नवजात शिशु का वजन कैसे करें मॉनिटर?

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट अक्टूबर 6, 2020 . 4 मिनट में पढ़ें
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शिशु का वजन जन्म के बाद घटता और बढ़ता है। शिशु के वजन को मॉनिटर करने के लिए उसके वजन को प्रभावित करने वाले कारकों के बारे में जानना भी जरूरी है। इनको समझने के बाद ही आप शिशु के वजन की मॉनिटरिंग कर सकती हैं। प्रीमैच्योर शिशु का संतुलित वजन अलग हो सकता है। वहीं, ड्यू डेट पर जन्म लेने वाले शिशु का वजन और उसकी मॉनिटरिंग अलग।

संतुलित नवजात शिशु का वजन

नवजात शिशु का संतुलित वजन एक रेंज के भीतर होता है। 37 और 40 हफ्ते के बीच जन्म लेने वाले नवजात शिशु का जन्म ढाई किलो और चार किलो के बीच हो सकता है। जन्म के वक्त शिशु के वजन को कई चीजें प्रभावित करती हैं। गर्भावस्था की अवधि इसमें एक अहम भूमिका निभाती है। ड्यू डेट या इसके बाद पैदा होने वाले शिशु समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों के मुकाबले साइज में बड़े होते हैं।

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शिशु के वजन की मॉनिटरिंग

जन्म के बाद घटता शिशु का वजन

जन्म के वक्त शिशु की बॉडी में अतिरिक्त फ्लूड होता है। शुरुआती कुछ दिनों में यह फ्लूड बॉडी से कम होने लगता है। यह एक सामान्य प्रक्रिया है। एक स्वस्थ्य नवजात शिशु का वजन सात से 10 प्रतिशत तक घटता है लेकिन, जन्म के दो हफ्ते के भीतर वजन फिर से बढ़ जाता है।

पहले महीने में शिशु का वजन

पहले महीने के दौरान शिशु का वजन प्रति दिन 30 ग्राम बढ़ता है। इस अवधि के दौरान उनकी लंबाई एक इंच से लेकर डेढ़ इंच तक बढ़ती है। वहीं, कुछ सात से 10 दिन के नवजात शिशु का वजन तेजी से बढ़ता है। तीसरे और छठे हफ्ते में उनका वजन दोबारा बढ़ता है।

ब्रेस्टफीडिंग और बॉटल फीडिंग के बच्चों का वजन

स्तनपान करने वाले बच्चों का वजन बढ़ने का अलग पैमाना होता है। वहीं, बॉटल से दूध पीने वाले बच्चों का वजन अलग तरह से बढ़ता है। स्तनपान करने वाले शिशु का वजन पहले दो से तीन महीने में अधिक बढ़ता है। इसके बाद उनका वजन बढ़ना रुक जाता है। इस दौरान उनके वजन के बढ़ने की रफ्तार धीमी हो जाती है।

ब्रेस्टफीडिंग करने वाले शिशु का वजन

ब्रेस्टफीडिंग करने वाले शिशु का वजन जन्म से लेकर पहले तीन महीने तक 150-200 ग्राम प्रति सप्ताह की रफ्तार से बढ़ता है। इसके बाद तीन से छह महीने तक एक सप्ताह में उनका वजन 100-150 ग्राम के बीच बढ़ता है। छह महीने के बाद उनके वजन बढ़ने की रफ्तार और धीमी हो जाती है। छह महीने से लेकर एक वर्ष तक हर हफ्ते उनका वजन 70-90 ग्राम के बीच बढ़ता है।

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शिशु के वजन को प्रभावित करने वाले कारक

मल्टिपल प्रेग्नेंसी

मल्टिपल प्रेग्नेंसी के मामले में शिशु का साइज छोटा होता है। ऐसी प्रेग्नेंसी में शिशुओं को यूटरस में आपस में स्पेस को शेयर करना पड़ता है। अक्सर जुड़वा बच्चों का जन्म समय से पहले होता है, जिसकी वजह से उनका वजन कम होता है।

बर्थ ऑर्डर

कई बार पहले बच्चे का साइज और वजन कम होता है। लोगों का मानना है कि लड़कों का साइज और वजन लड़कियों के मुकाबले ज्यादा होता है।

