इंप्लांटेशन (Implantation) है प्रेगनेंसी की पहली सीढ़ी, जानें इस प्रोसेस के दौरान क्या होता है?
इंप्लांटेशन (Implantation) गर्भावस्था की बहुत अहम प्रक्रिया है। निषेचन यानी कि फर्टिलाइजेशन के बाद इंप्लांटेशन की प्रोसेस होती है। गर्भवती महिलाओं को अक्सर इंप्लांटेशन (Implantation) समझ नहीं आता। कुछ महिलाओं में इसे स्पाॅटिंग से समझा जाता है तो कुछ को पेट के निचले हिस्से में ऐंठन का एहसास भी हो सकता है। इंप्लांटेशन (Implantation) की प्रोसेस के दौरान क्या होता है और किस तरह से महिलाओं को लक्षण नजर आ सकते हैं, अगर आपको इसके बारे में जानकारी नहीं है, तो ये आर्टिकल आपको जरूर पढ़ना चाहिए।
इंप्लांटेशन (Implantation) की प्रोसेस कब शुरू होती है?
इम्प्लांटेशन (Implantation)
गर्भावस्था यानी की प्रेग्नेंसी एक लंबी प्रक्रिया होती है। जब फर्टिलाइजेशन हो जाता है, तो उसके बाद एंब्रियो यानी कि भ्रूण बनता है। इसके बाद यह फेलोपियन ट्यूब के नीचे की ओर चला जाता है। ट्यूब की गहराई में जाने के बाद यूट्रस की लाइनिंग में यह तब तक रहता है, जब तक बच्चे की डिलिवरी नहीं हो जाती है। कई लोग फर्टिलाइजेशन को प्रेग्नेंसी की शुरूआत मानते हैं लेकिन सक्सेसफुल इंप्लांटेशन (Implantation) भी बहुत जरूरी होता है।
इंप्लांटेशन (Implantation) के बाद क्या होता है?
अगर एक बार एंब्रियो इंप्लांटेशन (Implantation) हो जाता है, तो हॉर्मोन्स का सिकरीशन चालू हो जाता है, जिससे कि पूरा शरीर बच्चे के लिए तैयार होना शुरू हो जाता है। इसके साथ ही महिला के पीरियड्स भी बंद हो जाते हैं। फर्टिलाइजेशन के लगभग आठ से नौ दिनों के बाद प्रत्यारोपण या इंप्लांटेशन शुरू होता है, हालांकि, यह छह दिनों की शुरुआत में और ऑव्यूलेशन के 12 दिनों के बाद तक हो सकता है।
इंप्लांटेशन (Implantation) होने पर क्या लक्षण दिखते हैं?
इंप्लांटेशन (Implantation) की प्रक्रिया के दौरान शरीर में एक नहीं बल्कि विभिन्न प्रकार के लक्षण नजर आते हैं। वहीं कुछ महिलाओं को यह लक्षण महसूस नहीं होते हैं। आइए जानते हैं इस दौरान एक महिला के शरीर में क्या-क्या बदलाव हो सकते हैं।
इस दौरान होती है स्पॉटिंग
जिन महिलाओं को प्रेग्नेंसी के बारे में जानकारी नहीं होती है, वह अक्सर अपने पीरियड्स का इंतजार करती हैं। अगर ऐसे में उन्हें कुछ मात्रा में ब्लीडिंग हो जाती है, तो उन्हें लगता है कि कुछ ही दिनों बाद उनके पीरियड्स शुरू हो जाएंगे लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। जो महिलाएं कंसीव कर लेती हैं, उनमें लाइट ब्लीडिंग हो सकती है। यह लाइट ब्लीडिंग पीरियड्स को लेकर कन्फ्यूजन पैदा कर सकती है। वही इंप्लांटेशन (Implantation) के दौरान कुछ महिलाओं को ब्लीडिंग या स्पॉटिंग नहीं होती है। अगर आपको भी ऐसी ब्लीडिंग हुई है और उसके बाद अचानक से पीरियड्स या ब्लीडिंग जैसा कुछ भी न हो, तो ऐसे में आपको प्रेग्नेंसी टेस्ट जरूर करना चाहिए।
इंप्लांटेशन (Implantation) से स्टमक क्रैम्प या पेट में ऐंठन
कुछ महिलाओं में पेट में ऐंठन या दर्द होने की समस्या भी इंप्लांटेशन के लक्षण में से एक है। कुछ महिलाओं को हॉर्मोन में बदलाव के कारण पेट में ऐठन की समस्या पैदा हो सकती है। यह 1 से 2 दिन तक हो सकती है। आपको पेट में ऐंठन का एहसास तब होगा, जब आपके पीरियड्स का समय होगा। ऐसे में कुछ महिलाओं को यह शंका बनी रहती है कि शायद उनके पीरियड शुरू होने वाले हैं, इसलिए उनके पेट में ऐंठन हो रही है। यदि आपको तीव्र दर्द महसूस हो तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
होने लगेगा थकान का एहसास
कुछ महिलाएं को इंप्लांटेशन के हल्के लक्षण महसूस होते हैं, जिनमें से एक है थकान का एहसास। इसके साथ ही कुछ महिलाएं स्तनों में सूजन, सिर में दर्द होना आदि लक्षण भी महसूस कर सकती हैं। ऐसा शरीर में हॉर्मोनल बदलाव के कारण होता है।
इंप्लांटेशन के कितने दिनों बाद करना चाहिए प्रेग्नेंसी टेस्ट?
अब आपके मन में यह सवाल होगा कि फर्टिलाइजेशन की प्रक्रिया हो गई, इंप्लांटेशन हो गया, तो ऐसे में लक्षणों के देखने के बाद टेस्ट कब करना चाहिए? वैसे तो महिलाएं प्रेग्नेंसी टेस्ट तभी करती हैं, जब उनके पीरियड्स मिस हो जाते हैं। अगर आपको प्रेग्नेंसी टेस्ट करने की जल्दी है, तो आप फर्टिलाइजेशन के करीब 19 दिनों के बाद प्रेग्नेंसी टेस्ट कर सकते हैं।
अब आपके मन में यह सवाल आ रहा होगा कि अगर पीरियड्स मिस हो गए हैं, तो क्या तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए? आप घर पर ही प्रेग्नेंसी किट से टेस्ट कर सकते हैं। अगर आपको पहले मिसकैरेज की समस्या हो चुकी है, तो ऐसे में आपको प्रेग्नेंसी के लक्षणों को देखने के बाद बहुत सावधानी रखने की जरूरत है। अगर आपको प्रेग्नेंसी के लक्षण नजर आते हैं, तो ऐसे में आपको तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। सामान्य तौर पर जिन महिलाओं को किसी भी प्रकार की समस्या नहीं है और उनके पीरियड्स मिस हो गए हैं, तो ऐसे में वह कुछ समय का इंतजार कर सकती हैं।
ध्यान दें
इस आर्टिकल में हमने आपको इंप्लांटेशन(Implantation) के बारे में अहम जानकारी दी है। उम्मीद है आपको हैलो हेल्थ की ओर से दी हुई जानकारियां पसंद आई होंगी। अगर आपको प्रेग्नेंसी के संबंध में अधिक जानकारी चाहिए, तो हैलो हेल्थ की वेबसाइट में आपको अधिक जानकारी मिल जाएगी।
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