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बच्चा खाना खाते समय करता है आना-कानी तो अपनाएं ये टिप्स

बच्चा खाना खाते समय करता है आना-कानी तो अपनाएं ये टिप्स

आपका बच्चा खाने के मेज पर आता है, एक बाईट खाते ही बोल पड़ता है कि मुझे नहीं खाना है। अधिकतर पेरेंट्स बच्चों इस आदत से परेशान रहते हैं। ऐसे में कई बार माता-पिता बच्चों पर खाना खाने के लिए दबाव (Pressure to eat) डालने लगते हैं। एक अध्ययन के अनुसार, बच्चों पर खाने का दबाव ज्यादा अच्छा नहीं होता है। मिशिगन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पाया कि जब पेरेंट्स अपने बच्चों पर भोजन के समय दबाव डालते हैं, तो इससे उनके विकास पर प्रभाव नहीं पड़ता है। डायट एक्सपर्ट देव उन्याल कहते हैं कि ” बच्चे पर अधिक दबाव डालने पर कई बार बच्चे अपने पसंदीदा खाने को भी नापसंद करने लगते हैं। उस वक्त पेरेंट्स के लिए यह बहुत निराशाजनक होता है। पेरेंट्स बच्चों को ऐसी स्थिति में संभालने के लिए उन चीजों को खाने के लिए प्रोत्साहन हेतु तरह-तरह के हथकंडे अपनाते हैं। आखिरकार, अपने बच्चों को पोषण देने के लिए एक माता-पिता के रूप में यह आपकी प्रवृत्ति है। खाने के लिए दबाव बनाना कोई स्थायी उपाय नहीं है।”

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खाने में आनाकानी हो सकता है ईटिंग डिसऑर्डर

अगर बच्चा ठीक से खाना नहीं खाता है, तो यह भविष्य में उनके लिए कई परेशिानियां खड़ी कर सकता है। बढ़ती उम्र के बच्चों के विकास के लिए सही पोषण बहुत जरूरी होता है। इसके अलावा सही पोषण न मिलने के कारण बच्चों को भविष्य में हाइट से भी समझोता करना पड़ सकता है। बच्चों में ईटिंग डिसऑर्डर को डायग्नोस करना इतना आसान भी नहीं होता। बच्चों में दो तरह के ईटिंग डिसऑर्डर पाए जाते हैं। जो अवॉइडेंट या रिस्ट्रिक्टिव (Avoidant/Restrictive Food Intake Disorder ) फूड इनटेक डिसऑर्डर हो सकते हैं। यहां समझने वाली बात यह भी है कि पेरेंट्स बच्चों के ईटिंग डिसऑर्डर के लिए जिम्मेदार नहीं होते हैं। लेकिन, माता-पिता को बच्चों को इस समस्या से निकालने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ सकती है। समस्या ज्यादा बढ़ जाने पर बच्चों को मेडिकल हेल्प की भी जरूरत हो सकती है।

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ईटिंग डिसऑर्डर के खतरे

खाने में आनाकानी करना बच्चों में ईटिंग डिसऑर्डर का लक्षण हो सकता है। खाने की समस्या से जूझ रहे बच्चों के लिए यह खतरा बड़ा भी हो सकता है। साथ ही बच्चों को गंभीर बीमारियों का सामना भी करना पड़ सकता है। कई बार यह समस्याएं इतनी गंभीर हो सकती है कि बच्चों की मौत तक हो सकती है। बच्चे में अगर ईटिंग डिसऑर्डर के लक्षण दिखते हैं, तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें। कई मामलों में मेडिकल हेल्प बहुत जरूरी होती है, तो ऐसे में आपको खुद से ही कोशिश करनी चाहिए। कई मामलों में यह भी देखा गया है कि आपको अपने बच्चे के लिए साइकोलॉजिस्ट की भी मदद लेनी पड़ सकती है। क्योंकि कई बार बच्चों का खाने में आनाकानी करने का कारण मानसिक भी हो सकता है।

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बच्चों की भूख का भी रखें ध्यान

बच्चों को खाने के लिए दबाव (Pressure to eat) बनाने से बेहतर होगा कि आप उनकी जरूरतों को समझें। खाने के लिए बच्चों के साथ जबरदस्ती न करके उनकी पसंद को जानें और उसी के अनुसार उनकी डायट को प्लान करें। बच्चों के साथ जबरदस्ती करना डिप्रेशन में डाल सकता है। कई मामलों में यह भी देखा गया है कि बच्चों पर खाने के लिए दबाव (Pressure to eat) डालने पर कई बार वे अपनी पसंदीदा चीजों को भी खाना छोड़ देते हैं। ऐसा भी देखा जाता है कि पेरेंट्स बच्चों को जबरदस्ती ज्यादा खाने के लिए दबाव डालते हैं। ऐसा करने से भी बच्चे भी बच्चे की खाने की इच्छा में कमी आती है। ऐसे में यह भी ध्यान दें कि बच्चें को उसकी भूख और पसंद के लिहाज से ही खाना दें।

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खाने के लिए दबाव बनाने की बजाए बच्चों के रुटिन को फॉलो करें

