उम्र के अनुसार घटता-बढ़ता है टेस्टोस्टेरोन का लेवल, जानें इसके बारे में

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प्रकाशित हुआ February 18, 2021 . 5 मिनट में पढ़ें
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टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) पुरुष और महिला दोनों में पावरफुल और स्टेरॉइड हॉर्मोन है। इसमें सेक्स को नियंत्रित करने, स्पर्म प्रोडक्टिविटी और ऊर्जावान बनाने की क्षमता होती है। यह हार्मोन पुरुष की यौनशक्ति (Sex Power) को भी ऊर्जावान बनाता है। महिलाओं में अंडाशय और पुरुषों में अंडकोष से टेस्टोस्टरोन बनता है और यह दोनों अंग पिट्यूटरी हाॅर्मोन (Pituitary Hormones) के प्रभाव में काम करते हैं। जानकर हैरानी होगी कि टेस्टोस्टरोन व्यक्ति के एग्रेशन (Aggression) और प्रतिस्पर्धा (Competitiveness) को भी कंट्रोल कर सकता है। जैसे-जैसे व्यक्ति की उम्र बढ़ती है, वैसे-वैसे टेस्टोस्टरोन का स्तर भी शरीर में घटने लगता है। टेस्टोस्टरोन के स्तर के घटने से शारीरिक और मानसिक रूप से कई बदलाव महसूस होने लगते हैं। इसमें सबसे पहला सेक्स पॉवर कम हो जाती है, लेकिन उम्र से टेस्टोस्टेरोन के स्तर का घटना एक प्राकृतिक प्रोसेज है।

टेस्टोस्टेरोन (Testosterone) के फायदे

कहना गलत नहीं होगा कि टेस्टोस्टरोन शरीर के लिए बहुत ही आवश्यक होता है। इससे पुरुषों की आवाज भारी होती है। साथ ही चेहरे पर बाल आने और मांसपेशियों को बढ़ाने में सहायक होता है। कई स्टडीज से पता चला है कि टेस्टोस्टरोन हॉर्मोन फिजिकली स्ट्रॉन्ग और कोलेस्ट्रोल के स्तर को बेलेंस करता है। इसके अलावा इससे हड्डियों का विकास, इम्यूनिटी पॉवर भी बूस्ट होती है। इसके बाकी के फायदों में इरेक्टाइल कार्य, शरीर में जमा वसा को कम करने, कामोत्तेजक, मूड में बदलाव और हॉर्मोन इंसुलिन के प्रति शरीर की संवेदनशीलत में बड़ा परिवर्तन लाने में सहायक है।

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 उम्र के साथ घटने लगता है टेस्टोस्टरोन का स्तर (Testosterone Level)

इस पावरफुल हॉर्मोन का भी समय के साथ प्रभाव कम होने लगता है। 30 से 35 की उम्र के बाद पुरुषों के टेस्टोस्टरोन के स्तर में गिरावट शुरू हो जाती है। वहीं, महिलाओं में रजोनिवृ्त्ति के बाद इस हॉर्मोन का प्रभाव घटता जाता है। बता दें कि टेस्टोस्टेरोन महिलाओं में भी सेक्स ड्राइव को मजबूत करता है। इसके अलावा मूड और स्वास्थ्य में सुधार और हड्डियों को मजबूत करने का काम करता है। टेस्टोस्टेरोन का लेवल कम होने पर डॉक्टर की सलाह लेना ही बेहतर है।

