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क्या वजन घटने से डायबिटीज का इलाज संभव है?

के द्वारा मेडिकली रिव्यूड डॉ. प्रणाली पाटील · फार्मेसी · Hello Swasthya


Mousumi dutta द्वारा लिखित · अपडेटेड 15/07/2021

क्या वजन घटने से डायबिटीज का इलाज संभव है?

आज कल की जीवनशैली ऐसी हो गई है कि कुछ बीमारियां कब आपके शरीर में बिन बुलाए मेहमानों की तरह अपना घर बसा लेती हैं, आपको पता ही नहीं चलता। क्यों? मेहमान की बात सुनकर आप चौंक गए! सच ही तो है, बेवजह बढ़ता वजन, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर, स्ट्रेस, डिप्रेशन ये कुछ आम बीमारियों के नाम हैं, जो आने का संकेत तो देते हैं, लेकिन आप उनको नजरअंदाज कर देते हैं। फिर जब ये बीमारियां शरीर में घर बसा लेती हैं, तब आपको होश आता है। क्या आपको पता है कि आपके शरीर का बढ़ता वजन डायबिटीज होने का कारण बन सकता है? इस सूचना का एक अच्छा साइड यह भी है कि वजन घटने से डायबिटीज का इलाज भी संभव हो सकता है या इसे कंट्रोल भी किया जा सकता है।

वैसे तो एक बार डायबिटीज हो जाने पर पूरी तरह से ठीक होना थोड़ा मुश्किल होता है। लेकिन वजन घटने से डायबिटीज का इलाज हो सकता है इस बात का मतलब यह है कि वेट लॉस होने पर हो सकता है मरीज को कम दवाईयां लेनी पड़े। इसके अलावा टाइप-2 डायबिटीज होने पर शरीर में जो समस्याएं होती हैं,उनको कुछ हद तक रोका जा सकता है। 

यह तो आपको पता ही है कि डायबिटीज के मरीजों के शरीर में बहुत मात्रा में शुगर होती है। इस शुगर के पीछे इंसुलिन हार्मोन का हाथ होता है। बात को जरा इस तरह से समझते हैं, असल में इंसुलिन पैंक्रियाज में बनता है। जब आप खाते हैं तो पैंक्रियाज इंसुलिन को रक्तकोशिकाओं में रिलीज करता है। यह इंसुलिन शुगर को कोशिकाओं में जाने की अनुमति देता है, जिससे ब्लड में शुगर की मात्रा कम हो जाती है। लेकिन टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों के शरीर में यह प्रक्रिया सही तरह से नहीं हो पाती। पैंक्रियाज में इंसुलिन की जितनी जरूरत होती है, उतनी बन नहीं पाती, फलस्वरूप इंसुलिन का उपयोग पर्याप्त मात्रा में शरीर कर नहीं पाता।

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अधिक वजन और डायबिटीज का संबंध (Relationship between overweight and diabetes)

अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर डायबिटीज और वजन का क्या संबंध है? अगर आप डायबिटीज के मरीज हैं और साथ में फूड लवर भी हैं, तो फिर शारीरिक स्थिति संकट में आ सकती है। हाल के अनुसंधानों से यह पता चला है कि जिनका वजन बहुत ज्यादा होता है, उनमें टाइप-2 डायबिटीज होने की संभावना 80 गुना अधिक होती है। असल में मोटापे को टाइप-2 डायबिटीज होने के लिए 80-85% तक जिम्मेदार माना जाता है। अध्ययनों से यह पता चला है कि पेट की चर्बी के कारण वसा कोशिकाएं ‘प्रो- इंफ्लामेटरी’ केमिकल रिलीज करती हैं, जिसके कारण शरीर इंसुलिन का उत्पादन ठीक तरह से नहीं कर पाता। अब तो आप समझ ही रहे होंगे कि डायबिटीज और वजन का एक दूसरे से क्या संबंध हैं।

