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अजनबियों को देखकर डर जाता है बच्चा, तो अपनाएं ये उपाय

अजनबियों को देखकर डर जाता है बच्चा, तो अपनाएं ये उपाय

बच्चे नटखट ही अच्छे लगते हैं। बच्चों का अजनबियों से डरना आम बात है। यह बच्चे के बड़े होने का हिस्सा है। 18 महीने के होने के बाद अमूमन बच्चों में यह डर खत्म हो जाता है। हालांकि कई बच्चों में यह लंबे समय तक भी हो सकता है। 18 महीने का होने के बाद भी अगर बच्चा शर्मीला हो या अजनबियों से डरता (Fear from Strangers) हो तो आपका चिंतित होना लाजमी है। बच्चे की ऐसी हरकतें उसे भोंदू बना सकती है। बड़े होने पर उसके अंदर आत्मविश्वास की कमी भी हो सकती है। इस संबंध में चिल्ड्रेन फर्स्ट की हेड और मनोवैज्ञानिक अंकिता खन्ना ने हैलो स्वास्थ्य को बताया कि “आपका बच्चा अगर शर्मीला है तो ये उसकी प्रवृत्ति है। लेकिन, आप इसे बदल सकते हैं। इसके लिए आपको बच्चे की स्पेशल केयर करने की जरूरत है। इसके अलावा बच्चे के अंदर से डर निकालने के लिए आप खुद बच्चे को बेझिझक बोलने का मौका दें।” आप कुछ आसान तरीकों से अपने बच्चे के अंदर से शर्मीलापन और डर को बाहर निकाल सकते हैं।

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यदि दो साल से बड़ा बच्चा अजनबियों से डरता है

ज्यादातर बच्चों में दो साल के हो जाने के बाद अजनबियों के प्रति डर खत्म हो जाता है। यदि आपका बच्चा अभी भी अजनबियों से डरता है तो बच्चे को थोड़ी आजादी देकर देखें। आपका बच्चा जितना आजाद महसूस करेगा उतना ही अजनबियों के साथ सहज महसूस करेगा।

बच्चे को आजादी देने के लिए इन टिप्स को करें फॉलो

  • अपने बच्चे को कुछ काम खुद करने दें। जैसे वह खुद से खाना खाएं। खुद चीजों को एक्सप्लोर करें। नए नए खेलों को खेले।
  • अपने बच्चे को कई ऐसे मौके दें जिसमें वह कई नए चेहरों को देखें और उनसे मिलें।
  • अगर बच्चे को कोई परेशानी है तो जल्दी से उसे सुलझाने न पहुंचें। उसे खुद से परेशानी को दूर करने का प्रयास करने दें।
    बच्चे को अकेले सोना सिखाएं।

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घर से करें शुरुआत

बच्चों के अंदर आत्मविश्वास बचपन से ही भरना जरूरी है। आपका बच्चा डरे या शर्माए नहीं इसके लिए आपको शुरू से ही बच्चे के साथ समय बिताना चाहिए। साथ ही उन्हें पारिवारिक कामों में भी शामिल करना चाहिए। इसके अलावा बच्चे को स्कूल और पार्क में उसके हमउम्र बच्चों से मिलवाएं। ऐसा करने से बच्चे के मन से अजनबियों से मिलने वाला डर निकल जाएगा।

बच्चे को करें मानसिक रूप से तैयार

अगर घर पर कोई मेहमान आने वाला है तो बच्चे मानसिक रूप से तैयार करें। किसी भी अजनबी व्यक्ति से बच्चे को अचानक न मिलाएं। बच्चे को समझाएं कि “घर आने वाले मेहमान आपसे दोस्ती करना चाहते हैं। इसलिए आप उनसे मिलें और बात करें।“ इसके अलावा घर आ रहे मेहमान से भी बात कर लें कि आपके बच्चे का स्वभाव कैसा है। बच्चे को देखते ही तुरंत उसे गोद में न उठाएं और धीरे-धीरे बात करें।

