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अपने 10 सप्ताह के शिशु की देखभाल के लिए आपको किन जानकारियों की आवश्यकता है?

अपने 10 सप्ताह के शिशु की देखभाल के लिए आपको किन जानकारियों की आवश्यकता है?

विकास और व्यवहार

मेरे 10 सप्ताह के शिशु का विकास कैसा होना चाहिए?

अब आपका शिशु 10 सप्ताह का हो गया है। इस दौरान अगर आपका शिशु घंटो तक लगातार सोता है, तो अच्छा है। क्योंकि इस उम्र में ज्यादातर शिशु रात में कई बार उठते हैं। सब शिशु एक—दूसरे से भिन्न होते हैं। आपका शिशु दिन और रात में कई बार सोता और जागता भी रह सकता है। ऐसा भी हो सकता है कि दिन में वह कई बार 10 घंटो तक जागता ही रहे। इस दसवें सप्ताह तक आपके शिशु में आप कई तरह के बदलाव देख सकती हैं।
वो रोने के अलावा कई अन्य तरह की आवाजें भी निकाल सकता है।
लेटकर वो अपने सिर को 45 डिग्री तक उठाने की कोशिश भी कर सकता है।

और पढ़ें : Neem : नीम क्या है?

मुझे 10 सप्ताह के शिशु के विकास के लिए क्या करना चाहिए?

आपका अपने शिशु से संवाद करने के कई रास्ते हो सकते हैं, उनमे से कुछ ये हैं;

कोई भी काम करते समय शिशु के सामने उसका वर्णन करें, जैसे कि डायपर बदलते समय उनसे बात करें कि “अब में आपको यह डायपर पहनाने वाली हूँ या अब में आपको नहलाने का समय हो गया है “, इससे शिशु को धीरे—धीरे आपके कार्य और आसपास के वातावरण को समझने में मदत मिलेगी।
अपने शिशु से सवाल करें। अब यहां आपका शिशु किसी भी सवाल का जवाब देने में सक्षम नहीं है। लेकिन आपका सवाल पूछना उसके अंदर समझ को बढ़ावा देगा।
कई अध्ययन बताते हैं कि जिन शिशुओं के साथ उनके माता-पिता संवाद करते रहते हैं, उनमें अन्य शिशुओं की तुलना में उनमें बोलने की क्षमता जल्दी विकसित होती है।
जैसे—जैसे आपका शिशु बड़ा होता जाएगा, उसे रोजाना की गतिविधियों का हिस्सा बनाएं, जिससे वह हर रोज कुछ न कुछ नया सीखता रहे।
अपने शिशु की भाषा समझने की कोशिश करें। कई बार जब आप उनसे ज्यादा बात करने की कोशिश करते हैं या खेलते हैं तो वह चिढ़ने या रोने लगते हैं,तब आपको उन्हें थोड़ा आराम चाहिए।

स्वास्थ्य और सुरक्षा

मुझे अपने डॉक्टर के साथ क्या बात करनी चाहिए?

हर डॉक्टर का परीक्षण करने का अपना एक तरीका होता है। कई टेस्ट और मापदंड होते हैं, जिनके आधार पर शिशु के विकास को परखा जाता है। लेकिन, आप भी आपके डॉक्टर के साथ कुछ बातों पर चर्चा कर सकते हैं,जैसे कि—
अपने डॉक्टर को अपने शिशु की रोजाना की गतिविधियां बताएं, जैसे कि उनका खाना, सोना और खेलना इत्यादि।
स्तनपान कराते समय आपको या आपके शिशु को यदि कोई परेशानी होती है, तो इस पर अपने डॉक्टर की सलाह लें।

मुझ किन बातों की जानकारी होनी चाहिए?

यहां कुछ जानकारी दी गई हैं, जिनका जानना आपके लिए जरूरी है।

रिफ्लक्स (Reflux):

रिफ्लक्स क्या है?

जब भी आपका शिशु कुछ खाता—पीता है या कुछ बहार निगल देता है, तो यह सामान्य है और ऐसा हर शिशु के साथ होता है। कई अध्ययन बताते हैं कि लगभग 50 प्रतिशत ​शिशु रोजाना उलटी करते हैं और इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है। लेकिन, हद से ज्यादा दूध पीना या फिर दिन में कई बार उलटी करना आपके शिशु में गैस जैसी कई बीमारियों का कारण बन सकता है।

शिशु को रिफ्लक्स क्यों होता है?

इसका मुख्य कारण शिशुओं में उन मांसपेशियों का कमजोर होना हैं, जो गले से पेट की ओर जुड़ती है। इसलिए जब आपका शिशु आहार ग्रहण करता है, तो कई बार कमजोर मांसपेशियों के कारण कुछ आहार वापस बाहर की तरफ वॉपस आ जाता है। कई बार यह अधिक खा लेने से भी होता है।

रिफ्लक्स का पता कैसे करें?