आशा करते हैं वजन घटने से डायबिटीज का इलाज में  कैसे मदद मिलती है, यह बात समझने में कोई समस्या नहीं रह गई होगी। जैसे-जैसे डायबिटीज के मरीज अपना वजन कम करेंगे, वैसे-वैसे पैंक्रियाज शरीर को जरूरत के अनुसार इंसुलिन की मात्रा देने में सक्षम होगा। अगर वजन कम करने से पैंक्रियाज अपना काम ठीक तरह से कर पाता है, तो डायबिटीज को आसानी से कंट्रोल में किया जा सकता है। लेकिन वजन कम करने के बावजूद अगर इंसुलिन का उत्पादन ठीक तरह से नहीं हो रहा है, तो डॉक्टर दवा में परिवर्तन कर सकता है या इंसुलिन थेरेपी देने की बात सोच सकता है। वजन कम करने से डायबिटीज की समस्या के अलावा दिल की बीमारी, किडनी की समस्या और नर्व डैमेज का खतरा कुछ हद तक कम होने में मदद मिलती है। 

लोग अक्सर यह सोचते हैं कि उम्र के बढ़ने के साथ हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज जैसी बीमारियां होती हैं। लेकिन यह धारणा बिल्कुल गलत है। किसी भी उम्र में अगर आपने हद से ज्यादा वजन बढ़ा लिया है या वजन बढ़ने के कारण पेट में चर्बी जमने लगी है, तो आपके लिए टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा बढ़ने लगता है। यहां तक कि अगर आपके परिवार के इतिहास में टाइप-2 डायबिटीज का नाम जुड़ा हुआ है, तो आपके लिए अपने वजन पर नियंत्रण रखना और भी जरूरी हो जाता है। संतुलित वजन बनाए रखने से आप 70-90 प्रतिशत डायबिटीज होने के जोखिम को कम कर सकते हैं। 

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वजन घटाने के फायदे (Weight loss benefits)

अगर आपने वजन घटाया या कुछ हद तक बढ़ते वजन पर अंकुश लगाया तो आपको जल्द ही कुछ फायदे नजर आएंगे, उनमें हैं- 

  • कोलेस्ट्रॉल का लेवल नॉर्मल हो जाएगा
  •  ब्लड प्रेशर कम हो जाएगा
  • ब्लड शुगर कम होगा
  • आपके घुटनों, टखनों, पैर और कमर का दर्द कम हो जाएगा, क्योंकि उनपर दबाव कम पड़ेगा
  • बहुत ज्यादा एनर्जी महसूस होगी
  • डिप्रेस्ड मूड के जगह पर आप खुश रहने लगेंगे
  • स्ट्रेस फ्री महसूस होगा
  • और पढ़ें- डायबिटीज होने पर शरीर में कौन-सी परेशानियाँ होती हैं?

    वजन घटने से डायबिटीज का इलाज : डायट

    आपको तो पता ही है कि हर मर्ज की दवा खान-पान में बदलाव होता है। अनुसंधानों से पता चलता है कि हर दिन कम से कम 500 कैलोरी कम करने से डायबिटीज को कंट्रोल में किया जा सकता है। डायट में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेड और फैट की मात्रा को कम या संतुलित करने की जरूरत होती है। कार्बोहाइड्रेड का सेवन, ब्लड शुगर बढ़ाने से सीधा संबंध होता है। आप जितना आहार में फाइबर की मात्रा को बढ़ाएंगे, उतना ही ब्लड शुगर को कम करना आसान हो सकता है। 

    और पढ़ें- क्या डायबिटीज का उपचार संभव है?