टेस्टोस्टरोन की कमी को ऐसे समझे

  • एक बार फिर बता दें कि टेस्टोस्टेरोन की स्तर आमतौर पर उम्र बढ़ने के साथ घटता रहता है। इसके घटने से कई समस्याओं को झेलना पड़ सकता है। इसमें सेक्स करने की इच्छा क्षीण होती जाती है। चिड़चिड़ाहट, सुस्ती और इरेक्शन जैसे कुछ लक्षण हैं जो टेस्टोस्टेरोन के स्तर घटने पर सामने आते हैं।
  • टेस्टोस्टेरोन के लेवल को उस वक्त कम कह सकते हैं, जब उसका लेवल 300 नैनोग्राम प्रति डेसिलीटर से नीचे गिरता चला जाता है। शोधों के मुताबिक, कई मामलों में इसे रोकना असंभंव है। इसको बनाए रखने के लिए सबसे जरूरी हेल्दी डायट और तनावरहित जीवनशैली है।
  • उम्र के आधार पर टेस्टोस्टरोन की कमी मांसपेशी और हड्डी के विकास में असामान्यताओं और विकसित जननांगों की वजह भी बन सकता है। साथ ही टेस्टोस्टेरोन का गिरता लेवल खून की नलियों और दिल के लिए भी जोखिभरा हो सकता है।

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टेस्टोस्टेरोन का नॉर्मल लेवल कितना होता है

मेडिकल साइंस के मुताबिक, टेस्टोस्टेरोन का लेवल सामान्य रूप से 300-1000 नैनोग्राम प्रति डेसीलीटर होता है।

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टेस्टोस्टेरोन की कमी के लक्षण (Symptoms of low testosterone)

टेस्टोस्टेरोन की कमी के एक नहीं बल्कि कई लक्षण हैं। टेस्टोस्टेरोन की कमी को हम तीन भागों में समझेंगे, जिनमें मानसिक, शारीरिक और यौन स्वास्थ्य पर बात करेंगे।

यौन स्वास्थ्य (Sexual Health) संबंधी समस्याएं

  • चरम सुख (ऑर्गेज्म) हासिल न कर पाना
  • सेक्स ड्राइव का कमजोर होना
  • सेक्स की इच्छा का खत्म होना
  • इरेक्शन बनाए रखने में मुश्किल
  • संभोग के दौरान जल्दी थक जाना

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शारीरिक समस्याएं (Health Problem)

  • शरीर का एकाएक गर्म होना जाना (हॉट फ्लैश)
  • ज्यादा पसीना आना
  • मर्दाना ताकत में कमी
  • अनियमित रूप से वजन बढ़ते जाना
  • एक्सरसाइज के बाद नॉर्मल होने में समय लगना
  • हल्की दाढ़ी आना
  • शरीर पर बालों का कम होना
  • स्पर्म का लेवल कम होना
  • मेल ब्रेस्ट बनते जाना

मानसिक समस्याएं (Mental Health)

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क्यों घट जाता है टेस्टोस्टेरोन का लेवल (Low Testosterone Level)

टेस्टोस्टेरोन के लेवल में कमी स्वाभाविक है, जो उम्र के बढ़ने से अपना प्रभाव कम कर देती है। टेस्टोस्टेरोन में कमी 30 से 35 साल की उम्र के बाद महसूस होने लगती है और फिर यह अंत तक जारी रहता है।

टेस्टोस्टरोन की कमी के कारण (Causes of Testosterone)

  • पिट्यूटरी ग्रंथि (ब्रेन में मौजूद एक ग्रंथि जो कई अहम हार्मोन को जन्म देती है) का रोग होना
  • कैंसर के दौरान रेडिएशन और कीमोथेरेपी इलाज कराने से इस पर असर पड़ता है।
  • जेनेटिक अबनॉर्मलिटी जैसे कि क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (Klinefelter syndrome)
  • प्रोटेस्टेट कैंसर ट्रीटमेंट में ली जाने वाली दवाईयां जिसमें हार्मोन और कोर्टिकोस्टेरॉयड दवाएं दी जाती हैं।
  • शरीर में आयरन की माात्रा का अधिक होना
  • अंडकोष में इंफेक्शन या गंभीर चोट लगना
  • शरीर में सूजन संबंधी बीमारियां होना (साइकॉइडोसिस)

