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नॉर्मल डिलिवरी केयर में इन बातों का रखें विशेष ख्याल

नॉर्मल डिलिवरी केयर में इन बातों का रखें विशेष ख्याल

जन्म के बाद नवजात शिशु आपकी सबसे प्रमुख प्राथमिकता हो चुकी होगी, लेकिन प्रसव के बाद मां की देखभाल भी बहुत महत्वपूर्ण है। डिलिवरी के बाद योनि में तकलीफ, यूटेराइन संबंधी समस्याओं आदि से जल्द उबरना होता है। प्रसव के बाद की अवधि यानी पोस्टपार्टम से मतलब बच्चे के जन्म के बाद पहले छह सप्ताह से होता है। वजायनल डिलिवरी होने के बाद आपके लिए यह खुशी का समय है, लेकिन प्रसव से निकली माओं को शारीरिक परेशानियों से निकलने में थोड़ा वक्त लगता है। इसलिए नॉर्मल डिलिवरी केयर या कहे पोस्टपार्टम केयर भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

इस समय माओं को कई प्रकार के उपचार और सपोर्ट की जरूरत होती है। इन सप्ताहों के दौरान वे शिशु के करीब होंगी और डॉक्टर के साथ पोस्टपार्टम चेकअप भी होगा। गर्भावस्था शरीर को उम्मीदों से अधिक बदलती है और यह शिशु के जन्म के बाद भी जारी रहता है। यहां आपको हैलो स्वास्थ्य बता रहा है कि नॉर्मल डिलिवरी केयर के लिए आपको किन बातों को ध्यान में रखना है।

नॉर्मल डिलिवरी केयर

योनि प्रसव के बाद मुझे खुद की कैसे केयर करनी चाहिए?

नॉर्मल डिलिवरी केयर करते वक्त आपको इस बात का ध्यान होगा कि नौ महीने की प्रेग्नेंसी और डिलिवरी के बाद आपके शरीर में कई तरह की परिवर्तन आए होंगे जिनसे आप अपरिचित हो सकती हैं। इसलिए नीचे बताई गई बातों का ध्यान रखें।

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नॉर्मल डिलिवरी केयर करते वक्त योनि में दर्द

यदि प्रसव के दौरान एपिसीओटॉमी या वजायनल टीयर् हुआ हो तो घाव कुछ हफ्तों तक तकलीफ दे सकता है। वजायनल डिलिवरी के बाद टीयर बहुत अधिक हो तो इसे ठीक करने के लिए अधिक समय लग सकता है। इसलिए नॉर्मल डिलिवरी केयर को ध्यान में रखते हुए इन सुझावों को अपनाएं।

  • तकिया या गद्देदार जगह पर बैठें।
  • आइस पैक से घाव की तकलीफ को कम करें या एक सेनेटरी नैपकिन और घाव के बीच एक ठंडा विच हेजल पैड रखें।
  • नॉर्मल डिलिवरी केयर में इस बात का ध्यान रखें कि यदि आपको पेशाब करने में तकलीफ हो तो यूरिनरी ट्रैक्ट पर गर्म पानी डालने के लिए स्क्वीज बोतल का उपयोग कर सकती हैं।
  • नॉर्मल डिलिवरी केयर के लिए नितंबों और कूल्हों को डूबोकर हल्के गर्म पानी में बैठें। इससे आपको राहत मिलेगी। यदि आपको जरूरत महसूस हो तो ठंडे पानी का भी उपयोग कर सकती हैं। ठंडे पानी का इस्तेमाल करते वक्त ध्यान रखें कि आपको सर्दी या जुकाम की शिकायत न होने पाएं। क्योंकि इससे शिशु को सर्दी-जुकाम हो सकता है।
  • नॉर्मल डिलिवरी केयर के दौरान आप ओवर-द-काउंटर पेन रिलीफ मेडिसिन ले सकती हैं। यदि आवश्यक हो तो डॉक्टर से एक नम्ब स्प्रे या क्रीम के बारे में जानकारी ले सकती हैं।
  • नॉर्मल डिलिवरी केयर में इस बात का ध्यान रखें कि यदि पोस्टपार्टम पीरियड में कब्ज की शिकायत हो तो स्टूल सॉफ्टनर या रेचक का उपयोग भी डॉक्टर के सलाह से कर सकती हैं।
  • यदि दर्द गंभीर और लगातार हो तो डॉक्टर से मिलने में न हिचकिचाएं क्योंकि यह किसी वजायनल इंफेक्शन के कारण भी हो सकता है। इस तरह आप नॉर्मल डिलिवरी केयर कर सकती हैं।

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वजायनल डिस्चार्ज

प्रसव के बाद आप सुपरफिशियल म्यूकस मेम्ब्रेन को छोड़ना शुरू करती हैं। हफ्तों तक इस झिल्ली के साथ वजायनल डिस्चार्ज होगा। यह डिस्चार्ज पहले कुछ दिनों के लिए लाल और गाढ़ा होगा। धीरे-धीरे यह पानी की तरह पतला बन जाएगा और गुलाबी या ब्राउन डिस्चार्ज फिर सफेद में बदल जाएगा। यदि यह पेल्विक में दर्द, बुखार या यूटेराइन टेंडरनेस के साथ योनि से भारी ब्लीडिंग या डिस्चार्ज हो तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें। नॉर्मल डिलिवरी केयर करते वक्त डिस्चार्ज पर नजर रखना जरूरी है।

