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लोअर सेगमेंट सिजेरियन सेक्शन (LSCS) के बाद नॉर्मल डिलिवरी के लिए ध्यान रखें इन बातों का

लोअर सेगमेंट सिजेरियन सेक्शन (LSCS) के बाद नॉर्मल डिलिवरी के लिए ध्यान रखें इन बातों का

बदलती जीवनशैली में आजकल बहुत कुछ बदल चुका है। यहां तक कि आजकल लोग बेबी डिलिवरी भी अपने अनुसार प्लान कर लेते हैं। ऐसे में लोग सिजेरियन डिलिवरी का सहारा लेते हैं। दिल्ली की रहने वाली 35 वर्षीय मीनाक्षी शर्मा लोअर सेगमेंट सिजेरियन सेक्शन (LSCS) डिलिवरी के बारे में कहती हैं कि, ”उन्होंने भी सिजेरियन डिलिवरी प्लान की थी जो सक्सेफुल रही।” इसके साथ ही मीनाक्षी बताती हैं कि उनकी इच्छा थी कि उनके शिशु का जन्म उनके अनुसार डेट और टाइम पर हो इसलिए उन्होंने लोअर सेगमेंट सिजेरियन सेक्शन का सहारा लिया। हालांकि, ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या लोअर सेगमेंट सिजेरियन सेक्शन (LSCS) डिलिवरी के बाद नॉर्मल डिलिवरी संभव है?

क्या लोअर सेगमेंट सिजेरियन सेक्शन (LSCS) के बाद नॉर्मल डिलिवरी से शिशु का जन्म हो सकता है?

डॉक्टर्स का मानना है कि लोगों में एक धारणा बन गई है कि लोअर सेगमेंट सिजेरियन सेक्शन डिलिवरी के बाद नॉर्मल डिलिवरी नहीं हो सकती है। नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) के अनुसार पहली डिलिवरी सी-सेक्शन होने के बाद दूसरी डिलिवरी नॉर्मल डिलिवरी हो सकती है, लेकिन इसके लिए गर्भवती महिला के सेहत का विशेष ध्यान रखना होगा और अगर प्रेग्नेंट लेडी की सेहत ठीक रहती है, तो नॉर्मल डिलिवरी हो सकती है। एनसीबीआई के रिसर्च के अनुसार 128 गर्भवती महिलाओं की पहली डिलिवरी लोअर सेगमेंट सिजेरियन सेक्शन हुई थी, लेकिन उनमें से 76 गर्भवती महिलाओं की दूसरी डिलिवरी नॉर्मल हुई।

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लोअर सेगमेंट सिजेरियन सेक्शन के बाद नॉर्मल डिलिवरी के लिए क्या हैं उपाय?

निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखकर लोअर सेगमेंट सिजेरियन सेक्शन के बाद शिशु का जन्म नॉर्मल डिलिवरी से किया जा सकता है। इनमें शामिल है-

1. दोनों प्रेग्नेंसी के बीच सही अंतराल होना

अगर आपकी पहले डिलिवरी लोअर सेगमेंट सिजेरियन सेक्शन से हुई है तो दूसरी बेबी डिलिवरी के प्लानिंग में कम से कम 18 महीने का गैप रखें। दूसरी प्रेग्नेंसी प्लान करने के पहले डॉक्टर से मिलें और उन्हें ये जरूर बताएं कि आपको नॉर्मल डिलिवरी प्लान करना है। ध्यान रखें डिलिवरी के वक्त मां और शिशु दोनों की सेहत को ध्यान में रख कर डॉक्टर नॉर्मल डिलिवरी या सिजेरियन डिलिवरी कर सकते हैं।

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2. पहली प्रेग्नेंसी में सिजेरियन का कारण

नवजात के जन्म के दौरान सबसे पहले उसका सिर बाहर आता है। प्रेग्नेंसी के 36वें हफ्ते या 37वें हफ्ते में शिशु का सिर नीचे की ओर आ जाता है, लेकिन कभी-कभी ऐसा नहीं होता है तो इस स्थिति में लोअर सेगमेंट सिजेरियन सेक्शन से बच्चे का जन्म होता है। इस समय सी-सेक्शन का सहारा इसलिए लिया जाता है क्योंकि ब्रीच बेबी (गर्भ में उल्टा बच्चा) को डिलिवरी के दौरान ऑक्सिजन की कमी हो सकती है और मां को ज्यादा देर तक लेबर पेन रह सकता है जो एक नई परेशानी का कारण बन सकता है। इन सभी परेशानियों को ध्यान में रखकर डॉक्टर डिलिवरी प्लान करते हैं।

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3. पहले सी-सेक्शन में हुई कोई परेशानी

दूसरी डिलिवरी के दौरान डॉक्टर यह भी ध्यान रखते हैं कि पहली सर्जरी पूरी तरह से ठीक हुई है या नहीं। एक्सपर्ट्स की मानें तो दूसरी प्रेग्नेंसी प्लानिंग के पहले पहली सर्जरी की भी पूरी जानकारी लेनी चाहिए और यह देखना चाहिए कि कोई घाव तो नहीं है।

