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छोटी उम्र से ही बताएं बच्चों को मनी मैनेजमेंट

छोटी उम्र से ही बताएं बच्चों को मनी मैनेजमेंट

बच्चों को जीवन के हर पहलू के बारे में बचपन से ही उनमें समझ पैदा करनी चाहिए। इनमें से एक है मनी मैनेजमेंट। पैसे से जुड़ी लेन-देन पर बच्चों को जिम्मेदारी देने से बच्चे पैसे को सही ढंग से खर्च और बचत का तरीका सीखते हैं। माता-पिता अपने बच्चों को मनी मैनेजमेंट बारे में समझदारी सिखाने के लिए घबराते हैं। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि वित्त (Finance) में कोई डिग्री या विशेष ज्ञान की आवश्यकता नहीं होती है। बचपन से ही बच्चों से घर के छोटे-छोटे कामों के लिए आस-पास के दुकानों और शॉपिंग सेंटर भेजने से भी उनमें पैसों को लेकर समझदारी आ सकती है।

बच्चों को मनी मैनेजमेंट सिखाने के बारे में सेंटर फॉर वीमेन एंड वेल्थ के कार्यकारी निदेशक एड्रिएन पेंटा कहते हैं,” इसके लिए एक बातचीत अधिक नहीं है। कई बातचीत के दौर इसमें आ सकते हैं। हम बच्चों के 18 साल की उम्र तक इंतजार नहीं करना चाहते हैं,जब तक कि वे कॉलेज जाने के लिए तैयार नहीं हो जाते हैं।”

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बच्चों को मनी मैनेजमेंट सिखाने के टिप्स

बच्चों पर माता पिता का पड़ता है असर

बच्चों को मनी मैनेजमेंट सिखाने से पहले आपको अपनी आदतों को देखना होगा। माता पिता की आदतों का बच्चों पर प्रभाव सबसे ज्यादा पड़ता है। अगर आप खर्चों को समझदारी के साथ करेंगे। साथ ही बचत को लेकर प्लानिंग करेंगे तो आपके बच्चे में भी यह आदत बनेगी। सबसे पहले आपको खुद में ये चीजें लानी होंगी, जिससे आप अपने बच्चों के आदर्श बन पाएंगे।

बच्चों को कराएं जिम्मेदारी का एहसास

जब बच्चा बढ़ने लगता है तो उसे समझाएं कि वह अब बड़ा हो रहा है। बड़े होने पर चीजें बचपन जैसी नहीं रहती हैं। उन्हें उनके खर्चों पर प्रबंधन करना होता है। इसके लिए आपको बच्चों को सही उम्र से उन्हें यह सिखाना होगा। आप चाहे तो बच्चे को यह सिखाने के लिए उनकी वीकली पॉकेट मनी उन्हें दे सकती हैं। इससे बच्चे यह सिखते हैं कि उन्हें पूरे हफ्ते अपनी जरूरतों को किस हिसाब से पूरा करना है। धीरे धीरे आपका बच्चा एक्सपर्ट हो जाएगा। आपका बच्चे में सीमित पैसों में खर्चा चलाने की समझ बढ़ेगी। अगर बच्चा आपके द्वारा दिए गए इस टास्क को बखूबी से निभाता है तो आप उसे कभी कभी घुमाने ले जा सकती हैं। बच्चों को मनी मैनेजमेंट सिखने में आपका यह कदम काफी मदद करेगा।

जब भी आप खरीदारी के लिए जाएं तो उन्हें साथ लेकर जाएं

जब भी आप कभी बाजार खरीदारी के लिए जाएं तो बच्चे को साथ लेकर जाएं। इससे बच्चा समझेगा कि कैसे आप सीमित पैसों में जरूरी सामानों की खरीदारी कर रही हैं। इससे उन्हें भी खरीदारी को लेकर समझ बनेगी। बच्चों को समझदारी से खर्चा करना सिखाएं। बच्चों के सामने बैठकर पारिवारिक बजट बनाएं। इस बजट में उनकी पॉकेट मनी को भी शामिल करें।

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इच्छा और जरूरत के बीच का अंतर बढ़ाएगा बच्चों में फाइनेंशियल लिटरेसी

बच्चों को पैसों के लेन-देन आदि को समझने के लिए सबसे पहले आपको उन्हें अपनी जरूरत और इच्छा या चाहत के बीच अंतर समझ पाने में सक्षम करना होगा। प्री-स्कूल जाने वाले बच्चे या उनसे थोड़े व्यस्क इन विषयों को नहीं समझते हैं। लेकिन वे जरूरतों और इच्छाओं को समझ सकते हैं” एड्रिएन पेंटा कहते हैं। परिवार अपना पैसा पहले भोजन, आश्रय और चिकित्सा जैसी जरूरतों पर खर्च करते हैं। इस बीच, खिलौने और छुट्टियों के रूप में अच्छी खरीदारी के लिए सभी जरूरतें पूरी होने के बाद ही खरीदारी की जानी चाहिए।

