backup og meta
खोज
स्वास्थ्य उपकरण
बचाना

बिना ‘ना’ कहे, इन तरीकों से बच्चे को समझाएं अपनी बात


Shayali Rekha द्वारा लिखित · अपडेटेड 30/09/2021

बिना ‘ना’ कहे, इन तरीकों से बच्चे को समझाएं अपनी बात

बच्चे नटखट होते हैं और उन्हें सही व गलत के बीच का अंतर नहीं पता होता है। एक साल के ऊपर के कुछ बच्चे जिद्दी स्वभाव (Stubborn child behaviour) के होते हैं। ऐसे में माता-पिता उन्हें डांट फटकार कर शांत कराने की कोशिश करते हैं। लेकिन, क्या आपने सोचा कि आपकी डांट से शांत हुए बच्चे के स्वभाव (Child behavior) में कोई अंतर आया है? शायद नहीं। इस बारे में लखनऊ के सेवेंथ डे पब्लिक स्कूल की टीचर निशा गोयल ने हैलो स्वास्थ्य को बताया कि” बच्चों को अधिक डांटने से उल्टा उन्हें इसकी आदत पड़ जाती है। बच्चे के मन में यह बात बैठ जाएगी कि अगर वे कोई शैतानी करेंगे तो बहुत ज्यादा हुआ तो मम्मी-पापा डांटेंगे ही ना! ऐसी परिस्थिति में मां-बाप (Parents) काफी परेशान हो जाते हैं। इसलिए बच्चे की परवरिश के दौरान कुछ खास बातों का ध्यान रखना आवश्यक है।

और पढ़ें : Hemophilia: जब बच्चे के शरीर से खून निकलना बंद नहीं होता

बच्चे के लिए घर में बनाएं नियम (House rules for children) 

बच्चे के से स्वभाव और उम्र के हिसाब से घर में नियम बनाएं। छोटे बच्चों की बदमाशियां बड़ें अक्सर हंस कर टाल देते हैं। ऐसे में बच्चे के स्वभाव (Child behavior) में नकारात्मक बदलाव आने लगता है। बच्चे को उसकी सीमाएं समझाएं। उदाहरण के तौर पर अगर बच्चा अपने से बड़ों पर हाथ उठाता है तो, उसे बताएं कि यह गलत है। उसे बताएं कि अगर वह ऐसा करता है, तो आप उसे क्या सजा दे सकते हैं। कोशिश करें कि अगर बच्चे को सजा देने की नौबत आए, तो वह हेल्दी (Healthy) हो ताकि, बच्चा उससे कुछ सीख (Learn) सके।

बच्चे के स्वभाव (Child behavior) को देख उसका ध्यान दूसरी तरफ लगा दें

जिद करना बच्चे के स्वभाव (Child behavior) का हिस्सा होता है और छोटे बच्चे किसी चीज या काम को लेकर जिद करते ही हैं। उनके मन मुताबिक चीजें न होने पर वह जल्दी चिढ़ जाते हैं। ऐसे में बच्चे के ध्यान को दूसरी तरफ लगा दें। उसे प्यार से दूसरी बातों और चीजों में उलझा दें ताकि उसका ध्यान पहली चीज से भटक जाए। जब बच्चा कोई दूसरा काम करने लगे, तो उसकी तारीफ करें, ताकि वह दूसरे काम में रुचि ले सके। ऐसा करने से आपको बच्चे के स्वभाव में फर्क (Different) नजर आएगा।

और पढ़ें : बच्चों में जिद्दीपन: क्या हैं इसके कारण और उन्हें सुधारने के टिप्स?

बच्चे को चेतावनी दें

छोटे बच्चे किसी बात को बहुत जल्दी भूल जाते हैं। अगर वह कोई गलती करते हैं, तो उस समय उसे चेतावनी दें। इसके बाद बच्चा फिर उसी गलती को दोहराए या गलत बर्ताव करे, तो उस चेतावनी को याद दिलाएं। इससे बच्चा समझ जाएगा कि दोबारा यह गलती करने पर उसे क्या सजा मिल सकती है और बच्चे के स्वभाव (Child behavior) में अंतर आएगा।

बच्चे को कम शब्दों में समझाएं

एक से पांच साल तक के बच्चे को शब्दों का अधिक ज्ञान नहीं होता है। ऐसे में आप अगर बच्चे के द्वारा की गई गलती पर ज्यादा समझाएंगे तो बच्चे को समझ में कुछ भी नहीं आएगा। इसलिए बच्चे से कम शब्दों में ज्यादा बात कहने की कोशिश करें, ताकि वे आपकी बात को समझे और उसे मानें।

और पढ़ें : नए पैरेंट्स की गलती नहीं होगी इन 5 टिप्स को आजमाकर

जबरदस्ती न करें

बच्चे के साथ अगर आप जबरदस्ती करेंगे तो वह विद्रोही स्वभाव का हो जाएगा। आपकी जबरदस्ती से बच्चा तुरंत तो शांत हो जाएगा लेकिन, बाद में उसका बर्ताव खतरनाक होता चला जाएगा। ऐसी परिस्थिति में बच्चे के साथ जबरदस्ती ना कर के उससे जुड़ने की कोशिश करें। उसकी बात को सुनें और उसे समझाएं।