    वजन घटने से डायबिटीज का इलाज : योगासन

    योगासन तो सदियों से सभी बीमारियों के इलाज में सहायक की भूमिका अदा करता आ रहा है। उसी भूमिका में योगाभ्यास विभिन्न लाइफस्टाइल संबंधित बीमारियों में टाइप-2 डायबिटीज के इलाज में भी मदद करता है। योगासन करने से साइको-न्यूरो-एंडोक्राइन और इम्युनिटी मेकानिज्म में फायदा मिलता है। योगाभ्यास को रोजाना जीवनशैली में शामिल करने से ग्लाइसेमिक कंट्रोल होने के साथ डायबिटीज के कारण शरीर में होने वाली जटिलताओं से राहत मिलने में मदद मिलती है। अब आप सोच रहें होंगे कि कौन-कौन-से योगासन इस बीमारी को कंट्रोल करने के लिए कर सकते हैं, तो इस मामले में बहुत सारे योगासनों का नाम आता है, उनमें हैं-

    -प्राणायाम

    -सूर्य नमस्कार

    – कपालभाती

    -अग्निसार क्रिया

    -वमन धौति क्रिया

    -शंख प्रकाशन

    -लघु शंख प्रकाशन

    -त्रिकोणासन

    -ताड़ासन

    -तिर्यक ताड़ासन

    -वीरासन

    -वक्रासन आदि।

    इसके अलावा ध्यान यानि मेडिटेशन करना भी जरूरी होता है। इससे मन पर अनुकूल प्रभाव पड़ता है, जिससे वजन को कम करने में मदद मिलती है।

    नोट- ऊपर दी गई जानकारी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। इसलिए किसी भी घरेलू उपचार, दवा या सप्लिमेंट का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर करें।

    और पढ़ें- डायबिटीज पैचेस : ये क्या है और किस प्रकार करता है काम?

    वजन घटने से डायबिटीज का इलाज : एक्सरसाइज 

    डायबिटीज और वजन का सीधा संबंध एक्सरसाइज से जुड़ा हुआ होता है। आप प्रतिदिन जितना व्यायाम करेंगे उतनी ही कैलोरी बर्न होगी। शरीर का मेटाबॉलिज्म जितना बेहतर तरीके से काम करेगा, उतना ही वजन को कम करना आसान होगा। इसके लिए बहुत ज्यादा कष्ट या मशक्कत करने की भी जरूरत नहीं है। आप अपनी इच्छा के मुताबिक एक्सरसाइज या वर्कआउट का चुनाव कर सकते हैं। अब सोच रहे होंगे कि आखिर किस टाइप की एक्सरसाइज करनी चाहिए?

    एक्सरसाइज के जिस फॉर्म को करने से आपको आनंद मिलता है, वहीं करें। क्योंकि पसंद की चीज करने से उसको करने की इच्छा बरकरार रहती है, नहीं तो वह बोझ जैसा महसूस लगने लगता है। रेजिस्टेंस ट्रेनिंग और एरोबिक्स दोनों का कॉम्बिनेशन वजन कम करने में बहुत मदद करता है। रेजिस्टेंस ट्रेनिंग या स्ट्रेंथ ट्रेनिंग में वेट लिफ्टिंग, पुशअप्स और सीट अप्स आदि करने से लाभ मिलता है। एरोबिक्स एक्सरसाइज में रनिंग, डांसिंग, स्विमिंग और साइकिलिंग शामिल रहता है। इन सब में से आप दो एक्सरसाइज का कॉम्बिनेंशन सिलेक्ट करके फिटनेस की तरफ कदम बढ़ा सकते हैं। 

    अब तक के विश्लेषण से आप समझ ही गए होंगे कि वजन घटने से डायबिटीज का इलाज करना या ब्लड शुगर को कंट्रोल में लाना कितना आसान हो जाता है। इसलिए फिट रहने की तरफ बढ़ाए कदम, साथ ही डायबिटीज और वजन को करें कंट्रोल। ऊपर दी गई जानकारी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। इसलिए किसी भी घरेलू उपचार, दवा या सप्लिमेंट का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर करें।

    डिस्क्लेमर

    हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

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