कहीं आप तो नहीं हैं हेलीकॉप्टर पेरेंट्स?

चिकित्सक द्वारा समीक्षित | द्वारा

अपडेट डेट मई 4, 2020 . 5 मिनट में पढ़ें
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क्या आपको 2018 में आई काजोल की मूवी हेलिकॉप्टर इला याद है? उस फिल्म में इला का किरदार निभा रही काजोल हर समय अपने बच्चे पर नजर रख सके इसके लिए वे कॉलेज में दाखिला ले लेती हैं। इस तरह के ओवर प्रोटेक्टिव पेरेंट्स आपको असल जिंदगी में भी मिल जाएंगे। बहुत से अभिभावक अपने बच्चों को लेकर हद से ज्यादा प्रोटेक्टिव होते हैं। उनकी हर छोटी-छोटी चीज का डिसीजन वे खुद ही लेते हैं, इन्हें ही हेलीकॉप्टर पेरेंट्स कहा जाता है। “हैलो स्वास्थ्य” के इस आर्टिकल में जानते हैं कि हेलीकॉप्टर पेरेंट्स के फायदे और नुकसान क्या हैं? हेलीकॉप्टर पेरेंटिंग के कारण क्या हैं?

हेलीकॉप्टर पेरेंटिंग (Helicopter parenting) क्या है?

आपको बता दें कि हेलीकॉप्टर पेरेंटिंग शब्द कोई बहुत नया नहीं है। इस टर्म को पहली बार 1969 में छपी एक बुक ‘पेरेंट्स एंड टीनएजर्स (Parents & Teenagers)’ में इस्तेमाल किया गया था। जिसमें टीनएजर्स ने कहा था कि उनके पेरेंट्स उनके इर्द-गिर्द हेलीकॉप्टर की तरह मंडराते रहते हैं। फिर यह शब्द इतना फेमस हुआ कि 2011 में इसे डिक्शनरी में भी शामिल कर लिया गया। हेलीकॉप्टर पेरेंट्स ऐसे माता-पिता हैं जिनका पूरा ध्यान हर समय अपने बच्चों पर ही लगा रहता है। बच्चों पर ध्यान देना अच्छी बात है लेकिन, हद से ज्यादा इन्वॉल्वमेंट बच्चे के बिहेवियरल डेवलपमेंट के लिए ही खतरनाक साबित हो सकती है। इसी तरह की पेरेंटिंग स्टाइल को अन्य नामों से भी जाना जाता है जैसे ‘लॉनमोवर पेरेंटिंग (lawnmower parenting)’, ‘कोसेटिंग पेरेंट (cosseting parent)’, या बुलडोज पेरेंटिंग (bulldoze parenting)’।

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क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

सेंटर फॉर द ट्रीटमेंट ऑफ एंग्जायटी डिसऑर्डर के डायरेक्टर और एंग्जायटी डिसऑर्डर : द गो-टू गाइड के लेखक ‘कैरोलिन डेच’ का कहना है कि “यह एक तरह की ऐसी पेरेंटिंग स्टाइल है जिसमें ओवर प्रोटेक्टिव पेरेंट्स अपने बच्चों पर अत्यधिक ध्यान केंद्रित करते हैं। आमतौर पर ऐसे पेरेंट्स अपने बच्चों के अनुभवों, विशेष रूप से उनकी सफलताओं या असफलताओं के लिए बहुत अधिक जिम्मेदारी लेते हैं।

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हेलीकॉप्टर पेरेंट्स होने के क्या कारण हैं?

