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बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए पेरेंट्स रखें इन बातों का ध्यान

बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए पेरेंट्स रखें इन बातों का ध्यान

बच्चों में आत्मविश्वास (Confidence in children) या बच्चों में कॉन्फिडेंस के सबसे बड़े दुश्मन हतोत्साहित होना और डर है। इसलिए, माता-पिता के रूप में, अपने बच्चे को प्रोत्साहित करना और उसका समर्थन करना आपका काम है। क्योंकि वे कठिन कार्यों से निपटने का प्रयास करते हैं। आत्मविश्वास की कमी उन्हें सफल कैरियर बनाने से रोक सकता है। इस बारे में मनोवैज्ञानिक और पेरेंटिंग पुस्तकों के लेखक कार्ल पिकहार्ट कहते हैं कि एक बच्चे में आत्मविश्वास की जब कमी होती है, तो नई या चुनौतीपूर्ण चीजों की कोशिश करने के लिए अनिच्छुक होंगे। क्योंकि वे असफल होने या दूसरों को निराश करने से डरते हैं। आत्मविश्वास एक सबसे बड़ा उपहार है जो एक अभिभावक अपने बच्चे को दे सकते है।

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बच्चों में आत्मविश्वास (Confidence in children) बढ़ाने के लिए उनसे बात करें

बच्चों में शुरूआती सामाजिक कौशल और आत्मविश्वास पेरेंट्स के साथ संबंध और संवाद पर अधिक निर्भर करता है। बच्चों में इनसे सामाजिक कौशल विकसित होने लगते हैं, जो उनके आत्मविश्वास बनाने में बहुत जरूरी होता है। इसलिए अपने बच्चों के साथ प्रभावी संवाद बनाए रखने की कोशिश करें। ताकि, आपको बच्चों की कमजोरी और अच्छाईयों का पता चल सके। इससे संबंध विकसित करने में मदद मिलेगी और बच्चे में खुल कर बोलने का आत्मविश्वास बढ़ेगा।

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बच्चों में आत्मविश्वास (Confidence in children) या बच्चों में कॉन्फिडेंस बढ़ाना है तो अपनी पसंद को चुनने का अवसर दें

बच्चों को आत्मविश्वास उनके पसंद के कामों को करने से अधिक मिलता है। उन्हें अपनी पसंद चुनने, विकल्प आदि शेयर करने में बच्चे की मदद करने में पेरेंट्स की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है। उनकी इच्छाओं के बारे में जान कर अपनी पसंद उसे खुद चुनने को प्रोत्साहित करें। यह उनकी आत्मविश्वास विकसित करने का सब से अच्छा तरीका है। ऐसा करना बच्चों को जीवन में फैसले लेने और समझने में सक्षम करता है।

प्रशंसा और प्रोत्साहन के लिए पुरस्कार देते रहें

बच्चे को हमेशा जताएं कि आप उनसे कितना प्यार करते हैं। बच्चे चाहें जैसे भी हों, हैं तो आपके ही न? तो आपको करना यह चाहिए कि बच्चे को समझाएं कि हर इंसान अपने आप में स्पेशल होता है। हर किसी की अपनी स्पेशल एबिलिटी और स्किल होती है। कोशिश करें कि बच्चों को उनके लिए पॉजिटिव यादों का निर्माण करने में आप करें। बच्चों की सफलता चाहे जिस स्तर की भी हो, उस की सफलता की तारीफ करें और प्रोत्साहन स्वरूप कुछ जरूरी गिफ्ट देते रहें। जैसे – स्टिकर, कुकीज आदि।

यह भी ध्यान रखें कि बच्चों के किसी असफलता पर उन्हें हतोत्साहित करना भूल होगी। जिस तरह आप उनकी भविष्य के लिए चिंतित हैं, वह भी हैं। बच्चे नहीं चाहते कि उनके कारण माता-पिता को शर्मिंदगी झेलनी पड़े या परेशानी हो। अतः बच्चे को असफल होने पर अगली बार पुनः प्रयास करने और अच्छा करने के लिए प्रोत्साहित करें।

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दूसरे बच्चों के साथ तुलना बिलकुल न करें

हर बच्चा अपने आप में स्पेशल होता है। हर किसी की अपनी स्पेशल एबिलिटी और स्किल होती है। कोई बच्चा मैथ्स में अव्वल होता है, तो कोई आर्ट्स में, कोई लैंग्वेज सब्जेक्ट में मास्टर होता है। बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाना है तो सबसे पहले हमें बच्चों की तुलना दूसरों से करना बंद करना चाहिए। यह बात फैक्ट है कि तुलना करने से बच्चों में हीन भावना पैदा होती है। इससे बच्चे में प्रतिद्वंद्विता की भावना पैदा होती है, जिसके चलते उसमें ईर्ष्या हो सकती है और यह बच्चे की सेहत, मानसिक विकास और व्यवहार के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

