बच्चे के लिए सॉलिड डायट कैसी हो, जानिए यहां एक्सपर्ट से

    बच्चे के लिए सॉलिड डायट कैसी हो, जानिए यहां एक्सपर्ट से

    शिशु की अच्छी हेल्थ के लिए उसका सही खानपान बहुत जरूरी है। वैसे भी शिशु की देखरेख कोई आसान बात नहीं होती है, उनके छोटी सी-छोटी जरूरतों को भी समझना पड़ता है। बच्चे के खानपान की बात करें तो शिशु के आहार की शुरूआत उनकी मां के दूध से होती है। फिर बढ़ती उम्र के साथ उसकी लिक्विड डायट शुरू हो जाती है। नौ से बारह महीने से शिशु की थोड़ी-थोड़ी कर के सॉलिड डायट शुरू होने लगती है। एक उम्र के बाद बच्चे के लिए सॉलिड डायट (Solid diet) शुरू करना जरूरी है। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि आप बच्चे को अचानक से सॉलिड फूड देना शुरू कर दें। इसके भी कुछ नियम होते हैं, शिशु के लिए कुछ भी धीरे-धीरे शुरू करें। जानें बच्चे के लिए सॉलिड डायट (Solid diet) देने का सही तरीका क्या है?

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    पहली बार बच्चे के लिए सॉलिड डायट (Solid diet for kids) कैसे शुरू करें?

    शिशु जब आठ महीने के ऊपर का हो जाता है। तो धीरे-धीरे उसकी सॉलिड डायट शुरू कर देनी चाहिए। शिशु के शरीर में सभी पोषक तत्वों की भी जरुरत होती है, एक समय के बाद ब्रेस्टमिल्क से पूरी नहीं हो पाती है। जिसमें खासतौर पर आयरन की कमी शामिल है, जिसके बच्चे के खानपान में आयरन युक्त भोजन शामिल होना जरूरी है। जब बच्चे के लिए सॉलिड डायट (Solid diet for kids) शुरू की जाती है, तो उसके लिए वो एकदम नया होता है। इसलिए शुरूआत में उसके लिए भोजन का पचाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। हालांकि 8 महीने के बाद शिशु की पाचन (Baby’s digestion) और इम्यून सिस्टम (Immune System) धीरे-धीरे इतना मजबूत हो चुका होता है कि वो धीरे-धीरे सॉलिड फूड पर आ सके। बच्चे के लिए सॉलिड डायट के शुरूआत के कुछ नियम भी होते हैं, जैसे कि पहले हल्के फलों से शुरूआत करें। बच्चे के लिए सॉलिड डायट शुरू करना है, तो उसकी शुरूआत इन फूड्स से करें, जिसमें शामिल हैं:

    सेब (Apple)

    बच्चे के लिए सॉलिड डायट शुरू करने के लिए सेब सबसे अच्छा फल माना जाता है। इसमें ठोस आहार की शुरुआत फल से कर सकते हैं। अधिकतर बच्चों को सेब स्वाद पसंद आता है। इसमें अधिकतर पोषक तत्व शामिल होते हैं, जो बच्चे के विकास के लिए आवश्यक होते हैं। लेकिन पेरेंट्स को इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि कोई भी ठोस आहार बच्चे को शुरूआत में खड़ा नहीं खिलाना चाहिए। सेब का छिलका निकालकर आप उसकी प्‍यूरी बनाकर बच्‍चे को खिला सकते हैं। यह डायजेशन में भी अच्छा होगा। इसमें फाइबर मात्रा भी अधिक पायी होती है। ये उसकी सेहत के लिए अच्छा साबित होगा।

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    केला (Banana)

    बच्चों के लिए सॉलिड डायट में केले का सेवन काफी फायदेमंद है। इसमें उच्च मात्रा में फोलेट पाया जाता है, जोकि बच्‍चे के तेज दिमाग और उसे एक्टिव रखने में मददगार होता है। इसलिए केले को बच्चों के लिए लिए सुपरफूड कहा जाता है। इसके अलावा आप अपने शिशु को ठोस आहार में एवाकाडो और केले की प्यूरी मिक्स कर के दे सकते हैं। इसमें मौजूद बीटा-कैरोटीन बच्चों की आंखों की तेज और अच्छी इम्‍युनिटी के लिए मददगार है।

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    चुकंदर (Beetroot)