बच्चे को ग्रुप गैदरिंग पर ले जाएं

बच्चे को अपने साथ ग्रुप गैदरिंग पर ले जाएं। इससे आपका बच्चा बार-बार एक ही व्यक्ति से मिलेगा तो उसका शर्मीलापन दूर होगा। साथ ही अजनबियों से मिलने पर होने वाला डर भी दूर होगा। जितना बच्चा नए लोगों से मिलेगा उतना ही वो सुरक्षित और आरामदायक महसूस करेगा। यदि आपका बच्चा नए लोगों से मिलने में परेशान होता है तो उसे थोड़ा समय दें। उसे अलग तरह से चीजों को समझाएं। जैसे उसे पार्टी में दूसरे बच्चों के साथ खेलने के लिए कहें। उसे समझाएं कि वो वहां मौजूद बच्चों के साथ अपना पसंदीदा खेल खेले। कभी भी बच्चे के अजनबियों से मिलने के डर को अनदेखा न करें। समय के साथ यह बदतर हो सकता है।

खेल-खेल में सिखाएं बच्चे को अजनबियों से मिलना

बच्चा शर्मीला है या अजनबियों से डरता है तो उसके डर को दूर करने के लिए खेल खेलें। आप एक अजनबी बन जाएं और बच्चे को दोस्ती करने की एक्टिंग करने को कहें। इससे बच्चे को समझ में आएगा कि आत्मविश्वास के साथ दूसरे लोगों से कैसे मिलते है।

धैर्य रखें

थोड़ा धैर्य रखें। जब तक बच्चा नए लोगों से मिलने के लिए तैयार नहीं होता तब तक उसके साथ जोर जबरदस्ती न करें। सबसे पहले अपने बच्चे को नए लोगों के पास जाने के लिए प्रेरित करें। फैमिली गैट टुगेदर में बच्चे को लेकर जाएं। बच्चे को आरामदायक महसूस करने दें। जब बच्चे को अजनबी लोगों से परिचित कराएं तो उनके आस पास रहें। यह उसे आश्वस्त करने में मदद करेगा कि वह सुरक्षित है।

सबके सामने न कहें कि ‘बच्चा शर्मीला है’

अक्सर पैरेंट्स दूसरे लोगों के सामने कहते हैं कि “हमारा बच्चा बहुत शर्मीला है।” पेरेंट्स को भले लगता हो कि वे अपने बच्चे का बखान कर रहे हो, लेकिन इसका बाल मन पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। बच्चे को लगने लगता है कि वह अजनबियों से बात नहीं कर सकता है। इसके अलावा बच्चा खुद को शर्मीला मानते हुए हमेशा दबने की कोशिश करेगा।

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बच्चों का डर दूर करने के लिए बाहर लेकर जाएं

घर में मेहमान के आने पर बच्चे को उनसे मिलने के लिए जबरदस्ती न करें। इसकी बजाय बच्चे का हाथ पकड़ें। उसे इमोशनल स्पोर्ट करें। बच्चे पर किसी तरह का दबाव बनाए बिना उन्हें नए-नए लोगों से मिलने के लिए तैयार करें। इसके लिए उन्हें पार्क, म्यूजियम, सोशल पार्टी, रेस्टोरेंट आदि जगह पर लेकर जाएं।

आखिरी विकल्प है मनोचिकित्सक

बच्चों में शर्मिलापन या अजनबियों के प्रति डर आगे चलकर सोशल एंग्जायटी का कारण बन सकता है। कुछ बच्चे सोशल फोबिया या सोशल एंग्जायटी से पीड़ित हो सकते हैं। ऐसे बच्चे आपके कोशिशों के बावजूद भी सामान्य रूप से लोगों से घुल मिल नहीं पाते हैं। ऐसे मामलों में किसी मनोचिकित्सक की सलाह जरूर लें। साइकेट्रिस्ट बिहेवरियल थेरेपी की मदद से बच्चे का इलाज करता है। जिससे बच्चे के अंदर से सोशल फोबिया दूर हो जाता है।

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इन उपायों से आप अपने बच्चे को न सिर्फ आत्मविश्वास दे सकते हैं, बल्कि समाज में एक निडर होकर जिंदगी जीने की कला सीखा सकते हैं। इसलिए बच्चों में डर और शर्मीलेपन को लाइटली न लें। बच्चे के हरकतों को समझें और तुरंत उसका उपाय करें। यदि आप इस लेख से जुड़ी अन्य कोई जानकारी पाना चाहते हैं तो बेहतर होगा आप किसी विशेषज्ञ से कंसल्ट करें।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

लेखक की तस्वीर
Shayali Rekha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 11/08/2020 को
Dr. Shruthi Shridhar के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड
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