उदाहरण के लिए, सभी को कपड़ों की जरूरत ‘जरूरत’ है, लेकिन किसी खास डिजाइनर का जींस चाहना ‘इच्छा’ की श्रेणी में आता है। इसी तरह, परिवार के लिए एक घर ‘आवश्यकता’ है, लेकिन सभी रूम में एक निजी बाथरूम भी हो, इच्छा है। घर का मुखिया हमेशा परिवार की सोचता है। बच्चों को भी इस उदाहरणों की मदद से पैसों की लेन-देन और उसके महत्व को समझने में मदद कर सकते हैं।

बच्चों में फाइनेंशियल लिटरेसी के लिए हर खरीद पर लागत समझाएं

पैसा जीवन के लिए प्राथमिक जरूरतों में से एक है। बच्चों को मनी मैनेजमेंट के बारे में समझाने के साथ यह भी समझाएंं कि सामान खरीदने के लिए इस्तेमाल किया गया पैसा, अन्य वस्तुओं को खरीदने के लिए आपके पास वापस उपलब्ध नहीं होगा। रोड आइलैंड के स्मिथफील्ड में स्थित ब्रायंट यूनिवर्सिटी में वित्त विभाग के प्रोफेसर और अध्यक्ष पीटर निगारो कहते हैं, “बच्चों को जितनी जल्दी हो सके उन्हें व्यापार और पैसों की लेन-देन के बारे में अवगत कराएं।”

यह समझाने का एक आसान तरीका बच्चों को रोजमर्रा की पसंद बनाने में शामिल करना है। बच्चों में फाइनेंशियल लिटरेसी के लिए किराने की दुकान इस सीख के लिए एक प्रमुख स्थान है। जहां, बच्चों को दो सामानों के बीच किसी एक को लेने का निर्णय लेने के लिए कहा जा सकता है, इस स्पष्टीकरण के साथ कि दोनों के लिए पैसा बजट में नहीं है। इससे बच्चे जरूरत की चीजों पर ट्रांजेक्शन करना सीख लेते हैं।

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मनी मैनेजमेंट टिप्स- पैसों के मामले में होने वाली गलियों से रूबरू करें

एक फाइनेंसियल इंस्टिट्यूशन में प्रबंधक अभिनव झा कहते हैं कि, मेरे भतीजे ने एक सप्ताह के भीतर जन्मदिन के उपहार के पैसे खर्च कर लिए। हालांकि, आवेग की खरीद पर रोक लगाने के बजाए, अपने आप यह एक सबक सीखा गया जब उनके भतीजे ने बाद में एक मेले के लिए मिले पैसों का बेहतर प्रबंधन करने के बारे में सलाह मांगी।

इसी तरह अन्य पेरेंट्स को भी खड़े रहने के लिए तैयार होना चाहिए। जबकि एक बच्चा अपने पैसे के मामले में खराब निर्णय लेता है। तब उन्हें उनकी गलत फैसले को बताना उनमें फाइनेंशियल लिट्रेसी लाने में बहुत सहायक होता है। बच्चे को यह भी सीखाना चाहिए कि पैसे चलंत संपति है, इसलिए उसे हमेशा से परिवर्तनशील रखें या जरूरत पर खर्च करें, वरना उनकी मोल खो जाती है।

कैसे काम करता है क्रेडिट के कांसेप्ट से बच्चों में फाइनेंशियल लिटरेसी

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अधिकांश बच्चों को वित्तीय रूप से साक्षर बनने के लिए सीखने की जरूरत है कि वे मूल्यों और व्यवहार से संबंधित हैं, न कि पैसा कैसे काम करता है के तकनीकी पहलुओं से। एक अपवाद क्रेडिट (उधार) है। पेंटा कहते हैं, “यह आपकी स्थायी प्रतिलिपि है।”

इन मनी मैनेजमेंट टिप्स को कर सकते हैं फॉलो

बच्चों को मनी मैनेजमेंट के गुर सिखाने के लिए आप चाहें तो कुछ उपाय आजमाकर उन्हें बेहतर सीख दे सकते हैं, जैसे

