन प्लेटफार्म पर बच्चों की सुरक्षा।
  5. अपने बच्चों के स्कूल के संपर्क में रहें।

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कोरोना संकट और लॉकडाउन की स्थिति बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए घातक है। यदि बच्चों की मनःस्थिति को गंभीरता से न लिया गया तो समस्या और बढ़ेगी। बच्चों के तनाव को उनसे ज्यादा समय बात करके, उनकी बातें सुनकर, उनको नया वातावरण देकर काफी हद तक कम किया जा सकता है और उनके साथ अपने रिश्तों को और मजबूत किया जा सकता है। बच्चों की मनःस्थिति शांत व प्रसन्नचित रहेगी तो उनका मानसिक स्वास्थ्य उत्तम रहेगा और बेहतर मानसिक विकास भी हो पाएगा।

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मनोचिकित्सक एके नाग कहते हैं कि मनुष्य का स्वभाव है आजाद विचरण करना। जब ऐसा नहीं हो पाता है और लंबे समय तक उसका घर से बाहर निकलना बंद हो जाता है तो वह बीमार अनुभव करने लगता है। लेकिन यह ऐसी आपदा है कि बाहर निकलना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। इसलिए लोगों को नए सिरे से अपनी दिनचर्या बनानी होगी। इस नई स्थिति में खुद को ढ़ालना होगा। वैसे भी परिस्थितियों के अनुसार खुद को बदलना मनुष्य का स्वभाव है। अभिभावक को बच्चों की बदल चुकी इस दिनचर्या में व्यायाम, योगाभ्यास जैसे शारीरिक कायरें को शामिल कराना होगा तभी वे खुद को स्वस्थ और तनाव मुक्त रख पाएंगे।

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Niharika Jaiswal द्वारा लिखित आखिरी अपडेट कुछ हफ्ते पहले को
और Admin Writer द्वारा फैक्ट चेक्ड
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