कभी-कभी शांत भी रहें

बच्चा है गलती तो करता रहेगा। लेकिन, इसका यह मतलब नहीं है कि आप हर बार उस पर चिल्लाते रहें। आपके चिल्लाने से बच्चे का व्यवहार आक्रामक हो जाएगा और वह आपसे जुबान भी लड़ा सकता है। इसलिए चिल्लाने से अच्छा है कि आप उसकी गलती का विकल्प निकाल कर उसके सामने रखें। बच्चे के कामों में शामिल होना सीखें। जिससे आप उसे उसके दोस्त जैसे लगेंगे।

बच्चे का सम्मान करें

आप जो भी करते हैं, बच्चा वही सीखता है। अगर आप बच्चे का सम्मान करेंगे तो वह भी आपको सम्मान देगा। आप किसी भी काम को करने जा रहे हैं तो बच्चे का सहयोग मांगे। उससे पूछे कि अगर इस काम को ऐसे करें तो क्या होगा। इससे बच्चे के मन में आपके प्रति विश्वास पैदा होगा और बच्चे में आत्मविश्वास (Self confidence) बढ़ेगा।

और पढ़ें : World Autism awareness Day : आखिर ऑटिस्टिक बच्चा क्या चाहता है आपसे?

बच्चे की बात को ध्यान से सुनें और समझें

कई बार बच्चे को ऐसा लगता है कि उस पर आप ध्यान नहीं दे रहे हैं। ऐसे में आपका ध्यान आकर्षित (Attract) करने के लिए वह बदमाशी करने लगता है। उस वक्त बच्चे से बात करें और पूछे कि वह क्या करना चाहता है? उसकी बातों को ध्यान से सुनें और समझें। इससे बच्चे को सुरक्षित  महसूस होगा और बच्चे का स्वभाव भी शांत बनेगा वह आगे से बदमाशी नहीं करेगा।

हंसकर दें जवाब

जब भी आपका बच्चा गुस्सा (Anger) होता है तब वह आपसे यह अपेक्षा करता है कि आप उसकी इस हरकत पर गुस्सा या मायूस होंगे, जो आमतौर पर सभी पेरेंट्स (Parents) करते भी हैं। लेकिन, आप ऐसा कुछ न करें और माहौल को बदलने के लिये कुछ पल तक शांति बनाएं रखे और हंसे। आपके इस बर्ताव से बच्चे को भी हंसी आएगी और इस कारण बच्चे के स्वभाव (Child behavior) में गुस्से की जगह कम होगी।

बच्चे को सब्र रखना सीखाने के लिए पेरेंट्स को भी रखने पड़ेगा धैर्य

बच्चे के स्वभाव (Child behavior) में जिद करना होता है। उन्हें उनकी मनचाही चीज न मिलने पर ही वे जिद करते हैं। ऐसे में उनकी इस आदत को बदलने के लिये आप उन्हें सब्र करना सिखायें। बच्चों में धैर्य विकसित करने के लिये आप उनके साथ उनका पसंदीदा खेल (Game) खेलें। आप अपने बच्चे के साथ ऐसा खेल खेलें जिसमें आप बच्चे बने और वो माता या पिता। ऐसा करने से उसे आपका दृष्टिकोण समझने में मदद मिलेगी।

बच्चे से सदा पूछें उसकी राय

आप अपने बच्चे से अपनी परेशानियों के हल मांगे। जैसे कि आप अपने बच्चे से अपने ऑफिस (Office) की समस्याओं को सरल बनाकर बच्चे से उसकी राय मांगे। उससे अपनी रोजमर्रा की बातों को शेयर करें। इससे आपके बच्चे का आत्मविश्वास (Babies confidence) बढ़ेगा और वह आपके सामने और खुलकर बात करेंगे। बजाय यह बताने के, कि उसे क्या करना है, आप उससे पूछना शुरू करें कि आप कैसे कुछ नया और अलग कर सकते हैं? ऐसा करने से उसे अपनी अहमियत महसूस करने में मदद मिलेगी।

ये सभी  बातों को अमल में ला कर आप अपने बच्चे को जिद्दी होने से सकते हैं। कोशिश करें कि आप ज्यादा से ज्यादा समय बच्चे के साथ बिताएं। बच्चे को भरोसा दिलाएं कि आप हमेशा उसके साथ हैं और आप उसका बुरा नहीं चाहते हैं। बच्चा जब आप पर भरोसा करने लगेगा तब वे आपकी बात को अधिक समझेगा।

डिस्क्लेमर

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।


Shayali Rekha द्वारा लिखित · अपडेटेड 30/09/2021

ad iconadvertisement

Was this article helpful?

ad iconadvertisement
ad iconadvertisement