मां का स्वास्थ्य

प्रेग्नेंसी के दौरान मां को हाई ब्लड प्रेशर या हार्ट से संबंधित समस्या होने पर शिशु का वजन कम हो सकता है। यदि महिला को डायबिटीज या वह मोटापे से परेशान है तो शिशु का वजन ज्यादा हो सकता है।

प्रेग्नेंसी में न्यूट्रिशन

प्रेग्नेंसी के दौरान महिला का खान पान ठीक ना रहने से शिशु का वजन कम हो सकता है। गर्भाशय में इससे शिशु की ग्रोथ भी प्रभावित होती है।

इस बातों को ध्यान रखकर आप शिशु के वजन को मॉनिटर कर सकती हैं। अगर शिशु का वजन समय के साथ न बढ़े या लगातार घटता जाए तो एक बार डॉक्टर से जरूर कंसल्ट करें।  वजन का लगातार कम होना या बढ़ना किसी स्वास्थ्य संबंधी समस्या का संकेत हो सकता है।

और पढ़ें : मां और शिशु दोनों के लिए बेहद जरूरी है प्री-प्रेग्नेंसी चेकअप

शिशु का वजन किन-किन बातों पर निर्भर करता है?

शिशु का वजह निम्नलिखित बातों पर निर्भर करता है। जैसे-

सेक्स

बच्चे का वजन उसके सेक्स (लिंग) पर निर्भर करता है। यह लड़के और लड़कियों में अलग-अलग होता है। नवजात शिशु अगर लड़का है, तो लड़के, लड़कियों की तुलना में ज्यादा बड़े होते हैं और उनका वजन ज्यादा होता है। यही नहीं लड़के ज्यादा तेजी से बढ़ते हैं और साथ ही उनका वजन भी बढ़ता है।

न्यूट्रिशन

बच्चे का वजन उनको मिलने वाले आहार पर निर्भर करता है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अनुसार ब्रेस्ट फीडिंग करने वाले शिशु का ग्रोथ ठीक तरह से होता है। वहीं फॉर्मूला मिल्क का सेवन करने वाले शिशु का ग्रोथ ठीक तरह से नहीं होता है। इसलिए ब्रेस्ट मिल्क सेवन करने वाले शिशु का वजन 6 महीने में बढ़ सकता है जबकि फॉर्मूला मिल्क का सेवन करने वाले शिशु का एक साल में बढ़ता है।

मेडिकल कंडीशन

बच्चों में कोई शारीरिक परेशानी होने पर बच्चे की ग्रोथ और वजन दोनों पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। ध्यान रखें अगर शिशु का वजन नहीं बढ़ रहा हो, तो हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लें।

और पढ़ें : गर्भनिरोधक दवा से शिशु को हो सकती है सांस की परेशानी, और भी हैं नुकसान

समय से पहले शिशु का जन्म

वैसे शिशु जिनका जन्म जो समय से पहले हुआ हो उनके शारीरिक विकास में वक्त लगता है। ऐसा बच्चे जन्म के पहले साल तक पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाते हैं लेकिन, कुछ समय के बाद उनमें भी सही तरह से ग्रोथ शुरू हो जाते हैं। वैसे कुछ बच्चे जिनका जन्म समय से पहले होता है वो जन्म के एक महीने के बाद ही शरीर से स्वस्थ हो जाते हैं।

नवजात शिशु को सिर्फ मां का दूध ही दिया जाता है। किसी कारण अगर मां का दूध शिशु को नहीं पाता है, तो फॉर्मूला मिल्क दिया जा सकता है। बच्चे को स्वस्थ रखने के लिए स्तनपान करवाना बेहद आवश्यक है। ब्रेस्ट मिल्क से शिशु को संपूर्ण न्यूट्रिशन मिल जाता है। इसलिए शिशु के साथ-साथ स्तनपान करवाने वाली महिला को अपने आहार पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

अगर आप शिशु का वजन कम होने के कारण परेशान हैं या उसका वजन ज्यादा बढ़ रहा है, तो इससे जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा।

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