प्रेग्नेंट बेली पर अधिक प्रेशर से क्या गर्भ में शिशु को हो सकता है नुकसान?

    प्रेग्नेंट बेली पर अधिक प्रेशर से क्या गर्भ में शिशु को हो सकता है नुकसान?

    प्रेग्नेंसी के दौरान होने वाली मां को कई चीजों में सावधानी बरतनी पड़ती है। खासतौर पर पहली और अंतिम तिमाही में। लेकिन , क्या आप जानते हैं कि प्रेग्नेंसी में बेबी बम्प का खास ध्यान रखना भी जरूरी है। यानी, इस दौरान आपकी प्रेग्नेंट बेली को कोई हानि नहीं होनी चाहिए। प्रेग्नेंसी में किसी को हग करने से आपको कोई नुकसान नहीं होगा। लेकिन, अगर आपको कोई एब्डोमिनल ट्रॉमा होता है (जैसे कार एक्सीडेंट), तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। आइए बात करें कि प्रेग्नेंट बेली पर प्रेशर का शिशु पर असर (Effect of pressure in pregnant belly on baby) क्या हो सकता है?। प्रेग्नेंट बेली पर प्रेशर का शिशु पर असर (Effect of pressure in pregnant belly on baby) के बारे में जानने से पहले जान लेते हैं कि क्या सच में गर्भ में शिशु सुरक्षित होता है?

    क्या सच में गर्भ में शिशु सुरक्षित होता है?

    असल में प्रेग्नेंसी पेट की आउटसाइड और उस आरामदायक बबल के बीच पैडिंग होती है, जिसमें बच्चा फ्लोट करता है। लेकिन, हमारा पेट बुलेटप्रूफ नहीं है। ऐसे में ,अगर इस पर प्रेशर पड़ता है तो इससे शिशु पर असर हो सकता है। असल में गर्भ में शिशु का ध्यान रखना आसान है। हालांकि, शिशु को गर्भ में सुरक्षित रखना और उसका इसमें विकसित होना पूरी तरह से नेचुरल है। कुछ कारण ऐसे हैं
    जिससे हमारा शरीर बिना किसी इंजरी के शिशु को आसानी से हैंडल कर सकता है, जैसे:

    • गर्भाशय, उर्फ स्ट्रांग मस्कुलर ऑर्गन शिशु को एक तरह आवास यानी घर प्रदान करता है।
    • एमनियोटिक फ्लूइड (Amniotic fluid) प्रेशर को एब्जॉर्ब कर लेता है।।
    • आपका इस दौरान अतिरिक्त बढ़ता हुआ वजन प्रोटेक्टिव फैट लेयर की तरह काम करता है।

    एक चीज का ध्यान रखें कि कांटेक्ट यानी किसी चीज से पेट के टच होना, ट्रॉमा यानी कार एक्सीडेंट से अलग है। हमारा पेट डे-टू-डे एब्डोमिनल कांटेक्ट को हैंडल कर सकता है लेकिन ट्रॉमा नहीं। हालांकि, ट्रॉमा बहुत दुर्लभ है। यह तो आप जान गए होंगे कि प्रेग्नेंट बेली पर प्रेशर का शिशु पर असर (Effect of pressure in pregnant belly on baby) किन स्थितियों में हो सकता है? अब जानिए की किस ट्राइमेस्टर में बेली का खास ध्यान रखना चाहिए?

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    प्रेग्नेंट बेली पर प्रेशर का शिशु पर असर: क्या कोई खास ट्राइमेस्टर अन्य से अधिक खतरनाक है?

    क्योंकि, फर्स्ट ट्राइमेस्टर में भ्रूण बहुत छोटा है, तो उसे एब्डोमिनल कांटेक्ट या ट्रॉमा का रिस्क नहीं रहता है। ऐसे में, नेगटिव आउटकम होना असंभव नहीं है, लेकिन यह तब तक दुर्लभ हैं, जब तक कि चोट गंभीर न हो। लेकिन, इनकी संभावना सेकंड ट्राइमेस्टर में बढ़ जाती है क्योंकि शिशु का बेट बढ़ना शुरू हो जाता है। हालांकि, अभी भी शिशु को नुकसान होने के चांसेस कम होते हैं। प्रेग्नेंट बेली पर प्रेशर का शिशु पर असर (Effect of pressure in pregnant belly on baby) सबसे अधिक पड़ता है तीसरी तिमाही में। लेकिन, थर्ड ट्राइमेस्टर बहुत ही ज्यादा अलग है। इस दौरान शिशु तेजी से बढ़ रहा होता है और पेट में अधिकतर जगह घेर रहा होता है।

