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पेरेंटिंग स्टाइल: क्या है आपके बच्चे के विकास में आपका योगदान?

पेरेंटिंग स्टाइल: क्या है आपके बच्चे के विकास में आपका योगदान?

पेरेंटिंग (Parenting), इसके बिना किसी भी बच्चे का विकास अधूरा होता है। पेरेंटिंग उस कला का नाम है, जिसमें आप बच्चे की सेहत से लेकर उसकी सुरक्षा का ध्यान रखते हैं। साथ ही आप उन्हें एक जिम्मेदार, कल्चर्ड और परिपक्व वयस्क बनाते हैं। बच्चे के इसी विकास के लिए आप जिस पेरेंटिंग का इस्तेमाल करते हैं, उसे पेरेंटिंग स्टाइल (Parenting Style) कहा जाता है।

आपकी पेरेंटिंग स्टाइल (Parenting Style) से यह तय होता है कि आपके बच्चे का विकास कैसे होगा। साथ ही आपकी पेरेंटिग स्टाइल पर ही निर्भर करता है कि आपका बच्चा अपने बारे में कैसा महसूस करता है। यह सुनिश्चित करना जरुरी है कि आपका पेरेंटिंग स्टाइल उसके विकास को सर्पोट करें। आप जिस तरह से अपने बच्चे के साथ बातचीत करते हैं, आप उसे कैसे अनुशासित करते हैं, यह उसके पूरे जीवन को प्रभावित करेगा। बच्चों के पहले टीचर उनके मां-बाप होते हैं इसलिए आपका पेरेंटिंग स्टाइल आपके बच्चे के बारे में बहुत कुछ बताता है। आइए जानते हैं अलग-अलग पेरेंटिंग स्टाइल के बारे में…

शोधकर्ता के अनुसार चार तरह के पेरेंटिंग स्टाइल (Parenting Style) होते हैंः

  1. ऑथोरिटेरियन पेरेंटिंग (Authoritarian Parenting)
  2. ऑथोरिटेटिव पेरेंटिंग (Authoritative Parenting)
  3. परमिसिव पेरेंटिंग (Permissive Parenting)
  4. अनइंन्वॉल्व पेरेंटिंग (Uninvolved Parenting)

हर पेरेंटिंग स्टाइल (Parenting Style) से बच्चों को पालने के लिए एक अलग दृष्टिकोण होता है और कई अलग-अलग विशेषताओं द्वारा पहचाना जा सकता है। पेरेंटिंग स्टाइल को बेहतर रूप से समझने के लिए आइए चलते हैं इसकी तह तक!

और पढ़ें: माता-पिता से बच्चे का ब्लड ग्रुप अलग क्यों होता है ?

ऑथोरिटेरियन पेरेंटिंग स्टाइल (Authoritarian Parenting)

पेरेंटिग स्टाइल

ऑथोरिटेरियन (Authoritarian) माता-पिता का मानना है कि बच्चों को बिना किसी अपवाद के नियमों का पालन करना चाहिए। ऑथोरिटेरियन माता-पिता यह कहने के लिए मशहूर हैं, “क्योंकि मैंने ऐसा कहा था इसलिए,”। जब एक बच्चा इन नियमों के बारे में सवाल उठाता है, तो उन्हें बातचीत करने में कोई दिलचस्पी नहीं होती और उनका ध्यान केवल बच्चों को आज्ञाकारी बनाने पर होता है। वे बच्चों को समस्या सुलझाने की चुनौतियों या बाधाओं में शामिल होने की परमिशन नहीं देते। इसके बजाय वे नियम बनाते हैं और एक बच्चे की राय जानें बिना परिणामों को घोषित कर देते हैं।

ऑथोरिटेरियन (Authoritarian Parents) माता-पिता अनुशासन के बजाय दंड का उपयोग कर सकते हैं। इसलिए किसी बच्चे को बेहतर विकल्प बनाने के तरीके सिखाने के बजाय, वे बच्चों को उनकी गलतियों के लिए गलत महसूस करवाते हैं। इन पेरेंट्स की अपने बच्चों से बहुत ज्यादा उम्मीदें रहती हैं जिस वजह से ये बच्चों के लिए सख्त नियम बनाकर रखते हैं।

ऑथोरिटेरियन (Authoritarian) माता-पिता अपने बच्चों को कोई ऑप्शन नहीं देते। उनका सिर्फ एक नियम होता है जो मैंने कह दिया, बस वहीं अंतिम निर्णय है। वो उस विषय बर ज्यादा बात नहीं करते। ये लोग शायद ही कभी अपने बच्चों को उनकी पसंद का कार्य करने की अनुमति देते हैं।

जो बच्चे सख्त ऑथोरिटेरियन माता-पिता के साथ बड़े होते हैं, वे ज्यादातर नियमों का पालन करते हैं। लेकिन, उनको आज्ञाकारी बनाने के लिए माता-पिता को काफी मेहनत करनी पड़ती है।

