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जब बच्चे स्कूल नहीं जाते तो पैरेंट्स क्या करें

जब बच्चे स्कूल नहीं जाते तो पैरेंट्स क्या करें

क्या आपके भी बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं और उन्हें सुबह उठते ही पेट में दर्द की शिकायत रहती है? और स्कूल की छुट्टी कर लेने पर अगली सुबह तक सभी लक्षण गायब हो जाते हैं? इसके अलावा क्या आपके बच्चे स्कूल जाते समय गुस्सा दिखाते हैं और उधल-पुथल मचाने लगते हैं?

अगर इन सभी सवालों का जवाब हां है तो आपको बता दें कि यह किसी पेट दर्द के कारण नहीं बल्कि बच्चों के स्कूल न जाने के बहाने होते हैं। बच्चों के स्कूल न जाने के पीछे कई कारण हो सकते हैं जैसे कि एंग्जायटी या नए लोगों से मिलने की घबराहट। इस स्थिति में उनका स्कूल जाना व स्कूल में रुकना बेहद मुश्किल होता है।

बच्चों के स्कूल न जाने की इस स्थिति को आप कामचोरी से न जोड़ें क्योंकि इन दोनों में ही काफी अंतर होता है। जो बच्चे कामचोर होते हैं उनमें किसी भी काम को करने की रूचि नहीं होती है। इसके अलावा ऐसे बच्चे स्कूल न जाने के लिए बंक का इस्तेमाल करते हैं। उनके माता-पिता को इस बात की भनक भी नहीं होती है कि उनका बच्चा स्कूल में है या नहीं।

इसके विपरीत जो बच्चे स्कूल न जाने की जिद या बहाने बनाते हैं उनमें अपने पेरेंट्स की बात न मानने के कोई लक्षण नहीं दिखाई देते हैं। ऐसे बच्चे में स्कूल न जाने को छोड़कर हर काम को बखूबी करने की आदत होती है और अपने माता-पिता की बात भी मानते हैं। हालांकि, यह सभी मामलों में नहीं होता है। इसके साथ ही ऐसे बच्चों के पेरेंट्स को पता होता है कि उनका बच्चा स्कूल क्यों नहीं जा रहा है। इस स्थिति में माता-पिता बच्चे को स्कूल भेजने के लिए कई तरह के पैतरे अपनाते हैं जिनके बावजूद उन्हें केवल असफलता ही हासिल होती है।

बच्चे को कुछ दिनों तक जबरदस्ती या डांट कर स्कूल भेजा जा सकता है लेकिन बेहतर यही होता है कि आप बच्चे की समस्या और भावनाओं को समझने की कोशिश करें और उसके अनुसार समाधान निकालें। कई बार बच्चे स्कूल नहीं जाते क्योंकि इसके कई गंभीर कारण हो सकते हैं।

आज हम आपको इस आर्टिकल की मदद से बताएंगे कि जो बच्चे स्कूल नहीं जाते उन्हें बेहतर ढंग से कैसे समझें और कुछ ऐसी टिप्स भी देंगे जिनकी मदद से आप उन्हें सफलतापूर्वक स्कूल भेज सकें।

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बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं तो क्या करें

  • फिजिकल पेन या अन्य समस्याओं का पता लगाएं। अगर बच्चे स्कूल न जाने के लिए शारीरिक चोट या किसी अन्य स्थिति की शिकायत करते हैं, तो किसी फिजिशियन से उसका चेक-आप करवाएं। अधिकतर मामलों में बच्चे फिजिकल पेन का बहाने बना रहे होते हैं। लेकिन एक बार पूरी संतुष्टि के लिए उनका चेक-करवाना जरूरी है। क्योंकि हो सकता है कि बच्चे को सही में कोई शारीरिक पीड़ा हो।
  • अपने बच्चे से बात करें। अगर आपके बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं तो उनसे बात करने की कोशिश करें और पूछें कि क्या कोई चीज उन्हें परेशान कर रही है? इसके साथ ही उन्हें बताएं कि उनके स्कूल जाने के लिए एक अच्छा प्लान तैयार किया जाएगा। हालांकि, इस बात को ध्यान में रखें कि कुछ बच्चे यह शेयर नहीं कर पाते हैं कि उन्हें क्या चीज परेशान कर रही है। ऐसे में उन्हें बात करने के लिए फोर्स न करें। बस बच्चे को इस बात का मैसेज जरूर दें की वह इस समस्या से लड़ सकता है और आप पूरा समय उसके साथ हैं।
  • लेक्चर देने से कुछ नहीं होता है। बच्चे स्कूल नहीं जाते इसके लिए उन्हें लंबे-चौड़े लेक्चर देने या बहस करने से उन्हें स्कूल भेजने में कोई मदद नहीं मिलती है। लेक्चर स्थिति को और खराब बना सकते हैं। किसी भी प्रकार की नेगेटिव फीलिंग बच्चे की समस्या को सोल्व करने में मदद नहीं कर सकती है।