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4. बच्चे का वजन

डिलिवरी के दौरान अगर बच्चे का वजन ज्यादा है तो ऐसी परिस्थिति में डॉक्टर सी-सेक्शन का सहारा लेते हैं।

5. शरीर को रखें फिट

पहली प्रेग्नेंसी लोअर सेगमेंट सिजेरियन सेक्शन होने के बाद नियमित योगा, एक्सरसाइज और वॉक से शरीर को स्वस्थ रखा जा सकता है। प्रेग्नेंसी के बाद भी बॉडी के शेप को ठीक रखा जा सकता है। इसके साथ ही पौष्टिक आहार का सेवन भी जरूरी है। इन सबकी मदद से दूसरी प्रेग्नेंसी नॉर्मल हो सकती है।

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6. नौवें महीने में बच्चे का वजन

अगर वजायनल बर्थ का विकल्प चुनना है तो इसके लिए नोवें माह में बच्चे के वजन पर नजर रखना जरूरी है। बच्चे का वजन काफी हद तक यह तय करता है कि डिलिवरी नॉर्मल होगी या सिजेरियन

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लोअर सेगमेंट सिजेरियन सेक्शन के बाद नॉर्मल डिलिवरी की संभावना कम होने के कारण

सी-सेक्शन डिलिवरी के बाद नॉर्मल डिलिवरी की संभावनाओं को कम करने वाले कारण हैं:

  • गर्भवती महिला की उम्र अधिक होना
  • गर्भवती महिला का वजन ज्यादा होना
  • होने वाले बच्चे का वजन जन्म के समय अधिक होना (4 किलो से अधिक)
  • गर्भकाल 40 सप्ताह से अधिक समय तक हो जाना
  • पहली प्रेग्नेंसी और दोबारा गर्भधारण करने के बीच का अंतराल कम होना (18 महीने या उससे कम)

सिजेरियन डिलिवरी के बाद नॉर्मल डिलिवरी की सफलता के विषय पर अपने डॉक्टर से बात करें और इसके फायदे व जोखिम के बारे में भी पूरी जानकारी प्राप्त करें।

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पेल्विक की हड्डी पर निर्भर है नॉर्मल डिलिवरी

जन्म लेने से पहले शिशु पेल्विक की हड्डी में से होकर गुजरता है। यदि महिला की पेल्विक हड्डी सामान्य अवस्था में या चौड़ी है तो नॉर्मल डिलिवरी की जा सकती है। पेल्विक की हड्डी चौड़ी होने से बच्चा आसानी से उसमें से निकल आता है। हालांकि, यदि महिला की पेल्विक की हड्डी एकदम छोटी और संकुचित है तो हर बार सिजेरियन सर्जरी ही करनी पड़ सकती है।

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लोअर सेगमेंट सिजेरियन सेक्शन के बाद नॉर्मल डिलिवरी के जोखिम

  • सी-सेक्शन डिलिवरी के बाद नॉर्मल डिलिवरी के पक्ष में होने के बावजूद भी कई तरह के जोखिम की संभावनाएं बनी रहती हैं। इस दौरान पहले की सिजेरियन डिलिवरी में लगाए गए चीरे की जगह पर गर्भाशय फटने की संभावना होती है। इससे आपका ज्यादा खून बह सकता है और गर्भ में पलने वाले बच्चे को ऑक्सिजन पहुंचने में मुश्किल हो सकती है।
  • अनप्लांड सिजेरियन डिलिवरी में ऑपरेशन से संबंधी अन्य समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है, साथ ही अधिक ब्लीडिंग की वजह से आपको खून चढ़ाने की संभावनाएं भी बन जाती हैं।
  • कुछ दुर्लभ मामलों में आपको हिस्टेरेक्टॉमी का भी सामना करना पड़ सकता है। इससे गर्भाशय और चीरे के घाव में इंफेक्शन की संभावना भी बढ़ जाती हैं।

इन बातों को ध्यान में रखकर नेक्स्ट प्रेग्नेंसी नॉर्मल (वजायनल) हो सकती है अगर पहली डिलिवरी लोअर सेगमेंट सिजेरियन सेक्शन (LSCS) से हुई है फिर भी।

अगर आप लोअर सेगमेंट सिजेरियन सेक्शन के बाद नॉर्मल डिलिवरी से जुड़े किसी तरह के सवाल का जवाब जानना चाहते हैं तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा।

हैलो हेल्थ ग्रुप किसी भी तरह की मेडिकल एडवाइस, इलाज और जांच की सलाह नहीं देता है।

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28 दिन

हैलो हेल्थ ग्रुप हेल्थ सलाह, निदान और इलाज इत्यादि सेवाएं नहीं देता।

सूत्र

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लेखक की तस्वीर
Nidhi Sinha द्वारा लिखित आखिरी अपडेट 14/05/2020 को
Dr Sharayu Maknikar के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड
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