हेलीकॉप्टर पेरेंटिंग के कई कारण हो सकते हैं। संभावित कारणों में शामिल हैं:

बच्चों के भविष्य को लेकर डर 

कुछ माता-पिता मानते हैं कि उनका बच्चा आज जो कुछ भी करता है, उसका उनके भविष्य पर बहुत प्रभाव पड़ता है। क्लास में बच्चे को कम ग्रेड मिलना, स्पोर्ट्स टीम में सेलेक्शन न होना या अच्छे कॉलेज में एडमिशन न होने के डर से माता-पिता हेलीकॉप्टर पेरेंट्स बन जाते हैं। उन्हें लगता है हेलीकॉप्टर पेरेंटिंग के जरिए वे अपने बच्चों की लाइफ में बाद में आने वाले स्ट्रगल्स को रोक सकते हैं।

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खुद उपेक्षित महसूस करना 

हो सकता है कि हेलीकॉप्टर पेरेंट्स को अपने माता-पिता से प्यार या केयर महसूस न हुई हो। इसलिए, वे सोचते हैं कि उनके बच्चे कभी इस तरह से महसूस न करें। हालांकि, यह एक बेहद ही सामान्य सी भावना है। लेकिन इसके चलते कभी-कभी पेरेंट्स अपने बच्चे को कुछ ज्यादा ही अटेंशन देने लगते हैं।

चिंता

कुछ माता-पिता अपने बच्चे को उदास देखते हैं, तो वे काफी निराश हो जाते हैं और चिंता में चले जाते हैं। ऐसा होने से रोकने के लिए माता-पिता हर कोशिश करते हैं। हेलीकॉप्टर पेरेंट्स भूल जाते हैं कि उदास या दुःखी होना जीवन का एक हिस्सा है और ये बच्चे को भावनात्मक रूप से डेवलप और अधिक लचीला बनाने में मदद करते हैं। 

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दूसरे हेलीकॉप्टर पेरेंट्स का प्रभाव 

जब माता-पिता दूसरे हेलीकॉप्टर पेरेंट्स को देखते हैं कि वे अपने बच्चे की लाइफ में कितना ज्यादा इन्वॉल्व हैं तो वे भी हेलीकॉप्टर पेरेंटिंग शुरू कर देते हैं। यह प्रेशर चाइल्डहुड और अडल्टहुड दोनों को ही प्रभावित करता है। इसलिए, जो माता-पिता ओवर प्रोटेक्टिव के आस-पास ज्यादा रहते हैं, उन पर इस पेरेंटिंग स्टाइल को अपनाने का दबाव बना रहता है। पेरेंट्स को खुद ही लगने लगता है कि वे अच्छे पेरेंट्स नहीं हैं। 

हेलीकॉप्टर पेरेंट्स के फायदे क्या हैं?

कुछ हद तक हेलीकॉप्टर पेरेंटिंग के फायदे हैं कि ऐसे बच्चे ज्यादा प्यार और खुशी महसूस करते हैं। ऐसे बच्चों की जिंदगी में बढ़ने के चांसेज ज्यादा रहते हैं। पेरेंट्स और बच्चों की बीच बॉन्डिंग जैसी चीजें बढ़ती हैं। हालांकि, इस तरह की मॉडर्न पेरेंटिंग स्टाइल अभी भी एक कंट्रोवर्सियल मैटर ही है। कई स्टडीज बताती हैं कि पेरेंट्स की ज्यादा भागीदारी से बच्चों को असफलताओं और चुनौतियों से लड़ना कठिन हो जाता है।

हेलीकॉप्टर पेरेंट्स होने के नुकसान क्या हैं?

बच्चों की परवाह हर माता-पिता को होती है। लेकिन, उनकी लाइफ में इतना घुल मिल जाने से हेलीकॉप्टर पेरेंटिंग के नुकसान भी हो सकते हैं जो आपके बच्चों को ही झेलने पड़ेंगे। जैसे-