    इसका मतलब है कि इस समय एमनियोटिक फ्लूइड (Amniotic fluid) और बॉडी फैट से कुशनिंग कम हो सकती है। इससे प्‍लेसेंटा एब्‍रप्‍शन(placental abruption) का रिस्क बढ़ जाता है, जो तीसरी तिमाही में होना सामान्य है। हालांकि, प्‍लेसेंटा एब्‍रप्‍शन हमेशा ट्रॉमा का कारण नहीं होता है लेकिन इससे ट्रॉमा हो सकता है जिससे ब्लीडिंग, दर्द और यहां तक प्रीमेच्योर डिलीवरी भी हो सकती है। जब बात एब्डोमिनल इम्प्लांट (Abdominal impact) की आती है, तो यह कुछ फैक्टर्स कम्बाइंड हो कर तीसरी तिमाही को और भी डेंजरस बना सकते हैं। प्रेग्नेंट बेली पर प्रेशर का शिशु पर असर (Effect of pressure in pregnant belly on baby) के बारे में यह जानकारी बेहद जरूरी है अब जानते हैं कि गर्भ में शिशु को कैसे प्रोटेक्ट करें?

    प्रेग्नेंसी बेली में प्रेशर का शिशु पर असर, Effect of pressure in pregnancy belly on baby.

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    गर्भ में शिशु का कैसे रखें ध्यान?

    महिला का शरीर नाजुक नहीं होता है। तभी तो महिलाएं गर्भावस्था में भी काम करती हैं। यही नहीं, इस दौरान खेतों और फैक्टरीज में महिलाएं कड़ी मेहनत करती हैं। यूटरस वो मस्कुलर ऑर्गन है, जो शिशु की गर्भ में प्रोटेक्शन करती है। जब एमनियोटिक फ्लूइड (Amniotic fluid) के शॉक एब्जॉर्बर और गर्भावस्था के दौरान आपका वजन बढ़ने लगता है, तो आपका शिशु पेट के डेली एब्डोमिनल कांटेक्ट के प्रभावों से ग्रसित हो जाता है। एब्डोमिनल ट्रॉमा अलग होता है। व्हीकल एक्सीडेंट, गिरना या अधिक वजन उठाने से शिशु को नुकसान हो सकता है। लेकिन, एब्डोमिनल ट्रॉमा के जोखिम को कम करने के लिए सावधानियों को बरतना बेहद जरूरी है। आइए जानें इन तरीकों के बारे में:

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    प्रेग्नेंट बेली पर प्रेशर का शिशु पर असर (Effect of pressure in pregnant belly on baby): कौन सी हैं वो सामान्य चीजें, जिनका रखें खास ख्याल

    प्रेग्नेंट बेली पर प्रेशर का शिशु पर असर (Effect of pressure in pregnant belly on baby) के साथ ही उन चीजों के बारे में जानकारी होना जरूरी है जिनसे शिशु को हानि हो सकती है। इसके साथ ही इन रिस्क्स से बचाव के बारे में भी जानें:

    बच्चे का बिग हग (Baby Hug)

    आपके बड़े बच्चे के एक बड़ा हग आपके लिए किसी बड़ी खुशी से कम नहीं है। ऐसा माना जाता यह कि इससे आपको किसी तरह का नुकसान नहीं हो सकता है। लेकिन, बच्चों का कोई पता नहीं होता कि वो कब इस हग से हाथ और पैरों को चलाना शुरू कर दें, जिससे गर्भ में शिशु को समस्या हो। इसलिए ध्यान रखें। अपने बच्चे को भी समझाएं कि आपके बच्चे को इस दौरान किस तरह से सावधानी बरतनी चाहिए।

    पालतू जानवर (Pets)

    अगर आपके घर में पालतू जानवर हैं, तो भी आपको खास तौर पर ध्यान रखना चाहिए। हो सकता है कि आपका कुत्ता या बिल्ली एकदम आपकी गोद में आ जाए या अपने पंजों से आपकी बेली को नुकसान पहुंचाएं। पालतू जानवर का एकदम आपके ऊपर चढ़ने से आपको नुकसान हो सकता है। ऐसे में आपको ध्यान रखना होगा कि आपका पालतू जानवर एकदम आपके ऊपर जम्प न करें।

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    प्रेग्नेंट बेली पर प्रेशर का शिशु पर असर (Effect of pressure in pregnant belly on baby): घर के काम (House work)