रिफ्लक्स का पता लगाने के लिए कई तरीके हैं। आप चाहें तो पीएच किट का प्रयोग कर रिफ्लक्स का पता कर सकते हैं या फिर एक्स—रे अथवा एंडोस्कोपी का उपयोग कर इसका पता लगाया जा सकता है।

और पढ़ें : Nutmeg : जायफल क्या है?

रिफ्लक्स का इलाज कैसे करें?

आमतौर पर शिशु एक साल की उम्र तक रिफ्लक्स करते हैं। अगर आपका शिशु किसी फॉर्मूला का सेवन कर रहा है, तो शायद आपके डॉक्टर शिशु को सोया दूध पिलाने की सलाह दे सकते हैं। इसके अलावा आप अपने शिशु के आहार को दिन के कई हिस्सों में बांट दें, ताकि ज्यादा खाने की वजह से आपका शिशु रिफ्लक्स न करे। कई शोध बताते हैं कि दूध में फार्मूला या पिसा हुआ चावल मिलाने से भी रिफ्लक्स से राहत मिलती है।

अपने शिशु को आहार का सेवन कराने के बाद शिशु को कुछ समय तक सीधा गोद में उठाए रखें। ताकि आहार को पेट तक पहुंचने में आसानी हो और रिफ्लक्स की शक्यता को काम किया जा सके। इसकी अलावा डॉक्टर शिशु के कई कुछ दवाइयां भी लिखकर दे सकते हैं, जो पेट की एसिडिटी को दूर करने में मदत कर सकती हैं।

घूमना और पलटना:

दसवे सप्ताह में पहुंचने तक आपके शिशु की मासपेशियां धीरे—धीरे मजबूत होने लगती हैं। वह लेटे—लेटे दोनों तरफ पलट सकते। पेट के बल कुछ हद तक गोल घूम सकता है। आपका शिशु शरारती है,तो किसी भी तरह का हादसा टालने के लिए कुछ चीजों का खास ध्यान दे, जैसे;

  • डायपर बदलते समय उसका एक हाथ पकड़े रखें।
  • शिशु को बेड या कोई भी ऊंची जगह पर न लेटाएं जब तक की आप उसके साथ न हो।

महत्वपूर्ण बातें

मुझे किन बातों का ख्याल रखना चाहिए?

लार निकालना

वैसे तो शिशु जब गर्भ में होता है तभी से लार ग्रंथियां काम करना शुरू कर देती हैं। लेकिन नवजात शिशु को हर वस्तु मुंह में लेने की आदत होती है, जिसके कारण ज्यादा लार की निर्मिति होती है और वह लार शिशु के मुंह से बाहर आने लगता है।

अब कई लोगों का यह मानना होता है कि अगर शिशु मुंह से लार निकाल रहा है तो शायद शिशु के दांत निकलने की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है, जो कि पूरी तरह गलत है। आमतौर पर शिशु का पहला दांत 4 से 7 महीने की आयु में निकलता है। कुछ शिशुओं में यह 3 वर्ष की आयु में भी हो सकता है।

कोइंग (कूजना)

जब आप पहली बार अपने बच्चे की आवाज सुनेंगे, तो शायद वह आपको थोड़ा अजीब लगे, क्योंकि वह शायद थोड़ी कर्कश या किसी खरखराहट की तरह हो। सही और पूरी तरह आवाज निकालने के लिए आपके शिशु को थोड़ी मेहनत करनी पड़ सकती है।

कोइंग माता-पिता के लिए बच्चे की पहली आवाज होती है। और यह पल किसी भी माता-पिता के लिए काफी भावपूर्ण हो सकता है। पर यह सिर्फ शुरुआत है। अगले कुछ हफ्तों के भीतर वह हंसना, किलकारियां मारना और तरह तरह की आवाजें निकलना शुरू कर देते हैं।

यहां यह बात भी ध्यान देने जैसी है कि हर शिशु अलग होता है और उसके जांच की वेसे बोलते की क्ष्मता अलग चरणों में व्यंजन उच्चारण कर सकता है। कुछ बच्चे तीन महीने की उम्र से ही व्यंजन का उच्चारण करना शुरू कर सकते हैं तो कुछ शिशुओं को इसके लिए पांच से छह महीनों का इंतजार करना पड़ सकता है। तो यदि आपका शिशु थोड़ा समय ले रहा है तो यह पूरी तरह सामान्य है।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

लेखक की तस्वीर
Aamir Khan द्वारा लिखित
अपडेटेड 08/07/2019
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