  • आप खुद पैसों की अच्छे से बचत कर दें सीख: बता दें कि आपका बच्चा आपसे काफी कुछ सीखता है। पैसों की कैसे बचत करनी चाहिए, यह सीख भी आप उसे सीखा सकते हैं। आप पैसों को कैसे सुरक्षित रखते हैं, इन आदतों के बारे में बच्चों को सीखाएं।
  • बच्चों को खर्च करने की अनुमति दें : जैसे ही आपका बच्चा यह जान जाए कि कोई भी चीज को खरीदने के लिए कीमत चुकानी पड़ती है, तो उसे भी पैसे खर्च करने के लिए आप पैसे दें। सप्ताह भर के अंतराल पर आप उसे पैसे दें। ताकि आपका बच्चा अपनी जरूरत के सामान की खरीदारी कर सके। आप उसे प्रोत्साहित करें कि किसी भी वस्तु को खरीदने से पहले उसकी प्लानिंग करें। पैसों की बचत कर उस वस्तु को खरीदें।
  • बच्चों को परिवार के अन्य सदस्यों की मदद करना सीखाएं : बच्चों को कम उम्र में ही परिवार के अन्य सदस्यों की मदद करना सीखाएं। वहीं, यदि वह छोटी-छोटी गलतियां करते हैं, तो करने दें और उसे सही व गलत का अंतर समझाएं। ऐसा करने से वो आगे चलकर बड़ी गलतियों को अंजाम नहीं देगा।
  • बच्चे को पैसे की बचत करने की आदत डलवाएं: जिम्मेदार पैरेंट्स का यह कर्तव्य है कि वो बच्चों को पैसों की बचत करने की सीख डलवाएं। इसके लिए आप उसे गुल्लक आदि भेंट कर सकते हैं ताकि वो पैसों की बचत कर सके। पैरेंट्स इस बात का विशेष ध्यान रखें कि कहीं उन पैसों को गुल्लक में न रख कुछ और तो नहीं कर रहा।
  • पैसों से दूसरों की मदद की सीख विकसित करें: जो मजा मिल-बांट कर खाने में आता है और दूसरों की मदद करने में जो सुकून मिलता है, वो कहीं और नहीं मिलता। इसलिए जरूरी है कि जिम्मेदार पेरेंट्स बच्चों को दूसरों की मदद करने की सीख विकसित करें। खासतौर पर जरूरतमंद की मदद करना सीखाएं।
  • बच्चों को एक अच्छा ग्राहक बनाने की ट्रेनिंग दें: एक अच्छा ग्राहक वही होता है, जो चीजों को खरीदने के पूर्व उससे जुड़ी अन्य वस्तुओं की कीमत, क्वालिटी सहित अन्य बिंदुओं पर ध्यान देता है। ऐसे में पेरेंट्स की जिम्मेदारी है कि वो बच्चों को एक अच्छा ग्राहक बनने की ट्रेनिंग दें। इसके लिए आप बच्चों को सिखा सकते हैं कि किसी भी वस्तु को खरीदने के पूर्व उसके समान अन्य वस्तु की तुलना में कौन-सा बेहतर है, बजट के हिसाब से कौन-सी वस्तु अच्छी है आदि मापदंडों पर प्रोडक्ट का सेलेक्शन करना सीखाएं।
  • उधार के प्रति सीखाएं ईमानदारी: जब आपका बच्चा इतना बड़ा हो जाए कि वो उधारी को समझने लगे, तो ऐसे में किसी बड़ी वस्तु को खरीदने के पहले आप उसे कुछ पैसे उधार दें। ताकि वो बाद में अपनी पॉकेट मनी से उसे धीरे-धीरे लौटा सके। इससे आपके बच्चे में उधार के प्रति ईमानदारी विकसित होगी। आगे चलकर यदि वो किसी से पैसे उधार में मांगता है, तो इमानदारी पूर्वक उसे वापिस लौटाएगा।
  • बच्चों की सीखाएं इनवेस्टमेंट: कम उम्र में ही बच्चों को इनवेस्टमेंट की सीख देना जरूरी होता है ताकि जब वो बड़ा हो तो बचत कर सके। वहीं इनवेस्टमेंट कर पूंजी बचा सके।
  • बच्चों को फैमिली की फाइनेंशियल प्लानिंग में करें शामिल: आपके बच्चों को पता होना चाहिए कि आप महीने का बजट कैसे तैयार करते हैं। बिल का पेमेंट, शॉपिंग और छुट्टियों के खर्च की प्लानिंग आप कैसे करते हैं। आप उन्हें बताएं कि तय बजट में आप कैसे सुख-सुविधाओं का भोग करते हैं। बच्चों को परिवार के इस फाइनेंशियल निर्णय में भागीदार बनाना चाहिए। ताकि वो भी अपनी राय दे सकें और आगे चलकर परिवार के फाइनेंशियल प्लानिंग से जुड़े निर्णय ले सकें।

चाहें तो ले सकते हैं एक्सपर्ट की सलाह

वैसे पैरेंट्स बच्चों के पहले गुरु होते हैं। लेकिन बच्चों को मनी मैनेजमेंट से जुड़े अन्य टिप्स देने के लिए आप चाहें तो एक्सपर्ट की मदद ले सकते हैं। इसके लिए आप टीचर्स या फिर काउंसलर्स की मदद ले सकते हैं। वो आपको सही व गलत के अंतर को बताने के साथ बच्चों को कैसे अच्छी सीख दें उसके बारे में भी बता सकते हैं।

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

5 Tips For Teaching Money Management To Children/https://www.lifehack.org/537979/5-tips-for-teaching-money-management-children/Accessed on 12/12/2019

Budgeting with Kids/https://www.nomoredebts.org/budgeting/budgeting-tips/smart-money-management-ideas-for-kids /Accessed on 9 sept 2020

Teaching Children About Money: Prospective Parenting
Ideas From Undergraduate Students – https://files.eric.ed.gov/fulltext/EJ1199117.pdf

Teaching kids about money – https://moneysmart.gov.au/teaching-kids-about-money

लेखक की तस्वीर
Dr. Abhishek Kanade के द्वारा मेडिकल समीक्षा
Nikhil Kumar द्वारा लिखित
अपडेटेड 12/09/2019
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