    प्रेग्नेंसी में घर, गार्डन में काम करना पूरी तरह से सुरक्षित है। लेकिन, अपने शरीर की सुनें। अगर आप काम करते हुए थकावट हो, तो ब्रेक लें। यही नहीं, सीढ़ियां चढ़ने, किसी अनइवन या गीले सरफेस पर काम करने से भी बचें। इसके साथ ही हायड्रेट रहें और हैवी लिफ्टिंग से बचें।

    सेक्स पोजीशन (Sex position)

    प्रेग्नेंसी में अच्छी बात यह है कि आपको इस दौरान अपने पार्टनर के साथ इंटिमसी रूटीन में बदलाव लाने की जरूरत नहीं है। ऐसी कोई सेक्स पोजीशन नहीं है, जो अनसेफ हों। हालांकि, कुछ पोजिशन्स अनकम्फर्टेबल हो सकती हैं। ऐसे में अपने अपने पार्टनर से बात करें और जो पोसिशन्स आपको असुरक्षित या अनकम्फर्टेबल लगें उनसे बचें।

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    प्रेग्नेंट बेली पर प्रेशर का शिशु पर असर: एब्डोमिनल ट्रॉमा (Abdominal trauma)

    निम्नलिखित स्थितियों में, अपने बढ़ते बच्चे की सुरक्षा के लिए सावधानियों पर विचार करें। इन स्थितियों में तुरंत डॉक्टर की सलाह भी जरूरी है:

    भारी चीजों को उठाना (Heavy lifting)

    हालांकि, जरूरी नहीं कि यह बढ़ती बेली से सम्बन्धित है। लेकिन मरीज अक्सर पूछते हैं कि क्या गर्भावस्था के दौरान काम पर बच्चों, ग्रॉसरी और चीजों को उठाना सुरक्षित है? हैवी लिफ्टिंग और बार-बार लिफ्टिंग मोशंस को प्रेग्नेंसी लॉस, प्रीटर्म बर्थ और मैटरनल इंजरी जैसे पुल्ड मसल के साथ जोड़ा जाता है। ऐसा माना जाता है कि कुछ खास प्रोफेशन वाली महिलाओं में कुछ जोखिम बढ़ जाते हैं जैसे हेल्थ केयर वर्कर. सर्विस वर्कर, टीचर, चाइल्ड हेल्थ प्रोवाइडर आदि।

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    ड्राइविंग (Driving)

    कार एक्सीडेंट्स एब्डॉमिनल ट्रॉमा का सबसे मुख्य कारण है। गाडी में स्टीयरिंग वील या सीटबेल्ट से अगेंस्ट स्ट्रेन से बेली को नुकसान हो सकता है। सेफ राइड या ड्राइव के लिए सही से सीट बेल्ट बांधे। यही नहीं, ड्राइविंग के दौरान सही से सीटबेल्ट लगाएं ताकि आप आरामदायक रहें। अगर आपको इस दौरान किसी एक्सीडेंट का सामना करना पड़े, चाहे वो छोटा ही हो, तुरंत डॉक्टर से चेकअप कराएं।

    वर्कआउट (Workout)

    प्रेग्नेंसी में भी एक्सरसाइज करना जरूरी है। लेकिन, इस दौरान आपको कौन सी एक्सरसाइजेज करनी चाहिए, इसके लिए डॉक्टर से सलाह लें। आप उस एक्सरसाइज को करें, जो आपके और आपके शिशु के लिए सुरक्षित हों। सही तरीके से व्यायाम करने से प्रेग्नेंट बेली पर प्रेशर का शिशु पर असर नहीं होता है। इससे आप और आपके शिशु को स्वस्थ रहने में मदद मिल सकती है।

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    उम्मीद है कि प्रेग्नेंट बेली पर प्रेशर का शिशु पर असर (Effect of pressure in pregnant belly on baby) के बारे में यह जानकारी आपको पसंद आई होगी। प्रेग्नेंसी में आपकी बेली जिन भी चीजों के सम्पर्क में आती है, वो उसे हार्ट नहीं करती है। इसमें आपका बच्चा पूरी तरह से सुरक्षित होता है। लेकिन, थर्ड ट्राइमेस्टर के दौरान इसका जोखिम और भी अधिक बढ़ जाता है। आपको इस दौरान ट्रॉमा से बचना चाहिए। अगर आप किसी ऐसे ट्रॉमा के संपर्क में आते हैं, तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लें। खासतौर पर अगर आप दर्द, ब्लीडिंग, कॉन्ट्रैक्शंस या शिशु की मूवमेंट में बदलाव आदि। अगर इस बारे में आपके मन इस बारे में कोई भी सवाल हो, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

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    AnuSharma द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 18/05/2022 को
    डॉ. प्रणाली पाटील के द्वारा मेडिकली रिव्यूड