ऑथोरिटेटिव पेरेंटिंग स्टाइल (Authoritative Parenting)

ऑथोरिटेटिव (Authoritative Parenting) माता-पिता भी नियम के पक्के होते हैं और वे परिणाम का ध्यान भी रखते हैं। लेकिन ये पेरेंट अपने बच्चों की राय को भी ध्यान में रखते हैं। वे अपने बच्चों की भावनाओं को मानते हैं, साथ ही यह भी स्पष्ट करते हैं कि जो भी हो हर बात के इंचार्ज एडल्ट ही हैं।

ऑथोरिटेटिव माता-पिता (Authoritative Parents) बच्चों के समय और एनर्जी का इस्तेमाल कर उनकी व्यवहार समस्याओं पर लगाम लगाने की कोशिश करते हैं। वे पॉजिटिव डिसिप्लीन के लिए अलग-अलग पैंतरों का इस्तेमाल करते हैं। वे उनके अच्छे व्यवहार के लिए बच्चों की तारीफ के साथ-साथ उन्हें इनाम देकर उनका मनोबल बढ़ाते हैं।

ऑथोरिटेटिव पेरेंटिंग (Authoritative Parenting) से पाले गए बच्चे खुश और सफल होते हैं। वे निर्णय लेने और अपने दम पर खतरों काे सहने में भी बेहतर होते हैं।

और पढ़ें: इन 5 बातों को ध्यान में रखकर करें माता-पिता की देखभाल

परमिसिव पेरेंटिंग स्टाइल (Permissive Parenting)

परमिसिव (Permissive Parenting) माता-पिता उदार होते हैं। जब कोई गंभीर समस्या होती है तभी वह कोई कदम उठाते हैं। वे काफी क्षमाशील हैं और वे “बच्चे बच्चे ही रहेंगें” का रवैया अपनाते हैं। वे बहुत कम ही परिणाम की बात करते हैं। अगर कोई बच्चा उनसे विनती करें, तो वह बच्चे को माफ कर उन्हें दोबारा मौका दे सकते हैं।

परमिसिव माता-पिता (Permissive Parents)आमतौर पर एक माता-पिता की भूमिका से अधिक एक दोस्त की भूमिका निभाते हैं। वे अक्सर अपने बच्चों को उनके साथ अपनी समस्याओं के बारे में बात करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, लेकिन वे अपने बच्चों में आमतौर पर बुरे विकल्पों या बुरे व्यवहार को रोकने का ज्यादा प्रयास नहीं करते।

परमिसिव माता-पिता अपने बच्चों के व्यवहार को नियंत्रित या विनियमित नहीं करते, इसलिए उनके बच्चे स्वीकार्य व्यवहार के बारे में कम जानते हैं। इन बच्चों को गुस्से पर नियंत्रण नहीं होता और साथ ही इनमें व्यवहार संबंधी समस्याएं अधिक होती हैं। तनावपूर्ण परिस्थितियों में ये अत्यधिक गुस्सा हो जाते हैं।

जो बच्चे परमिसिव माता-पिता (Permissive Parenting) के साथ बड़े होते हैं, वे पढ़ाई-लिखाई में ज्यादा संघर्ष करते हैं। वे अधिक व्यवहार संबंधी समस्याओं का सामना करते हैं क्योंकि वे एडमिनिस्ट्रेशन और नियमों को ज्यादा महत्व नहीं देते। ऐसे बच्चों में ज्यादातर आत्म-सम्मान की कमी होती है और वे दुखी रहते हैं।

और पढ़ें: नए माता-पिता के अच्छे मानसिक स्वास्थ्य के लिए 5 टिप्स

अन-इंवॉल्वड पेरेंटिंग स्टाइल (Uninvolved Parenting)

अन-इंवॉल्वड माता-पिता (Uninvolved Parenting) बच्चों से खुद को बढ़ाने की उम्मीद करते हैं। वे बच्चों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में ज्यादा समय या ऊर्जा नहीं लगाते हैं। अन-इंवॉल्वड माता-पिता बेपरवाह हो सकते हैं, लेकिन वे ऐसा जानबूझकर नहीं करते हैं। मानसिक स्वास्थ्य या दूसरे कारणों की वजह से माता-पिता बच्चे की शारीरिक या भावनात्मक जरूरतों की देखभाल करने में सक्षम नहीं हो पाते।

किसी अन-इंवॉल्वड माता-पिता (Uninvolved Parenting) को बाल विकास के बारे में कम जानकारी होती है और कभी-कभी वे दूसरी समस्याओं से परेशान होते हैं, जैसे ऑफिस का काम, बिलों का भुगतान, घर का खर्चा चलाना, परिवार की टेंशन, किसी बीमारी को लेकर चिंता आदि।

अन-इंवॉल्वड माता-पिता (Uninvolved Parenting) के बच्चों में आत्म सम्मान की कमी होती है। वे स्कूल में खराब प्रदर्शन करते हैं। उन्हें अक्सर व्यवहार संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ये तो हुई पेरेंटिंग स्टाइल की बात, लेकिन अब हम बात करेंगे, कुछ ऐसी ग़लतियों की, जो पेरेंटिंग के दौरान आपको नहीं करनी चाहिए।