    बच्चों के लिए सॉलिड डायट में आप उसे चुकंदर भी दे सकती हैं। चुकंदर में फोलिक एसिड होता है। यह बच्चे के शरीर में खून को बढ़ाता है। आप बच्चे को चुकंदर की प्यूरी बनाकर दे सकते हैं। इसमें कई विटामिन (Vitamin) और जरूरी पोषक तत्‍व प्राप्त होते हैं। इसमें मौजूद फोलिक एसिड, शिशु के मस्तिष्‍क के विकास के लिए अच्छा होता है।

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    नाशपाती (Pear)

    शिशु के लिए नाशपाती एक अच्छा सॉलिड फूड है। इसमें कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं। नाश्पाती की प्यूरी बच्चे अच्छे से पचा भी सकते हैं। इसमें कैल्शियम और फास्‍फोरस की भी अच्छी मात्रा पायी जाती है। यह शिशु की हड्डियाें को मजबूत करने में मदद करता है। शिशु को नाशपाती का छिलका और बीच निकालकर इसकी एक प्‍यूरी बनाकर खिलाएं।

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    दही (Curd)

    जब आपका बच्चा 9 से 12 महीने का हो जाए, तो उसे आप चावल-दही भी दे सकते हैं। दही-चावल बच्चे के लिए काफी कैल्शियम का अच्‍छा आहार होता है। इसका सेवन करने से शिशु का पाचन भी ठीक रहता है। दही में गुड़ बैक्टीरिया भी पाया जाता है। जो बच्चे के लिए शरीरिक विकास के लिए काफी अच्छा होता है।

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    ठोस आहार देने के दौरान रखें इन बातों का ध्‍यान

    बच्चे के लिए सॉलिड डायट शुरू करने से पहले पेरेंट्स को और बातों का ध्यान रखना भी आवश्यक है। ब्रेस्डफिडिंग के साथ बच्चा अचानक से ठोस आहार खाने के तैयार नहीं होगा। इसके लिए पहले से कुछ बातों का ध्यान रखें:

    • बच्चा का ठोस आहार शुरू करने से पहले ब्रेस्‍ट मिल्‍क या फॉर्मूला मिल्‍क कटोरी-चम्मच से धीरे-धीरे देना शुरू करें।
    • शुरुआत में बच्‍चे आसानी से ठोस आहार को डायजेस्ट नहीं कर पाते हैं। इसलिए शुरू फल की प्यूरी से करें और मात्रा भी थोड़ी रखें। आप उन्हें खेल-खेल में खाना खिलाएं। जितना बच्चा अपने मन से खाए, उतना ही खिलाएं।
    • शिशु को खाना खिलाने से पहले चैक करें कि खाने का तापमान ज्यादा गर्म तो नहीं है और फिर ठंडा होने पर ही खिलाएं।
    • जब शिशु की तबीयत सही न हो या मूड खराब हो तो उस दौरान ठोस आहार न दें। ऐसें में उनमें ठोस आहार को लेकर गलत धारण बन सकती है।
    • शुरुआत में शिशु को सादा खाना ही दें। फिर धीरे-धीरे नमक और चीनी वाला खाना खिलाएं। लेकिन नमक और चीनी की शुरूआत भी कम मात्रा में ही करें। लेकिन इसे देने से पहले एक बार डॉक्टर की भी सलाह कर लें।
    • शिशु को शुरूआत में ज्यादा घी या तेल जैसा चिकना न खिलाएं। सैचुरेटेड फैटी एसिड होने के कारण घी को आसानी से पचाया जा सकता है। लेकिन शुरूआत में बच्चे का लिवर अभी बहुत ज्यादा मजबूत नहीं होता है। इसे खनिज पदार्थ और विटामिन्स का अच्छा स्रोत माना जाता है।

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    बच्चे के लिए सॉलिड डायट की शुरूआत कैसे करें और किन बातों का ध्यान रखें। लेकिन इसी के साथ यह भी जानें कि हर बच्चे की शारीरिक जरूरते अलग-अलग होती है। इसलिए सभी के लिए खानपान और पोषक तत्वों की जरूरत भी अधिक होगी। यदि बच्चे को किसी प्रकार का हेल्थ डिजीज है, तो आप उसे अपने मन से कोई भी फूड देने की गलती न करें। उसकी डायट को लेकर पहले डॉक्टर से संपर्क करें। अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क करें।

    हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

    के द्वारा मेडिकली रिव्यूड

    डॉ. प्रणाली पाटील

    फार्मेसी · Hello Swasthya


    Niharika Jaiswal द्वारा लिखित · अपडेटेड 24/06/2022

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