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बच्चों में आत्मविश्वास (Confidence in children) और काम के प्रति दृढ़ रहना सिखाएं

बच्चों में आत्मविश्वास (Confidence in children) या बच्चों में कॉन्फिडेंस बढ़ाने के कई तरीके हैं। उन्हीं में से एक यह है कि बच्चों को अपने काम में समर्पित रहना सिखाना है। क्योंकि, जब बच्चा किसी काम खुद से को पूरा करता है, तो बच्चों में आत्मविश्वास (Confidence in children) या बच्चों में कॉन्फिडेंस आता है। इसके लिए आप उन्हें महान व्यक्तियों, वैज्ञानिकों, एक्टर्स आदि का उदाहरण दे सकते हैं। लेकिन, यह भी खयाल रखें कि किसी दूसरे बच्चे से तुलनात्मक न होने पाए। जिन से उसे अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने की प्रेरणा मिले।

इस से माता-पिता को यह समझने में मदद मिलती है कि क्या बच्चे को कुछ सीखने में समस्या आ रही है या उस पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है. बच्चे के शिक्षकों और दोस्तों से बात करें ताकि उस की दिलचस्पी जानने में मदद मिले।

बच्चों से कहें कि उनपर गर्व है

बच्चों में आत्मविश्वास (Confidence in children) या बच्चों में कॉन्फिडेंस बढ़ाने के लिए जरूरी है कि जब भी वे कोई अच्छा काम करें, तो उन्हें बताएं कि आपको उन पर गर्व है। वहीं दूसरी ओर जब वे ठीक से काम नहीं करते, तो पेरेंट्स को उनपर चिल्लाने या गुस्सा करने की बजाए उन्हें प्यार से समझाने की जरूरत होती है। इससे भी बच्चों में आत्मविश्वास (Confidence in children) कम होने लगता है। ऐसे में बच्चों को समय-समय पर बताएं कि गलतियां करना बुरी बात नहीं है बल्कि गलतियों से कुछ भी न सिखकर उन्हें दोहराना बुरी बात है।

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बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए उन्हें बताएं कि वे खास हैं

छोटी उम्र में बच्चे अक्सर जल्दी निराश हो जाते हैं। इतना ही नहीं निराशा होने पर बच्चे नकारात्मक सोच भी विकसित कर लेते हैं। वे सोचने लगते हैं कि कोई उनसे प्यार नहीं करता। बच्चा जब नकारात्मकता से घिर जाता है, तो वह चिड़चिड़ा भी होने लगता है। साथ ही यह नकारात्मकता बच्चों की रोज की दिनचर्या में भी दिखती है। ऐसे में बच्चों की भूख कम हो जाती है। पढ़ाई में उनका मन नहीं लगता और साथ ही उनके सोने के पैटर्न में भी बदलाव देखने को मिलते हैं। ऐसे में जरूरी है कि आप बच्चे को समय-समय पर बताते रहें कि वह आपके लिए कितने खास हैं।

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बच्चों में आत्मविश्वास (Confidence in children) बढ़ाने के लिए उनकी राय लें

घर में कोई भी नया काम करने के लिए जिस तरह घर के बड़े लोगों की राय ली जाती है उसी तरह बच्चों से भी इस बारे में बात करना अच्छा साबित होता है। ऐसा करने से बच्चा नए बदलाव के लिए खुद को तैयार कर लेता है और साथ उसको महसूस होता है कि उसी राय भी मायने रखती है। ऐसे में बच्चों में आत्मविश्वास (Confidence in children) या बच्चों में कॉन्फिडेंस बढ़ता है।

हैलो हेल्थ किसी भी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार उपलब्ध नहीं कराता। इस आर्टिकल में हमने आपको बच्चों में आत्मविश्वास (Confidence in children) या बच्चों में कॉन्फिडेंस संबंधित जानकारी दी है। उम्मीद है आपको हैलो हेल्थ की दी हुई जानकारियां पसंद आई होंगी। अगर आपको इस संबंध में अधिक जानकारी चाहिए, तो हमसे जरूर पूछें। हम आपके सवालों के जवाब मेडिकल एक्सर्ट्स द्वारा दिलाने की कोशिश करेंगे।

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सूत्र

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Nikhil Kumar द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 3 days ago को
डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड
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