ना करें पेरेंटिंग स्टाइल (Parenting Style) से जुड़ी ये गलतियां

अक्सर पेरेंट्स अपने बच्चों से जुड़े हर काम के लिए खुद को ज़िम्मेदार मानते हैं, जो वैसे तो उनके लिए फायदेमंद साबित होता है, लेकिन कई बार ये बच्चों को न चाहते हुए भी हानि पहुंचा सकता है। इसलिए हर पेरेंट्स के लिए जरूरी है ये जानना कि उन्हें पेरेंटिंग से जुड़ी कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए और किन बातों का ख्याल रखना चाहिए।

बच्चे को ही सब कुछ मानना

अक्सर मां-बाप एक गलती करते हैं कि वे अपने बच्चे को अपना सब कुछ मान कर उसी पर सारा ध्यान लगाते हैं। इसकी वजह से होता यह है कि बच्चे इंडिपेंडेंट होने के बजाय हर एक छोटी बड़ी चीजों के लिएपेरेंट्स पर निर्भर बन जाते हैं। जो उनके विकास के रास्ते पर आड़े आ जाता है। इसीलिए अपने बच्चों को अपने काम खुद करने की आदत डालें। साथ ही फैसला लेने की कला भी उन्हें सिखाएं।

बच्चों के पॉजिटिव बिहेवियर (Positive Behavior) को नजरअंदाज करना

बच्चे कच्ची मिट्टी की तरह होते हैं, इसीलिए उन्हें सही और गलत में फर्क समझाना पेरेंट्स का काम है। यदि आप उनके अच्छे कामों के लिए उन्हें शाबाशी देते हैं, तो उन्हें अच्छे कामों की पहचान होती है। वहीं गलत कामों के प्रति उन्हें समझाने पर, वे कामों को परखना सीखते हैं।इसीलिए बच्चे को समय-समय पर उनके पॉजिटिव बिहेवियर के लिए एनकरेज करना जरूरी है।

बच्चों के का भावनात्मक विकास (Emotional Growth) रोकना

हर मां बाप चाहते हैं कि उनके बच्चे लाइफ को ज्यादा से ज्यादा जिएं, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि पेरेंट्स बच्चों को हर सिचुएशन के हिसाब से एक्ट करना ना सिखाएं। बच्चों को अपनी तरह से जीने की छूट होनी चाहिए, फिर चाहे बच्चे पुराने कपड़े पहनना चाहे या कीचड़ में खेलना चाहे। कभी-कभी उन्हें अपने मन के मुताबिक ऐसी चीजें करने देना, उनके विकास के लिए जरूरी माना जाता है। बच्चों को अनुशासन सिखाना जरूरी है, लेकिन इसके अलावा उन्हें अपने भावनात्मक पहलू को खोजने की छूट देनी भी उतनी ही जरूरी है।

बच्चों को जिम्मेदार न बनने देना

हर मां बाप अपने बच्चे को प्रोटेक्ट करना चाहते हैं, लेकिन यह भी जरूरी है कि उनके गलत कामों के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाए। इससे होगा यह कि वे उनके द्वारा किये गए गलत कामों पर सोच-विचार करेंगे और उसके हानि और लाभ समझ सकेंगे। अपने गलत कामों के परिणाम के बारे में वे समझेंगे और अगली बार वह गलती करने से पहले सोचेंगे। इसीलिए जरूरी है कि उनके कामों के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाए और सही फैसले लेने के लिए प्रेरित किया जाए।
कभी-कभी माता-पिता केवल एक श्रेणी में फिट नहीं होते हैं। ऐसे में आप कभी अधिक परमिसिव होते हैं और कभी-कभी आप अधिक ऑथोरिटेटिव होते हैं। अच्छे माता-पिता होने के लिए समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ, आप अपने बच्चे के साथ एक सकारात्मक संबंध बनाए रख सकते हैं। इसके साथ भी आप अपने बच्चे के साथ स्वस्थ तरीके से अपना अधिकार दिखा सकते हैं।

हम आशा करते हैं आपको हमारा यह लेख पसंद आया होगा। हैलो हेल्थ के इस आर्टिकल में पेरेंटिंग स्टाइल से जुड़ी हर जरूरी जानकारी देने की कोशिश की गई है। यदि आप इससे जुड़ी अन्य कोई जानकारी पाना चाहते हैं तो आप कमेंट सेक्शन में अपना सवाल पूछ सकते हैं। आपको हमारा यह लेख कैसा लगा यह भी आप हमें कमेंट कर बता सकते हैं।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

लेखक की तस्वीर
Dr Sharayu Maknikar के द्वारा मेडिकल समीक्षा
Lucky Singh द्वारा लिखित
अपडेटेड 12/11/2019
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