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  • बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं ऐसे में उनकी टीचर या काउंसलर के साथ मीटिंग करें। इससे स्कूल के पास एक स्ट्रांग मैसेज जाता है की आप अपने बच्चे की मुश्किल स्थिति में उसका साथ दे रहे हैं।
  • गलतफैमियां न पालें, बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं इसके पीछे जरूरी नहीं की उनकी टीचर या स्कूल का हाथ हो। इसके साथ ही अगर आप एक टीचर हैं और किसी अन्य स्टूडेंट के लिए इस आर्टिकल को पढ़ रही हैं तो ऐसा जरूरी नहीं है की बच्चे की इस स्थिति का कारण उनके पेरेंट्स हों। एक दूसरे पर उंगली उठाने से बेहतर है की साथ में पता लगाया जाए की कहीं बच्चे को कोई बुली या डराता और मारता तो नहीं है। प्रॉब्लम का पता चलते ही तुरंत एक्शन लें।
  • जो बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं उन्हें घर पर रहना अच्छा लगता है। यह माता-पिता की ड्यूटी होती है वह घर पर ऐसा माहौल बनाएं जिससे बच्चे का घर से ज्यादा स्कूल में रहने का मन करे। बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं तो उन्हें लगता है कि वह घर पर कुछ भी कर सकते हैं। लेकिन यह आपकी जिम्मेदारी है कि आप उन्हें बताएं कि अगर वह सचमुच बीमार हैं तो उन्हें डॉक्टर के पास जाना होगा, बिस्तर में आराम करना होगा और टीवी या अन्य गेम पूरी तरह से बंद रहेंगे। टीवी और वीडियो गेम को लेकर कड़े नियम बनाएं। अधिकतर बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं क्योंकि उन्हें घर पर हर तरह की फ्रीडम होती है। वह घर पर रह कर वह सब कुछ करते हैं जिनमें उन्हें मजा आता है और इसी कारण उनका स्कूल जाने का मन नहीं करता है। अगर आप अपने बच्चे के साथ घर पर रहते हैं तो उसे अधिक अटेंशन और सिम्पथी न दिखाएं। यह थोड़ा निर्दयी लग सकता है लेकिन याद रखें कि बच्चे को घर पर रहना मजेदार नहीं लगना चाहिए है।