खाने में नखरे दिखाने वाले बच्चों के लिए ध्यान रखें कि एक ही समय पर खाना दें। अगर बच्चा खाने के लिए अक्सर मना कर देता है, तो उसे नियमित रूप से पौष्टिक भोजन दें। इसके अलावा बच्चे को अगर सॉलिड फूड पसंद नहीं है, तो आप उसे खाने के साथ दूध या जूस भी दे सकते हैं। लेकिन, साथ ही यह भी याद रखें कि बच्चे को ज्यादा लिक्विड देना उसकी भूख को कम कर सकता है। इसके अलावा बच्चे के रुटिन को फॉलो करना भी जरूरी है। यहां देखें कि वह कब सोता है, कब जागता है और कब उसे भूख लगती है। इसी के लिहाज से आप उसकी खाने का रुटिन बनाएंगे, तो आपको बच्चे पर खाने के लिए दबाव (Pressure to eat) बनाने की जरूरत नहीं होगी।

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पेरेंट्स अपनाएं ये टिप्स

पेरेंट्स बच्चों के सामने हेल्दी डायट लें

बच्चों के सामने भोजन करने से बच्चों को माता-पिता के खाने के चीजों की प्राथमिकताओं का पता चलता है। अगर वे पेरेंट्स को खाते हुए देखते हैं तो उन चीजों के प्रति उनमें रूचि होने की अधिक संभावना होती है। इसलिए पेरेंट्स को बच्चों के सामने हेल्दी फूड खाना चाहिए, जैसे कि हर सब्जी, दूध, मेवा और फल आदि। इससे बच्चों को पोषण मिलेगा।

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जबरदस्ती खाना न खिलाएं

पेरेंट्स कई बार ऐसा करते हैं कि बच्चे को भूख न लगने पर भी उन्हें खाना खाने के लिए दबाव (Pressure to eat) डालने लगते हैं। लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए। चाहें बच्चे हो या बड़े, किसी को कोई भी चीज जबरदस्ती न खिलाएं। जब उसको भूख लगे तभी खाना दें। ओवर ईटिंग करने या बिना भूख लगने पर खाना खाने से उसको अपच और कब्ज जैसे पेट से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं

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खेल- खेल में खिलाएं

बच्चों को खेल-खेल में खाना खिलाने की आदत डालें। खेल- खेल में खाना खिलाएंगे तो बच्चा वह चीजें भी खा जाएंगे जो उनको पसंद ना हो। आप चाहे तो उनकी फेवरेट सॉस के साथ ब्रोकली और हरी सब्जियां भी खिला सकते हैं

थोड़ी सख्ती भी जरूरी

अक्सर बच्चे हर दूसरे दिन जंक फूड खाने की जिद करते हैं और जब अभिभावक उन्हें मना करते हैं तो घर के अन्य सदस्य बच्चों का सपोर्ट सिस्टम बनकर सामने आते हैं। जिससे बच्चों की गलत आदतों को बढ़ावा मिलता है। इसलिए इस मामले में बच्चों के साथ थोड़ी सख्ती बरतनी जरूरी है। आप घर के अन्य सदस्यों को भी अपने टाइमटेबल से अवगत करा दें और बच्चे की गलत डिमांड को बिल्कुल भी बढ़ावा न दें।

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थाली में कुछ नहीं बचना चाहिए, इस रूल को खत्म करें

जी हां, हम में से कई लोग इस नियम के साथ बड़े हुए हैं जिसके अनुसार हमे प्लेट में दिया गया खाना पूरी तरह से खत्म कर के ही उठने की अनुमति होती है। हालांकि, यह एक अच्छी शिक्षा है लेकिन इसके कुछ दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। जैसे की ओवर ईटिंग।

बच्चे को जब भी लगे की उसका पेट भर चूका है उस खाना खत्म करने के लिए जबरदस्ती न करें।

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शिशु को सिखाएं अच्छी आदतें

अगर आपका बच्चा फिलहाल छोटा है तो आप उसे खाने की कई अच्छी आदतें भी सीखा सकते हैं। बच्चों में खाने को पसंद नपसंद करने की आदत बचपन से लगती है। यदि आप शिशु को शुरुआत से ही हरी सब्जियां खाना सिखाएंगे तो हो सकता है की वह उनकी मनपसंद सब्जियों में से एक बन जाएं।

कुछ भी न्य ट्राई करवाने से पहले बच्चे को खुद खा कर दिखाएं और उसके बाद उसे छोटी बाईट खाने के लिए ऑफर करें। बड़े बच्चों को चाहें तो आप ज्यादा खाने के लिए भी दे सकते हैं। खाने के लिए दबाव (Pressure to eat) न बनाएं, तो बेहतर है।

सोडा और अन्य खराब तरल पदार्थ की आदत न लगने दें

बच्चों को आर्टिफीसियल शुगर की वजह से कोका कोला, पेप्सी और अन्य सोडा वाली चीजे बेहद पसंद आती हैं। लेकिन इस प्रकार के तरल पदार्थ बच्चे के न केवल पोषण को खराब करते हैं बल्कि उनका पेट भर कर उन्हें अन्य पोषक तत्व नहीं लेने देते हैं।

पानी और दूध बच्चों के लिए सबसे अच्छे तरल पदार्थ होते हैं। जूस भी एक अच्छा विकल्प है यदि वह 100 प्रतिशत शुद्ध हो। हालांकि, बच्चों को प्रति दिन केवल 150 मिली जूस की ही जरूरत होती है।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

Eating disorders – https://www.mayoclinic.org/diseases-conditions/eating-disorders/diagnosis-treatment/drc-20353609 – accessed on 24/12/2019

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Eating disorders –  https://www.nutrition.gov/topics/diet-and-health-conditions/eating-disorders Accessed on 28/08/2020

लेखक की तस्वीर
Nikhil Kumar द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 08/07/2021 को
Dr. Shruthi Shridhar के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड