कहते हैं शरीर की आधी से भी अधिक बीमारियां हमारे पेट के स्वास्थ्य पर निर्भर करती हैं। यानी अगर हमारा खान-पान बेहतर होगा, तो पेट का स्वास्थ्य भी अच्छा होगा और हम पेट से संबंधित छोटी-मोटी बीमारियों से लेकर बड़ी व गंभीर बीमारियों से भी सुरक्षित बने रह सकते हैं। पर क्या आपको अपने पेट का आकार (Stomach size) या वह कितना स्वस्थ है, इसके बारे में पता है? जाहिर है अगर किसी की देखभाल करनी है, तो हमें उससे जुड़ी हर बात की जानकारी होनी चाहिए।
यही खास वजह है कि हम अपने इस लेख में आपको न सिर्फ पेट का आकार (Stomach size) बता रहे हैं, बल्कि पेट के स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जरूरी बातों की भी जानकारी दे रहे हैं।
हमारे शरीर में पेट एक मजूबत मांसपेशियों से बना ऑर्गेन है, जो भोजन पचाने का कार्य करता है। यह मुख्य रूप से जठरांत्र पथ यानी गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट (Gastrointestinal Tract) का हिस्सा होता है। जब भी पेट तक कोई भी तरल या ठोस भोजन पहुंचता है, तो पेट सिकुड़ता है और एसिड और एंजाइम का उत्पादन करता है, जो भोजन को गलाने व उसे पचाने में मदद करते हैं। इसके बाद भोजन पेट से होते हुए छोटी आंत में पहुंच जाता है।
पेट व पाचन तंत्र के हिस्से (Stomach and Organ of Digestive system)
पेट का आकार कितना होता है, यह बताने से पहले हम यह स्पष्ट कर दें कि पेट के भोजन पचाने के कार्य में शरीर के कई अन्य अंगों की भी अहम भूमिका होती है, जिसके बारे में नीचे बताया गया है।
भोजन नली (ग्रासनली) – मुंह से निगलने हुए भोजन को पेट तक पहुंचाने वाली नली पित्ताशय।
बड़ी आंत – पचा हुए भोजन से पोषक तत्वों को अवशोषित करता है।
छोटी आंत – पेट भोजन पचाने की प्रक्रिया में एसिड उत्पादन के बाद भोजन को पूरी तरह से पचाने के लिए छोटी आंत में भेज देता है। यह भी बड़ी आंत की तरह पचे हुए भोजन से पोषक तत्वों को अवशोषित करती है।
पेट – निगले हुए भोजन को इक्ट्ठा करके उन्हें पचाता है।
अग्न्याशय – यह एक लंबा अंग होता है जो पेट के ठीक नीचे होता है। इसका मुख्य कार्य पचाए गए भोजन को ऊर्जा के रूप में बदलना होता है।
रेक्टम – पचे हुए भोजन के अवशेषों को शरीर से बाहर निकालने वाली नली
गुदा – पचे हुए भोजन के अवशेषों को शरीर से बाहर निकालने वाला क्षेत्र व अंग
लिवर – यह शरीर में भोजन पचाने व पित्त बनाने का काम करता है। साथ ही शरीर से विषैले पदार्थो को बाहर निकालने, कार्बोहाइड्रेट को स्टोर करने और प्रोटीन के निर्माण में भी मदद करता है।
अपेंडिक्स – यह बड़ी और छोटी आंत के दाई ओर निचले हिस्से में होता है, जो शहतूत के आकार का होता है। वैसे तो भोजन पचाने में इसका कोई योगदान नहीं होता है, लेकिन यह पाचन क्रिया को सुचारू बनाए रखने के लिए अच्छे बैक्टीरिया को स्टोर कर सकता है।
हर व्यक्ति के पेट का आकार अलग-अलग हो सकता है। यह शरीर की स्थिति और पेट के अंदर मौजूद भोजन की मात्रा के आधार पर परिवर्तित हो सकता है। वहीं, अगर एक खाली पेट का आकार बताए, तो यह लगभग 12 इंच तक लंबा और लगभग 6 इंच तक चौड़ा हो सकता है। दिखने में यह लंबी व नाशपाती के आकार की एक थैली जैसी होती है।
पेट का आकार (Stomach size) कितना भोजन संग्रहित कर सकता है?
औसतन, किसी वयस्क व्यक्ति का खाली व स्वस्थ्य पेट लगभग 2.5 औंस की मात्रा तक भोजन को स्टोर कर सकता है, जिनमें से यह लगभग स्टोर किए हुए भोजन का 1 चौथाई हिस्सा लंबे समय तक अपनी थैली में स्टोर करके भी रख सकता है। नीचे हम एक बच्चे के पेट का आकार (Stomach size) बता रहे हैं कि वह कितना खाना स्टोर करके रख सकता है।
एक बात का ध्यान रखें कि शिशु जन्म के बाद से विकसित होता रहता है। वह मानसिक व शारीरिक रूप से गतिशील रहता है, इसलिए शारीरिक विकास के साथ ही बच्चे के पेट का आकार (Stomach size) खाना स्टोर करने की क्षमता भी समय-समय पर बढ़ाता रहता है।
24 घंटे के शिशु : लगभग 1 बड़ा चम्मच
72 घंटे के शिशु : 0.5 से 1 औंस
8 से 10 दिन के शिशु : 1.5 से 2 औंस
1 सप्ताह से 1 महीने के शिशु : 2 से 4 औंस
1 से 3 महीने के शिशु : 4 से 6 औंस
3 से 6 महीने के शिशु : 6 से 7 औंस
6 से 9 महीने शिशु : 7 से 8 औंस
9 से 12 महीने शिशु : 7 से 8 औंस
क्या मेरे पेट का आकार (Stomach size) बड़ा या छोटा हो सकता है?
हां बिल्कुल, न सिर्फ विकसित होती उम्र के साथ, बल्कि हमारे द्वारा खाए गए भोजन व उसकी मात्रा के आधार पर भी हमारे पेट का आकार बड़ा व छोटा हो सकता है। आसान शब्दों में बताए, तो जब हम भोजन करना शुरू करते हैं, तो हमारे पेट का आकार अपने आप ही भोजन की मात्रा के अनुसार बढ़ने लग जाता है, ताकि पेट में भोजन स्टोर हो सके। इसके बाद जब हम खाना बंद करते हैं, तो कुछ समय बाद पेट खाना पचाने वाले एंजाइम व एडिस का उत्पादन करना शुरू देता है।
इस दौरान पेट धीरे-धीरे सिकुड़ने लगता है और भोजन पचने के बाद वापस से सिकुड़कर अपनी सामान्य अवस्था में आ जाता है।
कई बार इसका अनुभव भी किया जा सकता है कि अधिक खाने के बाद हमें असुविधा होने लगती है। यह पेट के बढ़े हुए आकार की वजह से हो सकता है। क्योंकि अधिक भोजन करने पर पेट का सामान्य से अधिक मात्रा में फैल सकता है, जिससे हमें असुविधा हो सकती है।
हालांकि, अगर पेट स्वस्थ है, तो वह कुछ ही समय में भोजन को पचा सकता है और वापस से अपने सामान्य आकार में आ सकता है। वहीं, अगर पेट से जुड़ी कोई समस्या है, तो भोजन पचाने में देरी भी हो सकती है और पेट का आकार सामान्य होने में भी अधिक समय लग सकता है।
बच्चों के साथ ही बड़े लोगों के साथ ही इसकी समस्या देखी जा सकती है कि उन्हें अपने भरे हुए पेट का अनुभव नहीं हो पाता है। इस वजह से अक्सर वे अपने पेट के आकार की क्षमता से अधिक भोजन खा लेते हैं और पेट फूलने, एसिडिटी (Acidity) व भारी पन महसूस करने लगते हैं।
बता दें कि जब भी भोजन करते हुए हमारा पेट पूरी तरह से भर जाता है, तो वह नसों के जरिए मस्तिष्क को इसका संकेत भेजती हैं और भोजन पचाने के कार्य को शुरू करती है। इससे मन में खाना खाने की इच्छा बंद हो सकती है और हमें पेट भर जाने का अनुभव हो सकता है। कुछ मामलों में पेट से मस्तिष्क (Brain) तक यह संदेश पहुंचने में 20 मिनट तक का भी समय लग सकता है।
पेट का आकार जल्दी भर जाने पर क्या करें?
कुछ लोगों की समस्या होती है कि थोड़ी मात्रा में भोजन करते ही उनका पेट भरा-भरा महसूस होने लगता है, जिस वजह से वे भरपेट खाना नहीं खा पाते हैं और जल्द ही फिर से भूख महसूस होने लगती है। ऐसी स्थिति से बचाव के लिए वे निम्नलिखित बातों का ध्यान रख सकते हैं, जैसेः
हर एक से दो घंटे के बीच में थोड़ा-थोड़ा भोजन खाएं।
अपने खाने की प्लेट को छोटा ही रखें, ताकि उसमें थोड़ा ही भोजन सर्व कर सकें।
खाने से आधे घंटे पहले और तुंरत बाद पानी या अन्य तरल पेय पीने से बचें।
कैफीन या शुगर का सेवन कम करें। ये भूख खत्म करने के अनुभव को बढ़ा सकते हैं।
खाने के लिए छोटी चम्मच का इस्तेमाल करें और भोजन को अच्छे से चबा-चबा कर खाएं।
हमारे शरीर के सभी अंग प्राकृतिक तौर पर खुद के कार्यों को करने व खुद की देखभाल करने में सक्षम होते हैं। इसी तरह भोजन की मात्रा व प्रकार के अनुसार हमारे पेट का आकार (Stomach size) भी अपने-आप को फैला व सिकोड़ सकता है। इसके साथ ही यह भी ध्यान रखें कि पेट हमारे पाचन तंत्र का एक अहम हिस्सा है। यह भोजन और पेय को समायोजित करने के लिए फैलता व सिकुड़ता है। कुछ अध्ययन यह भी बताते हैं कि स्ट्रेचिंग जैसे एक्सरसाइज करने से पेट के आकार को बढ़ाया जा सकता है। हालाकिं, इस पर स्पष्ट कहना मुश्किल हो सकता है। हां, लेकिन यह माना जा सकता है कि स्ट्रेचिंग कुछ हद के पेट की मांसपेशियों को और अधिक लचीला बना सकता है, जिससे कुछ हद तक अधिक भोजन की मात्रा पर पेट का आकार सामान्ये से अधिक बढ़ सकता है।
कॉन्स्टिपेशन (Constipation) की समस्या को योग से भी दूर किया जा सकता है। कब्ज की समस्या कई गंभीर बीमारियों को दावत दे सकती है। इसलिए इससे बचना जरूरी है। तो कॉन्स्टिपेशन की समस्या से बचने के लिए नीचे दिए इस वीडियो लिंक पर क्लिक करें।
डिस्क्लेमर
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