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इन बातों का रखें ख्याल

  • टेस्टोस्टेरोन की कमी होने की संभावना के पीछे कुछ कारण हैं। अगर आप इन बातों पर ध्यान दें इससे बचा भी जा सकता है।
  • अत्यधिक तनाव को अपने ऊपर हावी न करें।
  • सिरोसिस होने से भी इसकी आशंका सामान्य से अधिक बढ़ जाती है।
  • किडनी के खराब होने पर भी टेस्टोस्टेरोन का लेवल लगातार गिरने लगता है।
  • शराब की बुरी लत भी इस पर बुरा असर छोड़ती है और सेक्स ड्राइव लो हो जाता है।
  • मोटापा भी इसके लिए नुकसानदायक है, इसलिए व्यायाम करना बेहद जरूरी है।
  • लंबे समय से चली आ रही गंभीर बीमारी भी इसका कारण बन सकती है।

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 टेस्टोस्टेरोन की कमी से ऐसे करें बचाव (Testosterone  Treatment)

  • मेटाबॉलिज्म में असामान्य बदलाव शरीर को ज्यादा थका देता है। इसलिए तनाव से दूर रहें। क्योंकि, शरीर में शारीरिक और भावनात्मक बदलाव इस पर बुरा असर छोड़ते हैं। यही कारण है कि हार्मोन का संतुलन बिगड़ने लगता है।
  • नियमित एक्सरसाइज करने से इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। साथ ही मोटापे पर कंट्रोल करने से इससे बच सकते हैं।
  • सैचुरेटेड वसा और ट्रांस वसा वाले भोजन को खाने से बचें।
  • शराब की मात्रा में कमी लाएं क्योंकि, शराब का ज्यादा सेवन करने से लीवर पर बड़ा बुरा असर पड़ता है, जो हार्मोन के संतुलन को गड़बड़ा देता है।
  • ‘नो स्मोकिंग’ का फॉर्मूला अपनाओं। क्योंकि, धूम्रपान करने से दिल की धड़कन असामान्य रूप से बढ़ती है, जिससे ब्लड सर्कुलेशन में ऑक्सीजन का स्तर कम होता चला जाता है।

 टेस्टोस्टेरोन की कमी से हो सकते हैं ये बड़े नुकसान

लंबे समय से टेस्टोस्टेरोन की कमी की समस्या से जूझने पर कुछ भयंकर बीमारी घेर सकती हैं।

  • महिलाओं को बांझपन का सामना करना पड़ सकता है
  • पुरुषों में स्तभन्न दोष पैदा हो सकता है
  • मेल ब्रेस्ट बना जाना
  • ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoprorsis)
  • सेक्स हॉर्मोन के कारण गंजेपन की समस्या
  • हड्डी और मांसपेशियों का कमजोर हो जाना

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 क्या है टेस्टोस्टेरोन की कमी का इलाज

  • मेडिकल साइंस में टेस्टोस्टेरोन की कमी का इलाज रिप्लेसमेंट थेरिपी ( Replacement Therapy) है। इसके अलावा टेस्टोस्टेरोन लोशन, कैप्सूल, इंजेक्शन या क्रीम से भी इसका इलाज किया जा सकता है।
  • पुरुषों की उम्र और प्रोटेस्टेट कैंसर के जोखिम कारकों के देखकर ही इसका इलाज किया जाता है।
  • वहीं, वृद्ध पुरुषों के इलाज से पहले उनका प्रोटेस्टेट कैंसर का परीक्षण जरूर किया जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि, टेस्टोस्टेरोन की कमी से प्रोटेस्टेट कैंसर का खतरा अधिक बढ़ जाता है।
  • गोनाडोट्रोपिन इंजेक्शन (Gonadotropin injection) का इस्तेमाल उन पुरुषों के लिए किया जाता है जो पिता बनने की इच्छा रखते हैं। यह शुक्राणु का उप्तादन बढ़ाने के लिए कई महीनों तक दिया जाता है।

हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

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