  • ओवर प्रोटेक्टिव पेरेंट्स का हर जगह मौजूद होना बच्चे को अपने दम पर कुछ भी करने के लिए उनमें कॉन्फिडेंस को कम कर सकता है। किसी भी चीज का निर्णय लेने का आत्मविश्वास उनमें कम हो जाता है। 
  • हेलीकॉप्टर पेरेंट्स हर समय बच्चों की हिफाजत के लिए मौजूद रहते हैं, उन्हें परेशानियों में पड़ने ही नहीं देते हैं ऐसे में बच्चा लाइफ में किसी भी नेगेटिव चीज से कुछ भी सीखता नहीं है। रिसर्च की मानें तो ऐसे बच्चे जीवन की परेशानियों और कठिन हालातों से मुकाबला करने में कम सक्षम होते हैं।
  • हेलीकॉप्टर पेरेंटिंग से बच्चों में स्ट्रेस और घबराहट बढ़ती है क्योंकि उन्हें हमेशा डायरेक्शन की जरूरत पड़ती है। अकेले ही जब उन्हें कोई भी निर्णय लेने को कहा जाता है तो वे घबराते हैं।
  • बच्चों के सभी छोटे-छोटे काम करने (जैसे लंच पैक करना, उनके रूम की साफ-सफाई करना आदि) से बच्चे अपने काम को मैनेज करना नहीं सीख पाते हैं। ऐसे में जब वे बाहर रहने जाते हैं तो उन्हें काफी कठिनाई होती है।

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क्या मैं हेलीकॉप्टर पेरेंट्स हूं?

इसका जवाब आपको इन पॉइंट्स से समझ आएगा अगर आप-

over protective parents

  • बच्चों के झगड़े में खुद भी लड़ने लगते हैं,
  • बच्चों के स्कूल का होमवर्क खुद करते हैं,
  • हर जगह बच्चे की उंगली थामे चलते हैं ताकि वह गिरे नहीं,
  • अपने बच्चे के ट्रेनर को भी ट्रेन करते हैं,
  • बच्चों को खुद कुछ करने नहीं देते हैं, 
  • बच्चों के सारे काम खुद करती हैं (जैसे उनका रूम ठीक करना, टाइम टेबल सेट करना, स्टडी टेबल सही करना आदि),
  • उन्हें परेशानियों में पड़ने नहीं देते,
  • बच्चों को हारने नहीं देते हैं फिर चाहे वह मामूली गेम ही क्यों न हो। 

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हेलीकॉप्टर पेरेंटिंग बंद करने के लिए क्या करें?

  • अपने बच्चों के ऊपर से मंडराना बंद कर दें,
  • अपनी चिंताओं को बच्चों पर ना डालें,
  • मॉडरेशन में ही बच्चे को प्यार जताएं,
  • अपने बच्चे को लेबल मत करें (जैसे तुम बहुत बदमाश हो, फनी हो आदि),
  • बच्चा अगर अपने लिए कुछ अलग चुनता है तो परेशान ना हों,
  • बच्चों को हद से ज्यादा अटेंशन देना बंद करें। 

तो आप भी समझ गए होंगे कि हेलीकॉप्टर पेरेंटिंग आपके बच्चे के डेवलपमेंट के लिए कैसी है? बच्चों के लिए फिक्रमंद होना अच्छा है लेकिन, बच्चों को उनकी लाइफ के कुछ डिसीजन खुद लेने के लिए भी कहें। मानते हैं उनके फ्रेंड्स के बारे में जानकारी रखना आज के समय की जरूरत है, पर हर बात में इतनी दखलअंदाजी भी सही नहीं है। उनकी प्रॉब्लम्स सॉल्व करने में सिर्फ उनकी मदद करें न की प्रॉब्लम्स सुलझाने लगें। कुल मिलाकर यही कहा जा सकता है कि बच्चे की बेहतर लाइफ और इमोशनल डेवलपमेंट के लिए उनको प्यार और केयर देने के साथ ही उन्हें कुछ फ्रीडम भी दें।

हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की कोई भी मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है। अगर इससे जुड़ा आपका कोई सवाल है, तो अधिक जानकारी के लिए आप अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

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