अब आपका शिशु नौ सप्ताह का हो चुका है। इस चरण में शिशु में आपको कई तरह के विकास देखने को मिलेंगे, जैसे कि वे परिचित और गैर-परिचित लोगों की आवाजों के बीच अंतर कर सकते हैं। शायद आप गौर कर पाएंगी कि आपका शिशु नई आवाजों को काफी गौर से सुनने की कोशिश करता होगा। इसी के साथ उसके चेहरे के हावभाव और प्रतिक्रियाएं भी बदलती होंगी।

इसलिए आप अपने शिशु से अधिक से अधिक बात करने की कोशिश करें। इससे उनमें नई समझ विकसित होगी। बात करने के दौरान शिशु के हावभाव में भी बदलाव आते हैं, जैसे कि जब कभी वे आपका चेहरा देखेगा तो कभी हंसकर अपनी प्रतिक्रिया देगा। आप समय—समय पर उनसे मनोरंजक संवाद करने के लिए संगीत, विभिन्न आवाजों का प्रयोग कर सकती हैं।
दूसरे महीने के पहले सप्ताह में, आपको अपने शिशु में कुछ बदलाव देख सकते हैं, जैसे कि:
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आप अपने शिशु से बात करने की कोशिश करें, ऐसा करना कई बार खुद से बात करने के जैसा भी प्रतीत हो सकता है। लेकिन, यकीन मानिए यह आपके शिशु में समझ निर्माण करने के लिए एक बड़ा महत्वपूर्ण कदम है। आपका शिशु आपके चेहरे को देखकर आपके हावभावों को समझने की कोशिश करता है। वह आपकी आवाज के भावों को समझता है और उसकी प्रतिक्रिया में वह कुछ आवाजें निकालता है या हंस सकता है।
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शिशु की स्थिति के आधार पर आप डॉक्टर से सलाह करें, लेकिन, आप निम्नलिखित विषयों पर अपने डॉक्टर से परामर्श कर सकते हैं, जैसे कि:
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यहां कुछ चीजें हैं जिनके बारे में आपको पता होना चाहिए:
कई अभिभावकों में टीकाकरण को लेकर कई भ्रम होते हैं। ज्यादातर माता-पिता ने टीकाकरण के फायदे से ज्यादा नुकसान के बारे में ही सुना होगा। लेकिन कई डॉक्टरों ने इस बात की पुष्टि की है कि टीकाकरण आपके शिशु को कई घातक बीमारियों से बचाता है।
शिशु में लगाए जाने वाले टीका हमारे बीमारियों से लड़ने के साथ हमारे शरीर एंटीबॉडी का निर्माण करते हैं। इसका मतलब ये है कि आपके शरीर में इस बीमारी के कीटाणुओं से लड़ने की शक्ति मिलती है और भविष्य में आप इन कीटाणुओं का सामना आसानी से कर सकते हैं।
यह सच है कि टीकाकरण से कई शिशुओं की जान बचाई जा चुकी है, लेकिन कई बार कुछ शिशुओं में इसके कुछ नुकसान भी देखे गए हैं, जैसे कि हल्का बुखार या कई बार कई गंभीर बीमारी की शक्ल भी ले सकता है। इस बात को नाकारा भी नहीं जा सकता कि टीकाकरण के कारण कुछ बच्चों की मौत भी हुई है। इसकी सावधानी के तौर पर आप कुछ उपाय अपना सकती हैं, जैसे;
वैसे तो ऐसे गंभीर मामले काफी कम देखे गए हैं, लेकिन अगर शिशु में निम्नलिखित लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
यदि टीकाकरण के बाद आपके बच्चे में इनमें से कोई भी लक्षण दिखे तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
यहाँ कुछ चीजें हैं , जिनके बारे में आप चिंतित हो सकते हैं:
अगर आप कई बार व्यस्त हैं तो शिशु को बोतल से भी दूध पीने की आदत भी डाल सकती हैं। बोतल द्वारा दूध पीने से आपका शिशु स्तनपान की आदत नहीं छोड़ेगा। अगर आप कुछ दिनों के लिए शिशु को बोतल द्वारा दूध पिलाने का सोच रही हैं तो कुछ बोतल में ब्रैस्ट फीड दूध निकालकर फ्रिज में रख सकती हैं और यह कुछ आपके शिशु की जरूरतों को पूरा कर सकता है।
कुछ स्तनपान करने वाले शिशु आसानी से बोतल से पीना पसंद नहीं करते हैं, लेकिन कुछ शिशु इसे बहुत जल्दी अपना लेते हैं। इसलिए अपने शिशु को कम से कम सप्ताह में तीन बार स्तनपान जरूर कराएं ताकि उन्हें इसकी आदत रहे। क्योंकि कई बार ऐसा देखा गया है कि बोतल द्वारा दूध पीने वाले शिशु बाद में स्तनपान करने में नखरे करते हैं।
शिशु को पूरे पोषक तत्व देने का स्तनपान एक आसान और स्वस्थ तरीका है । स्तनपान के दौरान आपका शिशु अपनी जरूरत या भूख के अनुसार दूध पी लेता है, लेकिन बोतल के द्वारा दूध पिलाते समय आपके सामने एक समस्या यह भी होती है कि कितना दूध आपके शिशु को पिलाया जाए। इस बारे आप आपके डॉक्टर से सलाह कर सकते हैं, क्योंकि हर शिशु की पोषक तत्त्व की जरूरतें अलग हो सकती हैं।
अगर आप कामकाजी महिला हैं और शिशु को दूध पिलाने का समय नहीं निकाल पा रही हैं तो आप शिशु को बोतल द्वारा दूध भी पिला सकती हैं। लेकिन, याद रहे की काम पर लौटने से पहले आपको कम से कम दो सप्ताह पहले से शिशु को बोतल से दूध पिलाने की आदत डालनी होगी, ताकि आपका शिशु इस बदलाव को आसानी से अपना सके।
अगर आप कभी कभार शिशु को बोतल द्वारा दूध पिलाना चाहती हैं, तो अपने दोनों स्तनों से थोड़ा दूध निकाल आप बोतल में रख सकती हैं। इससे दूध का रिसाव जैसी समस्याओं से खुद को दूर रख सकती हैं।
अगर आपका शिशु आपको देखकर हँसता नहीं है, तो इसमें चिंता करने जैसी कोई बात नहीं। क्योंकि कई बार शरारती से शरारती बच्चे भी शुरुवाती 6-7 सप्ताह तक मुस्कुराते नहीं हैं। और जब वह हंसना शुरू करते हैं तो कई बार वह वह यूं ही हँसते हैं। आप उनकी असली और नकली हंसी में फर्क उनके चेहरे के हावभाव देखकर कर सकती हैं। और कई बार आपको आपके शिशु को हंसाने के लिए कड़ी मेहनत भी करनी पढ़ती है जैसे कि उनके साथ खेलना, गुदगुदी करना इत्यादि।
डिस्क्लेमर
हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।
Murkoff, Heidi. What to Expect, The First Year. New York: Workman Publishing Company, 2009. Print version. Page 213-248.
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Current Version
15/10/2020
Aamir Khan द्वारा लिखित
के द्वारा मेडिकली रिव्यूड Dr. Pooja Bhardwaj
Updated by: Ankita mishra
के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
Dr. Pooja Bhardwaj