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  • एक लर्निंग एनवायरनमेंट बनाएं। अगर आपका बच्चा स्कूल नहीं जाता है और बीमार नहीं है तो उसे घर पर ही पढ़ने के लिए कहें। इसके लिए आप रीडिंग, लर्निंग और टेस्ट भी ले सकते हैं। किशोरों के लिए भी आपको इसी प्रकार के रूल्स बनाने चाहिए। अगर आपका बच्चा टीनेज है और स्कूल की छुट्टी कर के सोता रहता है तो ऐसे में ठोस कदम उठाएं और सोने की एक तय सीमा बनाएं। इस ग्रुप के बच्चों को संभालना ज्यादा मुश्किल और जरूरी होता है। वर्किंग पेरेंट्स के लिए इस प्रकार के आईडिया फॉलो करने में थोड़े मुश्किल हो सकते हैं लेकिन आपसे जितना हो सकता है उतनी कोशिश जरूर करें। बेबीसीटिंग के लिए कुछ समय दोस्त, पड़ोसी या रिश्तेदार से मदद लें जो ऑफिस नहीं जाते हों।
  • घर में नियम बनाएं कि केवल बीमारी की स्थिति को छोड़कर बच्चे को हर हालत में स्कूल जरूर जाना होगा। अगर वह सच में बीमार हुआ तो स्कूल की नर्स उसका चेक-अप कर के उसे जरूरत पड़ने पर घर भेज देंगी। सुबह-सुबह पेरेंट्स और बच्चों का काम और स्कूल के लिए एक साथ तैयार होना एक अच्छी आदत होती है। इससे माता-पिता और बच्चों को एक दूसरे से एनर्जी मिलती है। कई बार बच्चे को अधिक अटेंशन देने से स्थिति मुश्किल हो सकती है। इसके अलावा अगर डॉक्टर की मेडिकल रिपोर्ट से यह साबित हो चुका है कि बच्चे में किसी भी बीमारी के लक्षण नहीं हैं तो उसके साथ घर पर ज्यादा समय न बिताएं।
  • अगर बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं और आप उन्हें फोर्स नहीं करना चाहते हैं। तो इस स्थिति में किसी दूसरे की मदद लें। कई बार पेरेंट्स को फीलिंग कमजोर बना देती हैं जिसके कारण वह अपने बच्चे को स्कूल भेजने के लिए फोर्स नहीं कर पाते हैं। अगर बच्चे को मां के बिछड़ने से एंग्जायटी होती है तो पिता को बच्चे को स्कूल ले जाना चाहिए। इसके अलावा आप चाहें तो बच्चे को आदत पड़ने तक कुछ समय के लिए किसी दोस्त या रिश्तेदार की मदद ले सकते हैं और खुद को इस जॉब से हटा सकते हैं।

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किसी भी माता-पिता के लिए बच्चे का न चाहते हुए भी स्कूल जाना उन्हें तकलीफ दे सकता है। लेकिन ऐसी स्थिति में खुद पर काबू, धैर्य बनाए रखें, सबसे जरूरी मजबूत बने रहें। इस बात को ध्यान में रखें कि अगर बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं तो इससे उन्हीं के भविष्य पर असर पड़ता है। बच्चे को धैर्य के साथ समझाएं कि स्कूल जाना क्यों जरूरी होता है और जीवन में उसकी क्या-क्या महत्वकांक्षा होती हैं। स्कूल में ही बच्चा बड़ा होना सीखता है और खुद को बाहरी दुनिया के लिए बौद्धिक व भावनात्मक रूप से तैयार कर पाता है।

ऊपर दिए गए टिप्स के साथ इस बात को जरूर ध्यान में रखें कि आपका बच्चा स्कूल एंग्जायटी से जल्द ही उबर जाएगा। इसके अलावा बच्चे का अपनी इस एंग्जायटी पर जीत हासिल करने पर उसकी प्रशंसा करें और उसे प्रेरित करें कि आगे चल कर वह हर कठिन परिस्थितियों का ऐसे ही सामने करे।

हैलो स्वास्थ्य किसी भी तरह की कोई भी मेडिकल सलाह नहीं दे रहा है। अगर इससे जुड़ा आपका कोई सवाल है, तो अधिक जानकारी के लिए आप अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं।

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सूत्र

When Your Child Doesn’t Want to Go to School/https://www.parents.com/kids/education/elementary-school/when-your-child-doesnt-want-to-go-to-school//accessed on 22/04/2020

School refusal: children 5-8 years/https://raisingchildren.net.au/school-age/school-learning/school-refusal/school-refusal/accessed on 22/04/2020

What to Do When Your Child Won’t Go to School/https://www.psychologytoday.com/us/blog/shyness-is-nice/201309/what-do-when-your-child-wont-go-school/accessed on 22/04/2020

What to do when your child doesn’t want to go to school/https://www.todaysparent.com/kids/school-age/doesnt-want-to-go-to-school//accessed on 22/04/2020

लेखक की तस्वीर
Dr. Pranali Patil के द्वारा मेडिकल समीक्षा
Shivam Rohatgi द्वारा लिखित
अपडेटेड 23/04/2020
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