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बालों का झड़ना और त्वचा में बदलाव

गर्भावस्था के दौरान बढ़े हुए हॉर्मोन के स्तर में बदलाव बाल झड़ने का कारण बनता है। कई बार यह प्रसव के बाद भी कुछ दिनों तक जारी रहता है। प्रसव के बाद आपको छह महीने तक बालों के झड़ने का अनुभव होगा। हालांकि प्रेग्नेंसी में हेयरफॉल सभी महिला को हो यह जरूरी नहीं है क्योंकि इस दौरान बालों का टूटना कई अन्य कारणों से भी हो सकता है। कुछ मेडिकल कंडिशन वजायनल डिलिवरी के बाद हेयर फॉल को और भी ज्यादा बढ़ा देती हैं। प्रसव के बाद खिंचाव के निशान (स्ट्रेच मार्क्स) गायब नहीं होंगे, लेकिन समय बीतने के साथ-साथ वे फीके हो जाएंगे। इसलिए नॉर्मल डिलिवरी केयर में बालों का विशेष ध्यान रखें ताकि वे कोमल और मजबूत बने रहें।

स्तन में उभार

शिशु के जन्म के बाद महिलाओं के स्तनों में दूध भर जाता है। यह एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन स्तन में सूजन असहज हो सकती है। इस दौरान बेचैनी लग सकती है। बेचैनी को कम करने के लिए स्तन पर गर्म या ठंडा सेक लगाएं। अगर स्तन में दर्द हो तो उसे कम करने के लिए निप्पल क्रीम का उपयोग करें।

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पेल्विक फ्लोर में बदलाव

रेक्टम और वजायना के बीच के क्षेत्र को पेरेनियम कहा जाता है। डिलिवरी के दौरान यह फैलता है और इसमें टिश्यू बनता है। कभी-कभी डॉक्टर प्रसव में मदद के लिए इस एरिया में कट कर सकते हैं। आप कीगल व्यायाम करके अपनी डिलिवरी के बाद पेरिनियम एरिया को रिकवर कर सकती हैं। इसके अलावा इसमें तौलिए में लिपटे आइस पैक की भी मदद ले सकती हैं। नॉर्मल डिलिवरी केयर में पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज को जरूर शामिल करें। इन्हें कब से शुरू किया जा सकता है इस बारे में डॉक्टर से पूछें।

पसीना आना

बच्चे के होने के बाद हॉर्मोनल परिवर्तन से रात में पसीना आ सकता है। ठंडा रहने के लिए अपने बिस्तर से कंबल हटा दें। गर्भावस्था में पसीने की स्थिति से आप वाकिफ होंगी इसलिए पसीना आने से घबराएं नहीं। इसे नॉर्मल बदलाव समझें।

मूड स्विंग

गर्भावस्था में होने वाले मूड स्विंग की तरह प्रसव भी इमोशनल बदलाव लाता है। नए अनुभव को महसूस करने या कई बार चिंता भी होने लगती है जिसे बेबी ब्लूज कहा जाता है। इसके लक्षणों में मूड स्विंग्स, चिंता और सोने में कठिनाई शामिल आदि हैं। आमतौर पर बेबी ब्लूज दो सप्ताह के भीतर नॉर्मल हो जाता है। इससे राहत के लिए अपना ख्याल रखें और अपनी भावनाओं को साझा करें तथा मदद के लिए पार्टनर, प्रियजनों या दोस्तों से पूछें। नॉर्मल डिलिवरी केयर के समय इन सभी चीजों पर ध्यान देना जरूरी है। प्रसव से गुजरी महिला की फिजिकल केयर के साथ ही इमोशनल केयर भी करनी होगी।

पोस्टपार्टम चेकअप

अमेरिकन कॉलेज ऑफ ओब्स्टेट्रिशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट्स का सुझाव है कि प्रसव के बाद पोस्टपार्टम केयर नॉर्मल डिलिवरी केयर की एक प्रक्रिया है। प्रसव के बाद पहले 3 सप्ताह के भीतर अपने डॉक्टर से संपर्क करें। प्रसव के बाद 12 सप्ताह के भीतर कॉम्प्रिहेंसिव पोस्टपार्टम इवैल्यूएशन के लिए अपने डॉक्टर से मिलें। इस दौरान वह आपकी मनोदशा और भावनात्मक स्थिति, गर्भनिरोधक, शिशु की देखभाल की समीक्षा करेगा। साथ ही आपकी नींद और थकान संबंधित मुद्दों के बारे में बात करने के साथ फिजिकल टेस्ट भी करेगा। जिसमें महिला के पेट, योनि, गर्भाशय ग्रीवा और गर्भाशय की जांच आदि शामिल हो सकती है।

इस बातों का ध्यान रख पूरी तरह नॉर्मल डिलिवरी केयर की जा सकती है। फिर भी अगर कोई शंका हो तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। हमें उम्मीद है कि नॉर्मल डिलिवरी केयर विषय पर आधारित यह आर्टिकल आपको पसंद आया होगा। अधिक जानकारी के लिए डॉक्टर से संपर्क करें। हैलो हेल्थ ग्रुप किसी प्रकार की चिकित्सा सलाह, निदान और उपचार प्रदान नहीं करता।

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लेखक की तस्वीर
Nikhil Kumar द्वारा लिखित आखिरी अपडेट कुछ हफ्ते पहले को
Dr Sharayu Maknikar के द्वारा एक्स्पर्टली रिव्यूड